रायपुर, 19 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ के दूरस्थ जनजातीय और ग्रामीण अंचलों में खेती-किसानी को लाभकारी बनाने, सिंचाई का रकबा बढ़ाने और जल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए राज्य सरकार मिशन मोड में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर उनके गृह जिले जशपुर के कांसाबेल विकासखंड में Mahadevmuda Anicut Kansabel (महादेवमुड़ा एनीकट कांसाबेल) कम काजवे का निर्माण 5 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत से तेजी से कराया जा रहा है। जल संसाधन विभाग द्वारा तैयार की जा रही इस दोहरी उपयोगिता वाली परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र की लगभग 150 हेक्टेयर कृषि भूमि को सुनिश्चित सिंचाई का सीधा लाभ मिलेगा। इससे न केवल किसानों की मानसूनी बारिश पर निर्भरता समाप्त होगी, बल्कि एनीकट के ऊपर बनने वाले काजवे (पुलिया) से ग्रामीणों को नाले के आर-पार सुरक्षित आवागमन की स्थायी सुविधा भी प्राप्त होगी।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ‘Mahadevmuda Anicut Kansabel’: कांसाबेल क्षेत्र में ₹5.45 करोड़ की लागत से एनीकट कम काजवे का निर्माण कार्य तेज।
- 150 हेक्टेयर में सुनिश्चित सिंचाई: पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसान परंपरागत धान के साथ रबी फसलों और सब्जियों की ले सकेंगे दोहरी पैदावार।
- दोहरा लाभ (जल संचयन + आवागमन): वर्षा जल संचयन के साथ काजवे बनने से ग्रामीणों को बरसात में नाला पार करने की समस्या से मुक्ति।
- भूजल संवर्धन को बढ़ावा: बरसाती पानी के ठहराव से आसपास के कुओं, नलकूपों और बावड़ियों का तेजी से रिचार्ज होगा वाटर टेबल।
- समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश: जल संसाधन विभाग तय समय में निर्माण पूर्ण करने में जुटा; किसानों ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार।
Mahadevmuda Anicut Kansabel: ₹5.45 करोड़ की लागत से जल संरक्षण का मजबूत ढांचा
जशपुर जिले का कांसाबेल क्षेत्र अपनी पहाड़ी और ढलान वाली भौगोलिक बनावट के कारण मानसूनी वर्षा जल को सहेजने में लंबे समय से चुनौतियों का सामना कर रहा था। भारी वर्षा के बावजूद पानी तेजी से बहकर निकल जाता था, जिससे खरीफ फसल के बाद खेतों में सूखा पड़ जाता था।
Mahadevmuda Anicut Kansabel परियोजना इस समस्या का स्थायी समाधान बनकर सामने आई है। ₹5.45 करोड़ के बजट से नाले पर पक्के कंक्रीट एनीकट का निर्माण किया जा रहा है, जो लाखों लीटर वर्षा जल को रोककर एक विशाल जल भंडार तैयार करेगा। इस संचित जल से किसान लिफ्ट एरिगेशन और पंपों के माध्यम से सीधे अपने खेतों तक पानी पहुंचा सकेंगे।
150 हेक्टेयर में पहुंचेगा पानी: वर्षा पर निर्भरता खत्म, फसल विविधीकरण को बढ़ावा
इस परियोजना का सबसे सीधा और बड़ा आर्थिक लाभ क्षेत्र के छोटे और सीमांत आदिवासी किसानों को मिलेगा:
- फसल विविधीकरण (Crop Diversification): सिंचाई की सुनिश्चित सुविधा मिलने से किसान केवल बारिश आधारित धान की एक फसली खेती पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि वे गेहूं, मक्का, सरसों, चना और हरी सब्जियों की नकदी फसलें भी ले सकेंगे।
- कृषि उत्पादकता में भारी उछाल: समय पर फसलों को पानी मिलने से प्रति एकड़ पैदावार में वृद्धि होगी, जिससे किसानों की वार्षिक आय बढ़ेगी और वे आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।
एनीकट के साथ काजवे की दोहरी सुविधा: आवागमन होगा सुरक्षित और सुगम
परियोजना की सबसे व्यावहारिक विशेषता इसका ‘एनीकट कम काजवे’ (Anicut-cum-Causeway) डिजाइन है:
अक्सर देखा जाता है कि केवल एनीकट बनने से पानी तो रुक जाता है लेकिन रास्ता बंद हो जाता है। यहाँ जल संसाधन विभाग ने जल संग्रहण संरचना के ऊपर ही एक मजबूत सुगम काजवे (सबमर्सिबल ब्रिज) का निर्माण शामिल किया है। इससे बरसात के दिनों में नाले में उफान आने पर भी ग्रामीणों, किसानों के ट्रैक्टरों और स्कूल जाने वाले बच्चों का आवागमन बाधित नहीं होगा और दोनों किनारों के गांव आपस में बारह महीने जुड़े रहेंगे।
भूजल स्तर में होगा सुधार: पारंपरिक जलस्रोतों को मिलेगा जीवनदान
महादेवमुड़ा एनीकट में भारी मात्रा में पानी जमा रहने से आसपास के विस्तृत भूभाग में वाटर टेबल रीचार्ज होगा:
- कुओं और बोरवेल का संवर्धन: जलाशय के दबाव से आसपास के 2 से 3 किलोमीटर के दायरे में स्थित किसानों के नलकूप और गांव के कुएं गर्मियों में भी नहीं सूखेंगे।
- पर्यावरण संरक्षण: जलभराव रहने से स्थानीय पशु-पक्षियों और मवेशियों के लिए पीने का पानी उपलब्ध रहेगा और हरियाली का विस्तार होगा।
निर्धारित समय-सीमा में निर्माण पूर्ण करने कार्यों में तेजी
जल संसाधन विभाग के मैदानी इंजीनियरों और निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता किए बिना निर्माण कार्य को तय समय-सीमा में पूरा किया जाए।
कांसाबेल क्षेत्र के किसानों ने बताया कि लंबे समय से इस नाले पर बंधान की मांग की जा रही थी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने क्षेत्रवासियों की मांग को प्राथमिकता देते हुए ₹5.45 करोड़ की मंजूरी दिलाई। कार्य में तेजी आने से किसानों में जबर्दस्त उत्साह है और उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है।
“जशपुर जिले के दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय अंचलों में सिंचाई क्षमता बढ़ाना हमारी सरकार का सर्वोच्च संकल्प है। महादेवमुड़ा एनीकट कम काजवे से कांसाबेल के 150 हेक्टेयर खेतों तक पानी पहुंचेगा और ग्रामीणों को पक्का रास्ता मिलेगा। जब किसान के खेत को भरपूर पानी मिलेगा, तभी हमारी खेती लाभकारी बनेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। हम समयबद्ध रूप से इस परियोजना को पूरा कराएंगे।”— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन
कांसाबेल के किसानों, ग्रामीणों और कृषि आर्थिकी के लिए इसके क्या मायने हैं?
- सूखे और खंडवृष्टि के जोखिम से मुक्ति: मानसून में देरी या कम बारिश होने की स्थिति में भी एनीकट में संचित पानी से खरीफ फसल को सूखने से बचाया जा सकेगा।
- पलायन पर रोक: साल में दो फसलें मिलने से स्थानीय मजदूरों और सीमांत किसानों को काम की तलाश में महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
- स्थानीय हाट-बाजारों में व्यापार वृद्धि: सब्जी और दलहन उत्पादन बढ़ने से कांसाबेल और जशपुर के स्थानीय कृषि बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी।
महादेवमुड़ा एनीकट कम काजवे परियोजना: एक नजर में
- परियोजना का नाम: महादेवमुड़ा एनीकट कम काजवे निर्माण (Mahadevmuda Anicut Kansabel)
- स्थान: कांसाबेल क्षेत्र, जिला जशपुर, छत्तीसगढ़
- स्वीकृत लागत: ₹5,45,00,000 (5 करोड़ 45 लाख रुपये)
- सिंचित होने वाला रकबा: लगभग 150 हेक्टेयर (150 Hectares) कृषि भूमि
- संरचना का स्वरूप: जल संचयन हेतु एनीकट + आवागमन हेतु काजवे (पुलिया)
- कार्य की वर्तमान स्थिति: निर्माण कार्य प्रगति पर (समय-सीमा में पूर्णता का लक्ष्य)
- प्राथमिक लाभ: भूजल संवर्धन, मानसूनी जल संचयन, फसल विविधीकरण, बारहमासी आवागमन
- संचालक विभाग: जल संसाधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Mahadevmuda Anicut Kansabel परियोजना की कुल लागत कितनी है और यह कहाँ बन रही है?
Mahadevmuda Anicut Kansabel परियोजना जशपुर जिले के कांसाबेल क्षेत्र में स्थित है और इसका निर्माण कुल ₹5.45 करोड़ (5 करोड़ 45 लाख रुपये) की लागत से कराया जा रहा है।
इस एनीकट के बनने से कितने क्षेत्रफल में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी?
महादेवमुड़ा एनीकट कम काजवे के पूर्ण होने से कांसाबेल क्षेत्र की लगभग 150 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध होगा।
‘एनीकट कम काजवे’ से ग्रामीणों को क्या दोहरा फायदा मिलेगा?
एनीकट से वर्षा जल का संचयन होगा जिससे खेतों की सिंचाई होगी और भूजल स्तर बढ़ेगा, वहीं इसके ऊपर बने काजवे से बरसात के दिनों में भी ग्रामीणों और वाहनों का आवागमन सुगम रहेगा।
इस परियोजना से स्थानीय किसानों की खेती में क्या बदलाव आएगा?
किसानों की वर्षा पर निर्भरता खत्म होगी और वे धान के अलावा दलहन, तिलहन और मौसमी सब्जियों की दोहरी फसल ले सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक आय में वृद्धि होगी।
आधिकारिक स्रोत: जल संसाधन विभाग / जिला प्रशासन जशपुर / जनसंपर्क संचालनालय (DPR Raipur), छत्तीसगढ़ शासन