Published on July 18, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
भारत के अंतरिक्ष इतिहास में 18 जुलाई 2026 का दिन एक ऐतिहासिक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) ने भारत के पहले निजी तौर पर विकसित कक्षीय प्रक्षेपण यान (Orbital Launch Vehicle) ‘विक्रम-1’ (Vikram-1) को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर इतिहास रच दिया है। इस मील के पत्थर को भारतीय अंतरिक्ष सुधारों की सबसे बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। इस ऐतिहासिक Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace मिशन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं स्काईरूट की टीम से फोन पर बात की और उन्हें बधाई देते हुए इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा का एक निर्णायक मोड़ (Defining Moment) बताया।
यह ऐतिहासिक प्रक्षेपण ‘मिशन आगमन’ (Mission Aagaman) के अंतर्गत 18 जुलाई 2026 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से संपन्न हुआ। ‘विक्रम-1’ भारत का पहला ऐसा निजी रॉकेट है जो उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit – LEO) में स्थापित करने की पूर्ण व्यावसायिक क्षमता रखता है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और विभिन्न राज्य स्तरीय सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace का यह सफल मिशन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (GS Paper III – स्पेस टेक्नोलॉजी) और राष्ट्रीय नीतियों (GS Paper II – भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023) के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम विक्रम-1 की तकनीकी विशेषताओं, मिशन आगमन के विशिष्ट पेलोड्स, भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के रणनीतिक सुधारों, इन-स्पेस (IN-SPACe) की भूमिका और परीक्षा उपयोगी सभी महत्वपूर्ण आयामों का गहराई से अध्ययन करेंगे।
Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)
भारत के पहले निजी व्यावसायिक ऑर्बिटल रॉकेट प्रक्षेपण और इससे जुड़े महत्वपूर्ण रणनीतिक आंकड़ों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेपित किया गया है:
| महत्वपूर्ण संकेतक | Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace के प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| रॉकेट का नाम | विक्रम-1 (Vikram-1) – डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में नामित |
| विकासकर्ता कंपनी | स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace), हैदराबाद, भारत |
| लॉन्च की तिथि व स्थान | 18 जुलाई 2026, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा |
| मिशन का नाम | मिशन आगमन (Mission Aagaman) |
| पेलोड क्षमता | 350 किलोग्राम भार को निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में स्थापित करने की क्षमता |
| रॉकेट की संरचना | पूर्ण कार्बन कंपोजिट बॉडी, सॉलिड-फ्यूल बूस्टर और 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन |
| नियामक संस्था | इन-स्पेस (IN-SPACe) – स्वायत्त एकल खिड़की अंतरिक्ष नियामक |
| अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का लक्ष्य | वर्ष 2030 तक $40-45 बिलियन और वर्ष 2040 तक $100 बिलियन का आकार पाना |
Why in News?: चर्चा में क्यों है?
दशकों तक भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम पूरी तरह से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रत्यक्ष नियंत्रण और सरकारी बजट पर निर्भर रहा है। लेकिन वर्ष 2020 में शुरू हुए अंतरिक्ष सुधारों और ‘भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023’ के लागू होने के बाद, सरकार ने पूरे अंतरिक्ष मूल्य श्रृंखला (Space Value Chain) को गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) और निजी उद्योगों के लिए खोल दिया।
इसी ऐतिहासिक सुधार की सबसे बड़ी व्यावहारिक परिणति आज Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace के सफल प्रक्षेपण के रूप में सामने आई है। नवंबर 2022 में स्काईरूट ने ‘विक्रम-एस’ (Vikram-S) नामक भारत का पहला निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था, जो केवल एक तकनीकी प्रदर्शन था। लेकिन आज लॉन्च किया गया ‘विक्रम-1’ एक पूर्ण विकसित ऑर्बिटल रॉकेट है, जो व्यावसायिक स्तर पर उपग्रहों को 450 किमी की ऊंचाई पर स्थापित कर सकता है। यह सफलता वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार (Commercial Space Market) में भारत को अमेरिका की स्पेसएक्स (SpaceX) और रॉकेट लैब (Rocket Lab) के समकक्ष एक मजबूत प्रतिस्पर्धी के रूप में खड़ा करती है।
Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace: मिशन आगमन और तकनीकी विश्लेषण
विक्रम-1 रॉकेट का निर्माण पूरी तरह से स्वदेशी अत्याधुनिक तकनीकों और नवीन सामग्रियों का उपयोग करके किया गया है, जो भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की परिपक्वता को दर्शाता है:
1. पूर्ण कार्बन कंपोजिट संरचना (All-Carbon Composite Structure)
रॉकेट के पूरे मुख्य ढांचे (Fuselage) का निर्माण कार्बन कंपोजिट सामग्रियों से किया गया है। यह धातु की तुलना में अत्यधिक हल्का होता है लेकिन अत्यधिक मजबूत और सौर तापमान को सहन करने में सक्षम होता है। इससे रॉकेट की ईंधन दक्षता और पेलोड ले जाने की क्षमता काफी बढ़ जाती है।
2. 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन (3D-Printed Liquid Engine)
विक्रम-1 के ऊपरी चरण (Upper Stage) में प्रयुक्त होने वाले क्रायोजेनिक/लिक्विड इंजन का निर्माण उन्नत 3D-प्रिंटिंग तकनीक के माध्यम से एक ही टुकड़े (Single-piece) के रूप में किया गया है। यह तकनीक इंजन के वजन को कम करती है, जटिल वेल्डिंग जोड़ों को समाप्त करती है और विनिर्माण की लागत व समय को 80% तक कम कर देती है।
3. बहु-उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता (Multi-payload Deployment)
यह रॉकेट निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में 350 किलोग्राम तक के उपग्रहों को स्थापित करने में सक्षम है, जो वर्तमान वैश्विक नैनो और माइक्रो-सैटेलाइट बाजार की आवश्यकताओं के लिए सबसे उपयुक्त है।
मिशन आगमन (Mission Aagaman) के प्रमुख पेलोड्स
इस ऐतिहासिक उड़ान के दौरान विक्रम-1 अपने साथ कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के व्यावहारिक और प्रतीकात्मक पेलोड्स लेकर अंतरिक्ष में रवाना हुआ:
- SCOPE सैटेलाइट: स्काईरूट द्वारा स्वयं विकसित किया गया उन्नत संचार और पृथ्वी अवलोकन उपग्रह।
- SOLARAS S3 सैटेलाइट: भारतीय स्पेस स्टार्टअप ‘ग्राहा स्पेस’ (Grahaa Space) का एक उन्नत पृथ्वी इमेजिंग उपग्रह।
- Embrace रोबोटिक आर्म: स्टार्टअप ‘कॉस्मोसर्व स्पेस’ (Cosmoserve Space) द्वारा विकसित एक रोबोटिक आर्म, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) को पकड़ना और सुरक्षित करना है। यह अंतरिक्ष कचरा प्रबंधन में एक बड़ी तकनीकी प्रगति है।
- DCUBED का टेक्नोलॉजी पेलोड: जर्मनी की कंपनी का एक उन्नत तकनीकी प्रदर्शन पेलोड।
- प्रतीकात्मक पेलोड “कॉस्मिक ब्लूम” (Cosmic Bloom): एक सुंदर फूलों की आकृति वाली कलाकृति जिसे कला और विज्ञान के मेल के रूप में भेजा गया है।
- स्वर्ण माइक्रो-रॉकेट (18-Karat Gold Micro-rocket): 18 कैरेट सोने से बना एक अत्यंत सूक्ष्म रॉकेट, जिसमें भारत के तीन महान वैज्ञानिकों—डॉ. सी. वी. रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की चावल के दाने से भी छोटी सूक्ष्म मूर्तियाँ उकेरी गई हैं। यह भारत के वैज्ञानिक पुरोधाओं को एक अनोखी श्रद्धांजलि है।
“Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace भारत के निजी क्षेत्र की अदम्य क्षमता का प्रमाण है। यह ऐतिहासिक सफलता देश के लाखों युवाओं को बड़े सपने देखने और बिना किसी भय के नवाचार करने के लिए प्रेरित करेगी।”— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
भारत का अंतरिक्ष नीति सुधार 2023 और IN-SPACe
इस प्रक्षेपण की सफलता के पीछे भारत सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में किए गए साहसिक और दूरदर्शी नीतिगत सुधार हैं, जिन्हें समझना सिविल सेवा के अभ्यर्थियों के लिए आवश्यक है:
1. भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 (Indian Space Policy 2023)
इस नीति ने भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र को पूरी तरह से विकेंद्रीकृत कर दिया। इसके तहत इसरो (ISRO) की भूमिका को केवल अत्याधुनिक अनुसंधान, गहरे अंतरिक्ष मिशनों (जैसे चंद्रयान, गगनयान) और नई प्रौद्योगिकियों के विकास तक सीमित किया गया है, जबकि उपग्रहों के वाणिज्यिक निर्माण, प्रक्षेपण सेवाओं और संचार अनुप्रयोगों का पूरा कार्य निजी क्षेत्र (NGEs) को सौंप दिया गया है।
2. एकल-खिड़की नियामक: इन-स्पेस (IN-SPACe)
भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) की स्थापना एक स्वायत्त एकल-खिड़की एजेंसी के रूप में की गई है जो निजी कंपनियों की अंतरिक्ष गतिविधियों को अधिकृत (Authorise) और बढ़ावा देती है।
- प्रभावशाली आंकड़े: जून 2026 तक इन-स्पेस (IN-SPACe) ने देश के 4,500 से अधिक निजी संगठनों को पंजीकृत किया है, 133 से अधिक अंतरिक्ष लॉन्च और गतिविधियों को अधिकृत किया है, और इसरो की प्रयोगशालाओं व तकनीकों तक निजी कंपनियों की पहुंच सुगम बनाने के लिए 106 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं।
- निवेश संवर्धन: इन-स्पेस ने कैलेंडर वर्ष 2025 के दौरान भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स में 150 मिलियन डॉलर (लगभग ₹1,250 करोड़) के निवेश को सुगम बनाया है।
3. वित्तीय उत्प्रेरक योजनाएं (Funding Schemes)
सरकार निजी स्टार्टअप्स को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए तीन बड़े फंडों का संचालन कर रही है:
- इन-स्पेस सीड फंड योजना (Seed Fund): प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स को तकनीक विकसित करने के लिए ₹1 करोड़ तक की वित्तीय सहायता और मेंटरशिप प्रदान करना।
- ₹1,000 करोड़ का वेंचर कैपिटल (VC) फंड: वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 के बीच संचालित यह फंड होनहार स्पेस स्टार्टअप्स को शुरुआती पूंजी प्रदान करेगा ताकि देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को पांच गुना बढ़ाया जा सके।
- ₹500 करोड़ का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड (TAF): यह फंड स्टार्टअप्स द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीकों को व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारने के लिए कुल परियोजना लागत का 40% से 60% (अधिकतम ₹25 करोड़ प्रति प्रोजेक्ट) तक का अनुदान प्रदान करता है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में उदारीकृत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति
भारत सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बनाने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को पूरी तरह उदारीकृत कर दिया है, जिसकी संरचना नीचे दी गई है:
| अंतरिक्ष क्षेत्र की विशिष्ट गतिविधि | एफडीआई सीमा (FDI Cap) | प्रवेश मार्ग (Entry Route) |
|---|---|---|
| सैटेलाइट विनिर्माण और संचालन (Satellite Manufacturing & Operation) | 100% | 74% तक स्वचालित मार्ग (Automatic), 74% से अधिक सरकारी मार्ग |
| लॉन्च व्हीकल और स्पेसपोर्ट्स का निर्माण (Launch Vehicles & Spaceports) | 100% | 49% तक स्वचालित मार्ग, 49% से अधिक सरकारी मार्ग |
| सैटेलाइट कंपोनेंट्स और सब-सिस्टम्स का विनिर्माण | 100% | 100% स्वचालित मार्ग (Automatic Route) |
न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और व्यावसायिकता
भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के तहत इसरो की वाणिज्यिक शाखा ‘न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड’ (NSIL) की भूमिका को पुनर्गठित किया गया है। एनएसएसईएल (NSIL) अब व्यावसायिक सिद्धांतों पर अंतरिक्ष प्रणालियों का निर्माण और खरीद करती है।
जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, NSIL ने अब तक कुल 141 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया है, जिनमें 138 अंतरराष्ट्रीय ग्राहक उपग्रह और 3 भारतीय उपग्रह शामिल हैं। इसने इसरो द्वारा विकसित पीएसएलवी (PSLV) रॉकेट के उत्पादन का कार्य भी निजी कंसोर्टियम (HAL और L&T) को सौंप दिया है, जो भारत के व्यावसायिक अंतरिक्ष प्रक्षेपण को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रहा है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष अनुभाग (Exam Relevance Section)
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) और विभिन्न राज्यों की मुख्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सामान्य अध्ययन के पेपर-3 (विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्वदेशीकरण, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी) के दृष्टिकोण से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
UPSC Prelims Fact Box: Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace
- विक्रम-1: देश का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल प्रक्षेपण यान, जो उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (450 किमी) में स्थापित करने में सक्षम है।
- अग्निकुल कॉसमॉस: मई 2024 में श्रीहरिकोटा के पहले निजी लॉन्च पैड ‘धनुष’ से ‘अग्निबाण सॉर्टेड’ रॉकेट का सफल प्रक्षेपण करने वाला दूसरा भारतीय निजी स्पेस स्टार्टअप। इसमें दुनिया का पहला सिंगल-पीस 3D-प्रिंटेड सेमी-क्रायोजेनिक इंजन लगा था।
- पेलोड ‘Embrace’: अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) को पकड़ने के लिए विकसित की गई भारत की पहली निजी रोबोटिक आर्म।
- इन-स्पेस (IN-SPACe): निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को अधिकृत और प्रोत्साहित करने वाला देश का सर्वोच्च स्वायत्त नियामक।
UPSC Mains Analysis (GS Paper III: विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं आर्थिक सुदृढ़ीकरण)
प्रश्न: “भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में हाल ही में किए गए नीतिगत और नियामक सुधार (जैसे भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 और FDI उदारीकरण) ने इसरो (ISRO) को गहरे अंतरिक्ष अनुसंधानों पर ध्यान केंद्रित करने की स्वतंत्रता दी है, और साथ ही निजी क्षेत्र को देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का इंजन बनाया है।” हाल ही में संपन्न हुए विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण के विशेष संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर की रूपरेखा:
- प्रस्तावना: श्रीहरिकोटा से स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा किए गए भारत के पहले निजी ऑर्बिटल प्रक्षेपण Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace की ऐतिहासिक सफलता से उत्तर की शुरुआत करें।
- अंतरिक्ष सुधारों का त्रि-आयामी प्रभाव (ISRO, IN-SPACe, Private Sector):
- इसरो का विज़न परिवर्तन: अब इसरो केवल नियमित उपग्रह प्रक्षेपण के व्यावसायिक कार्यों से मुक्त होकर अपना ध्यान गगनयान (मानव अंतरिक्ष मिशन), चंद्रयान, और गहरे सौर अन्वेषण (आदित्य-L1) जैसे रणनीतिक वैज्ञानिक अनुसंधान पर केंद्रित कर रहा है।
- निजी क्षेत्र की कूटनीति: स्काईरूट और अग्निकुल जैसी कंपनियों को इन-स्पेस के माध्यम से इसरो की विश्व स्तरीय प्रयोगशालाओं, लॉन्च पैड्स और तकनीकी हस्तांतरण (जैसे SSLV तकनीक का HAL को हस्तांतरण) की सुलभता मिलना।
- आर्थिक सुरक्षा और वैश्विक हिस्सेदारी: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था वर्तमान में लगभग $8.4 बिलियन की है, जिसे वर्ष 2030 तक $45 बिलियन और वर्ष 2040 तक $100 बिलियन करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
- चुनौतियां: निजी क्षेत्र के लिए अत्यधिक विफलता जोखिम (Failure Risk), बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश (Venture Capital) की निरंतर आवश्यकता, और वैश्विक बाजार में पहले से स्थापित स्पेसएक्स (SpaceX) जैसी महाशक्तियों से मूल्य और तकनीक के मोर्चे पर कड़ी प्रतिस्पर्धा।
- निष्कर्ष: यह सारांश प्रस्तुत करें कि ‘विक्रम-1’ का सफल प्रक्षेपण केवल एक रॉकेट का ऊपर उठना नहीं है, बल्कि यह भारत के युवा वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स के आत्मविश्वास की नई उड़ान है, जो भारत को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy) का नया सिरमौर बनाएगी।
संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)
भारतीय अंतरिक्ष इतिहास और प्रमुख संगठनों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक तथ्य जो परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:
- डॉ. विक्रम साराभाई (1919-1971): इन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक (Father of Indian Space Programme) कहा जाता है। उन्हीं के प्रयासों से वर्ष 1962 में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) का गठन किया गया था, जिसे बाद में 15 अगस्त 1969 को ‘इसरो’ (ISRO) के रूप में पुनर्गठित किया गया। स्काईरूट के ‘विक्रम’ रॉकेट श्रृंखला का नाम उन्हीं के सम्मान में रखा गया है।
- डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम (1931-2015): इन्हें भारत के मिसाइल मैन (Missile Man of India) के रूप में जाना जाता है। वे भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-3) के परियोजना निदेशक थे, जिसने वर्ष 1980 में ‘रोहिणी’ उपग्रह को कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया था।
- निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit – LEO): यह पृथ्वी की सतह से लगभग 160 किमी से लेकर 2000 किमी तक की ऊंचाई वाली कक्षा होती है। इस कक्षा में उपग्रह अत्यधिक तेज गति से चक्कर लगाते हैं (लगभग 27,500 किमी/घंटा)। इसका उपयोग मौसम उपग्रहों, इमेजिंग सैटेलाइट्स और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के संचालन के लिए किया जाता है।
एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)
त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:
- Private Milestone: स्काईरूट एयरोस्पेस ने भारत का पहला निजी ऑर्बिटल प्रक्षेपण यान ‘विक्रम-1’ सफलतापूर्वक लॉन्च किया।
- Mission Aagaman: इस ऐतिहासिक मिशन का नाम ‘मिशन आगमन’ था, जिसने उपग्रहों को 450 किमी की निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में स्थापित किया।
- Technical Advance: विक्रम-1 रॉकेट पूरी तरह से कार्बन कंपोजिट बॉडी और 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन से निर्मित है।
- Debris Solution: मिशन के तहत ‘Embrace’ नामक रोबोटिक आर्म को भेजा गया है जो अंतरिक्ष कचरा प्रबंधन में शोध करेगी।
- Policy Engine: यह सफलता भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 और इन-स्पेस (IN-SPACe) के उदारीकृत सुधारों की प्रत्यक्ष परिणति है।
- FDI Reform: सरकार ने सैटेलाइट घटकों के निर्माण में 100% और लॉन्च व्हीकल निर्माण में 49% स्वचालित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दी है।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस वैज्ञानिक और नीतिगत विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में 18 जुलाई 2026 को लॉन्च किए गए भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ (Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace) का विकास किस स्पेस स्टार्टअप द्वारा किया गया है?
(A) पिक्सल स्पेस (Pixxel Space)
(B) अग्निकुल कॉसमॉस (Agnikul Cosmos)
(C) स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace)
(D) ध्रुव स्पेस (Dhruva Space)
उत्तर: (C) स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace)
व्याख्या: हैदराबाद आधारित निजी स्पेस टेक स्टार्टअप ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ ने इस ऐतिहासिक ‘विक्रम-1’ रॉकेट का विकास और सफल प्रक्षेपण किया है।
प्रश्न 2: ‘Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace’ के तहत संचालित ‘मिशन आगमन’ में भेजे गए उस रोबोटिक पेलोड का क्या नाम है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) को पकड़ना है?
(A) एम्ब्रेस (Embrace)
(B) कॉस्मिक ब्लूम (Cosmic Bloom)
(C) सोलारास एस3 (SOLARAS S3)
(D) स्कोप (SCOPE)
उत्तर: (A) एम्ब्रेस (Embrace)
व्याख्या: ‘एम्ब्रेस’ (Embrace) भारतीय स्टार्टअप कॉस्मोसर्व स्पेस द्वारा विकसित की गई एक विशेष रोबोटिक आर्म है, जिसका उद्देश्य निम्न पृथ्वी कक्षा में तैर रहे मलबे को पकड़कर अंतरिक्षीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
प्रश्न 3: भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को विनियमित, अधिकृत और बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2020 में स्थापित किए गए स्वायत्त संगठन का क्या नाम है?
(A) न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL)
(B) इन-स्पेस (IN-SPACe)
(C) एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन (Antrix)
(D) राष्ट्रीय अंतरिक्ष विकास परिषद
उत्तर: (B) इन-स्पेस (IN-SPACe)
व्याख्या: ‘इन-स्पेस’ (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) देश का सर्वोच्च स्वायत्त और एकल-खिड़की नियामक निकाय है जो सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं की अंतरिक्ष गतिविधियों को विनियमित और अधिकृत करता है।
प्रश्न 4: सरकार की नई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) उदारीकरण नीति के अनुसार, उपग्रहों के घटकों और सब-सिस्टम्स के विनिर्माण में कितने प्रतिशत एफडीआई को स्वचालित मार्ग (Automatic Route) से मंजूरी दी गई है?
(A) 49% एफडीआई
(B) 74% एफडीआई
(C) 100% एफडीआई
(D) केवल 24% एफडीआई
उत्तर: (C) 100% एफडीआई
व्याख्या: नए एफडीआई सुधारों के तहत उपग्रहों के घटकों, सब-सिस्टम्स और ग्राउंड सेगमेंट के निर्माण में निवेश और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए 100% स्वचालित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दी गई है।
प्रश्न 5: वर्ष 2026 के नवीनतम आधिकारिक विज़न के अनुसार, भारत सरकार ने देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को वर्ष 2040 तक कितने अरब डॉलर के स्तर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है?
(A) $20 बिलियन
(B) $45 बिलियन
(C) $100 बिलियन
(D) $150 बिलियन
उत्तर: (C) $100 बिलियन
व्याख्या: वर्तमान में लगभग $8.4 बिलियन की भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को वर्ष 2030 तक $40-45 बिलियन और वर्ष 2040 तक $100 बिलियन तक पहुँचाने का दीर्घकालिक लक्ष्य रखा गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace का क्या महत्व है?
Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की एक युगांतरकारी घटना है। इसके तहत देश का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया है, जो 350 किलोग्राम तक के व्यावसायिक उपग्रहों को निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में स्थापित करने की पूर्ण क्षमता रखता है। यह भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में निजी उद्योगों के प्रवेश का सफल प्रमाण है।
Q2. ‘विक्रम-1’ रॉकेट की तकनीकी विशेषताएं क्या हैं?
विक्रम-1 रॉकेट पूरी तरह से हल्के और मजबूत कार्बन कंपोजिट ढांचे से बना है। इसके निचले चरण में ठोस ईंधन आधारित बूस्टर और ऊपरी चरण में 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन लगा है, जो विनिर्माण की जटिलताओं और लागत को काफी कम कर देता है।
Q3. ‘मिशन आगमन’ (Mission Aagaman) क्या है?
‘मिशन आगमन’ विक्रम-1 रॉकेट की पहली व्यावसायिक कक्षीय उड़ान (Maiden Orbital Flight) का नाम है। इस मिशन के तहत रॉकेट ने अंतरिक्ष में कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और व्यावहारिक पेलोड्स (जैसे स्कोप सैटेलाइट, मलबे को पकड़ने वाला एम्ब्रेस रोबोटिक आर्म, और महान वैज्ञानिकों की स्वर्ण मूर्तियां) को पृथ्वी की 450 किमी की कक्षा में स्थापित किया।
Q4. इन-स्पेस (IN-SPACe) क्या है और यह निजी कंपनियों की कैसे मदद करता है?
IN-SPACe (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र) भारत सरकार का एक स्वायत्त एकल-खिड़की नियामक निकाय है। यह निजी कंपनियों की अंतरिक्ष गतिविधियों को अधिकृत करता है, उन्हें इसरो (ISRO) की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, तकनीकी विशेषज्ञता और श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड्स तक पहुंच प्रदान करता है।
Q5. भारत सरकार ने स्पेस सेक्टर में निवेश बढ़ाने के लिए क्या वित्तीय सुधार किए हैं?
सरकार ने उदारीकृत एफडीआई नीति के तहत सैटेलाइट पुर्जा विनिर्माण में 100% और रॉकेट प्रक्षेपण प्रणालियों में 49% स्वचालित मार्ग से सीधे विदेशी निवेश की छूट दी है। साथ ही, इन-स्पेस सीड फंड, ₹1,000 करोड़ के वेंचर कैपिटल (VC) फंड और ₹500 करोड़ के टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड (TAF) के माध्यम से स्टार्टअप्स को सीधे पूंजीगत सहायता दी जा रही है।

निष्कर्ष (Conclusion)
श्रीहरिकोटा के प्रक्षेपण स्थल से ऊपर उठा विक्रम-1 केवल एक रॉकेट नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत के वैज्ञानिक स्वाभिमान और सुशासन का एक नया कूटनीतिक लाइटहाउस है। Vikram 1 Rocket Launch Skyroot Aerospace की यह ऐतिहासिक सफलता यह सिद्ध करती है कि ‘भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023’ के तहत किए गए साहसिक और उदारीकृत सुधार अब जमीनी स्तर पर क्रांतिकारी परिणाम दे रहे हैं।
कार्बन कंपोजिट ढांचा, 3D-प्रिंटेड इंजन, और अंतरिक्ष मलबे को पकड़ने वाली ‘एम्ब्रेस’ जैसी रोबोटिक तकनीकों का सफल प्रदर्शन यह प्रमाणित करता है कि भारत की निजी स्पेस टेक कंपनियां विश्व स्तरीय नवाचार करने में पूरी तरह सक्षम हैं। इन-स्पेस के सीड फंड और ₹1000 करोड़ के वेंचर कैपिटल फंड के माध्यम से मिल रहा वित्तीय संबल आने वाले समय में देश के सुदूर अंचलों के युवाओं को एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नए कीर्तिमान रचने के लिए प्रेरित करेगा। यह ऐतिहासिक मील का पत्थर अंततः भारत को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy) का सबसे विश्वसनीय और वहनीय कूटनीतिक केंद्र बनाकर ‘विकसित भारत @ 2047’ के हमारे बड़े राष्ट्रीय सपनों को ब्रह्मांड की असीमित ऊंचाइयों तक ले जाने की सबसे मजबूत और अजेय रीढ़ साबित होगा।
Official Sources:
- Press Information Bureau (PIB) Delhi (https://pib.gov.in)