Published on July 21, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को आर्थिक और कृषि रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (MDoNER) और संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मेघालय के मुख्यमंत्री श्री कॉनराड के. संगमा की गरिमामयी उपस्थिति में शिलॉन्ग में आयोजित एक समारोह के दौरान आधिकारिक रूप से Mission Golden Spice Lakadong Turmeric परियोजना का शुभारंभ किया।
₹175.45 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी योजना का प्राथमिक उद्देश्य मेघालय की भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त विश्व प्रसिद्ध ‘लकाडोंग हल्दी’ को एक वैश्विक लक्ज़री मसाला ब्रांड के रूप में स्थापित करना है। यह कूटनीतिक पहल पूर्वोत्तर के सीमांत आदिवासी किसानों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ेगी।
यह दूरगामी परियोजना पांच वर्षों (2025-2030) के एक रणनीतिक रोडमैप के तहत दो प्रमुख चरणों में क्रियान्वित की जाएगी। प्रथम चरण मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण (Phase 1) पर केंद्रित होगा, जबकि दूसरा चरण इसके विस्तार और पैमाना (Phase 2) को बढ़ाने के लिए समर्पित किया गया है।
यूपीएससी (UPSC) और विभिन्न राज्य स्तरीय प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए Mission Golden Spice Lakadong Turmeric परियोजना, भारतीय कृषि अर्थशास्त्र (GS Paper III) और भारत के भूगोल व जीआई टैग (GS Paper I) के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस स्वर्णिम मसाला मिशन के तकनीकी पहलुओं, लकाडोंग हल्दी के गुणों और परीक्षा उपयोगी सभी महत्वपूर्ण आयामों का गहराई से अध्ययन करेंगे।
Mission Golden Spice Lakadong Turmeric: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)
मेघालय के इस स्वर्णिम मसाला मिशन और लकाडोंग हल्दी के संवर्धन से जुड़े प्रमुख आंकड़ों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेपित किया गया है:
| महत्वपूर्ण संकेतक | Mission Golden Spice Lakadong Turmeric के प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| योजना का नाम | मिशन गोल्डन स्पाइस (Mission Golden Spice Lakadong Turmeric) |
| लक्षित कृषि उत्पाद | जीआई-टैग प्राप्त ‘लकाडोंग हल्दी‘ (Meghalaya’s Lakadong Turmeric) |
| कुल बजटीय परिव्यय | 175.45 करोड़ रुपये (अभिसरण और केंद्रीय सहायता आधारित) |
| योजना की समय अवधि (Tenure) | 5 वर्ष (वर्ष 2025 से वर्ष 2030 तक) |
| किसानों की आय का लक्ष्य | पारिश्रमिक को ₹30-40 प्रति किलो से बढ़ाकर ₹80 प्रति किलो करना |
| क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य | खेती के क्षेत्र को वर्तमान 2,500 हेक्टेयर से बढ़ाकर 7,500 हेक्टेयर करना |
| नोडल केंद्रीय निकाय | पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) और पूर्वोत्तर परिषद (NEC) |
Why in News?: चर्चा में क्यों है?
मेघालय की जयंतिया पहाड़ियों (Jaintia Hills) में पाई जाने वाली लकाडोंग हल्दी अपनी अद्वितीय सुगंध और असाधारण औषधीय गुणों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इस हल्दी में करक्यूमिन (Curcumin) की मात्रा 7% से 10% पाई जाती है।
यह स्तर सामान्य तौर पर दुनिया भर में मिलने वाली अन्य हल्दी प्रजातियों (औसतन 2% से 3%) की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है। करक्यूमिन ही वह बायो-एक्टिव तत्व है जो हल्दी को उसके चमकीले पीले रंग के साथ-साथ उत्कृष्ट कैंसर रोधी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण प्रदान करता है।
इसके बावजूद, प्रसंस्करण सुविधाओं (Processing Facilities) के अभाव और कमजोर बाजार लिंकेज के कारण स्थानीय किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा था। इसी विसंगति को दूर करने के लिए सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जी-7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) के दौरान वैश्विक नेताओं के समक्ष इसे प्रदर्शित किया गया था। इस प्रदर्शन से मिली वैश्विक पहचान का कूटनीतिक लाभ उठाने के लिए Mission Golden Spice Lakadong Turmeric की औपचारिक शुरुआत की गई है।
“यह रोडमैप, Mission Golden Spice Lakadong Turmeric, केवल एक कृषि परियोजना नहीं है, बल्कि पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के विकास का मुख्य केंद्र बनाने का एक दूरदर्शी प्रयास है।”— श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री
लकाडोंग हल्दी की जादुई मिट्टी का रहस्य (The Magical Soil of Meghalaya)
इस कृषि उत्पाद के पीछे एक अत्यंत दिलचस्प वैज्ञानिक और भौगोलिक तथ्य छिपा हुआ है। वैज्ञानिकों द्वारा लकाडोंग हल्दी के पौधों को मेघालय की जयंतिया पहाड़ियों से बाहर अन्य राज्यों या जलवायु क्षेत्रों में उगाने के कई प्रयास किए गए।
परंतु, जैसे ही इस पौधे को मेघालय से बाहर लगाया जाता है, इसकी नई फसल में करक्यूमिन का स्तर तेजी से गिर जाता है। यह वैज्ञानिक तथ्य सिद्ध करता है कि मेघालय की मिट्टी के रासायनिक तत्वों और वहां के विशिष्ट सूक्ष्म-जलवायु (Micro-climate) में कोई प्राकृतिक विशेषता है जो इस हल्दी को दुनिया का सबसे प्रीमियम उत्पाद बनाती है।
नया Mission Golden Spice Lakadong Turmeric इसी भौगोलिक विशिष्टता (GI Tag) को सहेजने और इसके व्यापक संवर्धन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे नकली उत्पादों की पहचान करने और बस्तर की कूटनीति की तरह इसके भौगोलिक अधिकारों की रक्षा करने में मदद मिलेगी।
Mission Golden Spice Lakadong Turmeric के प्रमुख रणनीतिक स्तंभ
इस ₹175.45 करोड़ के स्वर्णिम मिशन को सुचारू और पारदर्शी तरीके से धरातल पर उतारने के लिए निम्नलिखित प्रमुख रणनीतिक आयामों को शामिल किया गया है:
1. दो चरणों का रोडमैप (Two-phase Implementation)
प्रथम चरण मुख्य रूप से मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित होगा। इसके तहत फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान (Post-harvest Losses) को रोकने, सुदूर गांवों में एकीकृत कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर ध्यान दिया जाएगा।
द्वितीय चरण के तहत कल्टीवेशन के क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा। इसके माध्यम से वैश्विक खरीदारों के साथ सीधे समझौते किए जाएंगे और बड़े पैमाने पर विपणन (Marketing) को सुगम बनाया जाएगा।
2. पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा एकीकृत जैविक हल्दी प्रसंस्करण संयंत्र
योजना के तहत मेघालय में पूर्वोत्तर भारत के सबसे बड़े और आधुनिक ‘एकीकृत जैविक हल्दी प्रसंस्करण और करक्यूमिन निष्कर्षण संयंत्र’ (Curcumin Extraction Facility) की स्थापना की जाएगी।
इससे भारत विदेशों को केवल कच्ची हल्दी भेजने के बजाय सीधे अति-मूल्यवान शुद्ध करक्यूमिन (Curcumin Extract) का निर्यात कर सकेगा। यह उत्पाद वैश्विक फार्मा और कॉस्मेटिक उद्योगों में अत्यधिक मूल्यवान माना जाता है।
3. बहु-विभागीय अभिसरण मॉडल (Convergence Model)
Mission Golden Spice Lakadong Turmeric को केवल एक विभाग तक सीमित न रखकर केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों के संयुक्त वित्तीय और तकनीकी समर्थन से डिजाइन किया गया है।
इस अभिसरण में मुख्य रूप से कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय शामिल हैं। साथ ही, राष्ट्रीय कृषि निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) और मसाला बोर्ड (Spices Board) भी इस कूटनीति का हिस्सा हैं।
इसके अलावा नवगठित ‘राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड’ (National Turmeric Board), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), इलेक्ट्रॉनिक और आईटी मंत्रालय (MeitY), नाबार्ड (NABARD) और मेघालय सरकार मिलकर काम करेंगे।
4. किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य
इस मिशन का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष सामाजिक-आर्थिक प्रभाव यह होगा कि स्थानीय किसानों को उनकी फसल का जो दाम आज केवल ₹30 से ₹40 प्रति किलोग्राम मिलता है, वह वर्ष 2030 तक बढ़कर ₹80 प्रति किलोग्राम हो जाएगा।
साथ ही, लकाडोंग हल्दी की खेती के रकबे को वर्तमान 2,500 हेक्टेयर से तीन गुना बढ़ाकर 7,500 हेक्टेयर किया जाएगा, जो ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि लाने का काम करेगा।
पारंपरिक मूल्य श्रृंखला में महिलाओं की भूमिका: असली संरक्षक
मेघालय का समाज पारंपरिक रूप से मातृसत्तात्मक (Matrilineal Society) है, जहां पारिवारिक और सामाजिक निर्णयों में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका होती है। लकाडोंग हल्दी के पारंपरिक रोपण और फसल कटाई के कार्यों में पीढ़ियों से आदिवासी महिला किसान ही मुख्य भूमिका निभाती आ रही हैं।
इसी व्यवस्था को सम्मान देते हुए Mission Golden Spice Lakadong Turmeric के तहत नवगठित होने वाले सभी ‘किसान उत्पादक संगठनों’ (FPOs) और प्रसंस्करण सहकारी समितियों के नेतृत्व के केंद्र में इन आदिवासी महिलाओं को रखा गया है।
यह निर्णय न केवल महिलाओं के कौशल का उन्नयन करेगा, बल्कि ग्रामीण पूर्वोत्तर के पहाड़ी क्षेत्रों में उनके वास्तविक नेतृत्व और आर्थिक संप्रभुता को मजबूत करेगा। यह सुशासन और सामाजिक न्याय का एक सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष अनुभाग (Exam Relevance Section)
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) और विभिन्न राज्यों की मुख्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सामान्य अध्ययन के पेपर-3 (कृषि नीतियां, खाद्य प्रसंस्करण) और पेपर-1 (भारत का भूगोल और जीआई टैग) के दृष्टिकोण से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
UPSC & State PCS Fact Box: Mission Golden Spice Lakadong Turmeric
- लकाडोंग हल्दी (Lakadong Turmeric): यह मेघालय के जयंतिया हिल्स जिले के ‘लकाडोंग’ क्षेत्र में उगाई जाने वाली एक विशिष्ट किस्म है। इसे उच्च करक्यूमिन सामग्री के कारण कड़ा भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त है।
- करक्यूमिन (Curcumin): हल्दी में पाया जाने वाला मुख्य जैव-सक्रिय यौगिक है जो इसे विशिष्ट पीला रंग और औषधीय गुण प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड (National Turmeric Board): भारत सरकार द्वारा देश में हल्दी के निर्यात, कूटनीति और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए गठित एक विशिष्ट राष्ट्रीय बोर्ड।
UPSC Mains Analysis (GS Paper III: कृषि विज्ञान, खाद्य प्रसंस्करण एवं पूर्वोत्तर विकास)
प्रश्न: “पूर्वोत्तर भारत की ‘अष्टलक्ष्मी’ अवधारणा को साकार करने के लिए प्रत्येक राज्य की अनूठी भौगोलिक विशेषताओं (USPs) को पहचानकर उनका एक समेकित मूल्य श्रृंखला मॉडल में विकास करना अनिवार्य है।” हाल ही में शुरू किए गए Mission Golden Spice Lakadong Turmeric के विशेष संदर्भ में इस कथन की समालोचनात्मक विवेचना कीजिए।
उत्तर की रूपरेखा:
- प्रस्तावना: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा मेघालय में शुरू की गई ₹175.45 करोड़ की योजना के विज़न और कूटनीतिक उद्देश्यों का परिचय देते हुए उत्तर प्रारंभ करें।
- पूर्वोत्तर भारत की कृषि चुनौतियां और लकाडोंग हल्दी के गुण: भौगोलिक अलगाव, पहाड़ी ढलान, कोल्ड स्टोरेज की कमी और प्रसंस्करण तकनीकों का अभाव। 7%-10% करक्यूमिन वाली लकाडोंग हल्दी के अद्वितीय वैज्ञानिक गुणों की व्याख्या करें।
- समेकट मूल्य श्रृंखला मॉडल की रणनीतिक भूमिका:
- बहु-मंत्रालयी अभिसरण (Convergence): किस प्रकार यह मिशन केवल कृषि विभाग तक सीमित न रहकर APEDA, राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड, और खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के साथ मिलकर कार्य कर रहा है।
- मूल्य संवर्धन (Value Addition): कच्ची हल्दी के बजाय ‘करक्यूमिन अर्क’ (Curcumin Extract) का निर्माण कर निर्यात आय को 300% से 400% तक बढ़ाना।
- महिला सशक्तिकरण: मातृसत्तात्मक मेघालय समाज में महिला किसानों को एफपीओ के माध्यम से नीतिगत निर्णयों के केंद्र में रखना।
- पूर्वोत्तर के अन्य उत्पादों के लिए अनुकरणीय मॉडल: समझाएं कि कैसे इसी प्रकार के कड़े मॉडल मेघालय के अनानास (Pineapple), अदरक (Ginger), कटहल और जंगली शहद के लिए भी तैयार किए जा सकते हैं।
- निष्कर्ष: यह सारांश प्रस्तुत करें कि यह मिशन पूर्वोत्तर के राज्यों को भारत के विकास की मुख्यधारा में लाने का एक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल आर्थिक रोडमैप है, जो ‘विकसित भारत @ 2047’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक स्वर्णिम मील का पत्थर साबित होगा।
संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)
मेघालय की भौगोलिक संरचना, जनजातियों और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगठनों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक तथ्य जो परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:
- मेघालय की पहाड़ियाँ और जनजातियाँ: मेघालय का पठार मुख्य रूप से तीन पहाड़ियों—गारो (Garo), खासी (Khasi) और जयंतिया (Jaintia)—का एक समेकित समूह है। इन पहाड़ियों का नाम यहाँ निवास करने वाली स्थानीय आदिवासी जनजातियों के नाम पर रखा गया है। लकाडोंग हल्दी का मुख्य उत्पादन जयंतिया हिल्स जिले में होता है।
- करक्यूमिन की रसायन विज्ञान (Chemistry of Curcumin): करक्यूमिन (C21H20O6) एक प्राकृतिक फिनोल है, जिसे डिकार्बोनेटेड डायरिलहेप्टानोइड (Diarilheptanoid) वर्ग के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है। इसका उपयोग चिकित्सा विज्ञान में कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने, अल्जाइमर रोग के उपचार और सूजन को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
- विश्व में हल्दी उत्पादन में भारत की स्थिति: भारत विश्व में हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक देश है। वैश्विक हल्दी उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 80% से अधिक है। तेलंगाना, महाराष्ट्र और तमिलनाडु भारत के शीर्ष हल्दी उत्पादक राज्य हैं, जबकि मेघालय अपनी उच्चतम गुणवत्ता के लिए जाना जाता है।
एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)
त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए Mission Golden Spice Lakadong Turmeric के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:
- Budget and Launch: पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) ने मेघालय में ₹175.45 करोड़ के ‘मिशन गोल्डन स्पाइस’ को मंजूरी दी।
- Target Product: मेघालय की जीआई-टैग प्राप्त ‘लकाडोंग हल्दी’, जिसमें करक्यूमिन की मात्रा दुनिया में सर्वाधिक (7-10%) है।
- Two-Phase Roadmap: यह मिशन 5 वर्षों (2025-2030) के दौरान मूल्य श्रृंखला के सुदृढ़ीकरण और क्षेत्र विस्तार के दो चरणों में संचालित होगा।
- Double Remuneration: किसानों को मिलने वाले दाम को ₹30-40 प्रति किलो से बढ़ाकर ₹80 प्रति किलो करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य।
- Area Expansion: खेती के कुल रकबे को 2,500 हेक्टेयर से बढ़ाकर 7,500 हेक्टेयर किया जाएगा।
- Extraction Facility: पूर्वोत्तर भारत के सबसे बड़े एकीकृत जैविक हल्दी प्रसंस्करण और करक्यूमिन अर्क संयंत्र की स्थापना की जाएगी।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और कृषि विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा किस राज्य की जीआई-टैग प्राप्त ‘लकाडोंग हल्दी’ को वैश्विक ब्रांड बनाने के लिए ‘मिशन गोल्डन स्पाइस’ (Mission Golden Spice Lakadong Turmeric) शुरू किया गया है?
(A) असम
(B) मणिपुर
(C) मेघालय
(D) नागालैंड
उत्तर: (C) मेघालय
व्याख्या: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मेघालय के मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मेघालय की प्रसिद्ध ‘लकाडोंग हल्दी’ के संवर्धन के लिए ₹175.45 करोड़ के ‘मिशन गोल्डन स्पाइस’ की शुरुआत की है।
प्रश्न 2: मेघालय की ‘लकाडोंग हल्दी’ (Lakadong Turmeric) में पाया जाने वाला वह मुख्य जैव-सक्रिय यौगिक (Bioactive Compound) कौन सा है जो इसे उत्कृष्ट औषधीय गुण प्रदान करता है और जिसकी मात्रा इसमें सर्वाधिक (7-10%) पाई जाती है?
(A) लाइकोपीन (Lycopene)
(B) करक्यूमिन (Curcumin)
(C) कैरोटीनॉइड (Carotene)
(D) कैफीन (Caffeine)
उत्तर: (B) करक्यूमिन (Curcumin)
व्याख्या: करक्यूमिन हल्दी का मुख्य औषधीय और रंग प्रदान करने वाला यौगिक है। लकाडोंग हल्दी में करक्यूमिन का स्तर 7% से 10% होता है, जो दुनिया की अन्य प्रजातियों की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है।
प्रश्न 3: ‘Mission Golden Spice Lakadong Turmeric’ योजना की कुल समय अवधि (Tenure) कितनी निर्धारित की गई है, जिसे दो प्रमुख चरणों में लागू किया जाना है?
(A) 3 वर्ष (2025 से 2028)
(B) 5 वर्ष (2025 से 2030)
(C) 7 वर्ष (2025 से 2032)
(D) 10 वर्ष
उत्तर: (B) 5 वर्ष (2025 से 2030)
व्याख्या: इस महत्वाकांक्षी कृषि मिशन की कुल अवधि पांच वर्षों की होगी, जो वर्ष 2025 से शुरू होकर वर्ष 2030 तक कड़े लक्ष्यों के साथ क्रियान्वित की जाएगी।
प्रश्न 4: मेघालय के किस पहाड़ी क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु को ‘लकाडोंग हल्दी’ के पारंपरिक और प्राकृतिक उत्पादन का मुख्य केंद्र माना जाता है, जहाँ से बाहर जाने पर इसके करक्यूमिन स्तर में गिरावट आ जाती है?
(A) गारो हिल्स (Garo Hills)
(B) खासी हिल्स (Khasi Hills)
(C) जयंतिया हिल्स (Jaintia Hills)
(D) मिकिर हिल्स
उत्तर: (C) जयंतिया हिल्स (Jaintia Hills)
व्याख्या: लकाडोंग हल्दी मुख्य रूप से मेघालय के पूर्वी और पश्चिमी जयंतिया हिल्स जिले में उगाई जाती है, जहाँ की अनूठी मिट्टी इसके उच्च करक्यूमिन स्तर का मुख्य भौगोलिक कारण है।
प्रश्न 5: हाल ही में भारत सरकार द्वारा देश में हल्दी के निर्यात, कूटनीति, पैकेजिंग और वैश्विक अनुसंधान को एकीकृत करने के लिए किस विशिष्ट राष्ट्रीय बोर्ड के गठन को मंजूरी दी गई है?
(A) मसाला विकास प्राधिकरण
(B) राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड (National Turmeric Board)
(C) कृषि मूल्य संवर्धन परिषद
(D) पूर्वोत्तर जैविक कृषि आयोग
उत्तर: (B) राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड (National Turmeric Board)
व्याख्या: भारत सरकार द्वारा हाल ही में देश में हल्दी के समग्र विकास, कूटनीति और निर्यात को एक ही खिड़की से सुगम बनाने के लिए ‘राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड’ के गठन को मंजूरी दी गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. Mission Golden Spice Lakadong Turmeric क्या है?
Mission Golden Spice Lakadong Turmeric पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) और मेघालय सरकार द्वारा शुरू की गई एक संयुक्त कृषि और औद्योगिक विकास योजना है, जिसका बजट ₹175.45 करोड़ है। इसका मुख्य उद्देश्य मेघालय की जीआई-टैग प्राप्त लकाडोंग हल्दी को वैश्विक स्तर पर एक प्रीमियम मसाला ब्रांड के रूप में स्थापित करना है।
Q2. लकाडोंग हल्दी (Lakadong Turmeric) दुनिया की अन्य हल्दी प्रजातियों से क्यों श्रेष्ठ है?
यह हल्दी इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि इसमें पाया जाने वाला मुख्य औषधीय और कैंसर रोधी यौगिक ‘करक्यूमिन’ (Curcumin) अत्यंत उच्च स्तर पर (7% से 10%) पाया जाता है। सामान्य तौर पर दुनिया भर में मिलने वाली अन्य हल्दी प्रजातियों में करक्यूमिन की मात्रा केवल 2% से 3% होती है।
Q3. इस मिशन के तहत किसानों की आय और खेती के क्षेत्र के लिए क्या लक्ष्य रखे गए हैं?
इस मिशन के तहत वर्ष 2030 तक किसानों को मिलने वाले मूल्य को ₹30-40 प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर सीधे ₹80 प्रति किलोग्राम (दोगुना से अधिक) करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, लकाडोंग हल्दी की खेती के रकबे को वर्तमान 2,500 हेक्टेयर से बढ़ाकर 7,500 हेक्टेयर किया जाएगा।
Q4. “जादुई मिट्टी का रहस्य” क्या है, जिसका उल्लेख मेघालय के मुख्यमंत्री ने किया?
वैज्ञानिक अध्ययनों से सिद्ध हुआ है कि जब लकाडोंग हल्दी के पौधों को मेघालय के जयंतिया हिल्स क्षेत्र से बाहर अन्य राज्यों या जलवायु क्षेत्रों में लगाया जाता है, तो इसकी फसल में करक्यूमिन का स्तर तेजी से गिर जाता है। यह साबित करता है कि जयंतिया हिल्स की मिट्टी के रासायनिक तत्वों और विशिष्ट सूक्ष्म-जलवायु में ही इस हल्दी के उत्कृष्ट गुणों का रहस्य छिपा हुआ है।
Q5. इस योजना में आदिवासी महिलाओं की क्या भूमिका है?
मेघालय का समाज मातृसत्तात्मक है, जहां आदिवासी महिला किसान ही पीढ़ियों से लकाडोंग हल्दी के पारंपरिक रोपण और संरक्षण की मुख्य संरक्षक रही हैं। इस मिशन के तहत स्थापित होने वाले सभी ‘किसान उत्पादक संगठनों’ (FPOs) और प्रसंस्करण सहकारी समितियों के नेतृत्व के केंद्र में इन आदिवासी महिलाओं को रखा गया है।
निष्कर्ष (Conclusion)
शिलॉन्ग में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा द्वारा शुरू किया गया यह महत्वाकांक्षी मिशन Mission Golden Spice Lakadong Turmeric पूर्वोत्तर भारत के कृषि आधुनिकीकरण और सामाजिक सुशासन का एक अनुपम कूटनीतिक उदाहरण है। मेघालय की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर ‘लकाडोंग हल्दी’ को केवल एक कच्ची फसल न मानकर, उसे करक्यूमिन निष्कर्षण और मूल्य-वर्धित लक्ज़री उत्पादों के रूप में तब्दील करना सुशासन का सर्वश्रेष्ठ व्यावहारिक मार्ग है।
विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड, और नाबार्ड (NABARD) का यह एकीकृत अभूसरण (Convergence) मॉडल वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों में सहकारी कूटनीति को मजबूत करेगा। इसके अतिरिक्त, मातृसत्तात्मक मेघालय समाज की आदिवासी महिला किसानों को इस पूरी मूल्य श्रृंखला के नेतृत्व में शीर्ष स्थान देना वास्तविक महिला सशक्तिकरण का सबसे व्यावहारिक उदाहरण है।
यद्यपि सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे और परिवहन लॉजिस्टिक्स को स्थापित करना एक बड़ी चुनौती होगी, परंतु यह ‘स्वर्णिम मसाला मिशन’ अंततः पूर्वोत्तर के राज्यों को ‘अष्टलक्ष्मी’ के विज़न के अनुकूल भारत के विकास के मुख्य केंद्र में स्थापित करेगा। यह साझा प्रयास न केवल मेघालय के आदिवासी किसानों को आर्थिक संप्रभुता प्रदान करेगा, बल्कि ‘विकसित भारत @ 2047’ के हमारे बड़े राष्ट्रीय सपनों को संपूर्ण विश्व में भारतीय जैविक मसालों की स्वर्णिम खुशबू और कूटनीतिक महक के साथ साकार करने की सबसे मजबूत प्राकृतिक और आर्थिक रीढ़ साबित होगा।
Official Sources:
- Press Information Bureau (PIB) Delhi (https://pib.gov.in)