रायपुर, 06 अक्टूबर: बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम, वैज्ञानिक सोच और जलवायु परिवर्तन की गहरी समझ विकसित करने के उद्देश्य से राजधानी रायपुर में एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। Jugnu Climate Tabloid (जुगनू क्लाइमेट टैब्लॉइड) के नाम से बच्चों के लिए देश का पहला द्विभाषी (हिंदी-अंग्रेजी) पर्यावरण टैब्लॉइड आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया गया है। आईआईएसईआर पुणे (IISER Pune) के ‘केयर प्रोजेक्ट’, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़, यूनिसेफ (UNICEF) और छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय ‘कहानीकार’ कार्यशाला के दौरान इस अनूठी पत्रिका का विमोचन किया गया।
मुख्य बिंदु:
- ‘Jugnu Climate Tabloid’: बच्चों के लिए भारत का पहला द्विभाषी (हिंदी-अंग्रेजी) पर्यावरण टैब्लॉइड रायपुर में हुआ लॉन्च।
- आईआईएसईआर पुणे (IISER Pune) के ‘केयर प्रोजेक्ट’ की एक्शन रिसर्च के आधार पर तैयार किया गया टैब्लॉइड।
- ‘आर्ट ऐज स्टोरी, स्टोरी ऐज नॉलेज, नॉलेज ऐज एक्शन’ थीम पर दो दिवसीय ‘कहानीकार’ शिक्षक कार्यशाला आयोजित।
- मकसद: बच्चों की ‘इको-एंग्जायटी’ (पर्यावरणीय चिंता) को ‘इको-एजेंसी’ (सक्रिय समाधान) में बदलना।
‘जुगनू’ टैब्लॉइड: बच्चों के लिए देश का पहला हिंदी-अंग्रेजी क्लाइमेट प्लेटफॉर्म
जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और तकनीकी विषय को बच्चों की आसान भाषा में समझाने के लिए ‘जुगनू’ टैब्लॉइड को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। यह भारत का पहला ऐसा पर्यावरण प्रकाशन है जो पूरी तरह द्विभाषी (Bilingual) है, ताकि भाषा किसी भी बच्चे के सीखने में बाधा न बने।
यह टैब्लॉइड केवल सूचनाओं का दस्तावेज नहीं है, बल्कि देश भर के स्कूली बच्चों और शिक्षकों के स्थानीय अनुभवों, लोककथाओं और पर्यावरणीय नवाचारों का खुला मंच है। इसमें ग्रामीण और जनजातीय अंचलों के बच्चे अपने जल, जंगल, जमीन और बदलते मौसम पर अपने विचार, चित्र और कहानियां सीधे साझा कर सकेंगे।
‘इको-एंग्जायटी को इको-एजेंसी में बदलना ही जुगनू का लक्ष्य’: डॉ. शालिनी शर्मा
केयर प्रोजेक्ट की प्रोजेक्ट लीड एवं ‘जुगनू’ की पब्लिशर डॉ. शालिनी शर्मा ने टैब्लॉइड के विजन को साझा करते हुए कहा कि आज दुनिया भर में बच्चे जलवायु संकट को देखकर डर और अनिश्चितता महसूस कर रहे हैं।
“‘जुगनू’ का उद्देश्य बच्चों में जलवायु संकट को लेकर खौफ या निराशा पैदा करना नहीं है। हमारा संकल्प है—‘Let us turn Eco-anxiety into Eco-agency’। हम बच्चों को केवल समस्या देखने वाला नहीं, बल्कि अपने आसपास के पर्यावरण को समझने, सवाल पूछने और समाधान का नेतृत्व करने वाला सक्रिय नागरिक बनाना चाहते हैं।”— डॉ. शालिनी शर्मा, पब्लिशर ‘जुगनू’ एवं प्रोजेक्ट लीड, केयर प्रोजेक्ट (IISER पुणे)
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‘कहानीकार’ कार्यशाला: कला और कहानियों से विज्ञान सिखाने की नई पेडागॉजी
राजधानी में 6 और 7 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय ‘कहानीकार’ कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए शासकीय विद्यालयों के शिक्षक हिस्सा ले रहे हैं। कार्यशाला की मूल थीम रखी गई है—‘आर्ट ऐज स्टोरी, स्टोरी ऐज नॉलेज, नॉलेज ऐज एक्शन’ (कला ही कहानी, कहानी ही ज्ञान और ज्ञान ही कर्म)।
उद्घाटन सत्र में छत्तीसगढ़ साइंस सेंटर के महानिदेशक श्री पी. कवीश्वर ने कहा कि पारंपरिक रटने वाली शिक्षा के बजाय कहानी बच्चों को प्रकृति का स्वतंत्र अवलोकन करने का माध्यम देती है। जब बच्चा खुद पेड़-पौधों, पक्षियों और मौसम के बदलावों पर कहानी बनाता है, तो पर्यावरण संरक्षण उसकी स्वाभाविक आदत बन जाता है।
वहीं छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर की सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर श्रीमती प्रज्ञा कदम ने जोर देकर कहा कि पर्यावरणीय संवेदनशीलता को केवल परीक्षा के पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर बच्चों के संस्कारों और दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाना अनिवार्य है।
शिक्षकों और स्कूली बच्चों के लिए इस पहल के क्या मायने हैं?
- अनुभवात्मक शिक्षण (Experiential Learning): शिक्षक अब विज्ञान और भूगोल को नीरस किताबों से नहीं, बल्कि स्थानीय लोक-कथाओं, कला और प्रयोगों के जरिए कक्षा में पढ़ा सकेंगे।
- स्थानीय पारिस्थितिकी का दस्तावेजीकरण: बस्तर से लेकर सरगुजा तक के वनांचल स्कूलों के बच्चों के पास अपनी स्थानीय जैव-विविधता और पारंपरिक ज्ञान को राष्ट्रीय स्तर पर छापने का अवसर होगा।
- भयमुक्त पर्यावरण शिक्षा: बच्चों में ग्लोबल वार्मिंग को लेकर पनप रहे तनाव को सकारात्मक पर्यावरणीय गतिविधियों (जैसे पौधारोपण, जल संरक्षण) की दिशा दी जा सकेगी।
‘जुगनू’ क्लाइमेट टैब्लॉइड एवं कार्यशाला: एक नजर में
- पहल का नाम: Jugnu Climate Tabloid (जुगनू क्लाइमेट टैब्लॉइड)
- प्रारूप (Format): बच्चों के लिए भारत का पहला द्विभाषी (हिंदी-अंग्रेजी) पर्यावरण टैब्लॉइड
- सहयोगी संस्थाएं: IISER पुणे (केयर प्रोजेक्ट), समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़, यूनिसेफ (UNICEF) और छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर
- कार्यशाला का नाम: ‘कहानीकार’ (Kahanikar) दो दिवसीय शिक्षक कार्यशाला
- मूल दर्शन (Core Motto): Turning Eco-Anxiety into Eco-Agency
- लक्षित वर्ग: प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं के शिक्षक एवं विद्यार्थी
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Jugnu Climate Tabloid क्या है और यह क्यों खास है?
‘जुगनू’ भारत का पहला द्विभाषी (हिंदी और अंग्रेजी) क्लाइमेट टैब्लॉइड है, जिसे बच्चों को पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों से रचनात्मक तरीके से जोड़ने के लिए तैयार किया गया है।
‘जुगनू’ टैब्लॉइड को किन संस्थाओं के सहयोग से विकसित किया गया है?
इसे आईआईएसईआर पुणे (IISER Pune) के केयर प्रोजेक्ट द्वारा समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़, यूनिसेफ (UNICEF) और छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर के संयुक्त सहयोग से विकसित किया गया है।
पर्यावरण शिक्षा में ‘इको-एंग्जायटी’ से ‘इको-एजेंसी’ का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है बच्चों में जलवायु संकट के डर (Eco-Anxiety) को खत्म कर उन्हें रचनात्मक सोच और सक्रिय कदमों (Eco-Agency) के जरिए समाधान खोजने के लिए प्रेरित करना।
रायपुर में आयोजित ‘कहानीकार’ कार्यशाला की मुख्य थीम क्या है?
इस कार्यशाला की थीम ‘आर्ट ऐज स्टोरी, स्टोरी ऐज नॉलेज, नॉलेज ऐज एक्शन’ रखी गई है, जिसमें शिक्षकों को कहानी और कला के जरिए पर्यावरण पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur / छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर)