रायपुर / जशपुर, 10 सितम्बर 2026: पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अब छत्तीसगढ़ के किसान ‘कैश क्रॉप्स’ (Cash Crops) की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। देश को खाद्य तेलों (Edible Oils) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि करने के उद्देश्य से जशपुर जिले में Oil Palm Farming CG (ऑयल पाम की खेती) को मिशन मोड पर शुरू किया गया है। केंद्र सरकार के ‘नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम’ योजना के तहत जशपुर के आदिवासी और ग्रामीण किसानों के लिए आय के नए दरवाजे खुल गए हैं。
इस नई कृषि क्रांति को धरातल पर उतारने के लिए उद्यानिकी विभाग (Horticulture Department) द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मेगा प्लांटेशन (Mega Plantation) कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जशपुर के घोलेंग, बगीचा के भुरसाकोना और फरसाबहार के टिकलीपारा में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में किसानों को इस उन्नत खेती से जोड़ा गया। किसानों को ऑयल पाम के पौधे लगाने से लेकर सिंचाई और रखरखाव तक की तकनीकी जानकारी दी जा रही है।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसानों को अपनी जेब से भारी निवेश नहीं करना पड़ेगा। सरकार फेंसिंग (तारघेरा), ड्रिप सिंचाई, बोरवेल, पम्प और यहां तक कि शुरुआती 4 वर्षों तक पौधों की देखभाल के लिए नकद आर्थिक सहायता (Subsidies) दे रही है, जिससे Oil Palm Farming CG एक जीरो-रिस्क और हाई-प्रॉफिट का सौदा बन गया है।
| ऑयल पाम खेती: मुख्य तथ्य (Quick Facts) | विवरण |
|---|---|
| योजना का नाम | नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम (NMEO-OP) |
| क्रियान्वयन जिला | जशपुर, छत्तीसगढ़ |
| भौतिक लक्ष्य एवं प्राप्ति | 100 हेक्टेयर का लक्ष्य, 43 हेक्टेयर में रोपण पूर्ण |
| रोपण तकनीक | 9×9 मीटर की दूरी, 143 पौधे प्रति हेक्टेयर |
| रखरखाव अनुदान | प्रथम से चतुर्थ वर्ष तक ₹5,250 प्रति हेक्टेयर/वर्ष |
100 हेक्टेयर का लक्ष्य: रोपण तकनीक और ब्लॉक-स्तरीय अभियान
जशपुर जिले को इस योजना के तहत 100 हेक्टेयर का भौतिक लक्ष्य प्राप्त हुआ है, जिसके विरुद्ध अब तक 43 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम का सफल रोपण किया जा चुका है।
उद्यानिकी विभाग द्वारा जिन स्थानों पर मेगा प्लांटेशन कार्यक्रम चलाए गए, वे हैं: घोलेंग (विकासखंड जशपुर), भुरसाकोना (विकासखंड बगीचा) और टिकलीपारा (विकासखंड फरसाबहार)। इन कार्यक्रमों में सहायक संचालक (उद्यान) सहित विकासखंड स्तर के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
पौध सामग्री अनुदान: योजना के प्रावधानों के अनुसार, 9×9 मीटर की दूरी पर एक हेक्टेयर में 143 पौधे लगाए जाते हैं। आयातित (Imported) पौध सामग्री के व्यय की प्रतिपूर्ति के लिए किसानों को 29,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक का अनुदान दिया जा रहा है。
फेंसिंग, ड्रिप सिंचाई, बोरवेल और पंप के लिए बंपर अनुदान
राज्य में Oil Palm Farming CG को सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए उद्यानिकी विभाग निम्नलिखित आर्थिक सहायता (Subsidies) प्रदान कर रहा है:
- फेंसिंग (Fencing): पौधों की सुरक्षा के लिए 54,485 रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान।
- ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation): बेहतर जल प्रबंधन के लिए 14,130 रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान।
- बोरवेल (Borewell): सफल बोर खनन के लिए 50,000 रुपये तक की सहायता।
- पंप (Pump): 2 हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्र में रोपण करने वाले अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC), लघु/सीमांत और महिला हितग्राहियों को डीजल/इलेक्ट्रिक पम्प के लिए 10,000 रुपये प्रति पम्प। अन्य (सामान्य) हितग्राहियों को 8,000 रुपये प्रति पम्प का अनुदान।
चार वर्षों तक रखरखाव और ‘अंतर्वर्ती खेती’ (Intercropping) का लाभ
ऑयल पाम के शुरुआती विकास और किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए पौधों के रखरखाव हेतु भी 4 वर्षों तक अनुदान दिया जाएगा। प्रथम वर्ष से चतुर्थ वर्ष तक प्रत्येक वर्ष 5,250 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता खाद, दवा, उर्वरक, गैप फिलिंग (मरे हुए पौधों की जगह नए पौधे लगाना) और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए दिए जाने का प्रावधान है।
अंतर्वर्ती खेती से दोहरा लाभ: ऑयल पाम के पौधों के बीच (9×9 मीटर की दूरी होने के कारण) काफी खाली स्थान होता है। इस खाली स्थान का उपयोग कर किसान ‘अंतर्वर्ती फसलें’ (Intercropping) भी ले सकेंगे। इसके प्रोत्साहन के लिए भी प्रथम से चतुर्थ वर्ष तक प्रत्येक वर्ष 5,250 रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान का अलग से प्रावधान है। इससे किसानों को Oil Palm Farming CG के साथ-साथ अन्य फसलों से अतिरिक्त आय प्राप्त करने का शानदार अवसर मिलेगा।
उद्यानिकी विभाग द्वारा जिले के शेष भौतिक लक्ष्य (100 हेक्टेयर) को शीघ्र पूरा करने के लिए किसानों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि जिले के अधिक से अधिक किसान इस महत्वाकांक्षी योजना से जुड़कर इसका लाभ उठाएं और अपनी कृषि आय को नई ऊंचाई दें।
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UPSC/CGPSC Static Facts: NMEO-OP और पाम ऑयल का अर्थशास्त्र
चूंकि केंद्र और राज्य सरकार Oil Palm Farming CG को मिशन मोड में ले रही हैं, इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC GS-3 Agriculture & Economy) के छात्रों के लिए ये बुनियादी (Static) तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
- NMEO-OP (National Mission on Edible Oils – Oil Palm): यह केंद्र सरकार की एक ‘केंद्र प्रायोजित योजना’ (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसे अगस्त 2021 में लॉन्च किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य पाम ऑयल के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करना है।
- भारत का आयात संकट: भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक (Largest Importer) है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% खाद्य तेल आयात करता है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा ‘पाम ऑयल’ (Palm Oil) का है, जो मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से आता है।
- अंतर्वर्ती खेती (Intercropping): जब मुख्य फसल (जैसे ऑयल पाम) के बीच बचे हुए खाली स्थान पर एक ही समय में कोई दूसरी फसल (जैसे दालें या सब्जियां) उगाई जाती है, तो उसे अंतर्वर्ती खेती कहते हैं। इससे भूमि का 100% उपयोग होता है और मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।
विश्लेषण: जशपुर में ही ऑयल पाम की खेती क्यों?
(CGPSC Mains Analysis – Geography & Agriculture)
1. जलवायु और भौगोलिक अनुकूलता: पाम ऑयल के पेड़ को अच्छी बारिश और समान तापमान (Tropical Climate) की आवश्यकता होती है। जशपुर जिले का मौसम, यहां की बारिश (Rainfall) और मिट्टी की प्रकृति ऑयल पाम की खेती के लिए अत्यधिक अनुकूल (Highly suitable) है।
2. आयात बिल (Import Bill) में कमी: भारत हर साल खाद्य तेलों के आयात पर लाखों-करोड़ों विदेशी मुद्रा (Forex) खर्च करता है। Oil Palm Farming CG जैसी पहलों से न केवल किसानों की आय दोगुनी होगी, बल्कि भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) भी कम होगा। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर एक सीधा कदम है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. जशपुर जिले में Oil Palm Farming CG के लिए कितना भौतिक लक्ष्य रखा गया है?
जशपुर जिले में इस योजना के तहत 100 हेक्टेयर का भौतिक लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 43 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम का सफल रोपण किया जा चुका है।
Q2. योजना के तहत एक हेक्टेयर में कितने पौधे लगाए जाते हैं और कितना अनुदान मिलता है?
एक हेक्टेयर में 9×9 मीटर की दूरी पर 143 पौधे लगाए जाते हैं। आयातित पौध सामग्री के लिए 29 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक का अनुदान दिया जाता है।
Q3. लघु, सीमांत और महिला हितग्राहियों को पानी के पंप के लिए कितनी सब्सिडी दी जा रही है?
2 हेक्टेयर या उससे अधिक में रोपण करने वाले ST, SC, लघु/सीमांत और महिला हितग्राहियों को 10 हजार रुपये प्रति पम्प, तथा सामान्य किसानों को 8 हजार रुपये प्रति पम्प का अनुदान मिलता है।
स्रोत (Source)
छत्तीसगढ़ शासन, जनसंपर्क विभाग (DPRCG), 10 सितम्बर 2026, रायपुर/जशपुर।