रायपुर, 17 अक्टूबर: आधुनिक सूचना क्रांति के दौर में न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, पारदर्शी, त्वरित और समयबद्ध बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ की न्यायपालिका ने एक बड़ा कदम बढ़ाया है। जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में 16 अक्टूबर को Nyay Shruti Rules 2025 Durg (न्याय श्रुति नियम 2025 दुर्ग) के विधिक एवं व्यावहारिक परिप्रेक्ष्य पर एक दिवसीय राज्यस्तरीय विधिक संगोष्ठी तथा अत्याधुनिक ‘ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी’ का भव्य आयोजन किया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर और कुटुंब न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश श्रीमती सुमन एक्का की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में जजों, वकीलों, अभियोजन अधिकारियों और जेल प्रशासन ने ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से गवाही दर्ज कराने, डिजिटल साक्ष्यों की वैधता और भारतीय न्याय व्यवस्था में उनकी निष्पक्षता पर गहन विचार-विमर्श किया।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ‘Nyay Shruti Rules 2025 Durg’: दुर्ग जिला न्यायालय में ‘ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही’ पर संगोष्ठी संपन्न।
- ई-साक्ष्य व डिजिटल प्रदर्शनी: पहली बार डिजिटल साक्ष्यों, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों और उनकी ग्राह्यता पर प्रायोगिक प्रदर्शनी का आयोजन।
- नियमों की विधिक व्याख्या: द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत पराशर ने ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के मुख्य प्रावधानों पर डाला प्रकाश।
- प्रथम व्यवहार न्यायाधीश का संबोधन: कनिष्ठ श्रेणी न्यायाधीश कु. दीपांशी जैन ने तकनीकी साक्ष्यों के व्यावहारिक उपयोग का रखा खाका।
- संस्थागत समन्वय: उप संचालक अभियोजन भीम सिंह राजपूत, बार एसोसिएशन अध्यक्ष रमेश शर्मा, सचिव रविशंकर सिंह व जेल अधीक्षक मनीष संभाकर रहे मौजूद।
- विधिक जागरूकता में नवाचार: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) द्वारा बनाई गई आकर्षक रंगोली बनी आकर्षण का केंद्र।
Nyay Shruti Rules 2025 Durg: न्यायालय की सीमाओं से परे साक्ष्य, लेकिन विधि के दायरे में
अदालतों में मुकदमों के त्वरित निपटारे और दूर-दराज के गवाहों को अदालत तक आने की असुविधा से बचाने के लिए ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रणाली वरदान साबित हो रही है।
Nyay Shruti Rules 2025 Durg संगोष्ठी में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि तकनीक का उपयोग केवल सुविधा के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह विधिसम्मत, निष्पक्ष और विश्वसनीय होना चाहिए। द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री प्रशांत पराशर ने नियमों के कानूनी पहलुओं को समझाते हुए बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही लेते समय पहचान का सत्यापन, रिकॉर्डिंग की अखंडता और दोनों पक्षों को जिरह (Cross-examination) का समान अवसर मिलना प्राकृतिक न्याय की मूल शर्त है। कार्यक्रम का मुख्य अभिभाषण प्रथम व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) कु. दीपांशी जैन द्वारा प्रस्तुत किया गया।
ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों की प्रदर्शनी: तकनीक को समझने का व्यावहारिक माध्यम
संगोष्ठी का सबसे अनूठा और बौद्धिक आकर्षण प्रधान जिला न्यायालय तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) दुर्ग द्वारा लगाई गई विशेष प्रदर्शनी रही:
- सैद्धांतिक से व्यावहारिक की ओर: अदालतों में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (जैसे सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डेटा रिकॉर्ड, व्हाट्सएप चैट, ईमेल और डिजिटल हस्ताक्षर) को साक्ष्य अधिनियम के तहत कैसे सुरक्षित और प्रस्तुत किया जाए, इसका सजीव प्रदर्शन किया गया।
- हैश वैल्यू और प्रमाणन: प्रदर्शनी में वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को डिजिटल डेटा की सुरक्षा, हैश वैल्यू (Hash Value) के मिलान और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों के साथ लगने वाले कानूनी प्रमाण-पत्रों की तकनीकी प्रक्रिया से अवगत कराया गया।
विधिक जागरूकता में नवाचार: रंगोली ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा
कानूनी विषयों को केवल नीरस धाराओं तक सीमित न रखकर जन-जागरूकता से जोड़ने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग द्वारा न्यायालय परिसर में एक भव्य और कलात्मक रंगोली सजाई गई।
रंगोली में न्याय के तराजू, तकनीकी चिप और डिजिटल स्क्रीन का कलात्मक संयोजन किया गया था। इस रचनात्मक प्रस्तुति ने दर्शाया कि कानूनी जागरूकता को प्रभावी बनाने के लिए पारंपरिक कला और आधुनिक तकनीक दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
न्यायिक प्रक्रिया में संस्थागत समन्वय: पुलिस, जेल, अभियोजन और बार एसोसिएशन एकजुट
डिजिटल न्याय प्रणाली की सफलता केवल न्यायालय के कमरे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए जांच एजेंसियों और जेलों का भी डिजिटल रूप से सक्षम होना जरूरी है:
- अभियोजन व बार की सहभागिता: उप संचालक अभियोजन श्री भीम सिंह राजपूत, दुर्ग बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा और सचिव श्री रविशंकर सिंह ने कहा कि वकीलों और अभियोजकों को नई डिजिटल प्रक्रिया से प्रशिक्षित करना न्याय की गति बढ़ाएगा।
- जेल से सीधी पेशी: दुर्ग जेल अधीक्षक श्री मनीष संभाकर ने बताया कि न्याय श्रुति नियमों से बंदियों की जेल से ही सुरक्षित और सुगम वीडियो पेशी हो रही है, जिससे सुरक्षा का जोखिम और सरकारी धन की बर्बादी पूरी तरह रुक गई है।
“तकनीक न्यायिक प्रक्रिया में दूरियों को समाप्त कर रही है, लेकिन तकनीक का प्रयोग कानून की स्थापित मर्यादाओं के भीतर ही होना चाहिए। ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ डिजिटल युग में निष्पक्ष न्याय की मजबूत गारंटी हैं। डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी और संगोष्ठी का यह साझा प्रयास न्यायिक अधिकारियों, वकीलों और जांच एजेंसियों को एक मंच पर लाकर न्याय को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाएगा।”— के. विनोद कुजूर, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग
न्यायिक व्यवस्था, अधिवक्ताओं और वादकारियों के लिए इसके क्या मायने हैं?
- तारीख पर तारीख से मुक्ति: बाहर रहने वाले गवाह, डॉक्टर, फॉरेंसिक एक्सपर्ट और पुलिस अधिकारी अब अपने दफ्तर से ही वीडियो कॉल पर बयान दर्ज करा सकेंगे, जिससे मुकदमों का निपटारा महीनों के भीतर होगा।
- सरकारी खजाने और समय की बचत: कैदियों को जेल से अदालत लाने-ले जाने में लगने वाले भारी पुलिस बल, वाहन ईंधन और सुरक्षा खर्च में भारी कमी आएगी।
- इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में छेड़छाड़ असंभव: ई-साक्ष्य के वैज्ञानिक नियमों का पालन होने से झूठे डिजिटल साक्ष्यों की पहचान आसान होगी और निर्दोष को त्वरित न्याय मिलेगा।
दुर्ग ई-साक्ष्य संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी: एक नजर में
- विषय: ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही एवं न्याय श्रुति नियम, 2025
- आयोजन स्थल व तिथि: जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग (16 अक्टूबर 2026)
- आयोजक: प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय दुर्ग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA)
- मुख्य संरक्षक: श्री के. विनोद कुजूर (प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश)
- विशिष्ट उपस्थिति: श्रीमती सुमन एक्का (प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय दुर्ग)
- मुख्य वक्ता: श्री प्रशांत पराशर (द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश)
- अभिभाषण प्रस्तुति: कु. दीपांशी जैन (प्रथम व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ श्रेणी)
- सहभागी निकाय: दुर्ग बार एसोसिएशन, अभियोजन संचालनालय, केंद्रीय जेल दुर्ग
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Nyay Shruti Rules 2025 Durg संगोष्ठी का मुख्य विषय क्या था?
संगोष्ठी का मुख्य विषय “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही एवं न्याय श्रुति नियम, 2025 का विधिक एवं व्यावहारिक परिप्रेक्ष्य” था, जिसके साथ डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी भी लगाई गई।
‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ का भारतीय न्याय व्यवस्था में क्या महत्व है?
यह नियम अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए गवाही दर्ज करने और न्यायिक सुनवाई को विधिसम्मत, निष्पक्ष और समयबद्ध बनाने का मानक कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं।
दुर्ग जिला न्यायालय में ई-साक्ष्य प्रदर्शनी का उद्देश्य क्या था?
प्रदर्शनी का उद्देश्य वकीलों, जजों और आम नागरिकों को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों (ई-साक्ष्य), उनके कानूनी महत्व, सुरक्षित भंडारण और अदालत में उनकी ग्राह्यता (Admissibility) की व्यावहारिक जानकारी देना था।
इस विधिक कार्यक्रम में किन प्रमुख संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया?
कार्यक्रम में जिला न्यायपालिका के अतिरिक्त उप संचालक अभियोजन भीम सिंह राजपूत, दुर्ग बार एसोसिएशन अध्यक्ष रमेश शर्मा, सचिव रविशंकर सिंह तथा जेल अधीक्षक मनीष संभाकर उपस्थित थे।
आधिकारिक स्रोत: प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय दुर्ग / जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), दुर्ग / जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur)