बेमेतरा में 26-27 सितंबर को जुटेगा साहित्यकारों का महाकुंभ: प्रांतीय राजभाषा सम्मेलन के लिए CM साय को मिला न्योता

Chhattisgarh Rajbhasha Aayog Chairman Prabhat Mishra invites CM Vishnu Deo Sai for Bemetara language conference Chhattisgarh Rajbhasha Aayog Chairman Prabhat Mishra invites CM Vishnu Deo Sai for Bemetara language conference

रायपुर, 25 सितंबर: छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात कर उन्हें बेमेतरा में 26 और 27 सितंबर को आयोजित होने वाले दो दिवसीय प्रांतीय राजभाषा सम्मेलन में शामिल होने का न्योता दिया। मुख्यमंत्री ने आयोजन की तैयारियों की जानकारी लेते हुए सम्मेलन की सफलता के लिए आयोग को अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

मुख्य बिंदु:

  • बेमेतरा जिले में 26 और 27 सितंबर को आयोजित होगा दो दिवसीय प्रांतीय राजभाषा सम्मेलन।
  • राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सौंपा औपचारिक निमंत्रण।
  • प्रदेशभर के साहित्यकार, भाषाविद्, लेखक और शोधकर्ता छत्तीसगढ़ी भाषा व लोक संस्कृति के संवर्धन पर करेंगे मंथन।
  • प्रशासनिक कामकाज में छत्तीसगढ़ी के प्रभावी उपयोग और नई पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ने पर रहेगा विशेष फोकस।

बेमेतरा में जुटेगा भाषा और साहित्य का महाकुंभ

छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य के विकास को समर्पित यह दो दिवसीय सम्मेलन साहित्यकारों, विद्वानों और भाषा विशेषज्ञों को एक साझा वैचारिक मंच प्रदान करेगा। रायपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास में हुई सौजन्य भेंट के दौरान आयोग अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने मुख्यमंत्री को सम्मेलन के तकनीकी सत्रों, आमंत्रित वक्ताओं और प्रशासनिक तैयारियों का पूरा ब्योरा सौंपा।

सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से लेखक, कवि और लोक साहित्य से जुड़े प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल होंगे, जिससे राज्यभर के बौद्धिक विमर्श को एक नई दिशा मिलेगी।

नई पीढ़ी से संवाद और राजभाषा का प्रभावी प्रयोग

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण के साथ-साथ इसे आधुनिक शिक्षा और प्रशासनिक व्यवहार से जोड़ना है। दो दिनों के दौरान विभिन्न सत्रों में लोक साहित्य, पंडवानी, भरथरी जैसी पारंपरिक विधाओं के संरक्षण, डिजिटल माध्यमों में छत्तीसगढ़ी सामग्री के विस्तार और युवाओं में मातृभाषा के प्रति स्वाभिमान जगाने पर खुली चर्चा होगी।

विशेषज्ञ इस बात पर भी मंथन करेंगे कि आधुनिक संचार माध्यमों और सोशल मीडिया के दौर में क्षेत्रीय भाषा को कैसे और अधिक प्रासंगिक तथा उपयोगी बनाया जाए।

“छत्तीसगढ़ी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी माटी की पहचान है। बेमेतरा में आयोजित हो रहा सम्मेलन प्रदेश के रचनाकारों और भाषा प्रेमियों को एक सूत्र में पिरोकर भाषा के संरक्षण और विस्तार की नई दिशा तय करेगा।”— प्रभात मिश्रा, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग

आम जनता और साहित्य प्रेमियों के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • प्रशासनिक कामकाज में छत्तीसगढ़ी को बढ़ावा: ऐसे आयोजनों से छत्तीसगढ़ी भाषा को शासकीय पत्राचार और दैनिक प्रशासनिक कार्यों में शामिल कराने की नीतिगत पहल को मजबूती मिलेगी।
  • स्थानीय रचनाकारों को राज्यस्तरीय मंच: ग्रामीण और कस्बाई अंचलों में लिख रहे युवा साहित्यकारों को वरिष्ठ भाषाविदों के साथ विचार साझा करने और अपनी कृतियों को पहचान दिलाने का सीधा अवसर मिलेगा।
  • नई पीढ़ी में भाषाई स्वाभिमान: युवाओं और विद्यार्थियों को अपनी लोक संस्कृति, मुहावरों और समृद्ध इतिहास से जोड़ने के लिए शैक्षणिक विमर्श की स्पष्ट रूपरेखा तैयार होगी।

पृष्ठभूमि: छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की भूमिका

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का गठन राज्य की मातृभाषा छत्तीसगढ़ी के विकास, इसे राजकाज की भाषा के रूप में सशक्त करने और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में काम करने के लिए किया गया था।

आयोग समय-समय पर जिला और प्रांतीय स्तर पर सम्मेलनों का आयोजन कर शोधकर्ताओं, लेखकों और भाषा कार्यकर्ताओं को एकजुट करता रहा है। बेमेतरा का यह सम्मेलन इसी क्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

सम्मेलन की प्रमुख रूपरेखा

  • तारीख: 26 एवं 27 सितंबर 2026
  • स्थान: जिला मुख्यालय, बेमेतरा (छत्तीसगढ़)
  • आयोजक: छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग
  • प्रमुख विषय: भाषा संरक्षण, साहित्य संवर्धन, डिजिटल विस्तार और नई पीढ़ी में भाषाई जागरूकता

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रांतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन कब और कहां किया जा रहा है?

दो दिवसीय प्रांतीय राजभाषा सम्मेलन 26 और 27 सितंबर को छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में आयोजित किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के वर्तमान अध्यक्ष कौन हैं?

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के वर्तमान अध्यक्ष राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त प्रभात मिश्रा हैं।

बेमेतरा में आयोजित राजभाषा सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और लोक संस्कृति का संरक्षण करना तथा इसे नई पीढ़ी और प्रशासनिक कामकाज से जोड़ना है।

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