Published on 07 August 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
छत्तीसगढ़ श्रम विभाग योजनाएं के माध्यम से राज्य के संगठित, असंगठित और निर्माण श्रमिकों के जीवन स्तर में क्रांतिकारी बदलाव लाना साय सरकार की मुख्य प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और श्रम एवं उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में पिछले ढाई वर्षों (1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026) के दौरान राज्य के श्रम कल्याण क्षेत्र का कायाकल्प किया गया है।
इस अवधि में विभाग ने श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए न केवल 67 कल्याणकारी योजनाओं का दायरा बढ़ाया, बल्कि तकनीकी नवाचार और सुशासन के माध्यम से लाभ वितरण को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है। वर्तमान में राज्य के सभी 33 जिलों में प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण सुनिश्चित करते हुए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के जरिए सीधे हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा रहा है।
| महत्वपूर्ण संकेतक | छत्तीसगढ़ श्रम विभाग की उपलब्धियां और प्रमुख आंकड़े |
|---|---|
| संबद्ध मंत्रालय व विभाग | श्रम विभाग, छत्तीसगढ़ शासन (Minister: Shri Lakhanlal Dewangan) |
| कुल कल्याणकारी योजनाएं | संगठित, असंगठित और निर्माण श्रमिकों के लिए कुल 67 योजनाएं संचालित |
| नए श्रमिकों का पंजीयन | ढाई वर्षों (जनवरी 2024 – जून 2026) में 12.65 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन |
| कुल लाभान्वित श्रमिक | लगभग 17.82 लाख श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ मिला |
| वितरित कुल हितलाभ राशि | ₹800 करोड़ से अधिक का प्रत्यक्ष भुगतान (डीबीटी के माध्यम से) |
| आवास सहायता राशि | मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता के तहत राशि बढ़ाकर ₹1.50 लाख की गई |
| मातृत्व सहायता (मिनीमाता योजना) | 1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को प्रत्यक्ष मातृत्व सहायता प्रदान की गई |
| भोजन योजना (वीरनारायण सिंह योजना) | शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत मात्र ₹5 में पौष्टिक भोजन |
| डिजिटल गवर्नेंस टूल्स | श्रमेव जयते नया यूजर-फ्रेंडली पोर्टल और ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल ऐप विकसित |
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‘श्रमेव जयते’ पोर्टल और मोबाइल ऐप से डिजिटल सुशासन
लंबे समय से ग्रामीण और सुदूर वनांचल अंचलों के श्रमिकों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटना और योजनाओं के लिए आवेदन करना एक बड़ी चुनौती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए विभाग ने डिजिटल क्रांति का सहारा लिया है:
- सरल ऑनलाइन पंजीयन प्रणाली: विभाग ने एक नया और अत्यंत सुगम वेब पोर्टल shramevjayate.cg.gov.in और ‘श्रमेव जयते’ mobile app विकसित किया है। इसके माध्यम से श्रमिक अब अपने मोबाइल से ही घर बैठे ऑनलाइन पंजीकरण, नवीनीकरण (Renewal) और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए सीधे आवेदन कर सकते हैं।
- मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र (24/7): श्रमिकों की शिकायतों के त्वरित निवारण और सहायता के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन केंद्र स्थापित किया गया है, जो मुख्य रूप से प्रसिद्ध चौबीसों घंटे और सातों दिन (24/7) कार्य करता है। इसके अतिरिक्त, दूरस्थ क्षेत्रों में विशेष मोबाइल शिविर आयोजित कर लाखों श्रमिकों की ऑन-स्पॉट समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है।
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मिनीमाता महतारी जतन योजना और सामाजिक सुरक्षा का मजबूत ढांचा
श्रम विभाग ने महिला श्रमिकों और भावी पीढ़ियों के सामाजिक व स्वास्थ्य सुधार के लिए कई कड़े और संवेदनशील नीतिगत निर्णय लिए हैं:
- मातृत्व सुरक्षा (मिनीमाता महतारी जतन योजना): इसके अंतर्गत निर्माण और असंगठित क्षेत्र की लगभग 1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान सीधे उनके बैंक खातों में मातृत्व वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, ताकि इस संवेदनशील अवधि में उन्हें काम पर जाने की मजबूरी न रहे।
- मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना: घर बनाने के सपने को साकार करने के लिए आवास सहायता राशि को बढ़ाकर सीधे ₹1.50 लाख किया गया है।
- शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना: पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को कार्यस्थलों के समीप गर्म, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन मात्र ₹5 में उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उनकी पोषण सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है।
- मेधावी शिक्षा सहायता और निःशुल्क कोचिंग: श्रमिक परिवारों के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग और विशेष छात्रवृत्ति योजनाओं का प्रभावी संचालन किया जा रहा है, ताकि गरीबी किसी बच्चे की शिक्षा में बाधा न बने।
श्रम कानूनों में बदलाव और 33 जिलों में प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण
प्रशासनिक पहुंच को चुस्त-दुरुस्त बनाने और उद्योगों व श्रमिकों के बीच एक बेहतर कार्य-संस्कृति विकसित करने के लिए कई कड़े विनियामक और ढांचागत बदलाव किए गए हैं:
- सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालय: राज्य के नव-निर्मित 5 जिलों (मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती) में नए श्रम अधिकारी कार्यालयों की स्थापना की गई है, जिसके लिए 20 नवीन पदों का सृजन किया गया है। अब राज्य के सभी 33 जिलों में स्वतंत्र रूप से श्रम कार्यालय संचालित हैं।
- श्रम कानूनों का आधुनिकीकरण: महिला श्रमिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कड़े विनियामक नियमों के साथ रात्रिकालीन पाली (Night Shift) में कार्य करने की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही दुकानों एवं स्थापना अधिनियम का सरलीकरण, फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट (Fixed Term Employment) को कानूनी मान्यता और फैक्ट्री लाइसेंस की अवधि बढ़ाने जैसे ऐतिहासिक सुधारों ने रोजगार सृजन के साथ श्रमिक अधिकारों को भी मजबूत किया है।
UPSC & CGPSC Prelims Fact Box: Minimata, Shramik Anna & Fixed Term Employment
- मिनीमाता (Minimata): छत्तीसगढ़ की पहली महिला सांसद (वर्ष 1952 में लोकसभा के लिए निर्वाचित)। वे सामाजिक सुधारों, छुआछूत उन्मूलन और दलित व महिला अधिकारों की प्रबल समर्थक थीं। छत्तीसगढ़ की महिला श्रमिक मातृत्व सहायता योजना का नामकरण इन्हीं के सम्मान में किया गया है।
- शहीद वीरनारायण सिंह (Shaheed Veer Narayan Singh): छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी और सोनाखान (बलौदाबाजार) के जमींदार, जिन्होंने 1857 के विद्रोह में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लोहा लिया था और अकाल के समय गरीबों में अनाज बांटा था। श्रमिकों के लिए संचालित रियायती भोजन योजना का नामकरण उन्हीं के नाम पर है।
- फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट (Fixed Term Employment): यह एक श्रम अनुबंध (Contractual Agreement) मॉडल है जिसके तहत नियोक्ता (Employer) किसी कर्मचारी को एक निश्चित समयावधि के लिए काम पर रखता है। इसमें कर्मचारी को नियमित श्रमिकों की तरह ही आनुपातिक रूप से सभी सामाजिक सुरक्षा लाभ (जैसे पीएफ, ग्रेच्युटी, और चिकित्सा अवकाश) प्राप्त करने का कानूनी अधिकार होता है।
UPSC & State PCS Mains Analysis: असंगठित कार्यबल की सामाजिक सुरक्षा और राजकोषीय समावेशन
मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से, छत्तीसगढ़ सरकार के श्रम विभाग के ढाई वर्षों के ये सुधार राज्य की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था (Informal Economy) के औपचारिकरण (Formalisation) और राजकोषीय समावेशन (Fiscal Inclusion) की नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
छत्तीसगढ़ में विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र में कार्य करने वाले अधिकांश श्रमिक मौसमी और असंगठित श्रेणी के हैं, जिनके पास कोई नियमित मासिक आय या पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा नहीं होती। ऐसे संवेदनशील कार्यबल के लिए ‘मिनीमाता महतारी जतन योजना’ के तहत मातृत्व सहायता और ‘मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना’ के अंतर्गत दी जाने वाली ₹1.50 लाख की राशि बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) को कम करने का एक प्रत्यक्ष साधन है।
इसके अतिरिक्त, राज्य के सुदूर और नव-गठित 5 जनजातीय बाहुल्य जिलों (जैसे मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सारंगढ़) में श्रम अधिकारी कार्यालयों की स्थापना करना यह दर्शाता है कि सरकार प्रशासनिक पहुंच का विकेंद्रीकरण (Decentralisation of Administration) कर रही है। इससे सुदूर जंगलों में काम करने वाले तेंदूपत्ता संग्राहकों और निर्माण श्रमिकों को अपनी शिकायतों और दावों के निपटारे के लिए जिला मुख्यालयों तक लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ती। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए ₹800 करोड़ से अधिक की राशि का सीधे अंतरण सुशासन की संवेदनशीलता और पारदर्शिता को प्रमाणित करता है, जो अंततः अनौपचारिक कार्यबल की क्रय शक्ति (Purchasing Power) बढ़ाकर छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की मजबूत सामाजिक और आर्थिक रीढ़ साबित होगा।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस समसामयिक और नीतिगत विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में घोषित किए गए आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना’ के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता राशि को बढ़ाकर कुल कितने रुपये करने का ऐतिहासिक फैसला किया है?
(A) ₹50,000 रुपये
(B) ₹1,00,000 रुपये
(C) ₹1,50,000 रुपये
(D) ₹2,00,000 रुपये
उत्तर: (C) ₹1,50,000 रुपये
व्याख्या: निर्माण श्रमिकों को पक्के मकान के निर्माण में सहायता देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत मिलने वाली राशि को बढ़ाकर ₹1.50 लाख कर दिया है।
प्रश्न 2: छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद मिनीमाता के सम्मान में शुरू की गई ‘मिनीमाता महतारी जतन योजना’ का मुख्य प्रशासनिक उद्देश्य निम्नलिखित में से क्या है?
(A) राज्य के मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रशासनिक परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग प्रदान करना।
(B) निर्माण और असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों को गर्भावस्था के दौरान मातृत्व वित्तीय सहायता प्रदान करना।
(C) बुजुर्ग नागरिकों को सियान हेल्पलाइन के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता देना।
(D) महिला स्व-सहायता समूहों को कृषि उपकरणों पर सब्सिडी देना।
उत्तर: (B) निर्माण और असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों को गर्भावस्था के दौरान मातृत्व वित्तीय सहायता प्रदान करना।
व्याख्या: मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत निर्माण और असंगठित क्षेत्र की लगभग 1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को गर्भावस्था के दौरान मातृत्व वित्तीय सहायता प्रदान कर उनके स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत किया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. छत्तीसगढ़ श्रम विभाग योजनाएं के तहत श्रमिकों को कौन-सी डिजिटल सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं?
श्रमिकों को दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाने के लिए विभाग ने एक नया यूजर-फ्रेंडली वेब पोर्टल (shramevjayate.cg.gov.in) और ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। इसके माध्यम से श्रमिक घर बैठे ऑनलाइन पंजीयन, योजनाओं के लिए आवेदन और सहायता राशि की ट्रैकिंग कर सकते हैं।
Q2. ‘शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना’ क्या है और इसके तहत श्रमिकों को क्या लाभ मिलता है?
यह छत्तीसगढ़ सरकार की एक अत्यंत रियायती भोजन योजना है, जिसके तहत पंजीकृत निर्माण और असंगठित श्रमिकों को उनके कार्यस्थलों के समीप मात्र ₹5 में स्वच्छ, गर्म और पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है ताकि उनके स्वास्थ्य और पोषण की रक्षा की जा सके।
Q3. राज्य के किन नव-गठित 5 जिलों में नए श्रम कार्यालयों की स्थापना हाल ही में की गई है?
छत्तीसगढ़ के नए जिलों—मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती में नए श्रम पदाधिकारी कार्यालयों की स्थापना की गई है। इसके साथ ही अब छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में स्वतंत्र श्रम कार्यालय संचालित हैं।
तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)
- वृहद वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा संबल: छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में 17.82 लाख से अधिक पंजीकृत श्रमिकों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से पारदर्शी रूप से ₹800 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की है।
- तकनीक और संवेदनशीलता का समन्वय: ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल ऐप और 24/7 कार्यरत ‘मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र’ के माध्यम से वनांचल के अंतिम श्रमिक तक सरकारी योजनाओं की पहुंच को सुलभ बनाया गया है।
- श्रम कानूनों का व्यावहारिक आधुनिकीकरण: महिलाओं के लिए रात्रिकालीन पाली की सुविधा, फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट को कानूनी मान्यता और सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालयों का विस्तार उद्योगों और श्रमिकों के बीच संतुलित विकास का कड़ा सुशासित मॉडल प्रस्तुत करता है।
UPSC & CGPSC Relevance (यूपीएससी और सीजीपीएससी प्रासंगिकता)
यह विषय मुख्य रूप से सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा पेपर-5 (छत्तीसगढ़ का आर्थिक नियोजन, औद्योगिक और श्रम नीतियां, बुनियादी ढांचा विकास), पेपर-6 (छत्तीसगढ़ का सामाजिक परिदृश्य, कमजोर वर्गों व श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाएं), तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (कमजोर और असंगठित वर्गों के कल्याण के लिए सरकारी नीतियां, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र का विकास) और पेपर-3 (भारतीय अर्थव्यवस्था, असंगठित क्षेत्र का औपचारिकरण, श्रम सुधार और समावेशी विकास) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण और अनिवार्य समसामयिक मुद्दा है।
Official Source (आधिकारिक स्रोत)
यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग (DPRCG) के संयुक्त संचालक श्री छगन लाल लोन्हारे द्वारा 7 अगस्त 2026 को रायपुर में जारी की गई आधिकारिक राज्य श्रम कल्याण रिपोर्ट, श्रमेव जयते पोर्टल के आंकड़ों और विभाग के बजटीय आवंटन पत्रकों पर आधारित है।
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