Blue Economy India: 11,000 किमी लंबी तटरेखा सिर्फ सीमा नहीं, आर्थिक और सुरक्षा का नया केंद्र— डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026: भारत की विशाल समुद्री तटरेखा अब केवल भौगोलिक सीमा नहीं रह गई है, बल्कि यह देश के विकास, सुरक्षा और पारिस्थितिकी (Ecology) का सबसे बड़ा ‘इंजन’ बनने जा रही है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पीएमओ राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया है कि भारत की तटरेखा को पारिस्थितिकी, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और मानव विकास के एक ‘एकीकृत स्थान’ (Interconnected space) के रूप में देखा जाना चाहिए।

शुक्रवार को ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन कोस्टल इकोलॉजी, सिक्योरिटी एंड सस्टेनेबिलिटी’ (CCESS) 2026 को वर्चुअली संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने Blue Economy India (नीली अर्थव्यवस्था) की अपार संभावनाओं पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पास 11,000 से 12,000 किलोमीटर लंबा तटीय क्षेत्र है, जो दुनिया में सबसे लंबे तटीय क्षेत्रों में से एक है। इस क्षेत्र में छिपे असीम समुद्री संसाधनों का दोहन कर भारत अपनी अर्थव्यवस्था को एक ‘नेक्स्ट लेवल’ पर ले जा सकता है।

डॉ. सिंह ने ‘कोस्टल भारत’ (Coastal Bharat) के समग्र दृष्टिकोण (Holistic approach) का आह्वान किया, जिसमें पृथ्वी विज्ञान, शिक्षा जगत, रक्षा, समुद्री संस्थानों, कानूनी विशेषज्ञों और उद्योग जगत को अलग-अलग (Silos) काम करने के बजाय एक साथ मिलकर काम करना होगा।

तटीय सुरक्षा एवं पारिस्थितिकी सम्मेलन: मुख्य तथ्य (Quick Facts)विवरण
सम्मेलन का नामNational Conference on Coastal Ecology, Security and Sustainability (CCESS) 2026
मुख्य वक्ताडॉ. जितेंद्र सिंह (केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री)
तटरेखा की लंबाई (मंत्री के अनुसार)11,000–12,000 किलोमीटर
स्वदेशी अनुसंधान पोतORV सागर मंथन (ORV Sagar Manthan)
स्वच्छ सागर अभियान 202612 सितंबर से 19 सितंबर 2026 तक

डीप ओशन मिशन और 100% स्वदेशी ‘ORV सागर मंथन’

सम्मेलन में Blue Economy India को तकनीकी ताकत देने के लिए ‘डीप ओशन मिशन’ (Deep Ocean Mission) पर विशेष चर्चा हुई। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत गहरे समुद्र के उन संसाधनों की खोज की ओर बढ़ रहा है, जिन्हें अब तक छुआ नहीं गया है। इसके लिए स्वदेशी क्षमताएं विकसित की जा रही हैं।

इसी कड़ी में, हाल ही में पूर्णतः स्वदेशी अनुसंधान पोत (Research Vessel) ‘ORV सागर मंथन’ (ORV Sagar Manthan) लॉन्च किया गया है। इसके अलावा, समुद्र की गहराई का पता लगाने के लिए रोबोट और सबमर्सिबल (Submersibles) विकसित किए जा रहे हैं। ये प्रयास गहरे समुद्र में अनुसंधान और आत्मनिर्भरता (Self-reliance) की दिशा में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाते हैं।

समुद्री खनिज, ‘ब्लैक सल्फाइट’ और तटीय समुदाय

अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए Blue Economy India के तहत धातु (Metals), खनिज और मत्स्य पालन (Fisheries) को अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया गया। मंत्री ने विशेष रूप से ‘ब्लैक सल्फाइट’ (Black Sulphite) और खनिजों पर हो रहे शोध का उल्लेख किया, जिसे भविष्य में समुद्र से निकाला जा सकता है।

डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि संसाधनों का आर्थिक दोहन करते समय तटीय समुदायों की आजीविका सुधारने और पर्यावरणीय स्थिरता (Environmental sustainability) को बनाए रखने पर भी समान ध्यान देना होगा।

तटीय सुरक्षा में तकनीक का बढ़ता आयाम

आज के समय में तटों की सुरक्षा केवल गश्त (Patrolling) से नहीं हो सकती। डॉ. सिंह ने बताया कि Blue Economy India और तटीय सुरक्षा के लिए ‘ओशन ऑब्जर्वेशन’ (Ocean observation), निगरानी (Surveillance), संचार, रिमोट सेंसिंग, डेटा और उभरती प्रौद्योगिकियां (Emerging technologies) अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन सभी को ‘होलिस्टिक कोस्टल इंडिया’ (समग्र कोस्टल भारत) दृष्टिकोण के माध्यम से एक साथ लाने की जरूरत है।

‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान: 12 से 19 सितंबर

पर्यावरण संरक्षण के लिए पिछले पांच वर्षों से चलाए जा रहे “स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर” (Swachh Sagar Surakshit Sagar) अभियान का भी उल्लेख किया गया।

  • 2022 का रिकॉर्ड: मंत्री ने याद दिलाया कि वर्ष 2022 में 75 दिनों का एक विशाल अभियान चलाया गया था, जिसमें तटीय राज्यों के नागरिकों ने भारी भागीदारी की थी।
  • वर्तमान अभियान (2026): इस वर्ष यह अभियान 12 सितंबर से 19 सितंबर 2026 तक चलेगा।
  • गतिविधियां: इसमें क्लीन-अप ड्राइव (Clean-up drives), एनजीओ की भागीदारी और भारत की तटरेखा को स्वच्छ रखने के लिए ‘नागरिक संकल्प’ (Citizen pledge) शामिल किया गया है।

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UPSC/CGPSC Static Facts: कोस्टलाइन, EEZ और डीप ओशन मिशन

चूंकि डॉ. जितेंद्र सिंह ने Blue Economy India और तटीय पारिस्थितिकी पर नीतिगत बयान दिया है, इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC GS-1 Geography & GS-3 Environment/Security) के छात्रों के लिए ये बुनियादी (Static) तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  • भारत की तटरेखा (Coastline): गृह मंत्रालय (MHA) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत की मुख्य भूमि और द्वीपों की कुल तटरेखा 7,516.6 किमी है। (नोट: मंत्री जी ने अपने भाषण में तटीय ‘पारिस्थितिक क्षेत्र’ और EEZ के व्यापक प्रभाव को शामिल करते हुए 11,000–12,000 किमी का उल्लेख किया है)।
  • EEZ (Exclusive Economic Zone): समुद्र तट से 200 नॉटिकल मील तक का क्षेत्र EEZ कहलाता है। भारत का EEZ लगभग 2.37 मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैला है, जहां समुद्री संसाधनों के दोहन का विशेष अधिकार भारत को है।
  • डीप ओशन मिशन (DOM): पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) की यह योजना है। इसके तहत ‘पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स’ (Polymetallic Nodules) का खनन और ‘मत्स्य 6000’ (Matsya 6000) नामक मानवयुक्त सबमर्सिबल विकसित किया जा रहा है, जो 6000 मीटर की गहराई तक जा सकता है।

विश्लेषण: सिलोस (Silos) से निकलकर ‘होलिस्टिक अप्रोच’ की आवश्यकता

(UPSC Mains Analysis – Internal Security & Governance)

1. सुरक्षा और पारिस्थितिकी का गठजोड़ (Security-Ecology Nexus): मंत्री का यह बयान कि ‘तटीय पारिस्थितिकी और सुरक्षा को अलग-थलग नहीं देखा जा सकता’ एक रणनीतिक सोच है। उदाहरण के लिए, जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ता समुद्री जलस्तर (Sea-level rise) भारत के नौसैनिक अड्डों (Naval bases) और बंदरगाहों के लिए सीधा खतरा है। यदि पारिस्थितिकी बचेगी, तभी सुरक्षा तंत्र काम कर पाएगा।

2. Blue Economy India का ‘मल्टीप्लायर इफेक्ट’: भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। इसके लिए उसे उन खनिजों (जैसे ‘ब्लैक सल्फाइट’ या दुर्लभ मृदा तत्व) की जरूरत है जो जमीन पर कम हैं लेकिन गहरे समुद्र में प्रचुर मात्रा में हैं। ‘ORV सागर मंथन’ जैसी स्वदेशी तकनीक हमें पश्चिमी देशों की तकनीकी निर्भरता से मुक्त करेगी।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. National Conference on Coastal Ecology, Security and Sustainability (CCESS) 2026 को किसने संबोधित किया?

इस राष्ट्रीय सम्मेलन को केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने वर्चुअली संबोधित किया।

Q2. ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान 2026 में कब से कब तक आयोजित किया जा रहा है?

भारत की तटरेखा को साफ रखने के लिए यह अभियान इस वर्ष 12 सितंबर से 19 सितंबर 2026 तक चलाया जा रहा है, जिसमें क्लीन-अप ड्राइव और नागरिक संकल्प शामिल हैं।

Q3. Blue Economy India को बढ़ावा देने के लिए भारत का नया पूर्णतः स्वदेशी अनुसंधान पोत कौन सा है?

गहरे समुद्र में अनुसंधान और अन्वेषण (Exploration) के लिए भारत ने हाल ही में पूर्णतः स्वदेशी अनुसंधान पोत ‘ORV सागर मंथन’ (ORV Sagar Manthan) लॉन्च किया है।

स्रोत (Source)

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB Delhi), 11 सितंबर 2026.

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