PMKSY Watershed Reform Utsav: धमतरी की 16 पंचायतों से शुरू होगी जल क्रांति, प्रति हेक्टेयर बजट बढ़कर ₹28,000 हुआ

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धमतरी, 01 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ शासन और भारत सरकार की संयुक्त पहल पर वाटरशेड विकास को अधिक प्रभावी, सहभागी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए धमतरी जिले में PMKSY Watershed Reform Utsav (‘रिफॉर्म उत्सव’) का आयोजन किया जा रहा है। सेवा संकल्प अभियान और ‘सबकी योजना, सबका विकास’ (जन योजना अभियान – PPC) के अंतर्गत 2 अक्टूबर 2026 से ग्राम सभाओं के माध्यम से इसकी विधिवत शुरुआत होगी। जिले की 16 ग्राम पंचायतों में जल एवं मृदा संरक्षण के नए सुधारों को लागू किया जाएगा, जिसके तहत मैदानी क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर बजट बढ़ाकर ₹22,000 और पहाड़ी क्षेत्रों में ₹28,000 कर दिया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • ‘PMKSY Watershed Reform Utsav’ का 2 अक्टूबर से धमतरी की 16 ग्राम पंचायतों की ग्राम सभाओं से होगा शुभारंभ।
  • प्रति हेक्टेयर आवंटन में भारी वृद्धि: मैदानी क्षेत्रों में ₹12,000 से बढ़ाकर ₹22,000 और पहाड़ी क्षेत्रों में ₹15,000 से बढ़ाकर ₹28,000 हुआ बजट।
  • वाटरशेड परियोजनाओं की कार्यान्वयन अवधि 7 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष की गई, जिससे किसानों को शीघ्र लाभ मिलेगा।
  • ‘फाइल से लाइफ’ मंत्र: मृदा कटाव की रोकथाम, भू-जल संवर्धन और फसल विविधीकरण से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर।

बजट में 80% से अधिक की वृद्धि: मैदानी इलाकों में ₹22 हजार और पहाड़ियों में ₹28 हजार प्रति हेक्टेयर

वाटरशेड विकास कार्यक्रम (PMKSY-WDC 2.0) में किए गए ऐतिहासिक सुधारों के तहत परियोजना क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर उपलब्ध वित्तीय सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।

पहले मैदानी क्षेत्रों में केवल 12 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर अब 22 हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं पथरीले, ढलानदार और कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में यह राशि 15 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधे 28 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। इस बढ़ी हुई राशि से खेत स्तर पर मेड़बंदी, गली प्लग, चेकडैम और जलस्रोतों का निर्माण और अधिक तकनीकी मजबूती के साथ किया जा सकेगा।

अवधि 7 से घटकर 5 वर्ष: किसानों को तेजी से मिलेगा विकास का लाभ

वाटरशेड विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली अनावश्यक देरी को समाप्त करने के लिए परियोजना अवधि में बड़ा नीतिगत सुधार किया गया है। अब यह कार्य 7 वर्ष के बजाय 5 वर्ष में पूरा करना अनिवार्य होगा।

परियोजना अवधि घटने से जल संरक्षण संरचनाएं समय पर बनकर तैयार होंगी, जिससे वर्षा आधारित और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भू-जल स्तर तेजी से सुधरेगा। जिन इलाकों में किसान पहले पानी की कमी से एक भी फसल नहीं ले पाते थे, वहां अब न केवल खरीफ बल्कि रबी सीजन में दूसरी और अतिरिक्त फसल लेने के रास्ते खुलेंगे।


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2 अक्टूबर गांधी जयंती से 16 ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं से शुरुआत

इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए 2 अक्टूबर 2026 से ग्राम सभाओं के माध्यम से शुरुआत की जा रही है। जिले की चयनित 16 ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों के बीच खुली चर्चा होगी, जिसमें स्थानीय जरूरतों के अनुसार जल संरक्षण का खाका तैयार किया जाएगा।

ग्राम सभाओं के उपरांत राज्य, जिला तथा PMKSY-WDC 2.0 परियोजना स्तर पर ‘रिफॉर्म उत्सव’ की विभिन्न तकनीकी और जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इससे सरकारी योजनाओं में ग्रामीणों का सामुदायिक स्वामित्व (Community Ownership) स्थापित होगा।

फसल विविधीकरण, बागवानी और उन्नत बीजों से बढ़ेगी किसानों की आय

वाटरशेड विकास का लक्ष्य केवल पानी रोकना नहीं, बल्कि खेत की उत्पादकता बढ़ाकर किसान की जेब में आय पहुंचाना है।

मिट्टी में नमी बढ़ने के साथ ही किसानों को स्थानीय जलवायु के अनुकूल उन्नत और प्रमाणित बीज, आधुनिक कृषि उपकरण, फसल विविधीकरण (Crop Diversification), फलदार पौधों की बागवानी और कृषि-वानिकी (Agroforestry) से जोड़ा जा रहा है। इससे वर्षा आधारित खेती करने वाले छोटे और सीमांत किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित होगी।

‘फाइल से लाइफ’ तक: सरकारी कागजों से निकलकर खेतों तक पहुंचे सुधार

धमतरी जिले में कृषि विभाग द्वारा जिला और परियोजना स्तर पर मैदानी अमले को सक्रिय कर दिया गया है। पूर्व में आयोजित ‘वाटरशेड यात्रा’ और ‘वाटरशेड महोत्सव’ के अनुभवों का उपयोग करते हुए ग्रामीणों को जल संरचनाओं के रख-रखाव के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

वाटरशेड सुधारों का व्यापक विजन योजनाओं को प्रशासनिक फाइलों से निकालकर ग्रामीण परिवारों के वास्तविक जीवन (‘फाइल से लाइफ’) तक पहुंचाना है। यह पहल ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य के तहत देश को सूखा-मुक्त और जल-सुरक्षित बनाने की दिशा में मजबूत आधार बनेगी।

“वाटरशेड विकास का मूल उद्देश्य योजनाओं को केवल फाइलों तक सीमित न रखकर खेत, पानी और किसान की जिंदगी से जोड़ना है। प्रति हेक्टेयर राशि बढ़ने और अवधि घटने से धमतरी के सूखा प्रभावित अंचलों में समृद्धि का नया दौर शुरू होगा। जब समुदाय स्वयं जल संरक्षण की जिम्मेदारी लेता है, तभी वास्तविक बदलाव आता है।”— शशिरत्न पराशर, उप संचालक, कृषि विभाग, धमतरी

धमतरी के किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • दोहरी फसल से बढ़ी पैदावार: खेतों में जलभराव और नमी संरक्षण होने से किसान धान के बाद दलहन, तिलहन और सब्जियों की दूसरी फसल ले सकेंगे।
  • खेतों की उपजाऊ मिट्टी की सुरक्षा: मेड़बंदी और चेकडैम बनने से तेज बारिश में बहने वाली उपजाऊ ऊपरी मिट्टी का कटाव रुकेगा, जिससे खाद का खर्च घटेगा।
  • भू-जल स्तर में सुधार: जल संरचनाओं से भू-जल रिचार्ज होगा, जिससे गांवों के नलकूप, हैंडपंप और कुएं गर्मियों के दिनों में भी नहीं सूखेंगे।

वाटरशेड विकास सुधारों के मुख्य आंकड़े एक नजर में

  • अभियान का नाम: PMKSY Watershed Reform Utsav (रिफॉर्म उत्सव)
  • शुरुआत की तारीख: 02 अक्टूबर 2026 (गांधी जयंती)
  • प्राथमिक दायरा: धमतरी जिले की 16 ग्राम पंचायतें
  • मैदानी क्षेत्र बजट: ₹12,000 से बढ़ाकर ₹22,000 प्रति हेक्टेयर
  • पहाड़ी क्षेत्र बजट: ₹15,000 से बढ़ाकर ₹28,000 प्रति हेक्टेयर
  • परियोजना अवधि: 7 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष
  • नोडल योजना: PMKSY-WDC 2.0 (जन योजना अभियान के साथ समन्वय)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

PMKSY Watershed Reform Utsav की शुरुआत कब और कहां से हो रही है?

इसकी शुरुआत 2 अक्टूबर 2026 से धमतरी जिले की 16 ग्राम पंचायतों में आयोजित विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से की जा रही है।

वाटरशेड विकास योजना में प्रति हेक्टेयर कितनी राशि बढ़ाई गई है?

मैदानी क्षेत्रों में बजट ₹12,000 से बढ़ाकर ₹22,000 प्रति हेक्टेयर तथा पहाड़ी व कठिन क्षेत्रों में ₹15,000 से बढ़ाकर ₹28,000 प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है।

वाटरशेड परियोजनाओं की समय-सीमा में क्या बदलाव हुआ है?

परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समय-सीमा को 7 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है ताकि किसानों को समय रहते योजनाओं का लाभ मिल सके।

‘फाइल से लाइफ’ विजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं और सुधारों को केवल कागजों में न रखकर खेतों, जलस्रोतों और ग्रामीण परिवारों की वास्तविक आजीविका तक पहुंचाना है।

स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur / धमतरी) | विशेष लेख: शशिरत्न पराशर (उप संचालक)

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