Bastar Organic Farming Export Initiative: बस्तर के जैविक उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच, यूरोप के बाजारों में अपनी पहचान बनाएगी प्राकृतिक खेती

Bastar Organic Farming Export Initiative Launch Bastar Organic Farming Export Initiative Launch

Published on July 12, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल और प्राकृतिक रूप से समृद्ध बस्तर संभाग के कृषि परिदृश्य को वैश्विक पहचान दिलाने और स्थानीय आदिवासी किसानों की आय को कई गुना बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने नवा रायपुर अटल नगर स्थित महानदी भवन (मंत्रालय) में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में Bastar Organic Farming Export Initiative को हरी झंडी दे दी है। इस अनूठी पहल के अंतर्गत बस्तर संभाग के उन सुदूर और नव-नक्सल मुक्त गांवों की पहचान की जाएगी, जहां आज तक पारंपरिक कृषि पद्धतियों के कारण रासायनिक उर्वरकों या कीटनाशकों का कभी कोई उपयोग नहीं हुआ है।

इन प्राकृतिक रूप से जैविक खेतों (Default Organic Farms) का वैज्ञानिक रूप से प्रमाणीकरण (Organic Certification) कराया जाएगा, ताकि बस्तर के जैविक चावल, कोदो, कुटकी, रागी (मिलेट्स) और मूल्यवान वनोपजों को यूरोपीय देशों सहित अन्य बड़े अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक सीधे निर्यात किया जा सके। कृषि विभाग, पंचायत विभाग और राष्ट्रीय कृषि निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के संयुक्त सहयोग से शुरू की गई यह Bastar Organic Farming Export Initiative छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में कृषि क्रांति और सुशासन का एक मील का पत्थर है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह विषय भारत में जैविक खेती के नियामक ढांचे, कृषि निर्यात (GS Paper III) और जनजातीय विकास नीतियों (GS Paper II) के अंतर्गत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस निर्यात पहल, राष्ट्रीय जैविक प्रमाणीकरण प्रणालियों (NPOP & PGS) और बस्तर की अर्थव्यवस्था पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों का गहराई से अध्ययन करेंगे।

Table of Contents

Bastar Organic Farming Export Initiative: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)

बस्तर के जैविक उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाले इस रणनीतिक रोडमैप से जुड़े प्रमुख तथ्यों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:

महत्वपूर्ण आयामBastar Organic Farming Export Initiative के प्रमुख तथ्य
पहल का नामबस्तर जैविक खेती निर्यात पहल (Bastar Organic Farming Export Initiative)
मुख्य फोकस क्षेत्रबस्तर संभाग के नक्सल मुक्त हुए ग्रामों के पारंपरिक व रासायनिक-मुक्त खेत
लक्षित जिलेनारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर (बस्तर संभाग)
मुख्य निर्यातक गंतव्ययूरोपीय संघ (European Union) के देश और अन्य वैश्विक बाजार
प्रयुक्त प्रमाणन प्रणालियांNPOP (राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम) और PGS (सहभागी गारंटी प्रणाली)
ब्रांडिंग और विपणन‘बिहान’ (BIHAN) के अंतर्गत ‘छत्तीसगढ़ कला’ (36 Kala) एक्सपोर्ट ब्रांड द्वारा
सहयोगी एजेंसियांएपीडा (APEDA), कृषि विभाग, छत्तीसगढ़ राज्य आजीविका मिशन (बिहान) और पंचायत विभाग

Bastar Organic Farming Export Initiative क्या है?

भौगोलिक रूप से पृथक और घने जंगलों से घिरा बस्तर संभाग अपनी अद्वितीय जनजातीय संस्कृति और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। बस्तर के अधिकांश आदिवासी किसान पीढ़ियों से अपनी पारंपरिक कृषि पद्धतियों का पालन करते आ रहे हैं। आधुनिक और रासायनिक कृषि से दूर रहने के कारण, बस्तर के कई अंदरूनी गांवों के खेतों में आज तक कभी भी यूरिया, फॉस्फेट या रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव नहीं किया गया है।

वैज्ञानिक शब्दावली में इन्हें ‘डिफ़ॉल्ट ऑर्गेनिक’ (Default Organic) या स्वतः जैविक क्षेत्र कहा जाता है। Bastar Organic Farming Export Initiative इसी अनुपम धरोहर को एक संगठित व्यावसायिक और कूटनीतिक रूप देने की योजना है। इस पहल के तहत इन खेतों का राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार परीक्षण कर उन्हें जैविक खेती का आधिकारिक प्रमाण-पत्र दिया जाएगा, ताकि वैश्विक बाजारों में उन्हें ‘प्रीमियम जैविक उत्पाद’ (Premium Organic Products) के रूप में बेचा जा सके, जिससे बस्तर के गरीब किसानों को उनके उत्पादों का वर्तमान मूल्य से तीन से चार गुना अधिक दाम मिल सकेगा।

भारत में जैविक प्रमाणीकरण: NPOP और PGS प्रणालियां

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि भारत में जैविक उत्पादों के विपणन और निर्यात के लिए दो प्रमुख प्रमाणीकरण प्रणालियाँ काम करती हैं, जिनका उपयोग इस पहल में किया जाएगा:

1. राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (National Programme for Organic Production – NPOP)

यह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce) के तहत राष्ट्रीय कृषि निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा प्रबंधित एक अत्यंत कड़ा और वैज्ञानिक प्रमाणन कार्यक्रम है:

  • वैश्विक मान्यता: एनपीओपी (NPOP) प्रमाण-पत्र को यूरोपीय संघ (European Union), संयुक्त राज्य अमेरिका (USDA) और स्विट्जरलैंड द्वारा मान्यता प्राप्त है। इसलिए, बस्तर के जैविक उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में सीधे निर्यात करने के लिए NPOP प्रमाणीकरण प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • थर्ड-पार्टी ऑडिट: इसके तहत मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रमाणन संस्थाएं खेतों का भौतिक निरीक्षण और मृदा (Soil) व फसल परीक्षण करती हैं।

2. सहभागी गारंटी प्रणाली (Participatory Guarantee System – PGS-India)

यह कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture) द्वारा संचालित एक स्वदेशी और विकेंद्रीकृत प्रमाणीकरण प्रणाली है:

  • सामुदायिक भागीदारी: यह मुख्य रूप से स्थानीय उत्पादकों और उपभोक्ताओं के आपसी विश्वास व पीयर-रिव्यू (Peer Review) पर आधारित है, जो घरेलू बाजारों में बिक्री के लिए अत्यधिक लोकप्रिय और कम लागत वाली है।

3. बस्तर के लिए 3 वर्ष की अनिवार्यता में छूट की मांग

सामान्यतः, NPOP प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए किसी भी खेत को न्यूनतम तीन वर्षों की परिवर्तन अवधि (Conversion Period) से गुजरना पड़ता है, जिसमें रासायनिक इनपुट को पूरी तरह बंद कर मिट्टी के शुद्धिकरण का परीक्षण किया जाता है।

चूँकि बस्तर के इन लक्षित गांवों में पीढ़ियों से कभी रसायन प्रयुक्त ही नहीं हुए, इसलिए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने Bastar Organic Farming Export Initiative के सुचारू संचालन के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखकर बस्तर की इस विशिष्ट भू-सांस्कृतिक परिस्थिति को देखते हुए इस 3 वर्ष की परिवर्तन अवधि की अनिवार्यता में विशेष प्रशासनिक छूट प्रदान करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।

“बस्तर के जंगलों में उगने वाले मिलेट्स, सुगंधित चावल और लघु वनोपज (MFP) प्रकृति की अमूल्य देन हैं। Bastar Organic Farming Export Initiative के माध्यम से हम बस्तर के संघर्षपूर्ण अतीत को पीछे छोड़कर नक्सल मुक्त गांवों को समृद्धि और वैश्विक व्यापार के मार्ग पर आगे बढ़ाएंगे।”— उप मुख्यमंत्री, श्री विजय शर्मा

एपीडा (APEDA) और संयुक्त सर्वेक्षण दलों का गठन

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समयबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने एक विशिष्ट कार्ययोजना तैयार की है:

  • संयुक्त सर्वेक्षण दलों का गठन: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संचालक श्री अश्विनी देवांगन के नेतृत्व में दो उच्चस्तरीय संयुक्त दलों का गठन किया गया है।
  • जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण और मृदा परीक्षण: ये दल एपीडा (APEDA) और कृषि विभाग के वरिष्ठ मृदा वैज्ञानिकों के साथ मिलकर नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिलों के सुदूर जंगलों का दौरा करेंगे। वे खेतों की मिट्टी, पानी और फसल के नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण कर शून्य रासायनिक अवशेष (Zero Chemical Residues) की पुष्टि करेंगे।
  • ग्राम स्तरीय सहकारी समितियों का निर्माण: बस्तर के छोटे और सीमांत किसानों को संगठित करने के लिए ग्राम स्तर पर सहकारी समितियों (Cooperatives) का गठन किया जाएगा, जिससे उत्पादन से लेकर विपणन तक प्रत्येक ग्रामीण को लाभांश का सीधा भागीदार बनाया जा सके।

बिहान का ‘छत्तीसगढ़ कला’ (36 Kala) एक्सपोर्ट ब्रांड और वैश्विक विपणन

ग्रामीण स्व-सहायता समूहों (SHGs) के सुदृढ़ीकरण के लिए संचालित राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ (BIHAN) इस पूरी श्रृंखला का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक कड़ी है:

  • छत्तीसगढ़ कला (36 Kala) ब्रांड का उपयोग: बस्तर के प्रमाणित जैविक उत्पादों को सीधे ‘छत्तीसगढ़ कला’ एक्सपोर्ट ब्रांड के तहत पैक और विज्ञापित किया जाएगा।
  • लघु वनोपजों (Minor Forest Produce – MFP) का एकीकरण: बस्तर के वनों से एकत्रित होने वाले प्राकृतिक वनोत्पादों (जैसे महुआ, इमली, जंगली शहद और जड़ी-बूटियों) को जैविक प्रमाणीकरण के नियमों से छूट होने के कारण इन्हें तुरंत ‘एक्सपोर्ट रेडी’ (Export Ready) बनाकर विदेशों में भेजा जाएगा, जिससे आदिवासियों को संग्रहण का रिकॉर्ड पारिश्रमिक प्राप्त हो सके।

नक्सल मुक्त गांवों का सामाजिक-आर्थिक कायाकल्प

बस्तर संभाग पिछले कई दशकों से वामपंथी उग्रवाद (LWE) के दंश से पीड़ित रहा है। Bastar Organic Farming Export Initiative केवल एक आर्थिक कृषि योजना नहीं है, बल्कि यह बस्तर में स्थाई शांति बहाली का एक बड़ा सामाजिक-आर्थिक हथियार है:

  1. बंदूकों का स्थान हल और समृद्धि ने लिया: नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हुए नव-शांतिप्रिय गांवों के आदिवासियों को जब उनके सुगंधित चावल (जैसे दुबराज, जीराफूल) और मिलेट्स का वैश्विक बाजार मूल्य मिलेगा, तो वे आर्थिक रूप से मुख्यधारा से जुड़ेंगे।
  2. विकास के प्रति विश्वास की बहाली: आदिवासियों के खातों में सीधे तीन से चार गुना पैसा आने (Direct Benefit) से राज्य प्रशासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति उनका विश्वास सुदृढ़ होगा।
  3. जैव विविधता का संरक्षण: रासायनिक खादों के प्रवेश को पूरी तरह प्रतिबंधित कर बस्तर के पश्चिमी घाट और दंडकारण्य के संवेदनशील वनों के पर्यावरण को नष्ट होने से बचाया जा सकेगा।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष विश्लेषण (Exam Relevance Section)

यूपीएससी और सीजीपीएससी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए कृषि अर्थशास्त्र, जनजातीय विकास और पर्यावरण कूटनीति के दृष्टिकोण से यह समसामयिक विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

CGPSC & UPSC Prelims Fact Box

  • एपीडा (APEDA): ‘कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण’ की स्थापना संसद के एक अधिनियम द्वारा दिसंबर 1985 में की गई थी। यह केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करता है और भारत से जैविक कृषि उत्पादों के निर्यात को प्रमाणित करने वाली नोडल एजेंसी है।
  • सिक्किम (First Organic State): वर्ष 2016 में सिक्किम भारत का ही नहीं बल्कि विश्व का पहला पूर्णतः प्रमाणित जैविक राज्य (100% Organic State) बना था।
  • 36 कला (Chhattisgadh Kala) ब्रांड: छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ का वह आधिकारिक प्रीमियम ब्रांड जिसके तहत ग्रामीण महिला समूहों के हस्तशिल्प और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का वैश्विक निर्यात किया जा रहा है।

UPSC & CGPSC Mains Analysis (GS Paper III: कृषि एवं पर्यावरण)

प्रश्न: “वनांचल और जनजातीय क्षेत्रों में पारंपरिक ‘स्वतः जैविक खेती’ (Default Organic Farming) को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रमाणित कर निर्यात से जोड़ना सामाजिक सुशासन और पर्यावरण अनुकूल समावेशी विकास का एक श्रेष्ठ उदाहरण है।” हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई **Bastar Organic Farming Export Initiative** के विशेष संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर की रूपरेखा:

  • प्रस्तावना: बस्तर संभाग के प्राकृतिक कृषि परिदृश्य और हाल ही में घोषित Bastar Organic Farming Export Initiative के उद्देश्यों को संक्षेप में स्पष्ट करते हुए उत्तर प्रारंभ करें।
  • पारंपरिक जनजातीय कृषि की विशेषताएं: समझाएं कि कैसे बस्तर के सुदूर क्षेत्रों के आदिवासी किसान पीढ़ियों से रसायनों से दूर रहकर प्राकृतिक रूप से जैविक खेती करते आ रहे हैं (Default Organic), जो मिट्टी के स्वास्थ्य और जैव विविधता के अनुकूल है।
  • वैश्विक प्रमाणीकरण (NPOP & PGS) के लाभ और निर्यात रणनीति:
    • आय में गुणात्मक वृद्धि: वैश्विक स्तर पर प्रमाणित जैविक खाद्य पदार्थों की भारी मांग है, जिससे बस्तर के उत्पादों का मूल्य 300% से 400% तक बढ़ जाएगा।
    • स्थानीय रोजगार और ‘बिहान’ की भूमिका: स्व-सहायता समूहों और ’36 कला’ एक्सपोर्ट ब्रांड के माध्यम से आदिवासियों को बिचौलियों के शोषण से मुक्ति मिलेगी।
    • नक्सल उन्मूलन में सहायक: नक्सल मुक्त गांवों में जब आर्थिक खुशहाली आएगी, तो यह सामाजिक सुरक्षा और शांति बहाली में सीधे मदद करेगी।
  • व्यावहारिक चुनौतियां: कड़े NPOP प्रमाणीकरण के लिए आवश्यक 3 वर्ष की ‘रूपांतरण अवधि’ की बाधा, सुदूर पहाड़ी और जंगली क्षेत्रों में कोल्ड चेन और परिवहन लॉजिस्टिक्स का अभाव, वैश्विक मानकों के अनुरूप पैकेजिंग और स्वच्छता नियंत्रण बनाए रखना।
  • निष्कर्ष: यह सुझाव प्रस्तुत करें कि बस्तर के लिए रूपांतरण अवधि में केंद्र सरकार से छूट मिलना और ’36 कला’ ब्रांड का सुदृढ़ीकरण इस पहल को एक अनुकरणीय वैश्विक मॉडल बनाएगा, जो ‘सतत विकास लक्ष्यों’ (SDG 1 और SDG 15) की प्राप्ति में भी सहायक होगा।

संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)

कृषि और बस्तर संभाग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक सामान्य ज्ञान तथ्य जो परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:

  1. बस्तर की प्रमुख पारंपरिक फसलें: बस्तर संभाग कोडो, कुटकी, रागी (मिलेट्स) के साथ-साथ सुगंधित धान की किस्मों (जैसे दुबराज, जीराफूल, जवाफूल) के लिए प्रसिद्ध है, जिन्हें उनकी अनूठी खुशबू और पोषण तत्वों के लिए जाना जाता है।
  2. लघु वनोपज (Minor Forest Produce – MFP) और पेसा एक्ट: पेसा (PESA) अधिनियम, 1996 के तहत अनुसूचित क्षेत्रों की ग्राम सभाओं को महुआ, इमली, चारौटा और तेंदूपत्ता जैसे लघु वनोपजों के स्वामित्व और मूल्य निर्धारण का विशेष अधिकार दिया गया है।
  3. दंडकारण्य पठार (Dandakaranya Plateau): बस्तर संभाग भौगोलिक रूप से दंडकारण्य पठार का हिस्सा है, जो अपने लौह अयस्क (बैलाडीला) के साथ-साथ अत्यंत सघन वनों (साल और सागौन) और पारंपरिक जनजातीय जीवन के लिए प्रसिद्ध है।

एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)

त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए Bastar Organic Farming Export Initiative के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:

  • Global Reach: छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर के जैविक उत्पादों को यूरोपीय संघ और बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करेगी।
  • Target Districts: नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिलों में विशेष सर्वेक्षण शुरू।
  • Exemption Demand: पारंपरिक रूप से रसायन-मुक्त खेतों के कारण NPOP प्रमाणीकरण की 3 साल की ‘परिवर्तन अवधि’ में केंद्र से छूट की मांग।
  • Collaborative Effort: एपीडा (APEDA), कृषि विभाग, पंचायत विभाग और बिहान के संयुक्त प्रयास से योजना तैयार।
  • Export Branding: प्रमाणित उत्पादों को बिहान के प्रसिद्ध ‘छत्तीसगढ़ कला’ (36 Kala) एक्सपोर्ट ब्रांड के तहत बेचा जाएगा।
  • Livelihood Impact: जैविक प्रमाणन से बस्तर के आदिवासी किसानों की फसल का दाम 3 से 4 गुना बढ़ जाएगा।

अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और कृषि विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में चर्चा में रही ‘Bastar Organic Farming Export Initiative’ के तहत बस्तर के जैविक उत्पादों को किस अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीधे निर्यात करने की कार्ययोजना बनाई गई है?

(A) दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश (ASEAN)
(B) यूरोपीय संघ (European Union) के देश
(C) केवल अफ्रीकी महाद्वीप के देश
(D) दक्षिण अमेरिकी देश

उत्तर: (B) यूरोपीय संघ (European Union) के देश
व्याख्या: छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर के प्रमाणित जैविक उत्पादों को यूरोपीय संघ (Europe) के देशों के साथ-साथ अन्य बड़े वैश्विक बाजारों में निर्यात कर आदिवासी किसानों की आय बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।

प्रश्न 2: भारत से जैविक कृषि उत्पादों के वैश्विक निर्यात को प्रमाणित और विनियमित करने वाली सर्वोच्च नोडल एजेंसी कौन सी है?

(A) नाबार्ड (NABARD)
(B) एपीडा (APEDA)
(C) भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI)
(D) नीति आयोग

उत्तर: (B) एपीडा (APEDA)
व्याख्या: वाणिज्य मंत्रालय के अधीन कार्यरत ‘कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण’ (APEDA) भारत में ‘राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम’ (NPOP) का संचालन करता है, जो वैश्विक निर्यात के लिए अनिवार्य संस्था है।

प्रश्न 3: बस्तर के प्रमाणित जैविक उत्पादों को छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के किस प्रसिद्ध एक्सपोर्ट ब्रांड के तहत विपणित किया जाएगा?

(A) बस्तर हर्बल्स (Bastar Herbs)
(B) छत्तीसगढ़ कला ब्रांड या “36 कला” (36 Kala)
(C) सुराजी माटी ब्रांड
(D) दंडकारण्य ऑर्गेनिक ब्रांड

उत्तर: (B) छत्तीसगढ़ कला ब्रांड या “36 कला” (36 Kala)
व्याख्या: बस्तर के प्रमाणित सुगंधित चावल और मिलेट्स को बिहान के आधिकारिक प्रीमियम एक्सपोर्ट ब्रांड ‘छत्तीसगढ़ कला’ या ’36 कला’ के तहत पैक और वैश्विक स्तर पर निर्यात किया जाएगा।

प्रश्न 4: भारत के किस राज्य को वर्ष 2016 में देश का (और विश्व का) पहला पूर्णतः प्रमाणित जैविक राज्य (100% Certified Organic State) घोषित किया गया था?

(A) केरल
(B) सिक्किम
(C) हिमाचल प्रदेश
(D) छत्तीसगढ़

उत्तर: (B) सिक्किम
व्याख्या: सिक्किम को वर्ष 2016 में विश्व का पहला 100% प्रमाणित जैविक राज्य घोषित किया गया था, जिसने अपनी पूरी कृषि भूमि को रासायनिक खादों से मुक्त कर लिया था।

प्रश्न 5: ‘Bastar Organic Farming Export Initiative’ के त्वरित क्रियान्वयन के लिए किस कड़े नियम में केंद्र सरकार से विशेष प्रशासनिक छूट की मांग की जा रही है?

(A) न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) में छूट
(B) एनपीओपी (NPOP) के तहत 3 वर्ष की ‘रूपांतरण अवधि’ (Conversion Period) की अनिवार्यता में छूट
(C) जैविक उत्पादों पर लगने वाले सीमा शुल्क में छूट
(D) केवल हवाई परिवहन सब्सिडी में छूट

उत्तर: (B) एनपीओपी (NPOP) के तहत 3 वर्ष की ‘रूपांतरण अवधि’ (Conversion Period) की अनिवार्यता में छूट
व्याख्या: सामान्यतः जैविक प्रमाण-पत्र के लिए खेतों को 3 साल तक रसायनों से मुक्त रखने का परीक्षण करना होता है। चूंकि बस्तर में पीढ़ियों से रसायनों का उपयोग ही नहीं हुआ है, इसलिए सरकार इस 3 साल की रूपांतरण अवधि में छूट की मांग कर रही है ताकि तुरंत निर्यात शुरू किया जा सके।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Bastar Organic Farming Export Initiative क्या है?

Bastar Organic Farming Export Initiative छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी कृषि निर्यात योजना है। इसके तहत बस्तर संभाग के उन पारंपरिक व नक्सल मुक्त गांवों के खेतों का जैविक प्रमाणीकरण कराया जाएगा जहाँ कभी रसायनों का उपयोग नहीं हुआ है, ताकि उनके उत्पादों को सीधे यूरोप और वैश्विक बाजारों में निर्यात कर किसानों की आय बढ़ाई जा सके।

Q2. बस्तर के उत्पादों का जैविक प्रमाणीकरण किस प्रणाली के तहत कराया जाएगा?

बस्तर के उत्पादों को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रमाणित करने के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) और सहभागी गारंटी प्रणाली (PGS-India) का उपयोग किया जाएगा। NPOP प्रमाण-पत्र को यूरोपीय संघ और अमेरिका द्वारा मान्यता प्राप्त है, जो निर्यात के लिए अनिवार्य है।

Q3. इस पहल से बस्तर के आदिवासी किसानों को क्या सीधा लाभ होगा?

जैविक प्रमाणीकरण प्राप्त होने के बाद बस्तर के पारंपरिक सुगंधित चावल और मिलेट्स (कोदो, कुटकी, रागी) को प्रीमियम जैविक उत्पाद के रूप में बेचा जाएगा। इससे किसानों को उनके उत्पादों का वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना में तीन से चार गुना अधिक दाम सीधे उनके बैंक खातों में मिलेगा।

Q4. बस्तर के लिए 3 वर्ष की परिवर्तन अवधि (Conversion Period) में छूट क्यों मांगी जा रही है?

सामान्य नियमों के तहत जैविक प्रमाण-पत्र के लिए किसी भी खेत को 3 साल तक रसायनों से मुक्त रखने का परीक्षण करना होता है। लेकिन बस्तर के इन सुदूर आदिम गांवों में पीढ़ियों से पारंपरिक तरीकों से खेती की जा रही है और कभी रासायनिक उर्वरकों का उपयोग ही नहीं हुआ है, इसलिए समय बचाने के लिए इस 3 वर्ष की अवधि में छूट मांगी जा रही है।

Q5. बस्तर के इन प्रमाणित उत्पादों की मार्केटिंग और ब्रांडिंग कैसे की जाएगी?

इन प्रमाणित जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत स्थापित किए गए छत्तीसगढ़ के प्रीमियम एक्सपोर्ट ब्रांड ‘छत्तीसगढ़ कला’ (36 Kala) ब्रांड के तहत पैक करके अंतरराष्ट्रीय मंडियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सीधे विदेशों में निर्यात किया जाएगा।


निष्कर्ष (Conclusion)

मंत्रालय महानदी भवन में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई उच्चस्तरीय बैठक और घोषित की गई Bastar Organic Farming Export Initiative छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। बस्तर के वनों और पहाड़ियों में पीढ़ियों से संजोकर रखी गई ‘स्वतः जैविक खेती’ (Default Organic Farming) को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रमाणित कर यूरोप के समृद्ध बाजारों से जोड़ना यह सिद्ध करता है कि प्राकृतिक संरक्षण और आधुनिक कूटनीति का मेल ही सुशासन का वास्तविक मॉडल है।

एपीडा (APEDA) के तकनीकी सहयोग से सुदूर नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर के नक्सल मुक्त गांवों में संयुक्त सर्वेक्षण कराना और आदिवासियों को उनकी फसलों का तीन से चार गुना अधिक मूल्य दिलाना बस्तर से अशांति और भय के बादलों को हमेशा के लिए समाप्त कर देगा। यह पहल न केवल आदिवासियों को गरीबी रेखा से बाहर निकालकर आर्थिक रूप से समृद्ध बनाएगी, बल्कि बस्तर की प्राकृतिक पहचान और पर्यावरण को अक्षुण्ण रखते हुए छत्तीसगढ़ को वैश्विक जैविक खाद्य निर्यात मानचित्र पर एक अत्यंत सम्मानजनक और अजेय स्थान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी।

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