नारायणपुर, 04 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ अंचल से बंदूक के खौफ पर कलम की जीत की एक ऐसी ऐतिहासिक तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे बस्तर संभाग में नई नजीर पेश की है। Abujhmad Security Camp Hostel (अबूझमाड़ सुरक्षा कैंप बना छात्रावास) के अंतर्गत नारायणपुर जिले के ग्राम भाटपाल में जिस परिसर में करीब 15 वर्षों तक सुरक्षा बलों का कड़ा पहरा और कैंप था, उसे अब आदिवासी विद्यार्थियों के लिए सर्वसुविधायुक्त प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास में बदल दिया गया है। 11 अगस्त 2026 से विधिवत शुरू हुए इस परिसर में अब दूरदराज के दुर्गम जंगलों से आए कक्षा 6वीं से 12वीं तक के 153 छात्र सुरक्षित रहकर अपने सुनहरे भविष्य की इबारत लिख रहे हैं।
मुख्य बिंदु:
- ‘Abujhmad Security Camp Hostel’ (अबूझमाड़ सुरक्षा कैंप बना छात्रावास): बस्तर संभाग में पहली बार किसी सुरक्षा कैंप को बदला गया छात्र छात्रावास में।
- नारायणपुर के ग्राम भाटपाल में 15 साल पुराने सुरक्षा कैंप में 11 अगस्त 2026 से शुरू हुई विद्यार्थियों की आवासीय व्यवस्था।
- शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से मात्र 50 मीटर की दूरी; 153 आदिवासी विद्यार्थियों (114 प्री-मैट्रिक व 39 पोस्ट-मैट्रिक) को मिला सुरक्षित आवास।
- कलेक्टर नम्रता जैन की संवेदनशील पहल से दूरस्थ वनांचल के बच्चों का स्कूल ड्रॉप-आउट रुका और परिजनों को निजी किराए से मुक्ति मिली।
बस्तर संभाग में पहली बार: जहां बनती थी सुरक्षा रणनीति, वहां अब संवर रहा भविष्य
नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित भाटपाल का सुरक्षा कैंप डेढ़ दशक तक इस दुर्गम और संवेदनशील इलाके में शांति और सुरक्षा व्यवस्था का प्रमुख केंद्र रहा।
क्षेत्र के नक्सल प्रभाव से मुक्त होने के बाद जिला प्रशासन ने इस विशाल और सुरक्षित परिसर का उपयोग जनहित में करने की योजना बनाई। नारायणपुर कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन ने इस खाली हुए परिसर को उन ग्रामीण बच्चों के लिए छात्रावास में बदलने की अनूठी पहल की, जो स्कूल दूर होने और रहने की व्यवस्था न होने के कारण 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते थे। 11 अगस्त 2026 से यहां छात्रों के रहने, भोजन और पढ़ाई की औपचारिक व्यवस्था शुरू कर दी गई।
स्कूल से महज 50 मीटर की दूरी: समय और ऊर्जा की बचत
इस नवनिर्मित छात्रावास की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भाटपाल इस परिसर से मात्र 50 मीटर की पैदल दूरी पर स्थित है।
पहले जिन विद्यार्थियों को उबड़-खाबड़ रास्तों से स्कूल पहुंचने के लिए रोज घंटों पैदल चलना पड़ता था, वे अब पलक झपकते ही स्कूल पहुंच जाते हैं। स्कूल के एकदम नजदीक सुरक्षित आवास मिलने से बच्चों की आवाजाही की थकान समाप्त हो गई है और उन्हें स्वाध्याय व खेलकूद के लिए भरपूर समय मिल रहा है।
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153 छात्रों को मिला नया बसेरा: 6वीं से 12वीं तक के बच्चों के लिए व्यवस्था
भाटपाल के इस रूपांतरित परिसर में दो अलग-अलग छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें कुल 153 अनुसूचित जनजाति (ST) के बालक रहकर अध्ययनरत हैं:
- प्री-मैट्रिक छात्रावास (कक्षा 6वीं से 10वीं): इसमें माध्यमिक और हाईस्कूल स्तर के 114 विद्यार्थी रह रहे हैं।
- पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास (कक्षा 11वीं एवं 12वीं): इसमें उच्चतर माध्यमिक स्तर के 39 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
अबूझमाड़ के सुदूर वनांचल में 10वीं के बाद उच्चतर माध्यमिक शिक्षा जारी रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि गांवों में हायर सेकेंडरी स्कूल नहीं होते। ऐसे में पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास खुलने से गरीब आदिवासी परिवारों पर बच्चों के लिए निजी किराए का कमरा लेने का आर्थिक बोझ पूरी तरह समाप्त हो गया है।
जमीनी अनुभव: कोमेंद्र और रितेश की जुबानी बदलाव की कहानी
इस बदलाव का वास्तविक प्रभाव उन बच्चों के चेहरे पर साफ झलकता है जो पहले अभावों में पढ़ रहे थे:
- राजबेड़ा के कोमेंद्र की राह हुई आसान: भाटपाल से करीब 22 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच बसे ग्राम राजबेड़ा के रहने वाले 12वीं के छात्र कोमेंद्र बताते हैं कि पहले उन्हें भाटपाल में रहकर पढ़ाई करने के लिए खुद किराए का कमरा तलाशना पड़ता था, जिससे उनके गरीब माता-पिता पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव रहता था। अब पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास में बेड, पंखा, पौष्टिक भोजन और किताबों के साथ सुरक्षित माहौल मिलने से वे निश्चिंत होकर बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
- हलामीमुंजमेटा के रितेश को मिला पढ़ाई का माहौल: ग्राम हलामीमुंजमेटा से आने वाले 9वीं कक्षा के छात्र रितेश सोनी नए परिसर में आकर बेहद खुश हैं। वे बताते हैं कि गांव से रोज स्कूल आना असंभव था। यहां अपने सहपाठियों के साथ रहकर ग्रुप स्टडी करने और शिक्षकों से सीधे मार्गदर्शन लेने की बेहतरीन सुविधा मिल रही है।
कलेक्टर नम्रता जैन का निरीक्षण: भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर कड़े निर्देश
कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन ने स्वयं भाटपाल छात्रावास पहुंचकर शयनकक्षों, भोजन कक्ष और अध्ययन कक्षों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यार्थियों से सीधे बातचीत कर उनकी पढ़ाई की दिनचर्या और दैनिक जरूरतों का फीडबैक लिया।
कलेक्टर ने रसोई में तैयार किए जा रहे भोजन की गुणवत्ता का परीक्षण किया और संबंधित अधीक्षकों को कड़े निर्देश दिए कि बच्चों को शासन द्वारा निर्धारित साप्ताहिक मीनू के अनुसार ही समय पर पौष्टिक नाश्ता, मौसमी फल और संतुलित गर्म भोजन दिया जाए। उन्होंने पूरे परिसर और किचन में 24 घंटे स्वच्छता बनाए रखने को कहा, ताकि बच्चों का स्वास्थ्य उत्तम रहे और वे एकाग्र होकर पढ़ाई कर सकें।
“परिसर वही है, लेकिन इसका उद्देश्य पूरी तरह बदल चुका है। जिस जगह कभी बंदूकें रखी जाती थीं और सुरक्षा की रणनीतियां बनती थीं, आज वहां अबूझमाड़ के नन्हे बच्चे कलम थामकर अपने उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रहे हैं। यह बदलाव साबित करता है कि शांति और शिक्षा ही बस्तर के सर्वांगीण विकास का एकमात्र स्थाई मार्ग है।”— जिला प्रशासन नारायणपुर, छत्तीसगढ़
अबूझमाड़ की नई पीढ़ी और आदिवासी परिवारों के लिए इसके क्या मायने हैं?
- स्कूल ड्रॉप-आउट पर प्रभावी रोक: 10वीं के बाद हायर सेकेंडरी की पढ़ाई बीच में छोड़ देने वाले आदिवासी छात्र अब 12वीं तक की शिक्षा बिना किसी बाधा के पूरी कर सकेंगे।
- जंगलों के जोखिम से सुरक्षा: बारिश के दिनों में उफनते नालों और घने जंगलों के बीच रोज 20-25 किमी का खतरनाक पैदल सफर तय करने की मजबूरी समाप्त हो गई है।
- समान और गुणवत्तापूर्ण अवसर: जिला मुख्यालय से दूर गांवों के बच्चों को स्कूल के पास ही छात्रावास मिलने से वे इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में शहरों के बच्चों की बराबरी कर सकेंगे।
भाटपाल छात्रावास परियोजना के मुख्य आंकड़े एक नजर में
- स्थान: ग्राम भाटपाल, जिला नारायणपुर (मुख्यालय से 25 किमी दूर)
- परिसर का इतिहास: लगभग 15 वर्षों तक सुरक्षा बलों का कैंप रहा।
- छात्रावास संचालन प्रारंभ: 11 अगस्त 2026 से
- स्कूल से दूरी: शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से मात्र 50 मीटर
- कुल क्षमता व छात्र: 153 छात्र (114 प्री-मैट्रिक + 39 पोस्ट-मैट्रिक)
- कक्षा दायरा: कक्षा 6वीं से 12वीं तक की संपूर्ण आवासीय शिक्षा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Abujhmad Security Camp Hostel (भाटपाल छात्रावास) की क्या ऐतिहासिक विशेषता है?
यह बस्तर संभाग का पहला ऐसा छात्रावास है जिसे 15 वर्षों तक सुरक्षा बलों के कैंप रहे परिसर को रूपांतरित करके आदिवासी छात्रों की शिक्षा के लिए विकसित किया गया है।
भाटपाल छात्रावास में कुल कितने विद्यार्थी रह रहे हैं?
इस परिसर में कुल 153 छात्र रह रहे हैं, जिनमें प्री-मैट्रिक छात्रावास (कक्षा 6वीं से 10वीं) के 114 और पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास (कक्षा 11वीं-12वीं) के 39 विद्यार्थी शामिल हैं।
यह छात्रावास शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से कितनी दूरी पर स्थित है?
यह छात्रावास शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भाटपाल से मात्र 50 मीटर की सुरक्षित दूरी पर स्थित है, जिससे छात्रों का आवागमन बेहद सुगम हो गया है।
इस सुरक्षा कैंप को छात्रावास में बदलने की पहल किसने की?
नारायणपुर जिले की कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन ने दूरस्थ अंचलों के बच्चों के स्कूल ड्रॉप-आउट को रोकने के लिए इस सुरक्षा कैंप को छात्रावास में बदलने की पहल की।
स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur / नारायणपुर जिला ब्यूरो) | विशेष लेख