रायपुर, 08 सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं और खेती-किसानी से जुड़े लाखों किसानों के लिए नवा रायपुर से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य के सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने Cooperative Department CG (सहकारिता विभाग) की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली है। इस बैठक का सबसे बड़ा फैसला राज्य के को-ऑपरेटिव (सहकारी) बैंकों में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर भर्ती प्रक्रिया को तुरंत तेज करने का निर्देश देना रहा है।
डिजिटल इंडिया के दौर में कदमताल करते हुए मंत्री श्री कश्यप ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और ‘किसान-हितैषी’ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि बैंकों में रिक्त पदों की भर्ती की कार्यवाही में किसी भी प्रकार की लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि आधुनिक बैंकिंग सेवाओं के जरिए किसानों का भरोसा सहकारी प्रणाली पर और अधिक मजबूत किया जा सके।
बैठक में केवल भर्तियों पर ही नहीं, बल्कि किसानों को दिए जाने वाले हजारों करोड़ के कृषि ऋण (Farm Loans), पैक्स (PACS) के शत-प्रतिशत कंप्यूटराइजेशन और प्रदेश भर में बन रहे सैकड़ों गोदामों के निर्माण कार्यों की भी बारीकी से समीक्षा की गई, ताकि शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े किसान तक पहुंच सके।
| सहकारिता विभाग समीक्षा: मुख्य तथ्य (Quick Facts) | विवरण |
|---|---|
| बैठक की अध्यक्षता | श्री केदार कश्यप (सहकारिता मंत्री) |
| बड़ा फैसला (रोजगार) | को-ऑपरेटिव बैंकों में रिक्त पदों की भर्ती में तेजी |
| कृषि ऋण वितरण (खरीफ 2026) | 16 लाख+ किसानों को ₹7973 करोड़ का लोन वितरित |
| RIDF गोदाम निर्माण | 725 में से 718 गोदामों का निर्माण पूर्ण |
| विमोचन (लॉन्च) | सहकारी सप्ताह (29 जून-6 जुलाई) पर आधारित कॉफी-टेबल बुकलेट |
कृषि ऋण वितरण: 16 लाख किसानों को 7973 करोड़ का लोन
Cooperative Department CG की इस समीक्षा बैठक में अल्पकालीन कृषि ऋणों पर ब्याज अनुदान, और समय पर खाद-बीज वितरण की समीक्षा की गई। मंत्री ने निम्नलिखित सटीक आंकड़े प्रस्तुत किए:
- खरीफ सीजन 2026 का लक्ष्य: किसानों को को-ऑपरेटिव बैंकों के माध्यम से कुल 8800 करोड़ रुपये का कृषि ऋण बांटने का लक्ष्य रखा गया है।
- अब तक की उपलब्धि: इस लक्ष्य के विरुद्ध अब तक प्रदेश के 16 लाख से अधिक किसानों को 7973 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है (जो कि लक्ष्य का 90% है)। अधिकारियों को इसे जल्द 100% करने के निर्देश दिए गए हैं।
पैक्स का डिजिटलाइजेशन, माइक्रो ATM और नए गोदाम
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए Cooperative Department CG द्वारा कई ढांचागत सुधार (Structural Reforms) किए जा रहे हैं:
- PACS (प्राथमिक कृषि साख समिति): सभी पैक्स के शत-प्रतिशत कम्प्यूटराइज़ेशन और अंकेक्षण (ऑडिट) प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देश दिए गए, ताकि वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी रहे। नवगठित 515 पैक्स के सुचारू संचालन का भी आदेश दिया गया।
- डिजिटल बैंकिंग: ग्रामीण अंचलों में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का विस्तार करने तथा माइक्रो ए.टी.एम. (Micro ATM) की उपलब्धता बढ़ाने पर बल दिया गया।
- गोदाम निर्माण: 100 सोसायटियों में गोदाम निर्माण की समीक्षा हुई। इसके अलावा RIDF (ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष) के अंतर्गत आवंटित 725 गोदामों में से 718 गोदामों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। शेष 7 गोदाम जल्द पूरे किए जाएंगे।
सुशासन और कॉफी-टेबल बुकलेट का विमोचन
बैठक में मंत्री श्री कश्यप ने 29 जून से 06 जुलाई 2026 तक छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘सहकारी सप्ताह’ पर आधारित एक आकर्षक ‘कॉफी-टेबल बुकलेट’ का विमोचन भी किया।
प्रशासनिक कसावट (Governance) के लिए सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) के प्रकरणों का शीघ्र निराकरण, कोर्ट केस में समय पर जवाबदावा, कार्यालयों में ई-ऑफिस (e-Office) और आधार-बेस्ड उपस्थिति (Aadhaar-based attendance) लागू करने के कड़े निर्देश दिए गए। साथ ही धान उपार्जन केंद्रों में बचे धान का पारदर्शी तरीके से अंतिम निराकरण करने को कहा गया।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी (CGPSC Facts)
इस उच्च स्तरीय बैठक में सहकारिता और बैंकिंग सेक्टर के निम्नलिखित प्रमुख अधिकारी मौजूद थे:
- डॉ. सी.आर. प्रसन्ना: सचिव, सहकारिता विभाग
- श्री रमेश शर्मा: आयुक्त सहकारिता व पंजीयक सहकारी संस्थाएं
- श्री युगल किशोर: अपेक्स बैंक महाप्रबंधक एवं प्रभारी प्रबंध संचालक
- श्री यू.बी.एस. राठिया: अपर पंजीयक
- श्रीमती सावित्री भगत: अपर पंजीयक
- समस्त संभागीय संयुक्त आयुक्त, उप/सहायक आयुक्त और जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के CEO।
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UPSC/CGPSC Static Facts: PACS और RIDF क्या है?
चूंकि यह बैठक Cooperative Department CG की आधारभूत संरचना पर केंद्रित थी, इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC Paper-5 Economy / UPSC GS-3) के छात्रों के लिए इन तकनीकी (Static) शब्दों को समझना बहुत जरूरी है:
- PACS (Primary Agricultural Credit Societies): पैक्स भारत में अल्पकालिक सहकारी ऋण संरचना (Short-term cooperative credit structure) का सबसे निचला (ग्राम पंचायत स्तर का) हिस्सा है। यह सीधे किसानों से जुड़कर उन्हें खाद, बीज और नकद ऋण प्रदान करता है। सरकार अब इन्हें ‘मल्टी-परपज’ बनाकर CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) से जोड़ रही है।
- RIDF (Rural Infrastructure Development Fund): ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष की स्थापना 1995-96 में भारत सरकार द्वारा की गई थी। इसका रखरखाव ‘नाबार्ड’ (NABARD) द्वारा किया जाता है। जो वाणिज्यिक बैंक कृषि क्षेत्र (Priority Sector Lending) में अपना लोन लक्ष्य पूरा नहीं कर पाते, उन्हें अपनी शेष राशि इस फण्ड में जमा करनी होती है। इसी फण्ड से राज्यों में गोदाम और सिंचाई परियोजनाएं बनती हैं।
विश्लेषण: पैक्स का कम्प्यूटराइज़ेशन क्यों है गेम चेंजर?
(CGPSC Mains Analysis – Rural Economy)
1. भ्रष्टाचार पर लगाम: सहकारी समितियों में अक्सर फर्जी ऋण खातों और धान तौल में गड़बड़ी की शिकायतें आती हैं। शत-प्रतिशत कम्प्यूटराइज़ेशन और ऑडिट (Audit) से एक क्लिक पर पता चल जाएगा कि किस किसान को कितना ऋण मिला है, जिससे सिस्टम में मौजूद ‘बिचौलिए’ (Middlemen) खत्म होंगे।
2. माइक्रो ATM और वित्तीय समावेशन: ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक की शाखाएं दूर होती हैं। सहकारी समितियों में ‘माइक्रो एटीएम’ (Micro ATM) लगने से किसान अपने गांव में ही आसानी से पैसे निकाल सकेंगे। यह ‘डिजिटल भारत’ और ‘वित्तीय समावेशन’ (Financial Inclusion) का सबसे बेहतरीन ग्रामीण मॉडल है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. Cooperative Department CG की समीक्षा बैठक में रोजगार को लेकर क्या बड़ा निर्देश दिया गया?
सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने राज्य के को-ऑपरेटिव (सहकारी) बैंकों में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों पर भर्ती की कार्यवाही में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
Q2. खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ में कृषि ऋण वितरण का क्या लक्ष्य है?
खरीफ सीजन 2026 के लिए को-ऑपरेटिव बैंकों के माध्यम से 8800 करोड़ रुपये का कृषि ऋण बांटने का लक्ष्य है, जिसमें से अब तक 16 लाख से अधिक किसानों को 7973 करोड़ रुपये (90%) बांटे जा चुके हैं।
Q3. पैक्स (PACS) क्या है और बैठक में इनके लिए क्या निर्देश दिए गए?
PACS (प्राथमिक कृषि साख समितियां) ग्रामीण स्तर पर किसानों को ऋण और खाद-बीज देती हैं। मंत्री ने सभी पैक्स के शत-प्रतिशत कम्प्यूटराइज़ेशन और ऑडिट प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देश दिए हैं।
स्रोत (Source)
छत्तीसगढ़ शासन, जनसंपर्क विभाग (DPRCG), 08 सितंबर 2026, रायपुर।