BHAVYA Rasayan Scheme India: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन अत्याधुनिक केमिकल पार्कों की स्थापना के लिए ₹3,030 करोड़ की ‘भव्य रसायन’ योजना को दी मंजूरी

BHAVYA Rasayan Scheme India Approved by Cabinet BHAVYA Rasayan Scheme India Approved by Cabinet

Published on July 24, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


भारत को वैश्विक रसायन विनिर्माण और कूटनीति का एक महाशक्तिशाली केंद्र बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 24 जुलाई 2026 को आयोजित कैबिनेट की बैठक में ‘भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन’ (Bharat Audyogik Vikas Yojana Rasayan) को मंजूरी दी गई। इस योजना को संक्षेप में BHAVYA Rasayan Scheme India का नाम दिया गया है, जो देश के तीन अलग-अलग राज्यों में अत्याधुनिक और समर्पित रासायनिक पार्कों (Chemical Parks) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगी।

यह दूरगामी योजना देश में रसायन और पेट्रोकेमिकल विनिर्माण को एक नई ऊंचाई देगी। इस योजना की घोषणा वित्तीय वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में की गई थी, जिसे आज कैबिनेट द्वारा औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी गई है। यह योजना न केवल घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि यह आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution) को गहरा करने और भारतीय रसायनों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) में एकीकृत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और विभिन्न राज्य स्तरीय प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए BHAVYA Rasayan Scheme India परियोजना, राष्ट्रीय औद्योगिक नीतियों (GS Paper III – इन्फ्रास्ट्रक्चर व औद्योगिक विकास) और पर्यावरण अनुकूल सुशासन (GS Paper II) के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस महत्वाकांक्षी योजना की विशेषताओं, प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचे, इसके आर्थिक प्रभावों और परीक्षा उपयोगी विभिन्न पहलुओं का गहराई से अध्ययन करेंगे।

Table of Contents

BHAVYA Rasayan Scheme India: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)

इस नई केमिकल पार्क योजना और इसके कूटनीतिक लक्ष्यों से जुड़े प्रमुख तथ्यों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेपित किया गया है:

महत्वपूर्ण आयामBHAVYA Rasayan Scheme India के प्रमुख तथ्य व आंकड़े
योजना का पूरा नामभारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (BHAVYA Rasayan)
योजना का उद्देश्यदेश में तीन समर्पित, अत्याधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल केमिकल पार्कों की स्थापना करना
कुल वित्तीय परिव्यय3,030 करोड़ रुपये (₹3,000 करोड़ साझा बुनियादी ढांचे के लिए, ₹30 करोड़ प्रशासनिक खर्च)
योजना की समय अवधि (Tenure)5 वर्ष (वित्तीय वर्ष 2026-27 से वित्तीय वर्ष 2030-31 तक)
केंद्र-राज्य वित्तीय अनुपातप्रति पार्क अधिकतम ₹1,000 करोड़ का केंद्रीय अनुदान; राज्य का न्यूनतम योगदान ₹500 करोड़
चयन प्रक्रिया का मार्गचैलेंज रूट (Challenge Route) के माध्यम से राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धी चयन
भूमि मानक प्रति पार्कन्यूनतम 8 वर्ग किलोमीटर (न्यूनतम 2,000 एकड़) अतिक्रमण-मुक्त समेकित भूमि
अपेक्षित डाउनस्ट्रीम क्षेत्रकृषि, वस्त्र (Textiles), फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंस्ट्रक्शन

BHAVYA Rasayan Scheme India क्या है?

रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी होते हैं। कृषि के लिए उर्वरकों से लेकर दवाओं (Pharmaceuticals), ऑटोमोबाइल पुर्जों, इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ों तक, प्रत्येक उद्योग को रसायनों की आवश्यकता होती है।

लेकिन भारत में अब तक रसायन उद्योगों के लिए एकीकृत और साझा बुनियादी ढांचे की भारी कमी रही है। इसके कारण इन उद्योगों को लॉजिस्टिक्स और प्रदूषण नियंत्रण पर भारी खर्च करना पड़ता था, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होती थी।

इसी विसंगति को दूर करने के लिए BHAVYA Rasayan Scheme India को लॉन्च किया गया है। यह योजना देश के तीन राज्यों में ऐसे विशाल रासायनिक पार्कों का निर्माण करेगी जहाँ सभी आवश्यक औद्योगिक सुविधाएं और पर्यावरण संरक्षण संयंत्र एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगे।

योजना का बजटीय आवंटन और वित्तीय संरचना

कैबिनेट द्वारा स्वीकृत इस योजना के बजटीय आवंटन और फंडिंग पैटर्न को निम्नलिखित महत्वपूर्ण नियमों के तहत डिजाइन किया गया है:

  • कुल ₹3,030 करोड़ का बजट: इस योजना के लिए कुल ₹3,030 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिसमें से ₹3,000 करोड़ सीधे पार्कों के भीतर साझा बुनियादी ढांचे (Common Infrastructure) और बुनियादी उपयोगिताओं के निर्माण के लिए प्रयुक्त होंगे। शेष ₹30 करोड़ प्रशासनिक व्यय के रूप में रखे गए हैं।
  • साझा वित्तीय उत्तरदायित्व: केंद्र सरकार प्रत्येक स्वीकृत केमिकल पार्क के लिए अधिकतम ₹1,000 करोड़ का अनुदान (Grant) प्रदान करेगी। यह अनुदान तभी मान्य होगा जब संबंधित राज्य सरकार उस पार्क के निर्माण में कम से कम ₹500 करोड़ का वित्तीय योगदान देगी।
  • 5-वर्षीय निश्चित कार्यकाल: यह योजना पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगी, जो वित्तीय वर्ष 2026-27 से शुरू होकर वित्तीय वर्ष 2030-31 तक जारी रहेगी।

चैलेंज रूट (Challenge Route) और कड़े भूमि मानक

BHAVYA Rasayan Scheme India के तहत राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद (Competitive Federalism) को बढ़ावा देने के लिए ‘चैलेंज रूट’ (Challenge Route) के माध्यम से 3 सर्वश्रेष्ठ पार्कों का चयन किया जाएगा:

  • न्यूनतम 2,000 एकड़ भूमि: इस योजना में भाग लेने वाले राज्यों को कम से कम 8 वर्ग किलोमीटर (न्यूनतम 2,000 एकड़) की समेकित और पूरी तरह से अतिक्रमण-मुक्त (Encumbrance-free) भूमि उपलब्ध करानी होगी।
  • प्लग-एंड-प्ले (Plug-and-play) बुनियादी ढांचा: इन पार्कों में आने वाले उद्योगों को जमीन मिलने के तुरंत बाद बिना किसी प्रशासनिक देरी के काम शुरू करने के लिए रेडीमेड बुनियादी ढांचा दिया जाएगा। इन साझा सुविधाओं में मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
    1. साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र (Common Effluent Treatment Plant – CETP)
    2. उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा (TSDF)
    3. सुलभ जल आपूर्ति और वितरण प्रणालियाँ
    4. विलायक पुनर्प्राप्ति और आसवन (Solvent Recovery & Distillation) सुविधाएं
    5. भाप उत्पादन और वितरण नेटवर्क (Steam Generation Network)
    6. एक दूसरे से जुड़ी हुई औद्योगिक पाइपलाइन प्रणालियाँ
    7. लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग (Warehousing) की साझा सुविधाएं

पर्यावरण अनुकूल कूटनीति और सतत विकास

रसायन उद्योग पारंपरिक रूप से प्रदूषण के दृष्टिकोण से अत्यधिक संवेदनशील माने जाते हैं। BHAVYA Rasayan Scheme India इस चुनौती से निपटने के लिए पर्यावरण के अनुकूल सतत पारिस्थितिकी तंत्र (Eco-friendly Ecosystem) के निर्माण को प्राथमिकता देती है।

पार्क के भीतर एक ही स्थान पर सेंट्रलाइज्ड वेस्ट मैनेजमेंट, हज़ार्डस वेस्ट मैनेजमेंट और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) स्थापित होने से पर्यावरण नियमों का कड़ाई से अनुपालन (Environmental Compliance) सुनिश्चित होगा। यह औद्योगिक संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक सुंदर कूटनीतिक संतुलन स्थापित करेगा, जो भारत को वैश्विक हरित मानकों (Green Standards) के अनुरूप ढालेगा।

डाउनस्ट्रीम उद्योगों पर व्यापक प्रभाव और ‘विकसित भारत’ का संकल्प

इस योजना की सफलता का प्रभाव केवल रसायन विनिर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश के कई बड़े डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों को मजबूत बनाएगा:

  • कृषि और वस्त्र क्षेत्र: कृषि के लिए सस्ते और उन्नत उर्वरक तथा वस्त्र उद्योग के लिए उत्कृष्ट रसायनों और रंगों की सुगम उपलब्धता।
  • फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स: दवाओं के निर्माण के लिए आवश्यक सक्रिय दवा सामग्री (APIs) और सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए आवश्यक रसायनों का स्वदेशी उत्पादन।
  • रोजगार और आर्थिक संवृद्धि: इस क्षेत्र के विकास से बड़े पैमाने पर घरेलू और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित होगा। इससे लाखों नए अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे, जो भारत को ‘विकसित भारत @ 2047’ के राष्ट्रीय विज़न के अनुकूल एक आत्मनिर्भर आर्थिक महाशक्ति बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष विश्लेषण (Exam Relevance Section)

यूपीएससी (UPSC CSE) और राज्य सेवा मुख्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सामान्य अध्ययन के पेपर-3 (औद्योगिक नीतियां, बुनियादी ढांचा, और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण) के दृष्टिकोण से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

UPSC & State PCS Prelims Fact Box: BHAVYA Rasayan Scheme India

  • भव्य रसायन (BHAVYA Rasayan): ‘भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन’ – देश में तीन समेकित केमिकल पार्कों की स्थापना की एक राष्ट्रीय योजना।
  • चैलेंज रूट (Challenge Route): एक ऐसी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया जिसमें राज्य सरकारें अपनी भूमि और बुनियादी सुविधाओं के प्रस्तावों के साथ प्रतिस्पर्धा करती हैं, और सर्वश्रेष्ठ तीन प्रस्तावों को केंद्र द्वारा चुना जाता है।
  • CETP और TSDF: Common Effluent Treatment Plant (साझा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र) और Treatment, Storage, and Disposal Facility (खतरनाक कचरे के सुरक्षित निपटान की सुविधा)।

UPSC Mains Analysis (GS Paper III: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं बुनियादी ढांचा विकास)

प्रश्न: “साझा बुनियादी ढांचे का अभाव और उच्च लॉजिस्टिक्स लागत भारतीय रसायन उद्योग के वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में पूर्ण एकीकरण के समक्ष मुख्य बाधा रहे हैं।” हाल ही में स्वीकृत की गई ‘भव्य रसायन’ (BHAVYA Rasayan) योजना के आलोक में विश्लेषण कीजिए कि यह नीति किस प्रकार देश में पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे सकती है।

उत्तर की रूपरेखा:

  • प्रस्तावना: केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत की गई ₹3,030 करोड़ की BHAVYA Rasayan Scheme India और इसके कड़े रणनीतिक उद्देश्यों का परिचय देते हुए उत्तर प्रारंभ करें।
  • भारतीय रसायन उद्योग के समक्ष चुनौतियां: असंगठित और बिखरा हुआ विनिर्माण ढांचा, अपशिष्ट निपटान की उच्च व्यक्तिगत लागत, और बुनियादी सुविधाओं (जैसे औद्योगिक पाइपलाइन और भाप नेटवर्क) का अभाव, जिससे वैश्विक बाजारों में हमारी लागत प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर होती है।
  • भव्य रसायन (BHAVYA Rasayan) के सुधारात्मक आयाम:
    • प्लंग-एंड-प्ले इन्फ्रास्ट्रक्चर: न्यूनतम 2,000 एकड़ के अतिक्रमण-मुक्त पार्कों में साझा सुविधाओं (CETP, TSDF, वेयरहाउस) की उपलब्धता, जिससे प्रारंभिक पूंजी निवेश और परिचालन लागत में भारी कमी आएगी।
    • पर्यावरण अनुकूल अनुपालन (Sustainable Green Manufacturing): केंद्रीकृत कचरा प्रबंधन प्रणालियों के कारण उद्योगों द्वारा पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन करना आसान होगा, जिससे सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति होगी।
  • अर्थव्यवस्था पर बहु-आयामी प्रभाव (Cascading Effect): कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे डाउनस्ट्रीम उद्योगों को सस्ते और स्वदेशी रसायनों की निर्बाध आपूर्ति होना, जिससे आयात निर्भरता (विशेषकर चीन पर) कम होगी।
  • निष्कर्ष: यह निष्कर्ष दें कि यह योजना कूटनीतिक रूप से ‘सहकारी संघवाद’ (Challenge Route) को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत को वैश्विक हरित विनिर्माण (Green Manufacturing Hub) का नया सिरमौर बनाएगी, जो ‘विकसित भारत @ 2047’ के सपनों को धरातल पर साकार करने की मजबूत रीढ़ साबित होगा।

संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)

रसायन उद्योग, पीसीपीआईआर (PCPIR) और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विनियामक संस्थाओं से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक तथ्य जो परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:

  1. PCPIR नीति (Petroleum, Chemical and Petrochemical Investment Region): भारत सरकार द्वारा देश में बड़े पैमाने पर पेट्रोकेमिकल निवेश को आकर्षित करने के लिए वर्ष 2007 में लागू की गई एक विशेष नीति। इसके तहत देश में विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), दाहेज (गुजरात), पारादीप (ओडिशा) और कुड्डलोर (तमिलनाडु) में चार विशाल पीसीपीआईआर क्षेत्रों को विकसित किया जा रहा है।
  2. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB): यह जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत स्थापित एक वैधानिक संगठन (Statutory Organisation) है, जो देश में पर्यावरण सुरक्षा मानकों और औद्योगिक कचरा निपटान के नियमों को कड़ाई से लागू करता है।
  3. भारतीय रासायनिक और पेट्रोकेमिकल उद्योग का आकार: भारत रसायन उत्पादन के मामले में वैश्विक स्तर पर छठे स्थान पर और एशिया में तीसरे स्थान पर है। यह उद्योग देश के विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing GDP) में अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)

त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए BHAVYA Rasayan Scheme India के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:

  • Mega Budget: केंद्रीय कैबिनेट ने देश में 3 समर्पित केमिकल पार्कों की स्थापना के लिए ₹3,030 करोड़ की योजना को मंजूरी दी।
  • Outlay Split: ₹3,000 करोड़ साझा बुनियादी ढांचे (Common Infrastructure) के निर्माण के लिए और ₹30 करोड़ प्रशासनिक खर्च के रूप में आवंटित।
  • Funding Ratio: केंद्र सरकार प्रति पार्क अधिकतम ₹1,000 करोड़ का अनुदान देगी, जिसमें राज्य सरकार का न्यूनतम योगदान ₹500 करोड़ होगा।
  • Land Standard: Challenge Route के तहत चुने जाने वाले प्रत्येक पार्क के लिए न्यूनतम 8 वर्ग किलोमीटर (2,000 एकड़) अतिक्रमण-मुक्त भूमि आवश्यक है।
  • Plug-and-play Features: पार्कों में साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP), विलायक पुनर्प्राप्ति, स्टीम नेटवर्क और वेयरहाउसिंग की ‘प्लग-एंड-प्ले’ सुविधाएं दी जाएंगी।
  • Viksit Bharat Goal: यह योजना कृषि, वस्त्र, फार्मा, और ऑटोमोबाइल जैसे डाउनस्ट्रीम उद्योगों को मजबूत कर ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्यों को पूरा करेगी।

अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और आर्थिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में 24 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत की गई ‘भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन’ (BHAVYA Rasayan Scheme India) के लिए कुल कितना बजटीय परिव्यय निर्धारित किया गया है?

(A) 1,500 करोड़ रुपये
(B) 2,030 करोड़ रुपये
(C) 3,030 करोड़ रुपये
(D) 4,500 करोड़ रुपये

उत्तर: (C) 3,030 करोड़ रुपये
व्याख्या: साय सरकार की तरह ही केंद्रीय कैबिनेट ने ₹3,030 करोड़ के कुल बजटीय परिव्यय के साथ इस योजना को मंजूरी दी है, जिसमें से ₹3,000 करोड़ साझा बुनियादी सुविधाओं के निर्माण के लिए प्रयुक्त होंगे।

प्रश्न 2: ‘BHAVYA Rasayan Scheme India’ के तहत, केंद्र सरकार प्रत्येक केमिकल पार्क की स्थापना के लिए अधिकतम कितने करोड़ रुपये तक का प्रत्यक्ष अनुदान (Grant) प्रदान करेगी?

(A) 250 करोड़ रुपये
(B) 500 करोड़ रुपये
(C) 1,000 करोड़ रुपये
(D) 1,500 करोड़ रुपये

उत्तर: (C) 1,000 करोड़ रुपये
व्याख्या: इस योजना के तहत केंद्र सरकार प्रति पार्क अधिकतम ₹1,000 करोड़ का अनुदान देगी, बशर्ते संबंधित राज्य सरकार भी उस पार्क के निर्माण में कम से कम ₹500 करोड़ का वित्तीय योगदान दे।

प्रश्न 3: इस योजना के अंतर्गत राज्यों से प्रतिस्पर्धी ‘चैलेंज रूट’ के माध्यम से चुने जाने वाले प्रत्येक केमिकल पार्क के लिए न्यूनतम कितनी अतिक्रमण-मुक्त समेकित भूमि (Contiguous Land) होना अनिवार्य है?

(A) 500 एकड़
(B) 1,000 एकड़
(C) 2,000 एकड़ (8 वर्ग किलोमीटर)
(D) 5,000 एकड़

उत्तर: (C) 2,000 एकड़ (8 वर्ग किलोमीटर)
व्याख्या: योजना के नियमों के अनुसार, प्रत्येक केमिकल पार्क के लिए न्यूनतम 8 वर्ग किलोमीटर या लगभग 2,000 एकड़ अतिक्रमण-मुक्त और समेकित भूमि होना अनिवार्य है।

प्रश्न 4: रसायनों के विनिर्माण में निकलने वाले औद्योगिक कचरे और प्रदूषित जल के सामूहिक शोधन के लिए पार्कों में स्थापित की जाने वाली प्रणाली को पर्यावरण विज्ञान में क्या कहा जाता है?

(A) TSDF (टी-एस-डी-एफ)
(B) CETP (साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र)
(C) स्मार्ट ग्रिड प्रणाली
(D) सॉल्वेंट रिकवरी प्लांट

उत्तर: (B) CETP (साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र)
व्याख्या: CETP का पूरा नाम ‘Common Effluent Treatment Plant’ (साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र) है। यह कई उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित जल को एक ही स्थान पर साफ कर पर्यावरण प्रदूषण को रोकने की एक वैज्ञानिक प्रणाली है।

प्रश्न 5: वैश्विक रसायन उत्पादन (Global Chemical Production) की सूची में वर्तमान समय में भारत का पूरे विश्व में कौन सा स्थान है?

(A) पहला स्थान
(B) तीसरा स्थान
(C) छठा स्थान
(D) दसवां स्थान

उत्तर: (C) छठा स्थान
व्याख्या: भारत वैश्विक रसायन उत्पादन के क्षेत्र में दुनिया में छठे स्थान पर और एशिया में तीसरे स्थान पर है, जो इसे भारत की जीडीपी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विनिर्माण स्तंभ बनाता है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. BHAVYA Rasayan Scheme India क्या है?

BHAVYA Rasayan Scheme India (भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन) भारत सरकार द्वारा स्वीकृत की गई एक नई राष्ट्रीय योजना है, जिसके लिए ₹3,030 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के तीन अलग-अलग राज्यों में समेकित और पर्यावरण-अनुकूल ‘केमिकल पार्कों’ का निर्माण कर भारत को रासायनिक विनिर्माण का वैश्विक हब बनाना है।

Q2. इस योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता और समय सीमा क्या है?

यह योजना पांच वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31) के लिए लागू रहेगी। इसके तहत केंद्र सरकार प्रति पार्क अधिकतम ₹1,000 करोड़ का अनुदान देगी, जिसमें संबंधित राज्य सरकार का न्यूनतम वित्तीय योगदान ₹500 करोड़ होना अनिवार्य है।

Q3. इन केमिकल पार्कों में मिलने वाली ‘प्लग-एंड-प्ले’ (Plug-and-play) सुविधाएं क्या हैं?

प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचे का अर्थ यह है कि उद्योगों को भूमि मिलने के तुरंत बाद बिना किसी प्रशासनिक देरी के काम शुरू करने के लिए रेडीमेड सुविधाएं दी जाएंगी। इनमें मुख्य रूप से साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP), कबाड़ निपटान प्रणाली (TSDF), विलायक पुनर्प्राप्ति, स्टीम नेटवर्क, पाइपलाइन नेटवर्क और वेयरहाउसिंग की सुविधाएं शामिल हैं।

Q4. यह योजना पर्यावरण संरक्षण और नियमों के अनुपालन को कैसे सुगम बनाती है?

केमिकल पार्कों के भीतर साझा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (CETP) और खतरनाक कचरा प्रबंधन (TSDF) के केंद्रीकृत रूप से स्थापित होने से व्यक्तिगत कंपनियों पर प्रदूषण नियंत्रण का वित्तीय बोझ कम होगा। साथ ही, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के कड़े नियमों का वैज्ञानिक अनुपालन सुनिश्चित होगा, जो वनों और पर्यावरण को सुरक्षित रखेगा।

Q5. ‘चैलेंज रूट’ (Challenge Route) क्या है और इसके तहत भूमि के क्या मापदंड हैं?

चैलेंज रूट एक ऐसी पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया है जिसमें राज्य सरकारें अपनी सर्वश्रेष्ठ भूमि और नीतियों के प्रस्तावों के साथ प्रतिस्पर्धा करती हैं, और सर्वश्रेष्ठ 3 प्रस्तावों को केंद्र द्वारा चुना जाता है। इसके तहत प्रत्येक पार्क के लिए न्यूनतम 8 वर्ग किलोमीटर या लगभग 2,000 एकड़ की समेकित और पूरी तरह से अतिक्रमण-मुक्त भूमि उपलब्ध करानी होगी।


निष्कर्ष (Conclusion)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत की गई यह महत्वाकांक्षी योजना BHAVYA Rasayan Scheme India भारत को वैश्विक रसायन विनिर्माण (Global Chemical Manufacturing) के मानचित्र पर एक स्वतंत्र, मजबूत और अजेय महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम है।

प्रतिस्पर्धी ‘चैलेंज रूट’ के माध्यम से राज्यों के बीच श्रेष्ठ प्रस्तावों का चुनाव करना और न्यूनतम 2,000 एकड़ की अतिक्रमण-मुक्त भूमि पर साझा ‘प्लग-एंड-प्ले’ सुविधाओं का निर्माण करना सुसुशासन (Good Governance) का एक अत्यंत उत्कृष्ट व्यावहारिक उदाहरण है। साझा अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों (CETP) और कबाड़ निपटान प्रणालियों (TSDF) के केंद्रीकृत एकीकरण से जहां प्रदूषण नियंत्रण के कड़े पर्यावरणीय मानकों का पालन सुगम होगा, वहीं भारतीय रसायनों की वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में स्थिति मजबूत होगी, जिससे आयातों पर हमारी निर्भरता (विशेष रूप से चीन पर) काफी कम होगी। यह रणनीतिक प्रयास न केवल हमारे विनिर्माण क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि यह ‘विकसित भारत @ 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुकूल देश में लाखों नए रोजगारों का मार्ग प्रशस्त करेगा, जो अंततः संपूर्ण भारत को 21वीं सदी की एक हरित, समृद्ध और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक महाशक्ति बनाने की सबसे मजबूत और अजेय रीढ़ साबित होगा।

Official References

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *