छत्तीसगढ़ को मिला प्रतिष्ठित SKOCH Gold Award: जनजातीय विरासत और वनाधिकार संरक्षण में रचा इतिहास, जानिए किन योजनाओं को मिला सम्मान

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रायपुर, 27 सितंबर: छत्तीसगढ़ के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जनजातीय विरासत के संरक्षण, आधुनिक संग्रहालयों के निर्माण और वनाधिकार पट्टों की सुरक्षा के लिए राज्य को प्रतिष्ठित ‘SKOCH Gold Award’ से सम्मानित किया गया है। विभाग को यह राष्ट्रीय पुरस्कार दो प्रमुख नवाचारों—’आदि विरासत’ (AADI VIRASAT) और ‘मोर वनाधिकार, मोर उत्तराधिकार’ के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रदान किया गया है। जूरी मूल्यांकन और देशव्यापी पब्लिक वोटिंग के बाद छत्तीसगढ़ के इस मॉडल को देश में सर्वश्रेष्ठ चुना गया।

मुख्य बिंदु:

  • जनजातीय कल्याण और वनाधिकार संरक्षण में उत्कृष्ट कार्यों के लिए छत्तीसगढ़ को मिला प्रतिष्ठित SKOCH Gold Award।
  • तत्कालीन टीम लीडर एवं प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा (IAS) ने जूरी के समक्ष रखा था राज्य का पक्ष।
  • ‘आदि विरासत’ के तहत AR/VR और 3D तकनीक से सुसज्जित दो भव्य जनजातीय संग्रहालयों का हुआ निर्माण।
  • ‘मोर वनाधिकार, मोर उत्तराधिकार’ से वनाधिकार पट्टों को मिला पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित कानूनी आधार।

सोनमणि बोरा के नेतृत्व में प्रस्तुतीकरण, जूरी और पब्लिक वोटिंग में अव्वल

इस प्रतिष्ठित सम्मान के चयन के लिए तीन स्तरीय कड़े मूल्यांकन से गुजरना पड़ा। तत्कालीन टीम लीडर एवं प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने संयुक्त सचिव बी.के. राजपूत और ओएसडी श्रीकांत शुक्ला के साथ राष्ट्रीय जूरी के समक्ष दोनों नवाचारी परियोजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

जूरी के तकनीकी विश्लेषण और देश भर से मिली पब्लिक वोटिंग में छत्तीसगढ़ के प्रोजेक्ट्स को अव्वल स्थान प्राप्त हुआ, जिसके बाद स्कॉच ग्रुप ने राज्य को गोल्ड मेडल से नवाजा।

‘आदि विरासत’: AR/VR तकनीक से जीवंत हुआ आदिवासी इतिहास

‘आदि विरासत’ परियोजना के तहत राज्य में दो विश्वस्तरीय संग्रहालयों का निर्माण किया गया है। इनमें नवा रायपुर स्थित ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ प्रमुख है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। वहीं राज्य के पहले जनजातीय संग्रहालय का लोकार्पण मुख्यमंत्री द्वारा किया गया।

इन संग्रहालयों में डिजिटल तकनीक, ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), वर्चुअल रियलिटी (VR) और 3D ऑडियो-विजुअल माध्यमों का उपयोग किया गया है, जिससे नई पीढ़ी आदिवासी नायकों के शौर्य, स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और समृद्ध लोक संस्कृति को सजीव रूप में देख और महसूस कर सकती है।


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‘मोर वनाधिकार, मोर उत्तराधिकार’: पट्टों को बनाया स्थायी अधिकार

आदिवासी कल्याण की दिशा में दूसरा बड़ा नवाचार ‘मोर वनाधिकार, मोर उत्तराधिकार’ अभियान रहा। इसमें वनाधिकार को केवल एक बार मिलने वाला पट्टा न मानकर पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाली सतत व्यवस्था में बदला गया।

मूल पट्टाधारक के निधन के बाद उनके वारिसों के नाम पर राजस्व और वन अभिलेखों का समयबद्ध ऑनलाइन अद्यतन किया जा रहा है। इसके साथ ही इन हितग्राहियों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), सिंचाई पंप, फसल बीमा और मनरेगा जैसी योजनाओं से सीधे जोड़कर उनकी आजीविका सुरक्षित की गई है।

“यह सम्मान छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों की अस्मिता, गौरवशाली इतिहास और उनके जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का राष्ट्रीय प्रमाण है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से आदिवासी नायकों के बलिदान को अमर बनाना और वनाधिकारों को उत्तराधिकार से जोड़ना अधिकार-आधारित सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण है।”— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

आदिवासी समाज और आम नागरिकों के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • पीढ़ियों तक जमीन की सुरक्षा: ‘मोर वनाधिकार’ के तहत अब वनभूमि पट्टाधारकों के वारिसों को नाम सुधार या नामांतरण के लिए भटकना नहीं पड़ता, जिससे जमीन छिनने का डर खत्म हो गया है।
  • सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ: वनाधिकार भूमि का रिकॉर्ड दुरुस्त होने से आदिवासी परिवारों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण, खाद-बीज और सरकारी योजनाओं की सब्सिडी मिल रही है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक गौरव: हाई-टेक संग्रहालय बनने से देश-विदेश के शोधार्थियों और पर्यटकों के बीच छत्तीसगढ़ के जनजातीय इतिहास और परंपराओं को नई पहचान मिली है।

पुरस्कृत दोनों प्रमुख परियोजनाओं की रूपरेखा

  • आदि विरासत (AADI VIRASAT): शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय और राज्य जनजातीय संग्रहालय का निर्माण; आधुनिक डिजिटल और इमर्सिव तकनीक का समावेश।
  • मोर वनाधिकार, मोर उत्तराधिकार: वनाधिकार पट्टों का उत्तराधिकार नामांतरण, डिजिटल रिकॉर्ड संधारण और आजीविका योजनाओं से शत-प्रतिशत लिंकेज।
  • चयन प्रक्रिया: विशेषज्ञ जूरी समीक्षा, प्रोजेक्ट मूल्यांकन और राष्ट्रीय स्तर पर पब्लिक वोटिंग।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

छत्तीसगढ़ को किस क्षेत्र में SKOCH Gold Award मिला है?

छत्तीसगढ़ के जनजातीय कल्याण विभाग को जनजातीय विरासत के डिजिटल संरक्षण और ‘मोर वनाधिकार’ सुधारों के सफल क्रियान्वयन के लिए यह राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है।

‘आदि विरासत’ परियोजना के तहत कौन से संग्रहालय बनाए गए हैं?

इसके तहत नवा रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय और राज्य का पहला जनजातीय संग्रहालय निर्मित किया गया है।

‘मोर वनाधिकार, मोर उत्तराधिकार’ पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य वनभूमि पट्टाधारकों के निधन के बाद उनके परिजनों को कानूनी उत्तराधिकार दिलाना और उन्हें विभिन्न कृषि व आजीविका योजनाओं से जोड़ना है।

स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur)

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