रायपुर, 14 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ के सुदूर, संवेदनशील और घने वनांचल में बसे ग्रामीणों तक शासकीय योजनाओं और बुनियादी नागरिक सेवाओं को पहुंचाने के अनूठे मॉडल ने पूरे देश में अपनी छाप छोड़ी है। भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) ने अपनी ‘स्टेट कोलैबोरेशन इनिशिएटिव’ के तहत देश भर के शीर्ष 14 नवाचारी प्रस्तावों में Sukma Connect 2.0 Project (सुकमा कनेक्ट 2.0 प्रोजेक्ट) का चयन करते हुए 1.17 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ की भावना के अनुरूप तैयार किए गए इस प्रोजेक्ट के जरिए अब सुकमा के अंतिम छोर के गांवों में 24 घंटे स्थानीय जनजातीय बोलियों में कॉल सेंटर सहायता, दो अत्याधुनिक मोबाइल सेवा वैन और 198 आवासीय आश्रम-विद्यालयों में डिजिटल निगरानी प्रणाली शुरू की जा रही है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ‘Sukma Connect 2.0 Project’: भारत सरकार के DARPG ने देश के 14 चुनिंदा प्रस्तावों में किया शामिल; ₹1.17 करोड़ की मिली मंजूरी।
- टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड लास्ट-माइल गवर्नेंस: कलेक्टर अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ मुकुन्द ठाकुर के नेतृत्व में तैयार हुआ मॉडल।
- सीएमसीसी 1.0 की ऐतिहासिक सफलता: मार्च 2026 से अब तक 40 हजार से अधिक फोन कॉल्स, 10 हजार से अधिक आयुष्मान कार्ड और 11 हजार नए वोटर आईडी जारी।
- स्थानीय बोलियों में 24 घंटे सेवा: गोंडी, हल्बी और दोरली जैसी स्थानीय बोलियों में कॉल सेंटर देगा शासकीय योजनाओं की सीधी जानकारी।
- डोरस्टेप डिलीवरी वैन: दो मोबाइल सेवा वैन अंदरूनी जंगलों में पहुंचकर मौके पर बनाएंगी आधार कार्ड, प्रमाण पत्र और बायोमेट्रिक अपडेशन।
- 198 आश्रम-स्कूलों में डिजिटल उपस्थिति: शाला त्यागी (ड्रॉपआउट) बच्चों की ट्रैकिंग कर उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।
Sukma Connect 2.0 Project: देश के 14 प्रस्तावों में चयन, केंद्र से ₹1.17 करोड़ की मंजूरी
प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG), भारत सरकार द्वारा देश के सभी राज्यों से सुशासन और नागरिक सेवा वितरण के सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव मंगाए गए थे।
Sukma Connect 2.0 Project ने अपने व्यावहारिक, तकनीकी और संवेदनशील दृष्टिकोण के दम पर देश भर के सैकड़ों प्रस्तावों के बीच शीर्ष 14 में स्थान बनाया। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 1.17 करोड़ रुपये की राशि से सुकमा के ‘केंद्रीकृत निगरानी एवं नियंत्रण केंद्र’ (CMCC 1.0) का विस्तार कर उसे आधुनिकतम सर्वर, जीपीएस युक्त मोबाइल वैन और उन्नत सॉफ्टवेयर से लैस किया जा रहा है, ताकि नक्सल प्रभावित और दुर्गम गांवों के लोगों को ब्लॉक या जिला मुख्यालय आने की मजबूरी न रहे।
सीएमसीसी 1.0 का रिपोर्ट कार्ड: 40 हजार कॉल और हजारों नागरिकों तक पहुंचीं सेवाएं
सुकमा जिले में कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में मार्च 2026 से संचालित सीएमसीसी 1.0 (CMCC 1.0) ने जमीनी स्तर पर चमत्कारिक परिणाम दिए हैं:
- 40,000 से अधिक फोन कॉल्स: प्रशासन ने सीधे ग्रामीणों को फोन लगाकर उनकी समस्याओं, राशन, पेंशन और स्वास्थ्य जरूरतों की जानकारी ली।
- 10,078 आयुष्मान कार्ड: दूर-दराज के आदिवासियों के घर बैठे आयुष्मान कार्ड बनाकर उन्हें 5 लाख तक के मुफ्त इलाज की गारंटी दी गई।
- 11,103 नए मतदाता परिचय पत्र: पहली बार मतदान करने वाले 18 वर्ष के युवाओं और छूटे हुए ग्रामीणों के वोटर आईडी कार्ड बनाए गए।
- आधार और बायोमेट्रिक सुधार: 5,788 नए आधार नामांकन किए गए और 27,391 ग्रामीणों के फिंगरप्रिंट व बायोमेट्रिक अपडेट किए गए।
- 452 महिला स्व-सहायता समूह: आजीविका संवर्धन के तहत 452 महिला समूहों का गठन कर 4,745 परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ा गया।
स्थानीय बोलियों में 24 घंटे सहायता: गोंडी और हल्बी में बात करेगा कॉल सेंटर
‘सुकमा कनेक्ट 2.0’ का सबसे मानवीय पहलू इसका बहुभाषी कॉल सेंटर है। सुकमा के अंदरूनी क्षेत्रों में अधिकांश आदिवासी केवल अपनी स्थानीय मातृभाषा में ही बात कर पाते हैं:
- मातृभाषा में संवाद: कॉल सेंटर में स्थानीय आदिवासी युवाओं को तैनात किया जा रहा है, जो 24 घंटे गोंडी, हल्बी, दोरली और छत्तीसगढ़ी में ग्रामीणों की शिकायतें सुनेंगे और योजनाओं की जानकारी देंगे।
- दो मोबाइल सेवा वैन (Mobile Service Vans): जिन गांवों में सड़कें या नेटवर्क नहीं हैं, वहां आधुनिक वी-सैट (VSAT) और कंप्यूटर से लैस 2 मोबाइल वैन सीधे गांव की चौपाल तक पहुंचेंगी और जाति, निवास, आधार और पेंशन जैसे काम मौके पर ही निपटाएंगी।
198 आवासीय विद्यालयों और आश्रमों में डिजिटल उपस्थिति और ड्रॉपआउट मॉनिटरिंग
परियोजना के तहत वनांचल के बच्चों की शिक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है:
- आश्रम-छात्रावासों की ट्रैकिंग: जिले के 198 पोटाकेबिन, आवासीय विद्यालयों और आश्रमों में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली (बायोमेट्रिक/फेस रिकग्निशन) लागू होगी, जिससे शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और बच्चों के भोजन-आवास की रियल-टाइम रिपोर्ट मिलेगी।
- शाला त्यागी बच्चों की वापसी: गरीबी या अन्य कारणों से पढ़ाई छोड़ चुके (Out-of-school) बच्चों को चिन्हित कर उन्हें दोबारा आश्रमों और स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए एक विशेष डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है।
कलेक्टर स्तर पर एकीकृत डैशबोर्ड: ‘टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड लास्ट-माइल गवर्नेंस’
जिला कलेक्टर की टेबल पर एक ऐसा सिंगल विंडो डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किया जा रहा है, जहाँ स्वास्थ्य, शिक्षा, राशन, पेंशन, मनरेगा और महतारी वंदन जैसी सभी योजनाओं की ग्रामवार प्रगति एक क्लिक पर दिखेगी।
यदि किसी गांव में पेयजल खराब है या राशन नहीं पहुंचा है, तो डैशबोर्ड पर तुरंत रेड अलर्ट आएगा और संबंधित विभाग के अधिकारी को समय-सीमा के भीतर उसे ठीक करना होगा। यह व्यवस्था सुकमा को पूरे देश में “प्रौद्योगिकी आधारित अंतिम-छोर सुशासन” का प्रमुख केंद्र बना रही है।
“सुकमा की भौगोलिक परिस्थितियां अत्यंत कठिन हैं, लेकिन तकनीक ने दूरियों को समाप्त कर दिया है। ‘सुकमा कनेक्ट 2.0’ को केंद्र सरकार द्वारा देश के शीर्ष 14 प्रस्तावों में चुनना हमारे पूरे जिले की प्रशासनिक टीम और ग्रामीणों के विश्वास की जीत है। 24 घंटे अपनी स्थानीय बोली में कॉल सेंटर और मोबाइल वैन मिलने से अब किसी भी ग्रामीण को अपने जायज हक के लिए मीलों पैदल चलकर दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। हमारा संकल्प है कि शासन खुद जनता के द्वार तक पहुंचे।”— अमित कुमार (IAS), कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, सुकमा
सुकमा के सुदूर आदिवासी ग्रामीणों और प्रशासन के लिए इसके क्या मायने हैं?
- लंबी दूरी और खर्च से मुक्ति: जगरगुंडा, भेज्जी, किस्टाराम जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीणों को आधार कार्ड सुधरवाने या प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 70-80 किमी दूर सुकमा मुख्यालय आने का किराया और समय बचेगा।
- बिचौलियों और शोषण का खात्मा: सीधे कॉल सेंटर से बात होने के कारण सरकारी योजनाओं में किसी बिचौलिए या दलाल की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
- बस्तर की बदलती राष्ट्रीय पहचान: सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ सुकमा अब अत्याधुनिक ई-गवर्नेंस और नागरिक सेवा डिलीवरी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाएगा।
सुकमा कनेक्ट 2.0 परियोजना: एक नजर में
- परियोजना का नाम: सुकमा कनेक्ट 2.0 (Sukma Connect 2.0 Project / CMCC 2.0)
- मान्यता एवं वित्तपोषण: प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG), भारत सरकार
- स्वीकृत वित्तीय अनुदान: ₹1.17 करोड़ (1 करोड़ 17 लाख रुपये)
- राष्ट्रीय चयन: ‘स्टेट कोलैबोरेशन इनिशिएटिव’ के तहत देश भर के शीर्ष 14 प्रस्तावों में शामिल
- प्रशासनिक नेतृत्व: श्री अमित कुमार (IAS, कलेक्टर) एवं श्री मुकुन्द ठाकुर (CEO, जिला पंचायत)
- प्रारंभिक आधार (CMCC 1.0): मार्च 2026 से संचालित (40 हजार+ कॉल्स, 10,078 आयुष्मान कार्ड, 11,103 वोटर आईडी)
- 2.0 के प्रमुख घटक: 24×7 बहुभाषी कॉल सेंटर (गोंडी/हल्बी), 2 मोबाइल सेवा वैन, 198 आश्रमों में डिजिटल उपस्थिति
- मूल दर्शन: टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड लास्ट-माइल गवर्नेंस (Technology-Enabled Last-Mile Governance)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Sukma Connect 2.0 Project को केंद्र सरकार ने किस योजना के तहत चुना है?
Sukma Connect 2.0 Project को भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) ने ‘स्टेट कोलैबोरेशन इनिशिएटिव’ के तहत देश के शीर्ष 14 प्रस्तावों में चुनकर ₹1.17 करोड़ की वित्तीय मंजूरी दी है।
सुकमा कनेक्ट 2.0 के तहत ग्रामीणों को क्या नई सुविधाएं मिलेंगी?
इसके तहत 24 घंटे स्थानीय बोलियों (गोंडी, हल्बी) में कॉल सेंटर सहायता, गांवों में पहुंचने वाली 2 मोबाइल सेवा वैन, 198 आश्रम-स्कूलों में डिजिटल उपस्थिति और घर बैठे सरकारी सेवाओं की डिलीवरी मिलेगी।
सुकमा में पहले से संचालित सीएमसीसी 1.0 (CMCC 1.0) की क्या उपलब्धियां रही हैं?
मार्च 2026 से संचालित सीएमसीसी 1.0 के जरिए 40,000 से अधिक कॉल्स किए गए, 10,078 आयुष्मान कार्ड, 11,103 नए वोटर आईडी, 5,788 नए आधार और 27,391 बायोमेट्रिक अपडेट किए जा चुके हैं।
इस परियोजना के सफल संचालन में किन प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका रही?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन के अनुरूप सुकमा कलेक्टर श्री अमित कुमार के कुशल निर्देशन और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में यह परियोजना सफलतापूर्वक क्रियान्वित की जा रही है।
आधिकारिक स्रोत: प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG), भारत सरकार / जिला प्रशासन सुकमा / जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur)