DDU GKY 2 0 Scheme: ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास के 12 वर्ष पूर्ण, DDU-GKY 2.0 में न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि बढ़कर 6 माह, बजट में ₹750 करोड़ का प्रावधान

DDU GKY 2 0 Scheme DDU GKY 2 0 Scheme

नई दिल्ली, 24 सितंबर 2026: भारत की ग्रामीण युवा शक्ति को उद्योग-संरेखित कौशल और सम्मानजनक आजीविका से जोड़कर ‘विकसित भारत @2047’ की नींव मजबूत करने के उद्देश्य से संचालित दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना अपनी स्थापना की 12वीं वर्षगांठ मना रही है। 25 सितंबर 2014 को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत प्रारंभ हुई इस योजना को केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) द्वारा मई 2025 में अधिसूचित नए दिशा-निर्देशों के साथ DDU GKY 2 0 Scheme के रूप में उन्नत किया गया है। केंद्रीय बजट 2026-27 में इस योजना के लिए ₹750 करोड़ का बजटीय आवंटन किया गया है।

वर्तमान में DDU GKY 2 0 Scheme देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 455 से अधिक प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटिंग एजेंसियों (PIAs), 760 सक्रिय प्रशिक्षण केंद्रों और 749 स्वीकृत परियोजनाओं के विशाल नेटवर्क के माध्यम से संचालित की जा रही है। वर्ष 2014-15 में अपनी शुरुआत से लेकर अब तक इस योजना ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी 36 क्षेत्रों (Sectors) और 800 से अधिक जॉब रोल्स में 18.47 लाख से अधिक ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया है तथा 12.43 लाख से अधिक को सफलतापूर्वक रोजगार (प्लेसमेंट) दिलाया है। इसमें महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश करते हुए 9.71 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित कर 6.34 लाख से अधिक युवतियों को रोजगार से जोड़ा जा चुका है।

स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए योजना के पूरक के रूप में देश के 634 जिलों में संचालित 647 ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (RSETIs) ने 63.47 लाख युवाओं को प्रशिक्षित कर 45.60 लाख को स्वरोजगार में स्थापित किया है। DDU-GKY 2.0 के तहत न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि को 3 माह से बढ़ाकर न्यूनतम 6 माह (Six Months) कर दिया गया है। साथ ही, युवाओं को 12 महीने की पोस्ट-प्लेसमेंट ट्रैकिंग, ₹7,620 की वित्तीय सहायता, 365 दिन रोजगार में टिके रहने पर ₹5,000 का ‘रिटेंशन सपोर्ट’ और प्रवासन सहायता केंद्रों (MSCs) के बजट को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹30 लाख प्रति केंद्र करने जैसे क्रांतिकारी सुधार लागू किए गए हैं।

DDU-GKY 2.0 एवं RSETI: मुख्य उपलब्धियां एवं ढांचा (Quick Facts)विवरण
योजना का नामDDU GKY 2 0 Scheme (दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना 2.0)
मूल शुभारंभ तिथि25 सितंबर 2014 (NRLM के तहत | 2026 में 12वीं वर्षगांठ)
नोडल मंत्रालयग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार (Ministry of Rural Development)
केंद्रीय बजट 2026-27 आवंटन₹750 करोड़
पात्र आयु वर्ग एवं आरक्षण15–35 वर्ष (गरीब ग्रामीण परिवार) | SC/ST: 50%, महिला: 33%, दिव्यांग: 5%
कुल प्रशिक्षित एवं प्लेसमेंटप्रशिक्षित: 18.47 लाख+ | प्लेसमेंट: 12.43 लाख+ (36 सेक्टर्स, 800+ जॉब रोल्स)
न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि3 माह से बढ़ाकर 6 माह (मजदूरी, स्वरोजगार एवं गिग इकॉनमी शामिल)
RSETI आंकड़े (2009 से अब तक)647 संस्थान, 63.47 लाख प्रशिक्षित, 45.60 लाख सेटल्ड (94% स्वरोजगार)

संवेदनशील क्षेत्रों हेतु विशेष पहल: रोशनी, हिमायत और पूर्वोत्तर

DDU GKY 2 0 Scheme के तहत देश के भौगोलिक एवं सामाजिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के लिए विशिष्ट कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं:

  • रोशनी (Roshni): गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा अधिसूचित वामपंथ उग्रवाद (LWE) प्रभावित जिलों के लिए अनिवार्य आवासीय कौशल प्रशिक्षण। इसमें 40% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इसे आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) में भी विस्तारित किया गया है।
  • हिमायत (Himayat): जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए 100% केंद्र पोषित विशेष योजना। यह ग्रामीण और शहरी दोनों युवाओं (BPL एवं APL) को वेतनभोगी, स्व-रोजगार और गिग (Gig) रोजगार से जोड़ती है।
  • पूर्वोत्तर राज्य: सामाजिक-सांस्कृतिक और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए DDU-GKY के कुल बजट का 10% हिस्सा पूर्वोत्तर राज्यों के लिए आरक्षित है।
  • कठिन पहुंच वाले क्षेत्र (Special Area Allowance): दुर्गम क्षेत्रों में काम करने वाली प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटिंग एजेंसियों (PIAs) को प्रति उम्मीदवार बेस ट्रेनिंग लागत का अतिरिक्त 10% विशेष क्षेत्र भत्ता देय है।

प्रशिक्षण संरचना: 576 घंटे का मानक और 4 गैर-डोमेन क्षेत्र

DDU-GKY 2.0 ने पाठ्यक्रम को उद्योग की आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप अत्यधिक मानकीकृत किया है:

  • 3 माह का पाठ्यक्रम (न्यूनतम 576 घंटे):
    1. 396 घंटे: तकनीकी/डोमेन कौशल (विमानन, कृषि, वेलनेस, ग्रीन जॉब्स, स्वास्थ्य, टेक्सटाइल आदि)।
    2. 180 घंटे: अनिवार्य गैर-डोमेन कौशल (चार मानकीकृत श्रेणियां):
      • अंग्रेजी संचार (English Communication): 60 घंटे
      • रोजगार क्षमता एवं जीवन कौशल (Life Skills): 60 घंटे
      • कंप्यूटर एवं डिजिटल साक्षरता: 30 घंटे
      • उद्यमशीलता (Entrepreneurship): 30 घंटे

रोजगार स्थायित्व, प्रवासन सहायता (MSC) और जॉब मेले

ग्रामीण युवाओं को शहरों में नौकरी छोड़ने (Drop-out) से रोकने के लिए DDU-GKY 2.0 में व्यापक वित्तीय संबल दिया गया है:

  • पोस्ट-प्लेसमेंट वित्तीय सहायता: नौकरी पाने वाले युवाओं को 6 महीने तक ₹1,270 प्रति माह की दर से कुल ₹7,620 की आर्थिक मदद दी जाती है।
  • रिटेंशन सपोर्ट (₹5,000): जो उम्मीदवार 365 दिनों तक रोजगार में बने रहते हैं (अधिकतम 60 दिन के ब्रेक के साथ), उन्हें ₹5,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। 12 महीने बाद अपस्किलिंग और रीस्किलिंग का अवसर मिलता है।
  • प्रवासन सहायता केंद्र (MSC): गृह राज्य और गंतव्य राज्यों में स्थापित इन केंद्रों की वार्षिक फंडिंग ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹30 लाख कर दी गई है। यह आवास, काउंसलिंग और कानूनी सहायता देते हैं।
  • जॉब मेले (Job Melas): ग्राम पंचायत स्तर पर ₹50,000 (100 नियुक्तियों पर) तथा ब्लॉक स्तर पर ₹1 लाख (200 नियुक्तियों पर) का वित्तीय अनुदान उपलब्ध है। ‘कौशल पंजी’ पोर्टल द्वारा 1 वर्ष तक ट्रैकिंग होती है।

डिजिटल तकनीक और वर्ष 2025-26 के अग्रणी राज्य

योजना में फेस ऑथेंटिकेशन, रियल-टाइम डैशबोर्ड, प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन नंबर (PRN) और ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ का पूर्ण एकीकरण किया गया है:

  • गोवा: DDU-GKY 2.0 के तहत प्रथम बैच शुरू करने वाला देश का अग्रणी राज्य बना।
  • आंध्र प्रदेश: मात्र 3 महीने की अल्पावधि में 12,000 से अधिक उम्मीदवारों का प्रशिक्षण प्रारंभ किया।
  • जम्मू और कश्मीर: 100% लक्ष्य आवंटित कर 91% आवंटन पर प्रशिक्षण शुरू कर दिया।

आरसेटी (RSETI): ग्रामीण स्वरोजगार की रीढ़

जहाँ DDU-GKY वेतनभोगी रोजगार पर केंद्रित है, वहीं RSETIs (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) 18 से 50 वर्ष के युवाओं को निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण देकर उद्यमी बनाते हैं:

  • वर्ष 2009 से अब तक 33 राज्यों/UTs के 634 जिलों में 647 संस्थान सक्रिय हैं।
  • प्रशिक्षित 63.47 लाख में से 45.60 लाख युवा सेटल हो चुके हैं (जिनमें 94% ने टिकाऊ स्वरोजगार उद्यम स्थापित किए हैं तथा 6% ने वेतनभोगी नौकरी पाई है)।

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CGPSC/UPSC Static Facts: DAY-NRLM, RSETI एवं कौशल विकास नीतियां

प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC GS-2/3 ग्रामीण विकास, कौशल विकास व अर्थव्यवस्था तथा CGPSC Paper-5 ग्रामीण आजीविका) के लिए मानक तथ्य:

  • दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM):
    • शुरुआत: जून 2011 में स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY) को पुनर्गठित कर विश्व बैंक के सहयोग से प्रारंभ। DDU-GKY इसी मिशन का मांग-आधारित, प्लेसमेंट-लिंक्ड कौशल घटक है।
    • उद्देश्य: ग्रामीण गरीब परिवारों को स्व-सहायता समूहों (SHGs) में संगठित कर स्थायी आजीविका और कौशल संवर्धन देना।
  • आरसेटी (RSETI) का ऐतिहासिक उद्गम:
    • वर्ष 1982 में कर्नाटक के धर्मस्थल में डॉ. डी. वीरेंद्र हेगड़े (धर्माधिकारी) तथा सिंडिकेट बैंक व केनरा बैंक के सहयोग से ‘रुडसेटी’ (RUDSETI) की स्थापना हुई थी। इस सफल मॉडल को ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2009 में पूरे देश के प्रत्येक जिले में अग्रणी बैंकों (Lead Banks) के माध्यम से ‘RSETI’ के रूप में अपनाया।
  • राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF):
    • कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा अधिसूचित योग्यता-आधारित ढांचा, जो ज्ञान, कौशल और योग्यता के स्तरों (Levels 1 to 10) के अनुसार औपचारिक शिक्षा और व्यावसायिक कौशल को जोड़ता है।
  • संवैधानिक प्रावधान:
    • अनुच्छेद 41 (DPSP): अपनी आर्थिक सामर्थ्य और विकास की सीमाओं के भीतर काम पाने और शिक्षा पाने का अधिकार।
    • अनुच्छेद 46: जनता के दुर्बल वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जातियों और जनजातियों के शैक्षणिक और आर्थिक हितों की विशेष अभिवृद्धि।

विश्लेषण: जनसांख्यिकीय लाभांश (345 मिलियन युवा) और ‘रिवर्स माइग्रेशन’ का समाधान

(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Demography, Labor Economics, Migration & Skill Policy)

1. ‘ट्रेन एंड प्लेस’ से ‘सस्टेंड करियर प्रोग्रेशन’ की ओर बदलाव: पूर्ववर्ती कौशल योजनाओं की सबसे बड़ी कमजोरी यह थी कि प्लेसमेंट के 2-3 महीने बाद ग्रामीण युवा शहरी परिवेश के अकेलेपन, कम वेतन और आवास की अनुपलब्धता के कारण नौकरी छोड़कर गांव लौट आते थे (Distress Return Migration)। DDU GKY 2 0 Scheme द्वारा न्यूनतम प्लेसमेंट 6 माह करना, ₹7,620 का पोस्ट-प्लेसमेंट भत्ता देना और प्रवासन सहायता केंद्रों (MSCs) का बजट बढ़ाकर ₹30 लाख करना इस समस्या की जड़ पर प्रहार करता है। यह युवा को केवल अप्रेंटिस नहीं, बल्कि औपचारिक अर्थव्यवस्था का स्थायी हिस्सा बनाता है।

2. वर्ष 2036 तक 345 मिलियन युवा: जनसांख्यिकीय आपदा को लाभांश में बदलना: भारत की युवा आबादी 2036 तक लगभग 34.5 करोड़ पहुँचने का अनुमान है। यदि ग्रामीण युवाओं को केवल असंगठित मजदूरी मिली, तो यह जनसांख्यिकीय आपदा बन जाएगी। 180 घंटे का गैर-डोमेन प्रशिक्षण (अंग्रेजी, कंप्यूटर, उद्यमिता) ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं में ‘कॉर्पोरेट कॉन्फिडेंस’ पैदा करता है। 50% एससी/एसटी और 33% महिला आरक्षण सामाजिक न्याय के साथ भारत को ‘विकसित भारत 2047’ के अनुरूप विश्व की कौशल राजधानी (Skill Capital of the World) के रूप में तैयार करता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. DDU GKY 2 0 Scheme के तहत न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि कितनी निर्धारित की गई है?

DDU-GKY 2.0 के तहत न्यूनतम प्लेसमेंट अवधि को पूर्व के 3 माह से बढ़ाकर न्यूनतम 6 माह (Six Months) कर दिया गया है, जिसमें निरंतर व गैर-निरंतर मजदूरी और गिग रोजगार शामिल हैं।

Q2. योजना के अंतर्गत युवाओं को पोस्ट-प्लेसमेंट और रिटेंशन हेतु क्या वित्तीय सहायता दी जाती है?

प्लेसमेंट के बाद 6 महीने तक ₹1,270 प्रतिमाह (कुल ₹7,620) की वित्तीय सहायता तथा 365 दिन तक रोजगार में टिके रहने पर ₹5,000 का अतिरिक्त रिटेंशन सपोर्ट दिया जाता है।

Q3. केंद्रीय बजट 2026-27 में DDU-GKY के लिए कितनी धनराशि आवंटित की गई है?

केंद्रीय बजट 2026-27 में दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (DDU-GKY) के लिए ₹750 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है।

स्रोत (Source)

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB Delhi), ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार, 24 सितंबर 2026.

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