रायपुर, 27 सितंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 138वीं कड़ी में छत्तीसगढ़ के नवाचारी ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान की जमकर सराहना की है। प्रधानमंत्री ने पोषण माह के संदर्भ में कहा कि कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ जंग में छत्तीसगढ़ के लोग पौष्टिक मुनगा (सहजन/मोरिंगा) को अपनी रोजमर्रा की थाली का हिस्सा बनाकर जनभागीदारी की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने इस राष्ट्रीय पहचान पर हर्ष जताते हुए कहा कि स्थानीय संसाधनों से पोषण क्रांति लाने की यह मुहिम पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बनी है।
मुख्य बिंदु:
- ‘मन की बात’ के 138वें एपिसोड में पीएम नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान का किया विशेष उल्लेख।
- कुपोषण से निपटने और पोषण माह में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए मुनगा (मोरिंगा) के उपयोग को सराहा।
- संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवा रायपुर स्थित शासकीय निवास में सुना प्रसारण; इसे बताया प्रदेश का गौरव।
- आंगनबाड़ी केंद्रों, ग्रामीण घरों और बाड़ियों में मुनगा पौधारोपण कर आहार में शामिल करने का चल रहा महाअभियान।
पोषण माह में राष्ट्रीय फलक पर चमकी छत्तीसगढ़ की पहल
सितंबर माह को देश भर में राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेखांकित किया कि कैसे छत्तीसगढ़ में स्थानीय स्तर पर आसानी से उगने वाले मुनगे को कुपोषण उन्मूलन का मजबूत माध्यम बना दिया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि खान-पान में स्थानीय और प्राकृतिक चीजों को शामिल करने का यह प्रयास दिखाता है कि जब समाज और सरकार मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव संभव होते हैं।
सुपरफूड है मुनगा: कुपोषण और एनीमिया से लड़ने में अचूक हथियार
वैज्ञानिक दृष्टि से सहजन यानी मुनगा (मोरिंगा) को ‘सुपरफूड’ माना जाता है। इसकी पत्तियों और फलियों में प्रचुर मात्रा में आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, सी और प्रोटीन पाया जाता है।
छत्तीसगढ़ सरकार इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों की महिलाओं और बच्चों को मुनगे की पत्तियों का पाउडर, सूप और सब्जियां दैनिक भोजन में शामिल करने के लिए प्रेरित कर रही है, जिससे महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) और बच्चों में कुपोषण की समस्या तेजी से दूर हो रही है।
‘स्थानीय संसाधनों से बड़ा सामाजिक बदलाव’: राजेश अग्रवाल
नवा रायपुर में ‘मन की बात’ सुनने के बाद संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि देश के सर्वोच्च मंच से छत्तीसगढ़ की जमीनी कोशिशों को सराहा जाना हर प्रदेशवासी के लिए गर्व का क्षण है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और जंगलों का प्रदेश नहीं है, बल्कि यहां का पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी समाज को स्वस्थ बनाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान का उल्लेख करना प्रदेश की सकारात्मक सोच और जनभागीदारी का सम्मान है। मुनगा हमारे घरों की बाड़ियों में आसानी से उगने वाला अमृततुल्य पौधा है। इस राष्ट्रीय पहचान से प्रदेश में पोषण के प्रति जागरूकता को और नई ऊर्जा मिलेगी।”— राजेश अग्रवाल, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री, छत्तीसगढ़
आम जनता और माताओं-बच्चों के लिए इसके क्या मायने हैं?
- बिना अतिरिक्त खर्च के संतुलित पोषण: मुनगे के पेड़ घर की बाड़ी में आसानी से लग जाते हैं, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को महंगे सप्लीमेंट्स के बिना प्राकृतिक प्रोटीन और विटामिन्स मिलते हैं।
- एनीमिया की दर में गिरावट: गर्भवती और धात्री माताओं के भोजन में मुनगा शामिल होने से नवजात शिशुओं के वजन में सुधार और माताओं में खून की कमी दूर होती है।
- सामुदायिक वानिकी को बढ़ावा: आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों और पंचायत परिसरों में मुनगा पौधे लगाने से गांवों में हरित आवरण के साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है।
पृष्ठभूमि: क्या है ‘हर घर मुनगा’ अभियान और क्यों खास है मोरिंगा?
छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य के तहत ‘हर घर मुनगा’ अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान के तहत घरों, आंगनबाड़ियों और सार्वजनिक स्थानों पर सहजन की उन्नत किस्मों के पौधे बांटे जा रहे हैं।
दूध से कई गुना ज्यादा कैल्शियम और पालक से कई गुना ज्यादा आयरन समेटे मुनगा छत्तीसगढ़ के खान-पान का पारंपरिक हिस्सा रहा है, जिसे अब शासन ने वैज्ञानिक पोषण रणनीति से जोड़ दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
‘मन की बात’ के 138वें एपिसोड में पीएम मोदी ने छत्तीसगढ़ के किस अभियान की सराहना की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुपोषण के खिलाफ चलाए जा रहे छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान की सराहना की है।
‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर सुलभ और पोषक तत्वों से भरपूर मुनगे (सहजन) को लोगों की दैनिक थाली का हिस्सा बनाकर कुपोषण व एनीमिया को जड़ से मिटाना है।
मुनगा (मोरिंगा) स्वास्थ्य के लिए क्यों इतना लाभकारी माना जाता है?
मुनगे की पत्तियों और फलियों में भरपूर मात्रा में आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur)