Published on July 13, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-हाथी संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए आधुनिक तकनीक की दिशा में एक क्रांतिकारी शुरुआत की गई है। राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट निगरानी प्रणाली का परीक्षण प्रारंभ किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance का नाम दिया गया है, जो वनों के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में चौबीसों घंटे वास्तविक समय (Real-time) में नजर रखने वाली मध्य भारत की सबसे बड़ी तकनीक-संचालित वन सुरक्षा पहल है।
यह अभिनव सर्विलांस सिस्टम कंप्यूटर विज़न (Computer Vision) और मशीन लर्निंग (Machine Learning) तकनीकों से लैस है, जो सामान्य सीसीटीवी कैमरों की तुलना में कहीं अधिक उन्नत और सक्रिय सुरक्षा समाधान प्रदान करता है। इस प्रणाली के क्रियान्वयन के लिए ओडिशा सीमा से लगे अत्यंत संवेदनशील रेंजों में 70 से 80 फीट ऊंचे टावरों पर एआई कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance सुशासन, प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग (GS Paper III) और छत्तीसगढ़ के पर्यावरण व भूगोल (GS Paper V) के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस एआई-आधारित निगरानी प्रणाली की कार्यप्रणाली, संवेदनशील रेंजों की सुरक्षा चुनौतियों, वन्यजीवों पर इसके प्रभाव और परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण आयामों का गहराई से अध्ययन करेंगे।
Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू की गई इस एआई-आधारित स्मार्ट सर्विलांस प्रणाली की प्रमुख विशेषताओं को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेपित किया गया है:
| महत्वपूर्ण क्षेत्र | Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance के मुख्य तथ्य |
|---|---|
| परियोजना का नाम | उदंती-सीतानदी एआई-आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम |
| मुख्य तकनीक | कंप्यूटर विज़न, मशीन लर्निंग और पीयर-टू-पीयर (P2P) वायरलेस तकनीक |
| शुरुआती परीक्षण क्षेत्र | कुल्हाडीघाट, इंदागांव, रिसगांव, दक्षिण उदंती और पायलीखण्ड उत्तर उदंती रेंज |
| लक्षित वन्यजीव | एशियाई हाथी, बाघ, तेंदुआ, भालू और अन्य दुर्लभ वन्यजीव |
| अलर्ट भेजने का माध्यम | व्हाट्सएप (WhatsApp) के जरिए फ्रंटलाइन वन कर्मियों को त्वरित अलर्ट प्रेषण |
| नेटवर्क रेंज और ढांचा | मैनपुर क्षेत्र से 15-20 किमी दूर एंटी-पोचिंग कैंपों तक 4G/5G वायरलेस कनेक्टिविटी |
| प्रति टावर स्थापना लागत | लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये (सस्ती और पोर्टेबल संरचना) |
| प्रशासनिक नेतृत्व | श्री अरुण पांडेय (वन बल प्रमुख), श्री ओम प्रकाश यादव (PCCF वन्यजीव), श्री गुरुनाथन एन.जी. (क्षेत्र संचालक) |
Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance क्या है?
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की सीमाएं पड़ोसी राज्य ओडिशा से सटी हुई हैं। यह भौगोलिक निकटता इस संरक्षित वन क्षेत्र को तस्करों, शिकारियों और अवैध अतिक्रमणकारियों के लिए काफी संवेदनशील बनाती है। वन विभाग के पास सीमित मैदानी कर्मचारियों (Staff Shortage) की चुनौती के बीच पूरे बफर और कोर जोन की निगरानी करना अत्यंत कठिन था। इसी समस्या के वैज्ञानिक और स्थायी समाधान के रूप में Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance परियोजना को लॉन्च किया गया है।
यह प्रणाली पारंपरिक कैमरों की तरह केवल वीडियो रिकॉर्ड नहीं करती, बल्कि इसके एआई सेंसर वास्तविक समय में वीडियो फुटेज का विश्लेषण करते हैं। जैसे ही कोई मानव (शिकारी, लकड़ी तस्कर) या लक्षित वन्यजीव (हाथी, बाघ) कैमरे की जद में आता है, सिस्टम तुरंत उसकी पहचान कर उसकी तस्वीर, समय और स्थान की जानकारी सीधे वन अधिकारियों के व्हाट्सएप पर भेज देता है, जिससे त्वरित कार्रवाई (Quick Response) संभव होती है।
स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम की कार्यप्रणाली और तकनीकी आयाम
इस आधुनिक प्रणाली को सुदूर और बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले जंगलों में संचालित करने के लिए बेहद नवीन वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग किया गया है:
1. पीयर-टू-पीयर (P2P) वायरलेस नेटवर्क और कनेक्टिविटी
घने जंगलों में इंटरनेट सिग्नल न होना हमेशा से एक बड़ी बाधा रहा है। इस परियोजना के तहत पीयर-टू-पीयर (Peer-to-Peer) तकनीक का उपयोग किया गया है। इसके माध्यम से मैनपुर क्षेत्र में उपलब्ध 4G और 5G नेटवर्क सिग्नलों को एंटीना और रिसीवरों की मदद से 15 से 20 किलोमीटर दूर गहरे जंगलों में स्थित एंटी-पोचिंग कैंपों और वन चौकियों तक पहुंचाया गया है। इससे बिना किसी केबल बिछाए निर्बाध वीडियो स्ट्रीमिंग संभव हो सकी है।
2. स्वतः प्रजाति पहचान (Automated Species Recognition)
Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance के कैमरे मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग करते हैं। ये कैमरे एशियाई हाथियों के झुंडों, बाघ, तेंदुए और भालू जैसे जीवों के शारीरिक ढांचों की पहचान कर उन्हें स्वतः वर्गीकृत कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति लकड़ी काटने वाली कुल्हाड़ी, आरी या बंदूक लेकर चलता है, तो कैमरा उसकी मानव गतिविधि का पता लगाकर तुरंत ‘संदिग्ध प्रवेश’ (Intrusion Alert) का मैसेज भेजता है।
3. पोर्टेबल और किफायती बुनियादी ढांचा
यह पूरा सिस्टम पोर्टेबल है। इसे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है, जो हाथियों के माइग्रेशन रूट (आवागमन गलियारे) के बदलने पर बेहद उपयोगी साबित होगा। प्रत्येक टावर, सौर ऊर्जा पैनल, P2P एंटीना और कैमरे की स्थापना की कुल लागत केवल 2.5 से 3 लाख रुपये है, जो इसे बेहद लागत-प्रभावी बनाता है।
“सीमित मानव संसाधन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance प्रणाली हमारे फ्रंटलाइन वन कर्मियों के लिए एक ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ (Force Multiplier) के रूप में काम करेगी। यह मध्य भारत में एआई तकनीक का सबसे उन्नत प्रयोग है।”— वन बल प्रमुख, श्री अरुण पांडेय
मानव-हाथी संघर्ष और वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी रोक
उदंती-सीतानदी क्षेत्र में इस एआई तकनीक का परीक्षण मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में किया जा रहा है जहां संघर्ष और अपराध की दर सबसे अधिक है:
- संवेदनशील रेंजों का कवरेज: प्रारंभिक परीक्षण ओडिशा सीमा से लगे कुल्हाडीघाट (Kulhadighat), इंदागांव (Indagaon), रिसगांव (Risgaon), दक्षिण उदंती और पायलीखण्ड उत्तर उदंती रेंजों में किया जा रहा है।
- मानव-हाथी द्वंद्व का समाधान: ओडिशा से आने वाले जंगली हाथियों के दल अक्सर गांवों में घुसकर फसलों और घरों को भारी नुकसान पहुँचाते हैं। Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance के माध्यम से हाथियों के गांवों की ओर बढ़ने पर ग्रामीणों को पहले ही अलर्ट जारी किया जा सकेगा, जिससे जन-धन की हानि रोकी जा सकेगी।
- मूल्यवान सागौन और वन्यजीव तस्करी पर रोक: कुल्हाडीघाट और रिसगांव क्षेत्र सागौन (Teak) की लकड़ी की तस्करी और दुर्लभ वन्यजीवों के अंगों के अवैध व्यापार के लिए जाने जाते हैं। चौबीसों घंटे की डिजिटल गश्ती से इन अपराधों पर पूरी तरह नकेल कसी जा सकेगी।
उदंती-सीतानदी का समृद्ध जैविक दस्तावेजीकरण (Ecology of US TR)
बेहतर वन संरक्षण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के कारण इस रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों में कई दुर्लभ और संकटापन्न प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई है। इनमें राजकीय पशु वनभैंसा (Wild Water Buffalo – Bubalus arnee), मालाबार पाइड हॉर्नबिल, उड़न गिलहरी (Flying Squirrel), ऊदबिलाव (Otter), और ट्राइकारिनेट हिल टर्टल (Tricarinate Hill Turtle) जैसे दुर्लभ जीव शामिल हैं, जिन्हें Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance के माध्यम से और अधिक वैज्ञानिक सुरक्षा मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में वनों का संरक्षण और ऐतिहासिक प्रयास
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व पिछले कुछ वर्षों से अतिक्रमणकारियों और शिकारियों के खिलाफ एक सख्त अभियान चला रहा है:
- अतिक्रमण मुक्ति अभियान: रिजर्व ने पिछले चार वर्षों के दौरान रिकॉर्ड 956 हेक्टेयर वन भूमि को अवैध अतिक्रमण से पूरी तरह मुक्त कराया है।
- अपराधियों की धरपकड़: इस अवधि में वन्यजीवों का अवैध शिकार करने वाले और बेशकीमती वनोपजों की तस्करी करने वाले 500 से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
- भू-स्थानिक तकनीकों का समन्वय: यह रिजर्व पहले से ही थर्मल ड्रोन (Thermal Drones), उपग्रह चित्रों और गूगल अर्थ इंजन आधारित भू-स्थानिक विश्लेषण तकनीकों का उपयोग कर रहा है। नए एआई नेटवर्क के जुड़ने से यह देश का सबसे आधुनिक डिजिटल सुरक्षा ग्रिड बन चुका है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष विश्लेषण (Exam Relevance Section)
सीजीपीएससी (CGPSC) और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सामान्य अध्ययन के पेपर-V (छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण्य) और सामान्य अध्ययन के पेपर-III (विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संरक्षण) के दृष्टिकोण से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
CGPSC & UPSC Prelims Fact Box: Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance
- उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व: यह छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और धमतरी जिलों में स्थित है। इसकी स्थापना वर्ष 2008-09 में उदंती वन्यजीव अभ्यारण्य (स्थापना 1983) और सीतानदी वन्यजीव अभ्यारण्य (स्थापना 1974) को मिलाकर की गई थी।
- वनभैंसा (Wild Water Buffalo): छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु, जिसका अंतिम प्राकृतिक आवास उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में स्थित है। इसके संरक्षण के लिए यहाँ विशेष ब्रीडिंग सेंटर चलाया जा रहा है।
- कंप्यूटर विज़न (Computer Vision): कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का वह क्षेत्र जो कंप्यूटरों को डिजिटल छवियों और वीडियो से सार्थक जानकारी प्राप्त करने और उन पर त्वरित निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।
UPSC & CGPSC Mains Analysis (GS Paper III: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पर्यावरण)
प्रश्न: “सीमित मानव संसाधन और कठिन भौगोलिक सीमाओं के बीच, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल वायरलेस प्रौद्योगिकियां वनों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्षों को सुलझाने में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं।” छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के हालिया एआई परीक्षण के विशेष संदर्भ में इस कथन की समालोचनात्मक विवेचना कीजिए।
उत्तर की रूपरेखा:
- प्रस्तावना: गरियाबंद के उदंती-सीतानदी में शुरू की गई Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance परियोजना और वन सुरक्षा में इसकी प्रासंगिकता से उत्तर प्रारंभ करें।
- पारंपरिक वन गश्ती की सीमाएं: वन रक्षकों के रिक्त पदों की समस्या, दुर्गम और नदी-नालों से घिरे पहाड़ी क्षेत्रों में गश्त की भौतिक सीमाएं, और ओडिशा सीमा के निकट अंतर-राज्यीय तस्करों द्वारा की जाने वाली त्वरित अवैध गतिविधियां।
- एआई आधारित स्मार्ट सर्विलांस की कार्यप्रणाली और लाभ:
- सक्रिय सुरक्षा (Proactive Security): निष्क्रिय सीसीटीवी के विपरीत स्वतः प्रजाति पहचान (बाघ, हाथी) और व्हाट्सएप पर रियल-टाइम संदेश प्रेषण।
- नेटवर्क समावेशन: पीयर-टू-पीयर तकनीक के माध्यम से 15-20 किमी दूर वनों तक 4G/5G इंटरनेट पहुँचाना, जो पेपरलेस प्रशासनिक कार्य को भी आसान बनाता है।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष का शमन: हाथियों की आवाजाही को पहले से ट्रैक कर बस्तियों के लोगों को समय पर सचेत करना।
- चुनौतियां और व्यावहारिक समस्याएं: घने वन आवरण (Canopy Cover) के कारण कैमरों के विज़न का बाधित होना, बारिश और तूफान के समय उपकरणों और सौर पैनलों की सुरक्षा, और हैकिंग या साइबर घुसपैठ की संभावनाओं से डेटा को बचाना।
- निष्कर्ष: यह निष्कर्ष दें कि यह पहल यह सिद्ध करती है कि छत्तीसगढ़ सुशासन और पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने में देश का एक मार्गदर्शक राज्य बन चुका है, जिसका क्रियान्वयन पूरे देश के संरक्षित क्षेत्रों के लिए एक टिकाऊ मॉडल बनेगा।
संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)
छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय उद्यानों और अभ्यारण्यों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक तथ्य जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:
- गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान (Guru Ghasidas National Park): छत्तीसगढ़ के कोरिया और सूरजपुर जिलों में स्थित राज्य का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान, जिसे हाल ही में देश के 53वें टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
- इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान (Indravati National Park): बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में स्थित छत्तीसगढ़ का पहला राष्ट्रीय उद्यान (स्थापना 1981) और एकमात्र प्रोजेक्ट टाइगर के तहत शामिल राष्ट्रीय उद्यान, जिसका नाम इंद्रावती नदी के नाम पर रखा गया है।
- कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Kanger Valley National Park): बस्तर जिले में स्थित देश का सबसे छोटा और जैव विविधता से समृद्ध राष्ट्रीय उद्यान, जो अपनी ‘कुटुम्बसर गुफाओं’ (Kutumsar Caves) और पहाड़ी मैना (राजकीय पक्षी) के प्राकृतिक आवास के लिए प्रसिद्ध है।
एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)
त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:
- Tech Landmark: छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में एआई (AI) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ऐतिहासिक ट्रायल शुरू किया गया।
- Active Security: यह प्रणाली कंप्यूटर विज़न और मशीन लर्निंग के माध्यम से हाथियों, बाघों और अवैध तस्करों की स्वतः पहचान कर तुरंत व्हाट्सएप पर अलर्ट भेजती है।
- P2P Wireless: पीयर-टू-पीयर तकनीक से मैनपुर के 4G/5G सिग्नल को 15 से 20 किमी दूर घने वनों की चौकियों तक वायरलेस तरीके से पहुँचाया गया है।
- Sensitive Areas: इस प्रणाली का शुरुआती ट्रायल ओडिशा सीमा से लगे कुल्हाडीघाट, इंदागांव, रिसगांव और दक्षिण उदंती रेंजों में किया जा रहा है।
- Ecolgical Success: इस तकनीकी निगरानी से वनभैंसा, मालाबार पाइड हॉर्नबिल और उड़न गिलहरी जैसी दुर्लभ प्रजातियों का बेहतर संरक्षण संभव होगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और पर्यावरण विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में छत्तीसगढ़ के किस टाइगर रिजर्व में वन और वन्यजीवों की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए एआई (AI) आधारित स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम का ट्रायल शुरू किया गया है?
(A) इंद्रावती टाइगर रिजर्व
(B) अचानकमार टाइगर रिजर्व
(C) उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व
(D) गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान
उत्तर: (C) उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व
व्याख्या: वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ करने के लिए गरियाबंद-धमतरी जिले में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में एआई आधारित स्मार्ट सर्विलांस का ऐतिहासिक परीक्षण शुरू किया गया है।
प्रश्न 2: ‘Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance’ प्रणाली के तहत, दूरस्थ वनों में इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुँचाने के लिए किस उन्नत वायरलेस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है?
(A) सैटेलाइट केबलिंग तकनीक
(B) पीयर-टू-पीयर (P2P) वायरलेस तकनीक
(C) ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) तकनीक
(D) केवल ब्लूटूथ लॉन्ग रेंज तकनीक
उत्तर: (B) पीयर-टू-पीयर (P2P) वायरलेस तकनीक
व्याख्या: इस परियोजना के तहत P2P तकनीक का उपयोग करके मैनपुर क्षेत्र के 4G/5G सिग्नल को बिना किसी केबल के 15 से 20 किमी दूर घने जंगलों में स्थित एंटी-पोचिंग कैंपों तक पहुंचाया गया है।
प्रश्न 3: उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ के किन दो जिलों के भौगोलिक सीमाओं के अंतर्गत विस्तृत है?
(A) रायपुर और दुर्ग
(B) गरियाबंद और धमतरी
(C) बिलासपुर और कोरबा
(D) बस्तर और बीजापुर
उत्तर: (B) गरियाबंद और धमतरी
व्याख्या: उदंती अभ्यारण्य मुख्य रूप से गरियाबंद जिले में और सीतानदी अभ्यारण्य धमतरी जिले में स्थित है। इन दोनों को मिलाकर वर्ष 2008-09 में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था।
प्रश्न 4: छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु ‘वनभैंसा’ (Wild Water Buffalo) का अंतिम बचा हुआ प्राकृतिक आवास निम्नलिखित में से कौन सा संरक्षित क्षेत्र माना जाता है?
(A) अचानकमार अभ्यारण्य
(B) उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व
(C) भोरमदेव अभ्यारण्य
(D) सेमरसोत अभ्यारण्य
उत्तर: (B) उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व
व्याख्या: संकटापन्न राजकीय पशु वनभैंसा का अंतिम शुद्ध आनुवंशिक प्राकृतिक आवास उदंती-सीतानदी रिजर्व है, जहाँ इसके संरक्षण और कृत्रिम ब्रीडिंग के लिए विशेष केंद्र संचालित है।
प्रश्न 5: ‘Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance’ प्रणाली के तहत किसी वन्यजीव या तस्कर की पहचान होने पर वन कर्मियों को अलर्ट किस डिजिटल माध्यम से तुरंत भेजा जाता है?
(A) ईमेल (Email) के माध्यम से
(B) व्हाट्सएप (WhatsApp) संदेश के माध्यम से
(C) केवल डाक के माध्यम से
(D) समाचार पत्रों के विज्ञापनों द्वारा
उत्तर: (B) व्हाट्सएप (WhatsApp) संदेश के माध्यम से
व्याख्या: जैसे ही एआई कैमरे किसी संदिग्ध गतिविधि या वन्यजीव को ट्रैक करते हैं, वे बिना किसी देरी के सीधे फ्रंटलाइन वन कर्मियों और बीट गार्डों के व्हाट्सएप नंबरों पर फोटो और जीपीएस लोकेशन भेज देते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance परियोजना क्या है?
Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू की गई एक अत्याधुनिक वन सुरक्षा पहल है। इसके तहत घने और दुर्गम जंगलों में कंप्यूटर विज़न और मशीन लर्निंग आधारित कैमरे लगाए गए हैं जो वन्यजीवों और तस्करों की स्वतः पहचान कर तुरंत अधिकारियों को अलर्ट भेजते हैं।
Q2. यह एआई-आधारित कैमरा सामान्य सीसीटीवी से कैसे भिन्न है?
सामान्य सीसीटीवी कैमरे केवल वीडियो रिकॉर्ड करते हैं जिनका विश्लेषण मैन्युअल रूप से करना पड़ता है। इसके विपरीत, एआई कैमरे कंप्यूटर विज़न के जरिए हाथी, बाघ, भालू और तस्करों की स्वतः पहचान कर सकते हैं और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के तुरंत व्हाट्सएप पर अलर्ट संदेश भेजने की क्षमता रखते हैं।
Q3. बिना इंटरनेट वाले घने जंगलों में यह प्रणाली कैसे काम करती है?
इस प्रणाली में पीयर-टू-पीयर (P2P) वायरलेस तकनीक का उपयोग किया गया है। इसके जरिए मैनपुर क्षेत्र के 4G/5G इंटरनेट सिग्नलों को एंटीना की मदद से 15 से 20 किलोमीटर दूर गहरे वनों में स्थित वन चौकियों और एंटी-पोचिंग कैंपों तक बिना किसी केबल के वायरलेस तरीके से पहुँचाया जाता है।
Q4. इस एआई तकनीक से मानव-हाथी संघर्ष को कैसे रोका जा सकेगा?
ओडिशा से आने वाले हाथियों के दल अक्सर बस्तियों में घुसकर फसलों और जान-माल को नुकसान पहुँचाते हैं। एआई कैमरे हाथियों की आवाजाही को उनके गलियारों (Corridors) में ही ट्रैक कर लेंगे, जिससे वन विभाग बस्तियों के ग्रामीणों को समय से पहले सुरक्षित कर सकेगा।
Q5. उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कौन सी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं?
इस रिजर्व में संकटापन्न वनभैंसा (राजकीय पशु), मालाबार पाइड हॉर्नबिल, उड़न गिलहरी, पेरेग्रीन फाल्कन, ऊदबिलाव, भारतीय विशाल गिलहरी और ट्राइकारिनेट हिल टर्टल जैसी अत्यंत दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियां पाई जाती हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू किया गया यह परीक्षण Udanti Sitanadi Tiger Reserve AI Surveillance छत्तीसगढ़ में प्रौद्योगिकी और सुशासन के सुंदर समन्वय का एक अनुपम उदाहरण है। वनों के सुदूर और दुर्गम सीमाओं पर जहाँ पारंपरिक गश्त करना बेहद कठिन था, वहाँ 70 से 80 फीट ऊंचे टावरों पर एआई कैमरे स्थापित कर पूरे क्षेत्र को एक मजबूत डिजिटल सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है।
पीयर-टू-पीयर वायरलेस नेटवर्क के माध्यम से गहरे वनों में इंटरनेट सिग्नल पहुँचाना और स्वतः हाथी व तस्करों की पहचान कर व्हाट्सएप पर त्वरित अलर्ट भेजना लालफीताशाही को समाप्त कर त्वरित रिस्पांस सुनिश्चित करने का एक बेहतरीन वैज्ञानिक उपाय है। यह तकनीक न केवल हमारे अमूल्य संकटापन्न वनभैंसों और हाथियों को शिकारियों से बचाएगी, बल्कि बहुमूल्य सागौन वनों के अवैध कटान पर भी पूर्ण विराम लगाएगी। ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के सपने को पूरा करते हुए, एआई-आधारित वन सुरक्षा का यह आधुनिक मॉडल भविष्य में मध्य भारत ही नहीं बल्कि देश भर के अन्य संरक्षित अभ्यारण्यों के लिए ‘स्मार्ट वाइल्डलाइफ सर्विलांस’ का एक शानदार मार्गदर्शक लाइटहाउस साबित होगा।
Official Sources:
- Public Relations Department, Government of Chhattisgarh (DPRCG) (https://dprcg.gov.in)