Bastar Dussehra 2026: 75 दिन के ऐतिहासिक पर्व का शंखनाद, यूनेस्को की सूची में शामिल कराने का लिया गया संकल्प

Bastar Dussehra 2026 Bastar Dussehra 2026

जगदलपुर / रायपुर, 8 सितंबर 2026: जब बस्तर में दशहरे की बात होती है, तो यह केवल बुराई पर अच्छाई की जीत (रावण वध) का पर्व नहीं होता, बल्कि यह आदिवासियों की आराध्य देवी ‘मां दंतेश्वरी’ की स्तुति और सामाजिक समरसता का विश्वप्रसिद्ध महाकुंभ होता है। ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के इसी अनूठे संगम— 75 दिवसीय Bastar Dussehra 2026 को इस वर्ष पूरी भव्यता और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाने की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं।

मंगलवार को जगदलपुर कलेक्टोरेट के ‘प्रेरणा कक्ष’ में बस्तर दशहरा समिति की एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री महेश कश्यप ने की। बैठक का सबसे बड़ा आकर्षण यह संकल्प रहा कि दुनिया के इस सबसे लंबे (75 दिनों तक चलने वाले) पर्व को ‘यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची’ (UNESCO Intangible Cultural Heritage List) में शामिल कराने के लिए केंद्र स्तर पर पुरजोर प्रयास किए जाएंगे।

इसके अलावा, पर्व के सुचारू संचालन के लिए समिति के नए उपाध्यक्ष का चुनाव भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया से संपन्न हुआ, जिसमें भारी बहुमत से नए उपाध्यक्ष के नाम पर मुहर लगी।

बस्तर दशहरा समिति बैठक: मुख्य तथ्य (Quick Facts)विवरण
पर्व का नाम और अवधिBastar Dussehra 2026 (75 दिवसीय विश्वप्रसिद्ध पर्व)
समिति के अध्यक्षसांसद श्री महेश कश्यप
नवनिर्वाचित उपाध्यक्षश्री बलराम मांझी (बहुमत से निर्वाचित)
प्रस्तावित बजट1 करोड़ 21 लाख रुपये
मुख्य मांग (CSR फंड)NMDC प्रबंधन से प्रतिवर्ष 1.5 करोड़ रुपये की स्थायी सहायता

बलराम मांझी बने नए उपाध्यक्ष: ऐसे हुआ चुनाव

बैठक की शुरुआत औपचारिक प्रक्रियाओं के साथ हुई, जिसके बाद दशहरा समिति के उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन कराया गया। इसमें दो नाम प्रस्तावित हुए:

  • बचेली परगना के श्री बीरो मांझी ने श्री अर्जुन मांझी के नाम का प्रस्ताव रखा।
  • सोनाबाल परगना के श्री समुन्द मांझी ने श्री बलराम मांझी के नाम का प्रस्ताव किया।

हाथ उठाकर मतदान की प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें स्पष्ट बहुमत के आधार पर श्री बलराम मांझी को Bastar Dussehra 2026 समिति का नया उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया। नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष ने ‘देवसराय’ सहित अन्य स्थलों की व्यवस्था सुधारने का सुझाव दिया।

सांसद महेश कश्यप और राजपरिवार की मांगें

सांसद श्री महेश कश्यप ने बस्तर दशहरे को विश्व की अनूठी सांस्कृतिक विरासत बताया। उन्होंने पर्व की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए एनएमडीसी (NMDC) प्रबंधन से सीएसआर (CSR) मद के अंतर्गत प्रतिवर्ष कम से कम डेढ़ करोड़ रुपये की स्थायी वित्तीय सहायता की मांग रखी। साथ ही, उन्होंने पर्व अवधि के दौरान किसी भी समानांतर आयोजन की अनुमति नहीं देने और पूजा स्थलों पर रेलिंग लगाने पर जोर दिया।

बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं ‘माटी पुजारी’ श्री कमलचंद भंजदेव ने बताया कि वर्ष 1423 से निरंतर चली आ रही यह परंपरा मैसूर और कुल्लू दशहरे से भी प्राचीन है। उन्होंने ‘मावली परघाव’ (Mavli Parghav) के लिए विशेष साफ-सफाई और आंगा देव (Aanga Dev) के सम्मानपूर्वक आगमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने मांझी-चालकी से पारंपरिक पगड़ी धारण करने का आग्रह किया और ‘मेंबरीन’ (Memberin) के मासिक मानदेय में वृद्धि का प्रस्ताव भी रखा।

1.21 करोड़ का बजट और प्रशासन की तैयारियां

दशहरा समिति के सचिव एवं तहसीलदार ने 1 करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया। बैठक में कलेक्टर श्री आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक (SP) श्री शलभ सिन्हा ने शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए प्रशासनिक समन्वय पर जोर दिया।

इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला पंचायत CEO श्री तन्मय खन्ना, दंतेवाड़ा से मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया बाबा सहित समस्त मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरीन, पुजारी और टेम्पल स्टेट समिति के सदस्य उपस्थित रहे।


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UPSC/CGPSC Static Facts: बस्तर दशहरा और यूनेस्को

चूंकि इस वर्ष Bastar Dussehra 2026 को यूनेस्को में शामिल कराने का संकल्प लिया गया है, इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC Paper-6 Art & Culture / UPSC) के छात्रों के लिए ये बुनियादी (Static) तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  • बस्तर दशहरे का इतिहास: यह पर्व 15वीं शताब्दी (लगभग 1408-1423 ई.) में काकतीय वंश (Kakatiya Dynasty) के 4थे शासक महाराजा पुरुषोत्तम देव द्वारा शुरू किया गया था। जगन्नाथ पुरी के राजा ने उन्हें ‘रथपति’ की उपाधि दी थी, जिसके बाद बस्तर में रथ खींचने की परंपरा शुरू हुई।
  • रावण वध नहीं होता: उत्तर भारत के दशहरे के विपरीत, बस्तर दशहरे में राम-रावण प्रसंग का कोई जिक्र नहीं होता। यह पूरी तरह से शक्ति की देवी ‘मां दंतेश्वरी’ और स्थानीय देवी-देवताओं को समर्पित है।
  • प्रमुख रस्में: पाट जात्रा (लकड़ी की पूजा), डेरी गड़ाई, काछन गादी (बेल की कांटों पर झूलना), जोगी बिठाई, मावली परघाव (दंतेवाड़ा से आई मावली माता का स्वागत), भीतर रैनी, बाहर रैनी और मुरिया दरबार।
  • यूनेस्को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage): भारत की 15 सांस्कृतिक परंपराएं (जैसे कुंभ मेला, गरबा, छऊ नृत्य) यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में शामिल हैं। बस्तर दशहरे को इसमें शामिल करने से इसे अंतरराष्ट्रीय संरक्षण और पर्यटन का बढ़ावा मिलेगा।

विश्लेषण: बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता का प्रतीक क्यों है?

(CGPSC Mains Analysis – Sociology & Tribal Culture)

1. विकेंद्रीकृत भागीदारी (Decentralized Participation): बस्तर दशहरा दुनिया का एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें राजा से लेकर रंक तक हर जाति/जनजाति का कार्य बंटा हुआ है। ‘काछन गादी’ की रस्म पनका या मिरगान जाति की कन्या करती है। रथ बनाने के लिए लकड़ी लाने का काम एक विशेष जनजाति (जैसे भतरा/माड़िया) करती है। रथ खींचने का काम मुड़िया और माड़िया करते हैं। यह ‘श्रम के विभाजन’ (Division of Labor) और सामाजिक समरसता का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है।

2. मुरिया दरबार (Muria Darbar): यह लोकतंत्र का एक आदिम स्वरूप है। दशहरे के अंत में राजपरिवार (अब प्रशासन) द्वारा ‘मुरिया दरबार’ लगाया जाता है, जहाँ मांझी, चालकी और मेंबरीन अपनी स्थानीय समस्याओं को प्रशासन के सामने रखते हैं। यह ‘बॉटम-अप अप्रोच’ (Bottom-up Approach) और प्रशासनिक जवाबदेही को दर्शाता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. Bastar Dussehra 2026 समिति का नया उपाध्यक्ष किसे चुना गया है?

समिति की बैठक में हाथ उठाकर हुए मतदान में स्पष्ट बहुमत के आधार पर श्री बलराम मांझी (सोनाबाल परगना से प्रस्तावित) को बस्तर दशहरा समिति का नया उपाध्यक्ष निर्वाचित किया गया है।

Q2. बस्तर दशहरे को किस अंतरराष्ट्रीय सूची में शामिल कराने का संकल्प लिया गया है?

बैठक में 75 दिनों तक चलने वाले इस विश्वप्रसिद्ध पर्व को ‘यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची’ (UNESCO Intangible Cultural Heritage List) में शामिल कराने का संकल्प लिया गया है।

Q3. इस वर्ष बस्तर दशहरा समिति ने पर्व के आयोजन के लिए कितना बजट प्रस्तावित किया है?

बस्तर दशहरा पर्व 2026 के लिए समिति द्वारा 1 करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। साथ ही NMDC से 1.5 करोड़ रुपये की स्थायी CSR सहायता मांगी गई है।

स्रोत (Source)

छत्तीसगढ़ शासन, जनसंपर्क विभाग (DPRCG), 08 सितंबर 2026, रायपुर/जगदलपुर।

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