Published on July 21, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य, संक्रामक रोगों की रोकथाम और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए Qdenga Dengue Vaccine India Approval को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने देश के पहले डेंगू रोधी टीके ‘क्यूडेंगा’ (Qdenga®) के विपणन (Marketing Authorisation) को हरी झंडी दे दी है।
यह टीका जर्मनी की कंपनी टकेडा जीएमबीएच (Takeda GmbH) द्वारा निर्मित किया गया है। भारत में इसका आयात मेसर्स टकेडा बायोफार्मास्युटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जाएगा।
यह पहली बार है जब भारत में डेंगू जैसी जानलेवा बीमारी की रोकथाम के लिए किसी टीके को आधिकारिक विनियामक मंजूरी प्राप्त हुई है। यह कूटनीतिक और चिकित्सात्मक रूप से भारत के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगा।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और विभिन्न राज्य स्तरीय प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए Qdenga Dengue Vaccine India Approval परियोजना, जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology), सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों (GS Paper II) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (GS Paper III) के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक (Current Affairs) विषय है।
इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस ऐतिहासिक टीके की वैज्ञानिक विशेषताओं, इसके खुराक कार्यक्रम, नैदानिक परीक्षणों (Clinical Trials), भारत में डेंगू की स्थिति और परीक्षा उपयोगी विभिन्न पहलुओं का गहराई से अध्ययन करेंगे।
Qdenga Dengue Vaccine India Approval: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)
इस ऐतिहासिक डेंगू टीके की विनियामक स्वीकृति और इसके उपयोग से जुड़े प्रमुख तथ्यों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेपित किया गया है:
| महत्वपूर्ण संकेतक | Qdenga Dengue Vaccine India Approval के प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| टीके का ब्रांड नाम | क्यूडेंगा (Qdenga®) – डेंगू टेट्रावैलेंट वैक्सीन (सजीव, क्षीण) |
| विकासकर्ता एवं निर्माता कंपनी | टकेडा जीएमबीएच (Takeda GmbH), जर्मनी |
| भारत में आयातक एजेंसी | मेसर्स टकेडा बायोफार्मास्युटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड |
| स्वीकृति प्रदान करने वाली संस्था | केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO), भारत सरकार |
| लक्षित आयु वर्ग | 4 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक के व्यक्ति |
| टीकाकरण खुराक कार्यक्रम | 0.5 मिलीलीटर की दो खुराकें, 3 महीने के अंतराल पर (0 और 3 महीने) |
| प्रशासन का मार्ग (Route) | सबकुटेनियस इंजेक्शन (Subcutaneous Injection – त्वचा के ठीक नीचे) |
| वैश्विक विनियामक स्थिति | 42 देशों में स्वीकृत; विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्री-क्वालिफाइड |
Why in News?: चर्चा में क्यों है?
भारत में प्रतिवर्ष मानसून के दौरान और उसके बाद डेंगू (Dengue) के मामलों में तीव्र उछाल देखा जाता है। यह बीमारी एडिस एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छरों द्वारा फैलती है और कई मामलों में रक्तस्रावी बुखार (Dengue Hemorrhagic Fever) के कारण जानलेवा साबित होती है।
अब तक देश में डेंगू से बचने का एकमात्र उपाय केवल मच्छरों का नियंत्रण और रोग के लक्षणों का प्रबंधन (Symptomatic Treatment) ही था। कोई भी टीका भारत में उपलब्ध नहीं था।
इसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट को समाप्त करने के लिए Qdenga Dengue Vaccine India Approval की प्रक्रिया को पूरा किया गया है। औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत कड़े वैज्ञानिक और नैदानिक मूल्यांकन के बाद ही इस टीके को भारतीय बाजार में उतारने की अनुमति दी गई है।
क्यूडेंगा (Qdenga®) वैक्सीन की तकनीकी और वैज्ञानिक विशेषताएं
इस वैक्सीन की संरचना और इसके निर्माण के पीछे की जैव प्रौद्योगिकी को समझना सिविल सेवा के अभ्यर्थियों के लिए आवश्यक है:
1. सजीव, क्षीण टेट्रावैलेंट टीका (Live Attenuated Tetravalent Vaccine)
क्यूडेंगा एक ‘लाइव-अटेनुएटेड’ (Live, Attenuated) टीका है, जिसका अर्थ है कि इसमें कमजोर किए गए जीवित डेंगू वायरस का उपयोग किया गया है। यह शरीर में बीमारी पैदा किए बिना एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (Immune Response) विकसित करता है।
यह ‘टेट्रावैलेंट’ (Tetravalent) है, यानी यह डेंगू के सभी चार सीरोटाइप्स (DENV-1, DENV-2, DENV-3, और DENV-4) के खिलाफ समान रूप से प्रभावी सुरक्षा प्रदान करता है।
2. रीकंपीनेन्ट डीएनए तकनीक (Recombinant DNA Technology)
इस टीके का विकास रिकॉम्बीनेन्ट डीएनए तकनीक (Recombinant DNA Technology) के माध्यम से किया गया है। इसका उत्पादन वेरो कोशिकाओं (Vero Cells) में किया जाता है।
इसमें डेंगू वायरस टाइप-2 (DENV-2) के आनुवंशिक ढांचे (Backbone) का उपयोग किया गया है। इस ढांचे में अन्य तीन सीरोटाइप्स की सतह के प्रोटीनों को एनकोड करने वाले जीनों को जेनेटिक इंजीनियरिंग द्वारा जोड़ा गया है।
इस वैज्ञानिक संरचना के कारण इस उत्पाद में आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव (Genetically Modified Organisms – GMOs) शामिल हैं। इसे एक फ्रीज-ड्राइड (Freeze-dried) पाउडर के रूप में आपूर्ति किया जाता है, जिसे उपयोग से पहले घोलकर त्वचा के नीचे इंजेक्ट किया जाता है।
खुराक और टीकाकरण कार्यक्रम (Immunisation Schedule)
Qdenga Dengue Vaccine India Approval के तहत इस टीके के प्रभावी उपयोग के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं:
- लक्षित आयु सीमा: यह टीका 4 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक की आयु के बच्चों और वयस्कों के लिए अनुशंसित किया गया है।
- खुराक की मात्रा: प्रत्येक खुराक 0.5 मिलीलीटर (ml) की होगी।
- समय अंतराल: पूर्ण प्रतिरक्षण के लिए दो खुराकों की आवश्यकता होगी। इन्हें 3 महीने के अंतराल पर (यानी पहली खुराक ‘0’ महीने पर और दूसरी खुराक ‘3’ महीने पर) दिया जाएगा।
वैश्विक सेफ्टी रिकॉर्ड और नैदानिक परीक्षण (Clinical Trials)
इस टीके की सुरक्षा और प्रभावशीलता को प्रमाणित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कड़े वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं:
1. अंतरराष्ट्रीय नैदानिक कार्यक्रम
इस वैक्सीन का परीक्षण ब्राजील, थाईलैंड और श्रीलंका सहित दुनिया के 8 से अधिक देशों में किया गया है। इन परीक्षणों में डेंगू-स्थानिक (Endemic) और गैर-स्थानिक दोनों ही क्षेत्रों के वासी शामिल थे।
2. भारत में तृतीय चरण (Phase III) का परीक्षण
Qdenga Dengue Vaccine India Approval देने से पहले भारत में 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों पर तीसरे चरण का कड़ा सुरक्षा और इम्यूनोजेनेसिटी (Immunogenicity) परीक्षण किया गया था। इस परीक्षण में भारतीय आबादी पर इसके कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं पाए गए।
3. वैश्विक नियामक मान्यता
यह टीका पहले से ही यूरोपीय संघ (EU), यूनाइटेड किंगडम (UK), स्विट्जरलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड सहित दुनिया के 42 देशों में स्वीकृत है।
इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्री-क्वालिफाइड (Prequalification) किया जा चुका है। वैश्विक स्तर पर अब तक इस टीके की 2.4 करोड़ (24 Million) से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं, जो इसके बेहतरीन सुरक्षा प्रोफाइल को साबित करता है।
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP)
भारत का राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम देश में मलेरिया, फाइलेरिया, कालाजार, जापानी एन्सेफलाइटिस, चिकनगुनिया और डेंगू की रोकथाम के लिए नोडल कार्यक्रम है। Qdenga Dengue Vaccine India Approval इस राष्ट्रीय कार्यक्रम को अत्यधिक मजबूत बनाएगा। यह टीका पहले से चल रहे मच्छर नियंत्रण (Vector Control), त्वरित निदान और उपचार के सरकारी प्रयासों का पूरक बनेगा।
भारत और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए इस स्वीकृति का महत्व
सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भारत के लिए यह मंजूरी अत्यंत दूरगामी परिणाम देने वाली साबित होगी:
- डेंगू के बोझ में कमी: भारत में प्रतिवर्ष हजारों लोग डेंगू के कारण अस्पतालों में भर्ती होते हैं, जिससे स्वास्थ्य प्रणालियों पर भारी दबाव पड़ता है। यह टीका अस्पतालों में भर्ती होने वाले गंभीर मामलों की संख्या को न्यूनतम करेगा।
- गरीब परिवारों को आर्थिक राहत: डेंगू का इलाज और प्लेटलेट्स चढ़ाने का खर्च गरीब परिवारों को कर्ज के कुचक्र में धकेल देता है। यह निवारक टीका उनके इस वित्तीय बोझ को कम करेगा।
- स्वास्थ्य कूटनीति (Health Diplomacy): भारत जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पहले से ही ‘विश्व की फार्मेसी’ के रूप में जाना जाता है। इस टीके का सफल समावेशन भारत के टीकाकरण बुनियादी ढांचे की वैश्विक साख को और मजबूत करेगा।
टीकाकरण अभियान के समक्ष संभावित चुनौतियां
तकनीकी रूप से उत्कृष्ट होने के बावजूद, भारत में इस टीके के व्यापक वितरण में निम्नलिखित चुनौतियां सामने आ सकती हैं:
- वित्तीय वहनीयता (Affordability): चूँकि यह टीका जर्मनी से आयात किया जाएगा, इसलिए इसकी शुरुआती कीमत सामान्य भारतीय नागरिकों के लिए अधिक हो सकती है। सरकार को इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) में शामिल करने के लिए सब्सिडी पर विचार करना होगा।
- कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स: यह एक लाइव-अटेनुएटेड टीका है, जिसे सुरक्षित रखने के लिए कड़े कोल्ड स्टोरेज तापमान (Cold Chain) की आवश्यकता होती है। ग्रामीण क्षेत्रों तक इसकी गुणवत्ता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा।
- टीकाकरण के प्रति हिचकिचाहट: ग्रामीण अंचलों में नए टीकों के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता होगी।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष विश्लेषण (Exam Relevance Section)
यूपीएससी और राज्य सेवा मुख्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सामान्य अध्ययन के पेपर-2 (लोक स्वास्थ्य नीतियां, सरकारी हस्तक्षेप) और पेपर-3 (जैव प्रौद्योगिकी, संक्रामक रोग नियंत्रण) के दृष्टिकोण से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
UPSC & State PCS Prelims Fact Box: Qdenga Dengue Vaccine India Approval
- CDSCO (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन): यह भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय नियामक निकाय है, जो दवाओं, टीकों और चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता व सुरक्षा को नियंत्रित करता है। इसके प्रमुख ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) होते हैं।
- रीकॉम्बीनेन्ट डीएनए तकनीक (Recombinant DNA): दो अलग-अलग स्रोतों के डीएनए को कृत्रिम रूप से प्रयोगशाला में जोड़कर एक नया जेनेटिक कॉम्बिनेशन बनाने की प्रक्रिया। इसका उपयोग इंसुलिन और हेपेटाइटिस-बी टीकों के निर्माण में भी होता है।
- वेरो कोशिकाएं (Vero Cells): ये अफ्रीकी हरे बंदर (African Green Monkey) की किडनी के उपकला (Epithelial) कोशिकाओं से प्राप्त की गई वंशावली हैं, जिनका उपयोग वायरोलॉजी और वैक्सीन उत्पादन के लिए सेल कल्चर में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
UPSC Mains Analysis (GS Paper III: विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य)
प्रश्न: “संक्रामक रोगों की रोकथाम में केवल मच्छर नियंत्रण जैसी पारंपरिक विधियां पर्याप्त नहीं हैं। ‘क्यूडेंगा’ की हालिया विनियामक मंजूरी के संदर्भ में चर्चा कीजिए कि किस प्रकार जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) और राष्ट्रीय टीकाकरण रणनीतियां भारत में वेक्टर जनित बीमारियों के बोझ को कम करने में केंद्रीय भूमिका निभा सकती हैं।”
उत्तर की रूपरेखा:
- प्रस्तावना: सीडीएससीओ द्वारा दी गई देश के पहले डेंगू टीके की मंजूरी Qdenga Dengue Vaccine India Approval के ऐतिहासिक महत्व से उत्तर प्रारंभ करें।
- पारंपरिक मच्छर नियंत्रण की सीमाएं: कीटनाशकों के प्रति मच्छरों में बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता (Resistance), तेजी से होता अनियंत्रित शहरीकरण जहां मच्छरों के प्रजनन स्थलों को पूरी तरह समाप्त करना कठिन है, और केवल रोगसूचक इलाज की सीमाएं।
- जैव प्रौद्योगिकी का योगदान (क्यूडेंगा वैक्सीन):
- रीकॉम्बीनेन्ट डीएनए और लाइव अटेनुएटेड तकनीक: यह तकनीक शरीर में बिना वास्तविक बीमारी फैलाए सभी 4 सीरोटाइप्स के खिलाफ मजबूत एंटीबॉडीज तैयार करती है।
- सार्वभौमिक सुरक्षा: 4 से 60 वर्ष के आयु वर्ग के लिए स्वीकृत होने के कारण यह देश की उत्पादक आबादी को सुरक्षा प्रदान करती है।
- राष्ट्रीय स्तर पर एकीकरण के लाभ (NVBDCP): यह टीका राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत चल रहे मच्छर जनित रोग शमन प्रयासों को मजबूत करेगा और अस्पतालों में भर्ती होने वाले गंभीर मामलों की संख्या को कम करेगा।
- चुनौतियां: आयातित टीकों की उच्च लागत, ग्रामीण क्षेत्रों में कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स का अभाव, और सभी चार सीरोटाइप्स के खिलाफ दीर्घकालिक प्रभावशीलता की निरंतर निगरानी।
- निष्कर्ष: यह सारांश प्रस्तुत करें कि ‘क्यूडेंगा’ की मंजूरी भारत को जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक वैश्विक लीडर के रूप में स्थापित करती है। यह आत्मनिर्भर भारत और ‘स्वस्थ भारत’ के संकल्प को पूरा करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)
डेंगू और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगठनों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक तथ्य जो परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:
- डेंगू वायरस और इसके वाहक: डेंगू एक मच्छर जनित उष्णकटिबंधीय (Tropical) बीमारी है जो फ्लेविभिरिडे (Flaviviridae) परिवार के डेंगू वायरस के कारण होती है। इसका मुख्य वाहक मादा एडिस एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर है, जो दिन के समय काटती है। यह मच्छर चिकनगुनिया, पीला बुखार (Yellow Fever) और जीका वायरस को भी फैलाता है।
- डेंगू के चार सीरोटाइप्स: इसके चार विशिष्ट लेकिन निकट से संबंधित सीरोटाइप्स हैं—DENV-1, DENV-2, DENV-3, और DENV-4। यदि कोई व्यक्ति एक सीरोटाइप से ठीक हो जाता है, तो उसे उस विशिष्ट सीरोटाइप के खिलाफ जीवन भर के लिए प्रतिरक्षा मिल जाती है, लेकिन अन्य तीन सीरोटाइप्स से संक्रमण होने पर गंभीर डेंगू बुखार (Dengue Shock Syndrome) का खतरा बढ़ जाता है।
- ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940: यह भारत का एक ऐतिहासिक कानून है जो देश में दवाओं, टीकों और सौंदर्य प्रसाधनों के आयात, निर्माण, वितरण और बिक्री को विनियमित करता है। इसी कानून के तहत सीडीएससीओ (CDSCO) को टीकों की विनियामक मंजूरी देने की शक्ति प्राप्त है।
एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)
त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए Qdenga Dengue Vaccine India Approval के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:
- First Dengue Vaccine: भारत सरकार ने देश के पहले डेंगू रोधी टीके ‘क्यूडेंगा’ (Qdenga®) को विनियामक मंजूरी दी है।
- Manufacturer: यह टीका जर्मनी की कंपनी टकेडा (Takeda GmbH) द्वारा रिकॉम्बीनेन्ट डीएनए तकनीक से बनाया गया है।
- Age Group: यह टीका 4 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक की आयु के लोगों के लिए सुरक्षित और प्रभावी पाया गया है।
- Dosage Schedule: इसके तहत 0.5 मिलीलीटर की दो खुराकें 3 महीने के अंतराल पर (0 और 3 महीने) त्वचा के नीचे (Subcutaneous) दी जाएंगी।
- Global Laurels: यह टीका पहले से ही यूरोपीय संघ और यूके सहित 42 देशों में स्वीकृत है और इसे डब्ल्यूएचओ (WHO) की प्री-क्वालिफिकेशन प्राप्त है।
- NVBDCP Support: यह स्वदेशी और आयातित टीका भारत के राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के लक्ष्यों को हासिल करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और स्वास्थ्य विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में सीडीएससीओ (CDSCO) द्वारा स्वीकृत किए गए भारत के पहले डेंगू रोधी टीके का क्या नाम है?
(A) डेंगवैक्सिया (Dengvaxia)
(B) क्यूडेंगा (Qdenga®)
(C) रोटावैक (Rotavac)
(D) कोवैक्सिन (Covaxin)
उत्तर: (B) क्यूडेंगा (Qdenga®)
व्याख्या: भारत सरकार ने जर्मनी की टकेडा कंपनी द्वारा विकसित लाइव-अटेनुएटेड टेट्रावैलेंट डेंगू टीके ‘क्यूडेंगा’ को भारत में उपयोग के लिए पहली बार विनियामक मंजूरी प्रदान की है।
प्रश्न 2: ‘Qdenga Dengue Vaccine India Approval’ के अनुसार, इस टीके को लगाने के लिए अनुशंसित आयु सीमा निम्नलिखित में से क्या निर्धारित की गई है?
(A) केवल 1 वर्ष से कम उम्र के शिशुओं के लिए
(B) 4 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक के व्यक्तियों के लिए
(C) केवल 18 वर्ष से ऊपर के वयस्कों के लिए
(D) 65 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों के लिए
उत्तर: (B) 4 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक के व्यक्तियों के लिए
व्याख्या: यह टीका 4 से 60 वर्ष की आयु के बच्चों और वयस्कों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी पाया गया है, जो इस आयु वर्ग के लोगों को डेंगू से सुरक्षा प्रदान करेगा।
प्रश्न 3: क्यूडेंगा (Qdenga®) टीके के पूर्ण प्रतिरक्षण के लिए कितनी खुराकों की आवश्यकता होती है और उनके बीच कितना समय अंतराल होना चाहिए?
(A) 3 खुराकें, 1 महीने के अंतराल पर
(B) 2 खुराकें, 3 महीने के अंतराल पर (0 और 3 महीने)
(C) केवल 1 एकमुश्त खुराक
(D) 2 खुराकें, 1 वर्ष के अंतराल पर
उत्तर: (B) 2 खुराकें, 3 महीने के अंतराल पर (0 और 3 महीने)
व्याख्या: क्यूडेंगा टीके की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए 0.5 मिलीलीटर की दो खुराकों की आवश्यकता होती है, जिन्हें 3 महीने के अंतराल पर त्वचा के नीचे इंजेक्ट किया जाता है।
प्रश्न 4: डेंगू बुखार मुख्य रूप से किस वायरस परिवार (Virus Family) के कारण होने वाली बीमारी है और इसका वाहक कौन सा मच्छर है?
(A) टोगाविरिडे परिवार, एनोफिलीज मच्छर
(B) फ्लेविभिरिडे परिवार, एडिस एजिप्टी मच्छर
(C) कोरोनाभिरिडे परिवार, क्युलेक्स मच्छर
(D) पाक्सविरिडे परिवार, सैंडफ्लाई मक्खी
उत्तर: (B) फ्लेविभिरिडे परिवार, एडिस एजिप्टी मच्छर
व्याख्या: डेंगू फ्लेविभिरिडे परिवार के वायरस के कारण होता है और इसका संचरण मुख्य रूप से संक्रमित मादा एडिस एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है जो आमतौर पर दिन के समय काटती है।
प्रश्न 5: भारत में दवाओं, टीकों और चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता, विनिर्माण सुरक्षा और आयात को विनियमित करने वाला ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट’ किस वर्ष पारित किया गया था?
(A) वर्ष 1940
(B) वर्ष 1950
(C) वर्ष 1985
(D) वर्ष 2005
उत्तर: (A) वर्ष 1940
व्याख्या: ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 भारत में दवाओं और टीकों के आयात, विनिर्माण और बिक्री को विनियमित करने वाला ऐतिहासिक कानून है। इसी कानून के तहत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) कार्य करता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. Qdenga Dengue Vaccine India Approval क्या है?
Qdenga Dengue Vaccine India Approval भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा देश के पहले डेंगू रोधी टीके ‘क्यूडेंगा’ (Qdenga®) को दी गई आधिकारिक विनियामक मंजूरी है। यह टीका 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में डेंगू की रोकथाम के लिए अत्यधिक प्रभावी पाया गया है।
Q2. क्यूडेंगा (Qdenga®) वैक्सीन को किस तकनीक से बनाया गया है?
यह एक सजीव, क्षीण (Live, Attenuated) टेट्रावैलेंट टीका है जिसे रिकॉम्बीनेन्ट डीएनए तकनीक (Recombinant DNA) की मदद से बनाया गया है। इसमें डेंगू वायरस टाइप-2 (DENV-2) के आनुवंशिक ढांचे पर अन्य तीन सीरोटाइप्स के जीनों को जोड़कर तैयार किया गया है।
Q3. इस टीके के लिए टीकाकरण खुराक कार्यक्रम क्या निर्धारित किया गया है?
इस टीके की 0.5 मिलीलीटर की दो खुराकें दी जाती हैं। इन दोनों खुराकों के बीच 3 महीने का समय अंतराल (0 और 3 महीने) होना अनिवार्य है। इसे त्वचा के नीचे (Subcutaneous Injection) इंजेक्ट किया जाता है।
Q4. क्या यह टीका वैश्विक स्तर पर भी सुरक्षित और स्वीकृत है?
हाँ, यह टीका पहले से ही यूरोपीय संघ, यूके, स्विट्जरलैंड और इंडोनेशिया सहित दुनिया के 42 देशों में स्वीकृत है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्री-क्वालिफाइड किया जा चुका है और वैश्विक स्तर पर इसकी 2.4 करोड़ से अधिक खुराकें सफलतापूर्वक दी जा चुकी हैं।
Q5. भारत में डेंगू नियंत्रण के सरकारी प्रयासों में यह टीका कैसे मदद करेगा?
यह टीका भारत के राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP) के तहत चल रहे मच्छर नियंत्रण, त्वरित निदान और उपचार के प्रयासों को मजबूत करेगा। यह डेंगू के कारण अस्पतालों में भर्ती होने वाले गंभीर मामलों की संख्या को न्यूनतम कर लोक स्वास्थ्य के आर्थिक बोझ को कम करेगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
भारत सरकार के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा देश के पहले डेंगू रोधी टीके ‘क्यूडेंगा’ की ऐतिहासिक मंजूरी Qdenga Dengue Vaccine India Approval संक्रामक रोगों के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक युगांतरकारी क्षण है। वर्षों से भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली मानसून के समय डेंगू के प्रकोप से जूझती रही है, जहां रोकथाम के केवल सीमित भौतिक उपाय ही उपलब्ध थे।
जैव प्रौद्योगिकी और रिकॉम्बीनेन्ट डीएनए तकनीक के माध्यम से विकसित यह लाइव-अटेनुएटेड टेट्रावैलेंट टीका सभी चार सीरोटाइप्स के खिलाफ एक मजबूत और दीर्घकालिक सुरक्षा कवच प्रदान करेगा। 42 देशों में इसका सफल वैश्विक उपयोग और डब्ल्यूएचओ की प्री-क्वालिफिकेशन इसकी अभूतपूर्व सुरक्षात्मक प्रासंगिकता को प्रमाणित करती है।
यद्यपि इस टीके के आयात के कारण होने वाली उच्च लागत और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक इसके सुरक्षित कोल्ड चेन वितरण को सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, परंतु इस टीके का सफल क्रियान्वयन अंततः भारत के राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम को अभूतपूर्व शक्ति प्रदान करेगा। यह वैज्ञानिक प्रयास ‘स्वस्थ भारत’ के संकल्प को पूरा करने, गरीब परिवारों को गंभीर स्वास्थ्य खर्चों से बचाने और भारत को वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के मानचित्र पर एक अग्रणी और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा।
Official Sources:
- Press Information Bureau (PIB) Delhi (https://pib.gov.in)