जशपुर, 09 अक्टूबर: संसाधनों की कमी कभी मजबूत हौसलों की राह में रुकावट नहीं बन सकती, इसे सच कर दिखाया है मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर की बेटियों ने। राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिताओं में Jashpur Girls Cricket Team (जशपुर बालिका क्रिकेट टीम) ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए अंडर-17 और अंडर-19 दोनों आयु वर्गों में स्वर्ण पदक जीतकर दोहरा इतिहास रच दिया है। सरगुजा जोन का प्रतिनिधित्व कर रहीं शासकीय प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास इचकेला की 20 प्रतिभाशाली बेटियों ने क्रिकेट की पिच पर रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसी मजबूत शहरी टीमों को धूल चटा दी। अंडर-17 वर्ग में इचकेला की बालिकाओं ने लगातार दूसरे वर्ष प्रदेश चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है।
मुख्य बिंदु:
- ‘Jashpur Girls Cricket Team’: शासकीय कन्या छात्रावास इचकेला की 20 बालिकाओं ने अंडर-17 और अंडर-19 दोनों वर्गों में जीता स्वर्ण पदक।
- अंडर-17 में बैक-टू-बैक गोल्ड: 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा (सारंगढ़) के फाइनल में बिलासपुर जोन को हराकर लगातार दूसरी बार बनीं चैंपियन।
- अंडर-19 में स्वर्णिम परचम: राजनांदगांव में आयोजित प्रतियोगिता में सरगुजा जोन की टीम ने सभी संभागों को हराकर जीता पहला स्थान।
- 5-6 वर्षों की अनवरत साधना: छात्रावास में रहकर पढ़ाई के साथ रोजाना सुबह-शाम क्रिकेट का कड़ा अभ्यास कर रही थीं वनांचल की बेटियां।
सारंगढ़ में अंडर-17 का जलवा: लगातार दूसरे साल बनीं प्रदेश चैंपियन
सारंगढ़ में 4 से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में अंडर-17 बालिका क्रिकेट टीम का प्रदर्शन एकतरफा रहा।
सरगुजा जोन की टीम ने लीग मैचों में रायपुर, दुर्ग और बस्तर जोन को एकतरफा हराकर फाइनल में जगह बनाई। खिताबी मुकाबले में बिलासपुर जोन को करारी मात देकर लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक अपने नाम किया (पिछले वर्ष कांकेर में भी इन्होंने ही गोल्ड जीता था)। टीम की कप्तान कुमारी गायत्री बाई के नेतृत्व में एंजेल लकड़ा, आस्था रानी, आकृति यादव, अमीषा लकड़ा, साक्षी यादव, सुप्रिया मिंज, अनन्या सिदार, अलका रानी कुजूर और आराधना ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन बल्लेबाजी और गेंदबाजी का प्रदर्शन किया।
राजनांदगांव में अंडर-19 का डंका: दिग्गज जोन टीमों को चटाई धूल
अंडर-19 बालिका वर्ग में भी इचकेला की बेटियों का विजय अभियान जारी रहा। 24 सितंबर से राजनांदगांव में आयोजित राज्य स्तरीय स्पर्धा में टीम ने रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और बस्तर को पराजित कर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।
इस विजेता टीम में शामिल इचकेला छात्रावास की 10 प्रमुख खिलाड़ी—वर्षा बाई, संतोषी बाई, जिज्ञासा कुजूर, तुलसिका भगत, पूर्वांशी साहू, रितु भगत, अवीना बाई, झूमर तिर्की, आर्यनसी बेक और अंशिका राज आर्यन रहीं। इनमें से 8 बेटियां लूथरन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इचकेला में पढ़ाई कर रही हैं।
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इचकेला छात्रावास का 5-6 वर्षों का संघर्ष: अभावों को मात देकर बनीं चैंपियन
इन आदिवासी बालिकाओं की यह ऐतिहासिक उपलब्धि रातों-रात नहीं मिली है। छात्रावास अधीक्षिका श्रीमती पंडरी बाई और श्री शंकर ने बताया कि ये बालिकाएं पिछले 5 से 6 वर्षों से छात्रावास में रहकर लगातार क्रिकेट का अभ्यास कर रही हैं।
गांव के पथरीले मैदानों पर फटे जूतों और सीमित किट के साथ अभ्यास शुरू करने वाली इन बेटियों ने पढ़ाई और खेल का ऐसा संतुलन बनाया कि आज पूरा प्रदेश उनकी प्रतिभा का कायल है। कोच संतोष कुमार (अंडर-17 व 19) और कोच श्रीमती प्रांशु प्रिया धनसो (अंडर-19) ने खिलाड़ियों की फिटनेस, तकनीक और मानसिक मजबूती पर दिन-रात मेहनत की, जिसका परिणाम इस दोहरे स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया।
“जशपुर की बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि खेल प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगे संसाधनों की मोहताज नहीं होती। इचकेला छात्रावास की 20 बालिकाओं द्वारा अंडर-17 और 19 दोनों में गोल्ड जीतना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण है। जिला प्रशासन इन बेटियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए उच्चस्तरीय कोचिंग और खेल सामग्री उपलब्ध कराएगा।”— रोहित व्यास (IAS), कलेक्टर, जशपुर
जनजातीय अंचलों की बालिकाओं और खेल जगत के लिए इसके क्या मायने हैं?
- राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा में चयन का रास्ता: राज्य स्तर पर चैंपियन बनने के बाद अब इन खिलाड़ियों का चयन आगामी नेशनल स्कूल गेम्स (SGFI) के लिए छत्तीसगढ़ की टीम में होना तय है।
- छात्रावासों में खेल संस्कृति को बढ़ावा: इस जीत से साबित हो गया है कि यदि एकलव्य और कस्तूरबा गांधी जैसे सरकारी छात्रावासों में खेल सुविधाएं बढ़ाई जाएं, तो देश को विश्वस्तरीय एथलीट मिल सकते हैं।
- ग्रामीण बालिकाओं में आत्मविश्वास: वनांचल की अन्य बेटियों में यह विश्वास जगा है कि वे भी क्रिकेट, फुटबॉल और तीरंदाजी में अपने दम पर पहचान बना सकती हैं।
जशपुर बालिका क्रिकेट टीम (दोहरा स्वर्ण पदक): एक नजर में
- उपलब्धि: राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में अंडर-17 और अंडर-19 दोनों में गोल्ड मेडल
- विजेता टीम का आधार: शासकीय प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास, इचकेला (जशपुर) की 20 खिलाड़ी
- प्रतिनिधित्व: सरगुजा जोन (Surguja Zone)
- अंडर-17 टूर्नामेंट स्थल: सारंगढ़ (26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा) – लगातार दूसरी बार चैंपियन
- अंडर-19 टूर्नामेंट स्थल: राजनांदगांव (राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा)
- मुख्य कोच: श्री संतोष कुमार एवं श्रीमती प्रांशु प्रिया धनसो
- मार्गदर्शन: छात्रावास अधीक्षिका श्रीमती पंडरी बाई एवं कलेक्टर रोहित व्यास (IAS)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
जशपुर की बेटियों ने किन क्रिकेट प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीते हैं?
जशपुर की बालिकाओं ने राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के अंडर-17 (सारंगढ़) और अंडर-19 (राजनांदगांव) दोनों आयु वर्गों में सरगुजा जोन को स्वर्ण पदक दिलाए हैं।
विजेता टीमों में किस छात्रावास की खिलाड़ियों का मुख्य योगदान रहा?
दोनों विजेता टीमों में जशपुर जिले के शासकीय प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास इचकेला की कुल 20 बालिका खिलाड़ियों ने भाग लेकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
अंडर-17 टीम की कप्तान कौन थीं और उन्होंने किसे हराकर खिताब जीता?
अंडर-17 टीम की कमान कुमारी गायत्री बाई के हाथों में थी और टीम ने फाइनल मुकाबले में बिलासपुर जोन को हराकर लगातार दूसरे वर्ष स्वर्ण पदक जीता।
इन खिलाड़ियों को किसने प्रशिक्षित किया?
इन बेटियों को अंडर-17 में कोच श्री संतोष कुमार ने और अंडर-19 में कोच श्रीमती प्रांशु प्रिया धनसो व श्री संतोष कुमार ने तकनीकी और मानसिक प्रशिक्षण दिया।
स्रोत (Source): सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग / जिला जनसंपर्क कार्यालय (DPR), जशपुर