नई दिल्ली/रायपुर, 02 अक्टूबर: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री की पावन जयंती के अवसर पर Gandhi and Shastri Jayanti (गांधी और शास्त्री जयंती) पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में दोनों युगपुरुषों के चित्रों पर श्रद्धापूर्वक पुष्प अर्पित कर नमन किया। मुख्यमंत्री ने दोनों महान विभूतियों के अमर योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि बापू का सत्य, अहिंसा और मानवता का मार्ग तथा शास्त्री जी का सादगीपूर्ण जीवन और ‘जय जवान-जय किसान’ का अमर नारा आज भी हमें अंत्योदय, सुशासन और निःस्वार्थ राष्ट्रसेवा के पथ पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
मुख्य बिंदु:
- ‘Gandhi and Shastri Jayanti’ (गांधी और शास्त्री जयंती) पर नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी श्रद्धांजलि।
- महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, स्वच्छता और समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण (अंत्योदय) के दर्शन को किया याद।
- पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के सादगीपूर्ण जीवन, दृढ़ नेतृत्व और ‘जय जवान-जय किसान’ के मंत्र को बताया देश की रीढ़।
- मुख्यमंत्री ने महापुरुषों के नैतिक मूल्यों को आत्मसात कर विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त छत्तीसगढ़ बनाने का किया आह्वान।
छत्तीसगढ़ सदन नई दिल्ली में श्रद्धासुमन: बापू के विचारों से आत्मनिर्भर भारत
नई दिल्ली प्रवास पर पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 2 अक्टूबर की सुबह छत्तीसगढ़ सदन में आयोजित पुष्पांजलि कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर बापू के स्वतंत्रता संग्राम और विश्व शांति के योगदान को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ने पूरी दुनिया को यह सिखाया कि बिना किसी भौतिक अस्त्र-शस्त्र के केवल सत्य और अहिंसा के नैतिक बल पर बड़ी से बड़ी साम्राज्यवादी शक्ति को झुकाया जा सकता है। बापू के विचारों के केंद्र में हमेशा गांव, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वच्छता और समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति का उत्थान रहा है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जो संकल्प आगे बढ़ रहा है, उसकी वास्तविक आत्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज के दर्शन में ही निहित है।
लाल बहादुर शास्त्री का स्मरण: ‘जय जवान-जय किसान’ सुरक्षा और समृद्धि का आधार
मुख्यमंत्री ने देश के दूसरे प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री का पुण्य स्मरण करते हुए कहा कि उनका निष्कलंक जीवन, सादगी और विपरीत परिस्थितियों में लिया गया दृढ़ निर्णय हर भारतीय के लिए मार्गदर्शक है।
शास्त्री जी ने 1965 के युद्ध और खाद्यान्न संकट के दौर में देश को ‘जय जवान-जय किसान’ का क्रांतिकारी नारा दिया था। यह मंत्र सीमाओं की रक्षा करने वाले जांबाज सैनिकों और खेतों में पसीना बहाकर देश का पेट भरने वाले अन्नदाताओं के अतुलनीय योगदान का सर्वोच्च सम्मान है। आज भी देश की संप्रभुता जवानों के शौर्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता किसानों के परिश्रम पर टिकी हुई है।
सुशासन और अंत्योदय का पथ: महापुरुषों के आदर्शों पर राज्य की विकास यात्रा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के दिखाए सुशासन के रास्ते पर चलकर राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए संकल्पबद्ध है।
चाहे किसानों को धान का रिकॉर्ड मूल्य देना हो, ग्रामीण अंचलों में महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल पहुंचाना हो या फिर दूरस्थ वनांचलों में नक्सलवाद से मुक्ति दिलाकर शांति और सुरक्षा का वातावरण बनाना हो, सरकार की नीतियां सीधे गांधीवादी अंत्योदय से प्रेरित हैं।
“महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री केवल अतीत के ऐतिहासिक नाम नहीं हैं, बल्कि वे भारत के शाश्वत नैतिक मूल्य हैं। बापू का सत्य और अहिंसा का संदेश तथा शास्त्री जी की सादगी और कर्तव्यनिष्ठा हमें यह सिखाती है कि सत्ता केवल सेवा का माध्यम है। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान नहीं आती, तब तक हमारी विकास यात्रा अधूरी है।”— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
नागरिकों, युवाओं और समाज के लिए इसके क्या मायने हैं?
- सार्वजनिक जीवन में सादगी और ईमानदारी: शास्त्री जी का जीवन युवाओं और नीति-निर्माताओं को यह सिखाता है कि बड़े पदों पर रहकर भी सादगी और ईमानदारी का पालन कैसे किया जाता है।
- अहिंसा और सामाजिक सद्भाव: आज के दौर में वैचारिक मतभेदों को भुलाकर आपसी संवाद और शांति से समस्याओं का समाधान खोजने में गांधीवादी विचार सबसे प्रासंगिक हैं।
- किसानों और जवानों का सम्मान: समाज में अन्नदाता किसान और देश की रक्षा करने वाले जवानों के प्रति सम्मान का भाव नागरिक चेतना को मजबूत बनाता है।
गांधी-शास्त्री जयंती के प्रमुख प्रेरक सूत्र
- महात्मा गांधी का मूल मंत्र: सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, सर्वधर्म समभाव और ग्राम स्वराज।
- लाल बहादुर शास्त्री का अमर संदेश: सादगी, शुचिता, दृढ़ प्रशासनिक इच्छाशक्ति और ‘जय जवान-जय किसान’।
- आयोजन स्थल: छत्तीसगढ़ सदन, नई दिल्ली।
- प्रशासनिक संकल्प: जनकल्याणकारी योजनाओं का पारदर्शी क्रियान्वयन और अंत्योदय की स्थापना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने Gandhi and Shastri Jayanti पर श्रद्धांजलि कहां अर्पित की?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान चाणक्यपुरी स्थित छत्तीसगढ़ सदन में महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
महात्मा गांधी के विचारों का छत्तीसगढ़ सरकार की नीतियों से क्या संबंध है?
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण (अंत्योदय), आत्मनिर्भर भारत, ग्राम स्वराज और स्वच्छता से जुड़े गांधीवादी विचार ही सरकार की नीतियों का मूल आधार हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के किस योगदान को मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से याद किया?
मुख्यमंत्री ने शास्त्री जी के सादगीपूर्ण जीवन, 1965 के युद्ध में उनके दृढ़ नेतृत्व और जवानों व किसानों को समर्पित अमर नारे ‘जय जवान-जय किसान’ को याद किया।
स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur / नई दिल्ली ब्यूरो)