रायपुर / रायगढ़, 10 सितम्बर 2026: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले ‘रायगढ़’ में एक बार फिर से तबले की थाप, घुंघरुओं की झंकार और सुरों की सरिता बहने वाली है। महाराजा चक्रधर सिंह की महान कला-साधना और उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित 41वें Chakradhar Samaroh 2026 (अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह) का भव्य शंखनाद होने जा रहा है। रायगढ़ के रामलीला मैदान में 14 से 23 सितम्बर तक आयोजित होने वाले इस 10 दिवसीय सांस्कृतिक महाकुंभ में भारत के कोने-कोने से नामचीन हस्तियां जुटेंगी।
समारोह की खासियत यह है कि यहाँ हर शाम कला की एक अलग विधा दर्शकों के सामने होगी। चाहे वह कबीर के रूहानी भजन हों, ओडिसी और कथक का शास्त्रीय लास्य हो, या फिर छत्तीसगढ़ी लोककला और पंडवानी का जोश। इस वर्ष Chakradhar Samaroh 2026 के मंच पर सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति, इंडियन आइडल फेम अमित साना और छत्तीसगढ़ के सुपरस्टार पद्मश्री अनुज शर्मा जैसी दिग्गज प्रतिभाएं अपनी कला का जादू बिखेरेंगी।
संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और जिला प्रशासन (जनसहयोग) द्वारा आयोजित यह प्रतिष्ठित समारोह न केवल राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों को एक मंच देता है, बल्कि स्थानीय नवोदित कलाकारों को भी दिग्गजों के साथ अपनी कला प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।
| 41वां चक्रधर समारोह: मुख्य तथ्य (Quick Facts) | विवरण |
|---|---|
| समारोह का नाम और संस्करण | 41वां Chakradhar Samaroh 2026 |
| आयोजन तिथि और समय | 14 से 23 सितम्बर 2026 (प्रतिदिन शाम 6 बजे से) |
| स्थान | रामलीला मैदान, रायगढ़ (छत्तीसगढ़) |
| आयोजक | संस्कृति विभाग, CG टूरिज्म बोर्ड एवं जिला प्रशासन |
| प्रमुख विधाएं | शास्त्रीय नृत्य, पंडवानी, लोकसंगीत, कबीर भजन, वाद्य वादन |
14 से 23 सितंबर तक का विस्तृत कार्यक्रम (Day-by-Day Schedule)
इस 10 दिवसीय Chakradhar Samaroh 2026 में प्रतिदिन शाम 6 बजे से कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी, जिनका 100% सटीक विवरण इस प्रकार है:
- 14 सितम्बर (शुभारंभ): श्री वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों द्वारा ‘गणेश वंदना’। पद्मश्री अनुज शर्मा की लोक कला/संगीत प्रस्तुति और पद्मश्री डॉ. उषा बारले की ओजस्वी ‘पंडवानी’ प्रस्तुति।
- 15 सितम्बर: निशित गंगानी (तबला वादन), टी. लक्ष्मी रेड्डी (कुचिपुड़ी), स्टार्क सोसाइटी बाड़मेर (राजस्थानी फोक), तरुणा साहू एवं समूह (पंडवानी), तथा माधवरस बैंड (भजन गायन)।
- 16 सितम्बर: मौमाला नायक (कथक), भूपेन्द्र साहू एवं समूह (छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य), डॉ. यास्मीन सिंह एवं समूह व सुश्री विभूति शर्मा (कथक), तथा पायल साहू एवं समूह (लोककला)।
- 17 सितम्बर: बादल (बस्तर अकादमी ऑफ डांस, आर्ट्स एवं लिटरेचर) की लोक कला, मधुमिता रॉय मिश्रा (कथक), जान्हवी बेहरा (ओडिसी)। शिवरंजनी हरीश व कलार्पणा नृत्य समूह (पद्म भूषण शोभना के शिष्य) द्वारा भरतनाट्यम, और शिव शक्ति कला संस्थान (कथक)।
- 18 सितम्बर: डॉ. मंजू इलंगबम (मणिपुरी नृत्य), पद्मश्री भारती बंधु (कबीर भजन), श्वेता नायक एवं समूह (कुचिपुड़ी) तथा श्री अनुराग शर्मा (लोकसंगीत)।
- 19 सितम्बर (काव्य व ओडिसी): गौरी शंकर दाश और रीला होता (ओडिसी नृत्य)। पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा एवं अन्य कलाकारों द्वारा हास्य काव्य संध्या।
- 20 सितम्बर: श्री बी. साहू एवं समूह (गोटीपुआ नृत्य), अमित साना (इंडियन आइडल फेम- गायन)। पद्मश्री रामलाल बरेठ के निर्देशन में भूपेन्द्र बरेठ एवं समूह (कथक)।
- 21 सितम्बर: श्री रूद्रशंकर सिन्हा (बनारस घराना कथक), श्री सोनू गुप्ता (लोकगीत), वांसती वैष्णव (कथक)। त्रिवेणी संगम द्वारा संतूर, पखावज व तबला वादन। संस्कार कला संघ (नृत्य नाटिका) व नृत्यांजलि (बनारस घराना कथक)।
- 22 सितम्बर: गुरु कोट्टक्कल नंदकुमारन नायर (कथकली), सुश्री दीक्षा रथ (ओडिसी), प्रो. डॉ. लवली शर्मा (सितार वादन), श्री पुनरिक साहू (लहरंगगा लोक संगीत) और राकेश शर्मा, रायगढ़ (सूफी व गजल)।
- 23 सितम्बर (भव्य समापन): देश की सुप्रसिद्ध पद्मश्री गायिका कविता कृष्णमूर्ति और जान कुमार सानू की सुरमयी गायन प्रस्तुति।
यह भी पढ़ें: Lokrang Parv CG: सरहुल-करमा की थाप पर झूम उठा रायपुर, शानदार समापन
UPSC/CGPSC Static Facts: महाराजा चक्रधर सिंह और गोटीपुआ
चूंकि राज्य का सबसे बड़ा सांस्कृतिक महोत्सव Chakradhar Samaroh 2026 आयोजित हो रहा है, इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC Paper-6 Art & Culture / UPSC Prelims) के छात्रों के लिए ये बुनियादी (Static) तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
- महाराजा चक्रधर सिंह: वे रायगढ़ रियासत के राजा थे और भारतीय शास्त्रीय संगीत तथा नृत्य के महान आश्रयदाता थे। उन्होंने कथक के ‘रायगढ़ घराने’ (Raigarh Gharana) की नींव रखी, जो जयपुर और लखनऊ घराने का एक सुंदर मिश्रण है। उन्होंने ‘नर्तन सर्वस्वम’ और ‘ताल बलनिधि’ जैसे कई संगीत ग्रंथों की रचना की। उन्हीं की स्मृति में 1985 से प्रतिवर्ष गणेश चतुर्थी के दौरान यह समारोह मनाया जाता है।
- गोटीपुआ (Gotipua): 20 सितंबर को होने वाला यह नृत्य ओडिशा का एक पारंपरिक नृत्य रूप है। इसमें युवा लड़के (जिन्हें गोटीपुआ कहा जाता है) महिलाओं की वेशभूषा पहनकर भगवान जगन्नाथ और कृष्ण की स्तुति में कठिन कलाबाजियां (Acrobatics) करते हैं। इसे ‘ओडिसी’ नृत्य का पूर्ववर्ती (Precursor) माना जाता है।
- पंडवानी (Pandavani): यह महाभारत के पांडवों की कथाओं का छत्तीसगढ़ी लोक गायन रूप है। इसकी दो मुख्य शैलियां हैं- वेदमती (बैठकर गाना, जैसे तीजन बाई) और कापालिक (खड़े होकर अभिनय के साथ)।
विश्लेषण: अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) का संरक्षण
(CGPSC Mains Analysis – Art & Culture)
1. सांस्कृतिक कूटनीति (Soft Power): रायगढ़ का यह समारोह केवल एक स्थानीय मेला नहीं है; यह भारत की ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ का एक जीवंत संग्रहालय है। कथकली (केरल), कुचिपुड़ी (आंध्र प्रदेश), मणिपुरी और ओडिसी जैसे नृत्यों को एक ही मंच पर लाना ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की मूल भावना को मजबूत करता है।
2. स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन (Cultural Tourism): 10 दिनों तक चलने वाले Chakradhar Samaroh 2026 में देश भर से दर्शक आते हैं। इससे रायगढ़ के स्थानीय व्यापार (होटल, ट्रांसपोर्ट, हस्तशिल्प) को जबरदस्त आर्थिक बूस्ट मिलता है, जो कला को सीधे अर्थव्यवस्था (Tourism Economy) से जोड़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. 41वां Chakradhar Samaroh 2026 कब और कहाँ आयोजित किया जा रहा है?
41वां अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह 14 से 23 सितम्बर 2026 तक छत्तीसगढ़ के रायगढ़ स्थित ‘रामलीला मैदान’ में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम प्रतिदिन शाम 6 बजे से शुरू होंगे।
Q2. यह समारोह किस महान विभूति की स्मृति में आयोजित किया जाता है?
यह सांस्कृतिक महाकुंभ रायगढ़ रियासत के पूर्व राजा और ‘रायगढ़ घराने’ के संस्थापक महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और संगीत के प्रति उनके समर्पण की स्मृति में आयोजित किया जाता है।
Q3. इस वर्ष चक्रधर समारोह के समापन (23 सितंबर) पर किसकी मुख्य प्रस्तुति होगी?
समारोह के भव्य समापन (23 सितम्बर) की शाम देश की सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका पद्मश्री कविता कृष्णमूर्ति और गायक जान कुमार सानू अपनी सुरमयी प्रस्तुति देंगे।
स्रोत (Source)
छत्तीसगढ़ शासन, संस्कृति विभाग एवं जनसंपर्क (DPRCG), 10 सितम्बर 2026, रायपुर/रायगढ़।