रायपुर, 23 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ के सुदूर गांवों में महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) द्वारा संचालित छोटे-मोटे कुटीर उद्योगों को देश-विदेश के बड़े बाजारों से जोड़ने और महिलाओं को कॉर्पोरेट स्तर का सफल कारोबारी बनाने के लिए एक बड़ा संस्थागत अभियान शुरू हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में Atha Udyam IIM Raipur (अथ उद्यम आईआईएम रायपुर) कार्यक्रम के तहत ग्रामीण महिला उद्यमियों को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। ‘आजीविका से उद्यमिता की ओर’ के मूल दर्शन पर आधारित इस विशेष इनक्यूबेशन कार्यक्रम की शुरुआत केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 11 सितंबर 2026 को की गई थी। इस महत्वाकांक्षी पहल को लेकर राज्य भर में भारी उत्साह देखा जा रहा है और अब तक 1,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। पात्र महिला उद्यमी आगामी 31 अक्टूबर 2026 तक आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ‘Atha Udyam IIM Raipur’: बिहान और आईआईएम रायपुर के फाउंडेशन फॉर एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (FED) की संयुक्त पहल।
- प्रथम चरण में 250 महिलाओं का चयन: प्राथमिक बैच में 250 महिला उद्यमियों को मिलेगा 64 घंटे का बिजनेस ट्रेनिंग और 1 साल का मेंटरशिप।
- 31 अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन: इच्छुक महिला उद्यमी आधिकारिक पोर्टल atha.iimraipur.edu.in पर कर सकती हैं आवेदन।
- ट्रेडिंग व्यवसाय पात्र नहीं: केवल गैर-कृषि उत्पाद निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, हथकरघा, वनोपज और सेवा उद्यमों से जुड़ी महिलाएं ही होंगी पात्र।
- 252 सीएलएफ सदस्यों को ट्रेनिंग: आईआईएम रायपुर द्वारा 252 क्लस्टर लेवल फेडरेशन सदस्यों और ब्लॉक प्रबंधकों को फील्ड मोबिलाइजेशन के लिए किया गया प्रशिक्षित।
- पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बैंक लिंकेज: उत्पादों की गुणवत्ता सुधार, लागत-मुनाफा गणना, डिजिटल मार्केटिंग और आसान बैंक ऋण उपलब्ध कराना मुख्य लक्ष्य।
Atha Udyam IIM Raipur: आजीविका से उद्यमिता की ओर बड़ा वैचारिक बदलाव
अब तक ग्रामीण स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को केवल स्थानीय स्तर पर आजीविका चलाने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती थी, लेकिन ‘अथ उद्यम’ का उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बिजनेस लीडर बनाना है।
Atha Udyam IIM Raipur कार्यक्रम के तहत ग्रामीण महिलाओं के छोटे-छोटे व्यवसायों को व्यवस्थित, अत्यधिक लाभकारी और स्केलेबल (विस्तार योग्य) कंपनियों के रूप में ढाला जाएगा। आईआईएम रायपुर के प्रबंधन विशेषज्ञ महिलाओं को सिखाएंगे कि कैसे एक साधारण पापड़, आचार, कोसा वस्त्र या वनोपज उत्पाद को आधुनिक ब्रांडिंग और पैकेजिंग देकर अमेजन, फ्लिपकार्ट और बड़े रिटेल स्टोर्स में प्रीमियम दामों पर बेचा जा सकता है।
प्रशिक्षण के साथ 1 साल तक विशेषज्ञों का साथ: 64 घंटे का सघन मॉड्यूल
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत इसका दीर्घकालिक हैंड-होल्डिंग और मेंटरशिप मॉडल है:
- 64 घंटे का चरणबद्ध प्रशिक्षण: चयनित महिलाओं को बिजनेस प्लानिंग, वित्तीय प्रबंधन, कच्चा माल खरीद, और ग्राहक मांग के अनुसार उत्पाद निर्माण का 64 घंटे का क्लासरूम व फील्ड प्रशिक्षण मिलेगा।
- 365 दिन का व्यक्तिगत मेंटरशिप: प्रशिक्षण के बाद एक वर्ष तक आईआईएम के बिजनेस कंसल्टेंट्स और सफल उद्योगपति महिलाओं के साथ जुड़े रहेंगे। वे फील्ड में जाकर उत्पादन, लेखा-जोखा (Bookkeeping) और मुनाफे की निगरानी करेंगे।
- संस्थागत बैंक ऋण: उद्यम के विस्तार के लिए महिलाओं को बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कम ब्याज पर पूंजी और मुद्रा ऋण दिलाने में सीधी मदद की जाएगी।
कौन-सी महिलाएं होंगी पात्र? केवल ट्रेडिंग करने वाले व्यवसाय अमान्य
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने कार्यक्रम की पात्रता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं:
- पात्र क्षेत्र: वे महिलाएं जो पहले से कोई गैर-कृषि व्यवसाय चला रही हैं—जैसे खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing), सिलाई व रेडीमेड वस्त्र निर्माण, हथकरघा (Handloom), हस्तशिल्प (Handicrafts), लघु वनोपज का मूल्य संवर्धन (Moringa, Imli, Mahua processing), हर्बल उत्पाद और विभिन्न सेवा-आधारित उद्यम।
- एसएचजी जुड़ाव: आवेदिका का किसी महिला स्व-सहायता समूह (SHG) की सदस्य होना या उनके परिवार से जुड़ा होना अनिवार्य है।
- क्या पात्र नहीं है: केवल बाजार से सामान खरीदकर सीधे बेचने (ट्रेडिंग/दुकानदारी) वाले व्यवसाय इस इनक्यूबेशन कार्यक्रम के लिए पात्र नहीं होंगे; उत्पाद में मूल्य संवर्धन या निर्माण होना आवश्यक है।
252 सीएलएफ प्रतिनिधियों और ब्लॉक प्रबंधकों को आईआईएम ने किया तैयार
इस अभियान को प्रदेश के अंतिम गांव तक पहुंचाने के लिए आईआईएम रायपुर के मैनेजमेंट डेवलपमेंट सेंटर (MDC) में व्यापक क्षमता निर्माण किया गया है:
- क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF): राज्य के 252 क्लस्टर लेवल फेडरेशन के प्रमुख सदस्यों को आईआईएम के प्रोफेसर्स ने विशेष रूप से प्रशिक्षित किया है। ये सदस्य गांवों में जाकर स्व-सहायता समूहों की योग्य दीदियों की पहचान कर रहे हैं।
- फील्ड सहयोग तंत्र: जिला एवं विकासखंड परियोजना प्रबंधक (BPM), क्षेत्रीय संकुल संगठन (VO) और सामुदायिक संदर्भ व्यक्ति (CRP दीदी) महिलाओं को ऑनलाइन फॉर्म भरने में तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
आवेदन कैसे करें? 31 अक्टूबर तक का अंतिम अवसर
कार्यक्रम के प्रथम बैच के लिए कुल 250 सर्वश्रेष्ठ महिला उद्यमियों का चयन उनकी वर्तमान व्यावसायिक क्षमता और आवेदन के मूल्यांकन के आधार पर किया जाएगा:
इच्छुक महिलाएं आईआईएम रायपुर के आधिकारिक वेब पोर्टल atha.iimraipur.edu.in पर जाकर सीधे ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। जो महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करने में असमर्थ हैं, वे अपने गांव की सीआरपी दीदी, ग्राम संगठन या विकासखंड स्तरीय ‘बिहान’ कार्यालय में जाकर निःशुल्क सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
“गांव की महिलाएं मेहनती हैं, लेकिन उन्हें आधुनिक बाजार, पैकेजिंग और वित्तीय प्रबंधन का अनुभव नहीं मिल पाता था। ‘अथ उद्यम’ इसी खाई को पाटने का काम कर रहा है। जब देश का शीर्ष प्रबंधन संस्थान आईआईएम रायपुर हमारी ग्रामीण बहनों के साथ 1 साल तक खड़ा रहेगा, तो छत्तीसगढ़ के गांवों से ऐसी महिला उद्यमी निकलेंगी जो सैकड़ों अन्य लोगों को रोजगार देंगी। 31 अक्टूबर तक अधिक से अधिक बहनें इस स्वर्णिम अवसर का लाभ उठाएं।”— विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन
छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं और आर्थिकी के लिए इसके क्या मायने हैं?
- लखपति दीदी से ‘बिजनेस ओनर’ तक का सफर: यह पहल महिलाओं को केवल ₹1 लाख सालाना आय तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें लाखों का टर्नओवर करने वाली कंपनी का मालिक बनाएगी।
- स्थानीय वनोपज और कृषि को ब्रांड वैल्यू: बस्तर और सरगुजा के महुआ, इमली, कोसा और मिलेट्स उत्पाद अब आधुनिक ब्रांड बनकर राष्ट्रीय मॉल्स में बिकेंगे।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विविधीकरण: कृषि पर निर्भरता कम होगी और गांवों में गैर-कृषि विनिर्माण इकाइयों से स्थायी समृद्धि आएगी।
‘अथ उद्यम’ ग्रामीण महिला उद्यमिता कार्यक्रम: एक नजर में
- कार्यक्रम का नाम: अथ उद्यम – आजीविका से उद्यमिता की ओर (Atha Udyam IIM Raipur)
- संयुक्त साझीदार: छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ एवं IIM रायपुर (FED)
- राष्ट्रीय शुभारंभ: 11 सितंबर 2026 (श्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री)
- वर्तमान आवेदन संख्या: 1,000 से अधिक आवेदन प्राप्त
- ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर 2026
- प्रथम बैच का आकार: 250 महिला उद्यमी (पात्रता व मूल्यांकन आधारित)
- आधिकारिक आवेदन पोर्टल: atha.iimraipur.edu.in
- प्रशिक्षण संरचना: 64 घंटे का बिजनेस मॉड्यूल + 1 वर्ष का व्यक्तिगत विशेषज्ञ मेंटरशिप
- पात्र क्षेत्र: खाद्य प्रसंस्करण, हथकरघा, हस्तशिल्प, वनोपज मूल्य संवर्धन, गैर-कृषि सेवा उद्यम (ट्रेडिंग अमान्य)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Atha Udyam IIM Raipur कार्यक्रम क्या है और यह किनके लिए शुरू किया गया है?
Atha Udyam IIM Raipur छत्तीसगढ़ सरकार के ‘बिहान’ मिशन और आईआईएम रायपुर की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के छोटे व्यवसायों को 64 घंटे की ट्रेनिंग और 1 साल के मेंटरशिप से सफल और बड़ा उद्यम बनाना है।
‘अथ उद्यम’ के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि क्या है और कहाँ आवेदन करें?
इच्छुक महिला उद्यमी 31 अक्टूबर 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट atha.iimraipur.edu.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं अथवा अपने नजदीकी बिहान कार्यालय या सीआरपी दीदी से संपर्क कर सकती हैं।
इस कार्यक्रम के लिए कौन-से व्यवसाय पात्र हैं और कौन-से अपात्र?
खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई, हथकरघा, हस्तशिल्प और वनोपज जैसे गैर-कृषि निर्माण व सेवा व्यवसाय पात्र हैं। केवल सामान खरीदकर बेचने वाले सामान्य ट्रेडिंग (दुकानदारी) व्यवसाय इसके लिए पात्र नहीं हैं।
प्रथम चरण में कितनी महिलाओं का चयन किया जाएगा और उन्हें क्या सहायता मिलेगी?
प्रथम चरण में 250 महिला उद्यमियों का चयन किया जाएगा, जिन्हें 64 घंटे का व्यावसायिक प्रशिक्षण, 1 साल तक आईआईएम के विशेषज्ञों का व्यक्तिगत परामर्श, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बैंक ऋण लिंकेज में मदद मिलेगी।
आधिकारिक स्रोत: छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ / भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) रायपुर / जनसंपर्क संचालनालय (DPR Raipur)