कवर्धा (कबीरधाम), 21 सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और पुरातात्विक गौरव के केंद्र भोरमदेव मंदिर क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए संचालित Bhoramdeo Corridor Project के निर्माण कार्यों में ढिलाई पर शासन ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत लगभग ₹146 करोड़ की लागत से विकसित किए जा रहे इस भव्य कॉरिडोर की प्रगति की कबीरधाम जिला पंचायत सभाकक्ष में उच्चस्तरीय समीक्षा की गई। समीक्षा बैठक की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा तथा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने संयुक्त रूप से की।
कार्यादेश जारी होने के 8 से 9 माह बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्यों में अपेक्षित गति न दिखने पर दोनों मंत्रियों ने निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों के प्रति तीव्र नाराजगी व्यक्त की। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने दो-टूक निर्देश दिए कि अब हर 15-15 दिन की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार कर निर्माण कार्य तेज किया जाए और प्रगति धरातल पर नजर आनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप परिणाम न देने वाले ठेकेदारों को तत्काल कार्य से पृथक (Terminated) किया जाएगा और अनुबंध की शर्तों के तहत उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में आगामी भोरमदेव महोत्सव से 10 दिन पूर्व तक सभी प्रमुख कार्यों को पूर्ण करने की सख्त समय-सीमा तय की गई। पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कड़े निर्देश दिए कि कॉरिडोर के ड्राइंग और डिजाइन में भोरमदेव मंदिर की मूल नागर शैली, ऐतिहासिक वास्तुकला, स्वरूप और रंगत से कोई छेड़छाड़ न हो। इसके अतिरिक्त, कवर्धा से भोरमदेव मार्ग पर शासकीय एवं वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने और उस भूमि का उपयोग सर्वसुविधायुक्त पार्किंग व जनसुविधाओं के लिए करने का संयुक्त राजस्व-वन अभियान चलाने का आदेश दिया गया।
| भोरमदेव कॉरिडोर समीक्षा बैठक: मुख्य तथ्य (Quick Facts) | विवरण |
|---|---|
| परियोजना का नाम | Bhoramdeo Corridor Project (भोरमदेव कॉरिडोर विकास) |
| स्वीकृत लागत | लगभग ₹146 करोड़ (स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत) |
| समीक्षा बैठक स्थल | जिला पंचायत सभाकक्ष, कबीरधाम (21 सितंबर 2026) |
| समीक्षा नेतृत्व | श्री विजय शर्मा (उप मुख्यमंत्री) एवं श्री राजेश अग्रवाल (पर्यटन मंत्री) |
| प्रशासनिक आदेश | प्रत्येक 15 दिन की माइलस्टोन कार्ययोजना; विफलता पर ब्लैकलिस्टिंग |
| पूर्णता की समय-सीमा | आगामी भोरमदेव महोत्सव से 10 दिन पूर्व तक लक्ष्य पूर्ण करना |
| वास्तुशिल्प निर्देश | भोरमदेव मंदिर की ऐतिहासिक वास्तुकला, प्राचीन स्वरूप और रंगत का अनिवार्य संरक्षण |
| अतिक्रमण विरोधी निर्देश | कवर्धा-भोरमदेव मार्ग से अतिक्रमण हटाकर पार्किंग व जनसुविधाओं का विकास |
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देश: ‘कागजी कार्ययोजना नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए काम’
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने Bhoramdeo Corridor Project के निर्माण में गुणवत्ता और समयबद्धता पर शून्य-सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति स्पष्ट की:
- 15-दिवसीय चक्र और फील्ड मॉनिटरिंग: कार्ययोजना केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। हर 15 दिन बाद निर्माण स्थल पर प्रगति स्पष्ट दिखनी चाहिए। पर्याप्त मशीनरी, कुशल जनशक्ति और तकनीकी संसाधन तुरंत झोंके जाएं।
- गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं: भोरमदेव क्षेत्र का विकास आगामी कई दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। निर्माण कार्य अत्यधिक मजबूत, टिकाऊ और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार होना चाहिए।
- पीएमसी (PMC) और विकास समिति में तालमेल: प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC), ठेकेदारों और भोरमदेव विकास समिति के मध्य निरंतर समन्वय रहेगा। तकनीकी अड़चनों की सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाए ताकि समाधान तुरंत हो सके।
पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल: भोरमदेव मंदिर की प्राचीन वास्तुकला का अक्षुण्ण संरक्षण
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहलुओं पर कड़े निर्देश दिए:
- 8-9 माह के विलंब पर जवाबदेही: कई कार्यों के टेंडर और कार्यादेश हुए 9 माह हो चुके हैं, फिर भी ढिलाई अक्षम्य है। लक्ष्य से पीछे रहने वाली एजेंसियों को हटाकर नई व्यवस्था की जाएगी।
- ठेकेदार का अधिकृत प्रतिनिधि अनिवार्य: निर्माण स्थल पर ठेकेदार की ओर से एक ऐसा जिम्मेदार और तकनीकी रूप से सक्षम प्रतिनिधि 24 घंटे उपस्थित रहे, जो ड्राइंग, डिजाइन और ऑन-साइट निर्णयों के लिए अधिकृत हो।
- ऐतिहासिक वास्तुकला का सम्मान: मंत्री ने स्पष्ट किया कि भोरमदेव केवल कवर्धा की नहीं, अपितु समूचे छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक पहचान और आस्था का सर्वोच्च केंद्र है। कॉरिडोर के नए ढांचे ऐसे बनें जो मंदिर के प्राचीन पत्थरों, नक्काशी और ऐतिहासिक रंगत के साथ पूर्ण सामंजस्य (Harmonization) स्थापित करें।
- नियमित निरीक्षण: जल संसाधन (सिंचाई) और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी नियमित रूप से निर्माण स्थल का भौतिक निरीक्षण करेंगे।
कवर्धा-भोरमदेव मार्ग से अतिक्रमण हटाने और पार्किंग निर्माण के निर्देश
कॉरिडोर के पहुंच मार्ग को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए कड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया गया:
- संयुक्त सीमांकन: राजस्व विभाग और वन विभाग संयुक्त रूप से कवर्धा से भोरमदेव मुख्य मार्ग के दोनों ओर की शासकीय भूमि का सीमांकन करेंगे।
- अतिक्रमण मुक्ति और जनसुविधा: तहसीलदार को अवैध कब्जों को चिन्हित कर तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए हैं। अतिक्रमण मुक्त कराई गई उपयुक्त शासकीय भूमि पर विशाल पार्किंग परिसर, विश्राम स्थल और अन्य पर्यटक सुविधाएं सुव्यवस्थित की जाएंगी।
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CGPSC Static Facts: भोरमदेव मंदिर समूह, फणि नागवंश एवं स्वदेश दर्शन
प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC राज्य सेवा परीक्षा Paper-6 छत्तीसगढ़ का इतिहास व स्थापत्य तथा Paper-5 पर्यटन अर्थव्यवस्था) के लिए मानक तथ्य:
- भोरमदेव मंदिर (Bhoramdeo Temple Complex):
- निर्माण काल एवं शासक: 11वीं शताब्दी (लगभग 1089 ईस्वी) में फणि नागवंश के छठवें शासक राजा गोपाल देव द्वारा निर्मित।
- स्थापत्य शैली: नागर शैली (चंदेल शैली) का उत्कृष्ट मंदिर। कामुक एवं मिथुन शिल्पों की प्रचुरता के कारण इसे ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ कहा जाता है। इसका प्रवेश द्वार पूर्वोन्मुखी है और यह भगवान शिव को समर्पित है (नामकरण स्थानीय गोंड देवता ‘भोरमदेव’ के नाम पर)।
- समीपस्थ ऐतिहासिक स्मारक:
- मड़वा महल (Mandwa Mahal): वर्ष 1349 ईस्वी में फणि नागवंशी शासक रामचंद्र देव द्वारा कलचुरि राजकुमारी अंबिका देवी से विवाह के उपलक्ष्य में निर्मित (दूल्हादेव मंदिर / विवाह मंडप सदृश)। इसमें 54 मिथुन मूर्तियों का अंकन है।
- छेरकी महल (Chherki Mahal): 14वीं शताब्दी का ईंट व प्रस्तर निर्मित शिव मंदिर, जो बकरियों के चरवाहों (छेरकी) को समर्पित माना जाता है।
- स्वदेश दर्शन योजना (Swadesh Darshan Scheme):
- केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2014-15 में प्रारंभ। इसके तहत छत्तीसगढ़ में ‘ट्राइबल टूरिज्म सर्किट’ विकसित किया गया है। अब स्वदेश दर्शन 2.0 (SD2.0) के अंतर्गत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गंतव्यों को समग्र रूप से ‘डेस्टिनेशन सेंट्रिक’ विकसित किया जा रहा है।
- भोरमदेव महोत्सव:
- कबीरधाम जिला प्रशासन एवं संस्कृति विभाग द्वारा प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण त्रयोदशी (मार्च-अप्रैल) के अवसर पर आयोजित होने वाला राज्य स्तरीय सांस्कृतिक समारोह।
विश्लेषण: हेरिटेज कॉरिडोर निर्माण में पुरातात्विक सत्यनिष्ठा और समयबद्ध शासन
(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Heritage Tourism, Cultural Integrity & Project Management)
1. आधुनिक अधोसंरचना बनाम पुरातात्विक सत्यनिष्ठा (Heritage Integrity): अक्सर प्राचीन स्मारकों के आसपास कॉरिडोर बनाते समय अत्यधिक कंक्रीटीकरण और आधुनिक कांच-स्टील का उपयोग स्मारक के मूल ऐतिहासिक परिवेश को नष्ट कर देता है। Bhoramdeo Corridor Project में मंत्रियों द्वारा ‘मंदिर की ऐतिहासिक वास्तुकला, प्राचीन स्वरूप और रंगत से कोई छेड़छाड़ न करने’ का सख्त निर्देश पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत प्रशंसनीय है। नए निर्माण में स्थानीय बालूका पत्थर (Sandstone) और नागर शैली के अनुपातिक डिजाइनों का उपयोग मंदिर के 1000 वर्ष पुराने परिवेश को बिना विकृत किए पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।
2. 15-दिवसीय माइलस्टोन आधारित अनुबंध प्रबंधन (Contractual Accountability): सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में सबसे बड़ा संकट ‘टाइम ओवररन’ (समय सीमा पार होना) और उसके कारण ‘कॉस्ट ओवररन’ (लागत में वृद्धि) का होना है। 8-9 महीने से सुस्त पड़े ठेकेदारों पर केवल जुर्माना लगाने के बजाय ’15-दिन की स्पष्ट कार्ययोजना’ और ‘भोरमदेव महोत्सव से 10 दिन पहले की अंतिम डेडलाइन’ तय करना प्रशासनिक कार्यकुशलता (Administrative Efficiency) का परिचायक है। यह मॉडल अन्य राज्य स्तरीय परियोजनाओं के लिए भी जवाबदेही का मानक बन सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. Bhoramdeo Corridor Project की अनुमानित लागत और योजना क्या है?
भोरमदेव कॉरिडोर का निर्माण केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत लगभग ₹146 करोड़ की लागत से कबीरधाम जिले में किया जा रहा है।
Q2. मंत्रियों ने निर्माण कार्यों की धीमी गति को दूर करने के लिए क्या समय-सीमा तय की है?
मंत्रियों ने हर 15 दिन की स्पष्ट कार्ययोजना बनाकर प्रगति दिखाने के निर्देश दिए हैं तथा आगामी भोरमदेव महोत्सव से 10 दिन पहले तक निर्धारित कार्यों को पूर्ण करने की समय-सीमा तय की है।
Q3. भोरमदेव मंदिर का निर्माण किस राजवंश के काल में और कब हुआ था?
भोरमदेव मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी (1089 ईस्वी) में फणि नागवंश के शासक राजा गोपाल देव के शासनकाल में नागर शैली में कराया गया था।
स्रोत (Source)
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Chhattisgarh) आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति, 21 सितंबर 2026.
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