Published on July 21, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
छत्तीसगढ़ के लोक संगीत, अध्यात्म, और ऐतिहासिक सामाजिक सुधार आंदोलनों को एक गौरवपूर्ण राष्ट्रीय पहचान प्रदान करते हुए 72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary की घोषणा की गई है। भारत के सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के 72वें संस्करण में छत्तीसगढ़ के रामनामी संप्रदाय पर आधारित वृत्तचित्र ‘राम-नामी’ (Ram-Nami) को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म (Best Non-Feature Film) का राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया है।
इस बड़ी सफलता के बाद पूरे छत्तीसगढ़ के कला जगत में हर्ष और गर्व की लहर दौड़ गई है। छत्तीसगढ़ सरकार के संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को राज्य की लोक विरासत के लिए एक अभूतपूर्व मील का पत्थर बताया है। उन्होंने इस वृत्तचित्र के प्रख्यात निर्देशक श्री भरतबाला गणपति (Bharatbala Ganapathy) और उनकी पूरी निर्माण टीम को बधाई देते हुए इसे छत्तीसगढ़ की कूटनीतिक जीत बताया है।
यह वृत्तचित्र न केवल रामनामी समाज की अनूठी भक्ति परंपरा को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में शुरू हुए एक अनूठे अहिंसक सामाजिक आंदोलन की कहानी भी कहता है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और विशेष रूप से छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए 72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary का यह सम्मान, छत्तीसगढ़ के सामाजिक सुधार आंदोलनों, लोक संस्कृतियों (GS Paper VI) और भारतीय कला विरासत (GS Paper I) के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम रामनामी समाज के इतिहास, उनके अनूठे गोदना (Tattoo) परंपरा के सामाजिक-धार्मिक कारणों, फिल्म के तकनीकी पक्ष और परीक्षा उपयोगी सभी महत्वपूर्ण आयामों का गहराई से अध्ययन करेंगे।
72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)
इस राष्ट्रीय स्तर के उत्कृष्ट सिनेमाई सम्मान और रामनामी संप्रदाय से जुड़े प्रमुख तथ्यों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेपित किया गया है:
| महत्वपूर्ण आयाम | 72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary के प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| अवार्ड का नाम | सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म (72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary) |
| वृत्तचित्र का शीर्षक | राम-नामी (Ram-Nami) |
| मुख्य विषयवस्तु | छत्तीसगढ़ के रामनामी समाज की विशिष्ट गोदना परंपरा और जीवन शैली |
| फिल्म के निर्देशक (Director) | श्री भरतबाला गणपति (प्रसिद्ध राष्ट्रीय कूटनीतिक फिल्म निर्माता) |
| विजेता राज्य और संप्रदाय | छत्तीसगढ़ राज्य, रामनामी संप्रदाय (मुख्यतः जांजगीर-चांपा, सारंगढ़ और बिलासपुर) |
| पुरस्कार घोषणा की तिथि | 20 जुलाई 2026 (संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा आधिकारिक विज्ञप्ति जारी) |
| सामाजिक कूटनीति | अस्पृश्यता और जातिवाद के खिलाफ 19वीं सदी का अनूठा अहिंसक आंदोलन |
Why in News?: चर्चा में क्यों है?
छत्तीसगढ़ का रामनामी संप्रदाय अपनी विशिष्ट धार्मिक और सामाजिक रीतियों के कारण पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है। लेकिन आधुनिकता के प्रभाव और युवा पीढ़ी के इस कठिन परंपरा से पीछे हटने के कारण यह अमूल्य लोक विरासत धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर है।
इसी गंभीर पृष्ठभूमि के बीच, विख्यात फिल्मकार भरतबाला ने इस समाज के अंतिम ‘नख-शिख’ (सिर से लेकर पैर तक राम नाम गुदवाने वाले) बुजुर्गों के जीवन पर एक अत्यंत संवेदनशील और मर्मस्पर्शी वृत्तचित्र का निर्माण किया।
इस फिल्म को 72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary के रूप में घोषित किया जाना यह सिद्ध करता है कि भारत सरकार हमारी लुप्तप्राय लोक परंपराओं के संरक्षण और उनके राष्ट्रीय दस्तावेजीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। यह सम्मान छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं के संवर्धन को एक नई वैश्विक कूटनीतिक गति प्रदान करेगा।
रामनामी संप्रदाय (Ramnami Sect): इतिहास और अनूठी परंपराएं
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए रामनामी संप्रदाय के इतिहास और उनके सामाजिक सुधारों को गहराई से समझना अत्यंत आवश्यक है:
1. संप्रदाय की उत्पत्ति का इतिहास
रामनामी संप्रदाय की शुरुआत 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध (लगभग 1890 के दशक) में तत्कालीन अविभाजित बिलासपुर जिले (वर्तमान जांजगीर-चांपा क्षेत्र) के ग्राम चारपारा से हुई थी। इसके प्रवर्तक **परसुराम** (Parasuram) नामक एक दलित सुधारक थे, जिन्होंने कुष्ठ रोग से पीड़ित होने के बाद राम नाम के जप से स्वयं को चंगा पाया था।
उस दौर में हिंदू समाज में अस्पृश्यता (Untouchability) और जातिगत भेदभाव चरम पर था। अनुसूचित जाति के लोगों को मंदिरों में प्रवेश करने और सार्वजनिक कुओं से पानी पीने की सख्त मनाही थी। इसी भेदभाव के शांतिपूर्ण और अहिंसक प्रतिरोध (Non-violent Protest) के रूप में इस संप्रदाय का जन्म हुआ।
2. ‘नख-शिख’ गोदना (Body Tattooing) की कूटनीति
जब दलितों को मंदिरों में प्रवेश करने से रोका गया, तो परसुराम और उनके साथियों ने एक अभूतपूर्व कूटनीतिक निर्णय लिया। उन्होंने तय किया कि वे अपने पूरे शरीर पर ही ‘राम’ का नाम गुदवा लेंगे।
इस अनूठी परंपरा के पीछे का दर्शन यह था कि ईश्वर केवल मंदिरों में या सवर्णों के पास नहीं रहता, बल्कि वह प्रत्येक मानव के भीतर और उसके रोम-रोम में वास करता है। इस प्रकार, जब पूरा शरीर ही ‘राम मंदिर’ बन गया, तो उन्हें किसी भी भौतिक मंदिर में प्रवेश करने की आवश्यकता ही नहीं रही।
रामनामी समाज के लोग मुख्य रूप से चार श्रेणियों में विभाजित होते हैं:
- नख-शिख रामनामी: जो अपने सिर से लेकर पैर के नाखूनों तक पूरे शरीर पर राम नाम का गोदना गुदवाते हैं।
- सर्वांग रामनामी: जो शरीर के अधिकांश महत्वपूर्ण हिस्सों पर राम नाम गुदवाते हैं।
- एकंग रामनामी: जो शरीर के किसी एक हिस्से (आमतौर पर माथे या छाती) पर राम नाम गुदवाते हैं।
- रामनामी: जो केवल राम नाम का जप करते हैं और रामनामी वस्त्र धारण करते हैं।
3. विशिष्ट वेशभूषा और जीवन शैली
इस संप्रदाय के लोग अत्यंत सादगीपूर्ण, अहिंसक और शाकाहारी जीवन जीते हैं। वे किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों और हिंसा से पूरी तरह दूर रहते हैं।
उनकी पारंपरिक वेशभूषा में ‘रामनामी ओढ़नी’ (जिस पर काले रंग से राम-राम छपा होता है), मयूरपंखों से सजा हुआ मुकुट, और करताल वाद्ययंत्र शामिल हैं। वे आपस में मिलने पर केवल ‘राम-राम’ कहकर एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं।
“72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary का यह राष्ट्रीय सम्मान केवल एक उत्कृष्ट फिल्म की सफलता नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के शोषित वर्गों द्वारा अपनी पहचान और अस्मिता की रक्षा के लिए किए गए सबसे सुंदर और अहिंसक आंदोलन का राष्ट्रीय अभिनंदन है।”— श्री राजेश अग्रवाल, संस्कृति मंत्री, छत्तीसगढ़ सरकार
फिल्म ‘राम-नामी’: भरतबाला गणपति का संवेदनशील निर्देशन
इस पुरस्कार विजेता वृत्तचित्र के निर्माण और इसके निर्देशक के विज़न का विश्लेषण कूटनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है:
1. भरतबाला गणपति का कूटनीतिक विज़न
भरतबाला भारतीय सिनेमा के एक प्रख्यात निर्देशक और निर्माता हैं, जो भारत की अनूठी भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधताओं को कैमरे के जरिए सहेजने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने ही भारत के प्रसिद्ध राष्ट्रभक्ति गीत ‘वंदे मातरम्’ (Maa Tujhe Salaam – ए. आर. रहमान के सहयोग से) के विजुअल्स का ऐतिहासिक निर्देशन किया था।
फिल्म ‘राम-नामी’ के माध्यम से उन्होंने बस्तर और छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाकों के ग्रामीण परिदृश्य के बीच रह रहे रामनामी समाज के अंतिम जीवित ‘नख-शिख’ बुजुर्गों की दैनिक दिनचर्या, उनके गीतों और उनके आंतरिक अध्यात्म को बड़े पर्दे पर उतारा है।
2. लुप्त होती विरासत का डिजिटल प्रलेखन
वर्तमान समय में, नई पीढ़ी के युवा समाज में भेदभाव कम होने और आधुनिक शिक्षा के कारण अपने चेहरे या पूरे शरीर पर ‘राम’ नाम गुदवाने से बच रहे हैं। ऐसे में यह वृत्तचित्र इस अनूठी परंपरा के अंतिम गवाहों का एक ऐतिहासिक डिजिटल दस्तावेज (Digital Archive) बन गया है, जिसे 72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary के रूप में चुनकर सम्मानित किया गया है।
राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक संवर्धन
संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के अनुसार, इस राष्ट्रीय सम्मान के बाद वैश्विक स्तर पर छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक पर्यटन (Cultural Tourism) को एक बड़ा संबल मिलेगा:
- वैश्विक शोधकर्ताओं का आकर्षण: इस पुरस्कार के बाद दुनिया भर के मानवशास्त्रियों (Anthropologists) और समाजशास्त्रियों की रुचि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक शासन व्यवस्था और लोक आस्थाओं में बढ़ेगी।
- पर्यटन का विस्तार: बस्तर और महानदी बेसिन के ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ रामनामी समाज के वार्षिक मेलों (जैसे बड़े भजन मेला) को देखने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का आगमन बढ़ेगा।
- सांस्कृतिक अस्मिता का पुनरुद्धार: यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ के स्थानीय कलाकारों और पारंपरिक बुनकरों (जो रामनामी शॉल बुनते हैं) को अपनी कला को व्यावसायिक रूप से बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करेगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष अनुभाग (Exam Relevance Section)
सीजीपीएससी (CGPSC) राज्य सेवा मुख्य परीक्षा के पेपर-VI (छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ, सामाजिक संरचना, कला और संस्कृति) और यूपीएससी (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-1 (आधुनिक भारतीय इतिहास और समाज सुधारक) के दृष्टिकोण से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
UPSC & CGPSC Prelims Fact Box: 72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary
- रामनामी संप्रदाय के प्रवर्तक: परसुराम (Parasuram), जिन्होंने 1890 के दशक में छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा क्षेत्र में इस सुधारवादी आंदोलन की शुरुआत की थी।
- रामनामी मेला (बड़े भजन मेला): प्रतिवर्ष पौष पूर्णिमा के अवसर पर छत्तीसगढ़ के महानदी के तट पर स्थित गांवों में इस विशाल धार्मिक मेले का आयोजन किया जाता है, जहाँ सभी रामनामी एकत्रित होकर भजन करते हैं।
- 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026 में घोषित देश के सर्वोच्च सिनेमाई पुरस्कार।
UPSC & CGPSC Mains Analysis (GS Paper I & VI: समाज सुधार एवं लोक कलाएं)
प्रश्न: “19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में छत्तीसगढ़ में जन्मा ‘रामनामी संप्रदाय’ केवल एक धार्मिक आंदोलन नहीं था, बल्कि यह सामाजिक असमानता और अस्पृश्यता के खिलाफ दलित चेतना का एक अनूठा अहिंसक और रचनात्मक प्रतिरोध था।” हाल ही में प्राप्त **72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary** के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर की रूपरेखा:
- प्रस्तावना: 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में छत्तीसगढ़ की रामनामी परंपरा पर आधारित फिल्म ‘राम-नामी’ को 72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary का सर्वोच्च सम्मान मिलने की पृष्ठभूमि से उत्तर प्रारंभ करें।
- सामाजिक प्रतिरोध के रूप में संप्रदाय का जन्म:
- मंदिर प्रवेश निषेध का रचनात्मक उत्तर: जब दलितों को भौतिक मंदिरों में प्रवेश से रोका गया, तो उन्होंने अपने पूरे शरीर पर राम का नाम गुदवाकर (Nakh-Shikh) अपने ही शरीर को ‘जीवंत मंदिर’ घोषित कर दिया। यह अस्पृश्यता के खिलाफ सामाजिक समानता की एक मूक घोषणा थी।
- सगुण और निर्गुण भक्ति का समन्वय: रामनामी समाज मूर्तिपूजा और ब्राह्मणवादी अनुष्ठानों का विरोध करता है। वे केवल कबीरदास की तरह ‘राम नाम’ के निर्गुण स्वरूप का जप करते हैं, जो सामाजिक समरसता (Social Harmony) को बढ़ावा देता है।
- नवाचार और सिनेमाई दस्तावेजीकरण (राम-नामी फिल्म): प्रख्यात निर्देशक भरतबाला द्वारा इस लुप्त होती समृद्ध विरासत का संवेदनशील फिल्मांकन करना। यह वर्तमान पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और कड़े सामाजिक संघर्षों के इतिहास से जोड़ने का कार्य करता है।
- प्रशासनिक और सांस्कृतिक संवर्धन की आवश्यकता: इस राष्ट्रीय पुरस्कार के बाद छत्तीसगढ़ सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा इस संप्रदाय के अंतिम बुजुर्गों के संरक्षण, उनके पारंपरिक बुनकरों को वित्तीय सहायता, और राज्योत्सव के माध्यम से इस लोक विरासत के संवर्धन के प्रयासों को तेज करने की आवश्यकता को स्पष्ट करें।
- निष्कर्ष: यह निष्कर्ष दें कि रामनामी संप्रदाय का यह अहिंसक इतिहास भारत के सुशासन और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का एक जीवंत उदाहरण है, जिसे यह राष्ट्रीय पुरस्कार एक वैश्विक पहचान प्रदान करता है।
संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)
छत्तीसगढ़ के सामाजिक आंदोलनों और लोक परंपराओं से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक तथ्य जो परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं:
- सतनाम पंथ और गुरु घासीदास (1756-1850): रामनामी संप्रदाय की तरह ही, छत्तीसगढ़ में सामाजिक समानता और अस्पृश्यता के अंत के लिए 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पूज्य गुरु घासीदास जी ने ‘सतनाम पंथ’ (Satnam Panth) की स्थापना की थी। उन्होंने ‘मनखे-मनखे एक समान’ (सभी मनुष्य समान हैं) का अमर संदेश दिया था। रामनामी समाज का आंदोलन काफी हद तक सतनामी चेतना से भी प्रभावित रहा है।
- छत्तीसगढ़ की प्रमुख लोक चित्रकला और गोदना शिल्पकला:
- गोदना (Tattooing): छत्तीसगढ़ की आदिम जनजातियों (विशेषकर बैगा और ओझा) में गोदना शरीर के अलंकरण और सामाजिक पहचान का एक अनिवार्य हिस्सा है। बैगा जनजाति को विश्व की सबसे अधिक गोदना प्रिय जनजाति माना जाता है। लेकिन रामनामी समाज ने इस पारंपरिक अलंकरण विधा को एक ‘धार्मिक और सामाजिक प्रतिरोध’ का रूप दिया।
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का इतिहास: इन पुरस्कारों की स्थापना वर्ष 1954 में ‘राजकीय फिल्म पुरस्कार’ के रूप में की गई थी, जिसका उद्देश्य भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने वाले सर्वश्रेष्ठ सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करना है। वर्तमान में यह सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जाता है।
एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)
त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए 72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:
- National Victory: 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में छत्तीसगढ़ की रामनामी परंपरा पर आधारित फिल्म ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री घोषित किया गया।
- Creative Director: इस फिल्म का संवेदनशील निर्देशन देश के प्रख्यात फिल्मकार श्री भरतबाला गणपति द्वारा किया गया है।
- Sociological Origin: रामनामी संप्रदाय की स्थापना 1890 के दशक में परसुराम द्वारा जांजगीर-चांपा क्षेत्र में छुआछूत के अहिंसक विरोध के रूप में की गई थी।
- Unique Tradition: इस समाज के लोग अपने पूरे शरीर पर राम नाम का गोदना (Tattoo) गुदवाते हैं, मोरपंख का मुकुट पहनते हैं और करताल बजाते हुए भजन करते हैं।
- Cultural Boost: इस सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन (Cultural Tourism) को वैश्विक स्तर पर नई प्रतिष्ठा मिलेगी।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और सांस्कृतिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में घोषित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में किस छत्तीसगढ़ी लोक परंपरा पर आधारित फिल्म ‘राम-नामी’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री (72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary) का सर्वोच्च सम्मान मिला है?
(A) बस्तर की डोकरा कला परंपरा
(B) छत्तीसगढ़ के रामनामी समाज की गोदना और भजन परंपरा
(C) अचानकमार के बैगा आदिवासियों की जीवन शैली
(D) सरगुजा के कर्मा और सुआ नृत्य की लोक कला
उत्तर: (B) छत्तीसगढ़ के रामनामी समाज की गोदना और भजन परंपरा
व्याख्या: 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में छत्तीसगढ़ के रामनामी संप्रदाय के ऐतिहासिक संघर्ष और उनकी अनूठी नख-शिख राम नाम गोदना परंपरा पर बनी फिल्म ‘राम-नामी’ को देश की सर्वश्रेष्ठ नॉन-फीचर वृत्तचित्र घोषित किया गया है।
प्रश्न 2: सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म श्रेणी के तहत राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली इस प्रसिद्ध डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ का निर्देशन किसके द्वारा किया गया है?
(A) हबीब तनवीर
(B) श्री भरतबाला गणपति (Bharatbala)
(C) अनुज शर्मा
(D) सत्यजीत रे
उत्तर: (B) श्री भरतबाला गणपति (Bharatbala)
व्याख्या: इस ऐतिहासिक वृत्तचित्र का संवेदनशील निर्देशन भारत के प्रख्यात और अनुभवी फिल्मकार भरतबाला गणपति द्वारा किया गया है, जिन्होंने पूर्व में ‘वंदे मातरम्’ संगीत वीडियो का भी निर्देशन किया था।
प्रश्न 3: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा क्षेत्र में 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध (लगभग 1890 के दशक) में अस्पृश्यता के अहिंसक विरोध के रूप में ‘रामनामी संप्रदाय’ की स्थापना का श्रेय किसे दिया जाता है?
(A) पूज्य गुरु घासीदास जी
(B) महात्मा परसुराम (Parasuram)
(C) धनीराम शास्त्री
(D) बालकदास जी
उत्तर: (B) महात्मा परसुराम (Parasuram)
व्याख्या: रामनामी संप्रदाय की स्थापना का ऐतिहासिक श्रेय महात्मा परसुराम को दिया जाता है, जिन्होंने जांजगीर-चांपा के चारपारा गाँव से इस महान सुधारवादी आंदोलन की शुरुआत की थी।
प्रश्न 4: रामनामी संप्रदाय के लोगों द्वारा धारण की जाने वाली उस वेशभूषा या वस्त्र को क्या कहा जाता है जिस पर काले रंग से राम-राम अंकित होता है?
(A) रामनामी ओढ़नी (Ramnami Odhni)
(B) पीतांबर चादर
(C) कबीर पंथी कुर्ता
(D) सतनामी साफ़ा
उत्तर: (A) रामनामी ओढ़नी (Ramnami Odhni)
व्याख्या: इस संप्रदाय के लोग सादगीपूर्ण जीवन जीते हुए अपने शरीर पर राम नाम अंकित कराते हैं और ‘रामनामी ओढ़नी’ धारण करते हैं। साथ ही वे मयूरपंखों से बना मुकुट पहनते हैं।
प्रश्न 5: प्रतिवर्ष ‘पौष पूर्णिमा’ के अवसर पर छत्तीसगढ़ के महानदी के तटवर्ती गांवों में आयोजित होने वाले रामनामी समाज के सबसे बड़े वार्षिक एकत्रीकरण और भजन उत्सव को क्या कहा जाता है?
(A) सिरपुर महोत्सव
(B) बड़े भजन मेला (Bade Bhajan Mela)
(C) चक्रधर समारोह
(D) राजीव लोचन मेला
उत्तर: (B) बड़े भजन मेला (Bade Bhajan Mela)
व्याख्या: प्रतिवर्ष पौष पूर्णिमा के अवसर पर छत्तीसगढ़ में महानदी के तट पर स्थित गांवों में ‘बड़े भजन मेला’ का आयोजन किया जाता है, जहां पूरे राज्य से हजारों रामनामी आकर सामूहिक भजन और कूटनीतिक संवाद आयोजित करते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. 72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary क्या है?
72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा घोषित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के तहत छत्तीसगढ़ की रामनामी परंपरा पर आधारित फिल्म ‘राम-नामी’ को दिया गया देश की सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर (डॉक्यूमेंट्री) फिल्म का सर्वोच्च सम्मान है।
Q2. रामनामी संप्रदाय (Ramnami Sect) का क्या ऐतिहासिक महत्व है?
रामनामी संप्रदाय की स्थापना 1890 के दशक में परसुराम द्वारा जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़ में की गई थी। यह तत्कालीन हिंदू समाज में व्याप्त अस्पृश्यता और मंदिर प्रवेश निषेध के खिलाफ दलितों का एक अनूठा अहिंसक और रचनात्मक आंदोलन था, जिसके तहत उन्होंने अपने पूरे शरीर पर ‘राम’ नाम का गोदना गुदवाकर अपने शरीर को ही ‘जीवंत मंदिर’ घोषित कर दिया था।
Q3. इस राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म ‘राम-नामी’ के निर्देशक कौन हैं?
इस वृत्तचित्र का संवेदनशील और उत्कृष्ट निर्देशन भारत के प्रख्यात कूटनीतिक फिल्मकार श्री भरतबाला गणपति (Bharatbala) द्वारा किया गया है, जो पूर्व में ‘वंदे मातरम्’ संगीत वीडियो के निर्देशन के लिए भी प्रसिद्ध हैं।
Q4. ‘नख-शिख’ रामनामी क्या होते हैं?
नख-शिख रामनामी वे भक्त होते हैं जो अपने सिर की चोटी से लेकर पैरों के नाखूनों तक पूरे शरीर के रोम-रोम पर काले रंग की स्याही से ‘राम’ नाम का गोदना गुदवाते हैं। यह इस संप्रदाय की सबसे कठिन और सर्वोच्च भक्ति व सामाजिक समर्पण की स्थिति मानी जाती है।
Q5. इस राष्ट्रीय पुरस्कार से छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक विकास को क्या लाभ होगा?
इस सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन (Cultural Tourism) को वैश्विक स्तर पर नई प्रतिष्ठा मिलेगी। यह विश्व भर के मानवशास्त्रियों और शोधकर्ताओं को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित करेगा, जिससे राज्य के पारंपरिक बुनकरों और हस्तशिल्पियों को भी बड़ा आर्थिक मंच प्राप्त होगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में छत्तीसगढ़ की रामनामी परंपरा पर आधारित वृत्तचित्र को मिला यह सर्वोच्च सम्मान 72nd National Film Awards Ram-Nami Best Documentary छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, अध्यात्म और ऐतिहासिक सामाजिक न्याय के संघर्ष की एक वैश्विक कूटनीतिक विजय है। परसुराम जी के विज़न से उपजा यह अनूठा आंदोलन यह सिद्ध करता है कि बड़े सामाजिक सुधारों के लिए हथियारों या हिंसा की नहीं, बल्कि ‘रोम-रोम में राम’ जैसी एक मूक और अजेय रचनात्मक चेतना की आवश्यकता होती है।
प्रख्यात फिल्मकार भरतबाला के संवेदनशील निर्देशन ने न केवल इस लुप्त होती अनूठी विरासत को बड़े पर्दे पर सहेजने का कार्य किया है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास और कड़े सामाजिक संघर्षों के प्रति स्वाभिमान से भर देगा। छत्तीसगढ़ सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा इस संप्रदाय के संरक्षण और संवर्धन के प्रयास आने वाले समय में राज्य के ‘सांस्कृतिक पर्यटन’ (Cultural Tourism) को एक नई ऊँचाई प्रदान करेंगे। यह राष्ट्रीय पुरस्कार अंततः यह संदेश देता है कि सुशासन और सामाजिक न्याय (Social Justice) के जिन सिद्धांतों पर आज हमारे लोकतांत्रिक भारत की नींव खड़ी है, उनके असली प्रणेता हमारे ग्रामीण अंचलों के वे साधारण आदिवासी और सीमांत समाज के लोग हैं जिन्होंने सदियों पूर्व समरसता और समानता का यह स्वर्णिम मार्ग प्रशस्त किया था।
Official Sources:
- Public Relations Department, Government of Chhattisgarh (DPRCG) (https://dprcg.gov.in)