By: Ishan Verma (Founder & Editor, TheExamHub.in)
नई दिल्ली | 6 जून
Digital India Bhashini Kathmandu University MoU: डिजिटल इंडिया और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत और पड़ोसी देश नेपाल के संबंधों को एक नई ऊंचाई मिली है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत आने वाले ‘डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन’ (DIBD) ने नेपाल के काठमांडू विश्वविद्यालय के ‘सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (DPI-AI) के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच भाषा एआई (Language AI), बहुभाषी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और समावेशी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। इस साझेदारी के जरिए नेपाल के लिए ‘वॉयस फर्स्ट’ (आवाज आधारित) बहुभाषी अनुवाद मंच विकसित किया जाएगा।
🗣️ ‘वॉयस फर्स्ट’ भाषा अनुवाद मंच का होगा सह-निर्माण
यह समझौता केवल एक तकनीकी साझेदारी नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य भाषा, साक्षरता और डिजिटल बाधाओं को दूर करके दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. भाषा एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास
दोनों संस्थान मिलकर नेपाली भाषा के उच्च-गुणवत्ता वाले डेटासेट, स्पीच कॉर्पोरा और बहुभाषी एआई संसाधनों का विकास करेंगे। इसमें स्पीच-टू-टेक्स्ट (Speech-to-Text), टेक्स्ट-टू-स्पीच (Text-to-Speech), मशीन ट्रांसलेशन (Machine Translation) और बहुभाषी संवादात्मक एआई (Conversational AI) क्षमताओं का निर्माण शामिल है।
2. दुर्लभ भाषाओं का संरक्षण और डिजिटलीकरण
यह साझेदारी भारत-नेपाल क्षेत्र की कम संसाधन वाली और विलुप्त होने के कगार पर खड़ी भाषाओं के संरक्षण और डिजिटलीकरण का समर्थन करेगी। इसके जरिए ऐसी भाषाओं से जुड़े समुदायों को उनकी मातृभाषा में एआई-सक्षम टूल और सेवाएं प्रदान की जा सकेंगी।
3. अंतिम छोर तक सरकारी सेवाओं की पहुंच
भाषिणी के खुले और इंटरऑपरेबल भाषा प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से, यह सहयोग नेपाल सरकार को अपनी डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं को नागरिकों की पसंदीदा भाषा में पहुंचाने में सहायता करेगा, जिससे साक्षरता और डिजिटल पहुंच की बाधाएं कम होंगी।

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🤝 एस. जयशंकर और शिशिर खनाल की गरिमामयी उपस्थिति
इस ऐतिहासिक समझौते पर डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के सीईओ श्री अमिताभ नाग और काठमांडू विश्वविद्यालय के एसोसिएट डीन प्रो. बाल कृष्ण बाल ने हस्ताक्षर किए।
यह आदान-प्रदान नई दिल्ली में चल रही द्विपक्षीय बैठकों के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और नेपाल के विदेश मंत्री श्री शिशिर खनाल की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। यह दोनों देशों द्वारा उभरती प्रौद्योगिकियों और समावेशी डिजिटल परिवर्तन के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
🤖 क्या है डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (DIBD)?
डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC) के तहत भाषिणी डिवीजन भारत की एक राष्ट्रीय पहल है, जो एआई-संचालित बहुभाषी डिजिटल समावेशन पर काम कर रही है:
- क्षमता: यह प्लेटफॉर्म वर्तमान में 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को शक्ति प्रदान करता है और प्रतिदिन 15 मिलियन (1.5 करोड़) से अधिक अनुवादों को प्रोसेस करता है।
- भाषा समर्थन: भाषिणी वर्तमान में 36 भारतीय लिखित भाषाओं, 23 भारतीय आवाज (Voice) भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करती है।

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आगामी यूपीएससी, पीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इस समझौते से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण शॉर्ट नोट्स:
- समझौते का नाम: डिजिटल इंडिया भाषिणी और काठमांडू विश्वविद्यालय के बीच समझौता (MoU)।
- हस्ताक्षरकर्ता: श्री अमिताभ नाग (सीईओ, DIBD) और प्रो. बाल कृष्ण बाल (एसोसिएट डीन, काठमांडू यूनिवर्सिटी)।
- उपस्थित मुख्य मंत्री: डॉ. एस. जयशंकर (भारत के विदेश मंत्री) और श्री शिशिर खनाल (नेपाल के विदेश मंत्री)।
- मुख्य उद्देश्य: नेपाल के लिए ‘वॉयस फर्स्ट’ भाषा अनुवाद मंच और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास करना।
- तकनीकी क्षेत्र: नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP), बहुभाषी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन ट्रांसलेशन।
- भाषिणी का नोडल मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार।
FAQs
प्रश्न 1: भाषिणी डिवीजन और काठमांडू विश्वविद्यालय के बीच हुए इस समझौते (MoU) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच भाषा एआई, मशीन अनुवाद और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को मजबूत करना है, जिसके तहत नेपाल के लिए ‘वॉयस फर्स्ट’ बहुभाषी अनुवाद मंच सह-विकसित किया जाएगा।
प्रश्न 2: डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (DIBD) वर्तमान में कितनी भाषाओं का समर्थन करता है?
उत्तर: भाषिणी वर्तमान में 36 भारतीय लिखित भाषाओं, 23 भारतीय आवाज आधारित भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करती है, और प्रतिदिन 1.5 करोड़ से अधिक अनुवाद प्रोसेस करती है।
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