रायपुर, 30 सितंबर: छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम स्वनिधि’ (प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि) योजना के निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा से दो वर्ष पहले ही हासिल करने का बड़ा फैसला किया है। मंत्रालय में आयोजित राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने सभी नगरीय निकायों को विशेष कार्ययोजना बनाने और बैंकों में लंबित ऋण प्रकरणों का तत्काल निराकरण करने के कड़े निर्देश दिए। राज्य में रेहड़ी-पटरी वालों को बिना गारंटी सुलभ कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के साथ-साथ शत-प्रतिशत डिजिटल लेन-देन से जोड़ा जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- भारत सरकार द्वारा निर्धारित पीएम स्वनिधि के लक्ष्यों को तय समय से 2 साल पहले पूरा करेगा छत्तीसगढ़।
- प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरण के ऋण वितरण में तेजी; बैंकों में लंबित आवेदनों के निपटारे के लिए SLBC को निर्देश।
- शत-प्रतिशत डिजिटल सशक्तीकरण: सभी वेंडरों को क्यूआर (QR) कोड वितरण, यूपीआई लेन-देन और कैशबैक प्रोत्साहन पर जोर।
- योजना के बेहतर क्रियान्वयन हेतु राज्य व निकाय स्तर पर नए मानव संसाधन की भर्ती और प्रदेश में ‘स्वच्छ स्ट्रीट फूड हब’ की स्थापना।
बिना गारंटी सुलभ कार्यशील पूंजी: तीनों चरणों के ऋण वितरण की समीक्षा
प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने स्पष्ट किया कि कोई भी पात्र पथ विक्रेता (स्ट्रीट वेंडर) योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। इस योजना का मूल उद्देश्य रेहड़ी-पटरी और छोटे ठेले-गुमटी संचालकों को साहूकारों के ब्याज जाल से मुक्त कराकर बिना किसी गारंटी के आसान कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना है।
बैठक में प्रथम चरण (₹10,000), द्वितीय चरण (₹20,000) और तृतीय चरण (₹50,000) के ऋण वितरण की निकायवार और बैंकवार विस्तृत समीक्षा की गई। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) को निर्देशित किया गया कि वे सभी बैंक शाखाओं के साथ समन्वय बनाकर लंबित फाइलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करें।
डिजिटल लेन-देन पर जोर: क्यूआर कोड और यूपीआई कैशबैक प्रोत्साहन
योजना के तहत पथ विक्रेताओं को आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए क्यूआर कोड वितरण और यूपीआई आधारित डिजिटल लेन-देन को तेज किया जाएगा।
प्रमुख सचिव ने डिजिटल लेन-देन पर केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले मासिक कैशबैक प्रोत्साहन की समीक्षा की और निर्देश दिए कि वेंडरों को डिजिटल रूप से प्रशिक्षित किया जाए, जिससे उनके बैंक खातों में सीधे कैशबैक का लाभ पहुंच सके।
वेंडर्स के साथ नियमित संवाद और जिला स्तर पर बैंकर्स कार्यशालाएं
योजना की पहुंच बढ़ाने के लिए नगरीय निकायों में पथ विक्रेताओं के साथ नियमित संवाद कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही जिला स्तर पर विशेष बैंकर्स कार्यशालाएं आयोजित होंगी, जहां वेंडरों और बैंक प्रबंधकों को आमने-सामने बिठाकर मौके पर ही ऋण स्वीकृत किए जाएंगे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बैंकों और बैंक शाखाओं को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।
स्वच्छ एवं हाइजीनिक स्ट्रीट फूड हब और नई भर्तियों को मंजूरी
पीएम स्वनिधि को जमीनी स्तर पर मजबूती देने के लिए राज्य और नगरीय निकाय स्तर पर आवश्यक मानव संसाधन (Dedicated Manpower) की नियुक्ति को औपचारिक स्वीकृति दी गई।
इसके अलावा प्रदेश के प्रमुख शहरों में आम नागरिकों को सुरक्षित और पौष्टिक खानपान उपलब्ध कराने के लिए ‘स्वच्छ एवं हाइजीनिक स्ट्रीट फूड हब’ (Clean Street Food Hubs) विकसित किए जाएंगे। बैठक में क्रेडिट कार्ड योजना की प्रगति, ऋण अदायगी की स्थिति और भारत सरकार को भेजे गए विभिन्न प्रस्तावों को कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में आरबीआई, सिडबी और नगरीय निकायों के शीर्ष अधिकारी शामिल
मंत्रालय में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमीत अग्रवाल, वित्त विभाग के उप सचिव ए.के. सिंग, सूडा के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील अग्रहरि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उप महाप्रबंधक प्रदीप गोंदुले, सिडबी (SIDBI) के उप महाप्रबंधक संतोष राव मोरे तथा एसएलबीसी प्रतिनिधि व उप महाप्रबंधक मनोज सिंह उपस्थित रहे।
इसके साथ ही नगर निगमों के आयुक्त प्रकाश सर्वे, अरुण वर्मा, दशरथ सिंह राजपूत, उपायुक्त नीरज कौशिक, कार्यपालन अभियंता ए.के. सिंग तथा सभी निकायों के नोडल अधिकारी व्यक्तिगत और वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
“पथ विक्रेता हमारे शहरी जीवन और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनका सम्मान बढ़ाना शासन का दायित्व है। छत्तीसगढ़ में हम इस योजना को केवल ऋण वितरण तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि डिजिटल साक्षरता और सम्मानजनक व्यापारिक माहौल देकर वेंडर्स को आत्मनिर्भर बनाएंगे।”— सोनमणि बोरा, प्रमुख सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, छत्तीसगढ़
स्ट्रीट वेंडर्स और आम शहरी उपभोक्ताओं के लिए इसके क्या मायने हैं?
- बिना ब्याज के चक्रव्यूह से मुक्ति: छोटे व्यापारियों को स्थानीय साहूकारों से 5 से 10 प्रतिशत के दैनिक ब्याज पर कर्ज लेने की मजबूरी खत्म होगी और बैंकों से कम ब्याज पर सस्ता लोन मिलेगा।
- समय पर अदायगी से बड़ा कर्ज: पहला ₹10,000 का लोन चुकाने पर ₹20,000 और फिर ₹50,000 तक की कार्यशील पूंजी बिना किसी गिरवी के मिल सकेगी।
- साफ-सुथरे स्ट्रीट फूड हब: शहरों में फूड वेंडर्स के लिए स्वच्छ और व्यवस्थित वेंडिंग जोन बनने से आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण खानपान मिलेगा और यातायात बाधित नहीं होगा।
पीएम स्वनिधि समीक्षा बैठक के प्रमुख निर्णय
- समय पूर्व लक्ष्य: भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को 2 वर्ष पूर्व हासिल करने हेतु विशेष कार्ययोजना।
- लंबित ऋण निपटारा: एसएलबीसी और बैंकों द्वारा तीनों चरणों के आवेदनों का फास्ट-ट्रैक क्लीयरेंस।
- डिजिटल सशक्तीकरण: शत-प्रतिशत क्यूआर कोड मैपिंग और यूपीआई लेनदेन पर नियमित कैशबैक।
- मानव संसाधन तैनाती: योजना संचालन के लिए राज्य व निकाय स्तर पर समर्पित स्टाफ की भर्ती।
- बैंकर्स सम्मान: बेहतर प्रदर्शन करने वाली बैंक शाखाओं को राज्य स्तर पर पुरस्कृत करने की योजना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
छत्तीसगढ़ सरकार ने पीएम स्वनिधि के लक्ष्य को लेकर क्या बड़ा फैसला लिया है?
राज्य सरकार ने भारत सरकार से मिले पीएम स्वनिधि योजना के सभी लक्ष्यों को तय समय-सीमा से दो वर्ष पहले ही पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
पीएम स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को कितनी राशि का लोन मिलता है?
योजना के तहत पहले चरण में ₹10,000, दूसरे चरण में ₹20,000 और तीसरे चरण में ₹50,000 तक का बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण मिलता है।
डिजिटल लेन-देन करने वाले पथ विक्रेताओं को क्या फायदा मिलता है?
क्यूआर कोड और यूपीआई के माध्यम से डिजिटल लेन-देन करने वाले पथ विक्रेताओं को केंद्र सरकार की ओर से मासिक कैशबैक प्रोत्साहन सीधे बैंक खाते में दिया जाता है।
स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur / नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग)