Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict: कोयंबटूर में खुला देश का पहला उत्कृष्ट केंद्र, लॉन्च हुआ नेशनल पोर्टल

Inauguration of Centre of Excellence on Human Wildlife Conflict Inauguration of Centre of Excellence on Human Wildlife Conflict

Published on July 10, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


भारत में जैव विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation) और मानव बस्तियों की सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम उठाया गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज तमिल नाडु के कोयंबटूर में स्थित WII-SACON परिसर में देश के पहले Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict (मानव-वन्यजीव संघर्ष उत्कृष्ट केंद्र) का विधिवत उद्घाटन किया। इस केंद्र की स्थापना का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधानों, आधुनिक तकनीकों और नीतिगत समर्थन के माध्यम से मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को न्यूनतम करना है।

इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने ‘नेशनल ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट पोर्टल’ (National Human-Wildlife Conflict Portal) का भी शुभारंभ किया, जो देश भर में संघर्ष की घटनाओं के डेटा प्रबंधन और त्वरित समाधान के लिए एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा। 10 जुलाई 2026 को आयोजित इस उद्घाटन समारोह में केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह और देश भर के वरिष्ठ वन अधिकारी व वैज्ञानिक उपस्थित थे। यूपीएससी (UPSC), तमिलनाडु लोक सेवा आयोग (TNPSC) और अन्य राज्य स्तरीय सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict पर्यावरण, पारिस्थितिकी और आपदा प्रबंधन (GS Paper III) के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक विषय है। इस विस्तृत लेख में हम इस उत्कृष्ट केंद्र की स्थापना, इसके कार्यों, चुनौतियों और भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के वैज्ञानिक उपायों का समग्र अध्ययन करेंगे।

Table of Contents

Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)

इस नवनिर्मित उत्कृष्ट केंद्र और उसके उद्घाटन समारोह से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं को नीचे दी गई तालिका में संक्षेपित किया गया है:

महत्वपूर्ण क्षेत्रविवरण
उत्कृष्ट केंद्र का नामCentre of Excellence on Human-Wildlife Conflict (CoE-HWC)
स्थापना स्थलWII-SACON परिसर, अनाइकट्टी, कोयंबटूर, तमिलनाडु
उद्घाटनकर्ता एवं तिथिकेंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव, 10 जुलाई 2026
घोषणा की पृष्ठभूमिप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की 7वीं बैठक के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप।
मुख्य डिजिटल लॉन्चनेशनल ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट पोर्टल (National HWC Portal)
जारी की गई आधिकारिक रिपोर्ट‘Current Status of Human–Wildlife Conflict in India: An Overview’
सहयोगी संस्थाएंभारतीय वन्यजीव संस्थान (WII, देहरादून) और सालिम अली पक्षी विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केंद्र (SACON)

Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict की स्थापना और पृष्ठभूमि

भारत में पिछले कुछ दशकों में तेजी से बदलते भूमि-उपयोग प्रतिरूप (Land-use Patterns), वनों के विखंडन (Habitat Fragmentation) और बढ़ती मानवीय गतिविधियों के कारण मानव और वन्यजीवों के बीच संपर्क अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है। यह संपर्क अक्सर हिंसक संघर्ष का रूप ले लेता है, जिससे इंसानों और फसलों के साथ-साथ मूल्यवान वन्यजीवों (जैसे बाघ, तेंदुए और हाथी) की भी जान जाती है।

इसी गंभीर चुनौती का स्थायी समाधान निकालने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (National Board for Wildlife – NBWL) की सातवीं बैठक में एक विशेष उत्कृष्ट केंद्र की स्थापना की घोषणा की थी। इसी विज़न को साकार करते हुए आज कोयंबटूर में आधिकारिक रूप से Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict की शुरुआत की गई है। यह केंद्र देश भर में बिखरे हुए अलग-अलग सफल प्रयोगों और वैज्ञानिक अनुसंधानों को एक मंच पर लाकर एक राष्ट्रीय अनुसंधान और नवाचार केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

“संघर्ष के स्थान पर सह-अस्तित्व और सद्भाव (Coexistence and Harmony) ही हमारी पारिस्थितिक स्थिरता का मूल मंत्र होना चाहिए। हमें आधुनिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग से समस्या-उन्मुख होने के बजाय समाधान-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाना होगा।”— केंद्रीय पर्यावरण मंत्री, श्री भूपेंद्र यादव

Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict के मुख्य उद्देश्य और रणनीति

यह नवनिर्मित Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict मुख्य रूप से निम्नलिखित वैज्ञानिक और प्रशासनिक रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करेगा:

1. राष्ट्रीय अनुसंधान और नीतिगत समर्थन

यह केंद्र देश भर के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वन विभागों को वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित नीतिगत सहायता प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों के लिए विशिष्ट दिशा-निर्देश तैयार करना है जहां संघर्ष की घटनाएं सबसे अधिक दर्ज की जाती हैं।

2. बाघ, तेंदुए और हाथियों के संघर्ष का विशिष्ट समाधान

समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict को बाघ अभयारण्यों (Tiger Reserves) से बाहर भटकने वाले बाघों, इंसानी बस्तियों के निकट रहने वाले तेंदुओं और फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले हाथियों के संघर्ष के प्रबंधन के लिए प्रजाति-विशिष्ट (Species-specific) और क्षेत्र-विशिष्ट (Area-specific) रणनीतियां बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

3. क्षमता निर्माण और सामुदायिक जागरूकता

केवल कानून या बाड़ लगाने से इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता। यह केंद्र ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मिशन मोड में जन-जागरूकता अभियान चलाएगा ताकि लोगों को वन्यजीवों के आमने-सामने आने (Encounters) की स्थिति में घबराने (Panic) के बजाय सुरक्षात्मक उपाय अपनाने के लिए प्रशिक्षित किया जा सके। इसके तहत वन कर्मियों और स्थानीय समुदायों का बड़े पैमाने पर क्षमता निर्माण किया जाएगा।

नेशनल ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट पोर्टल का शुभारंभ

इस राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान लॉन्च किया गया ‘नेशनल ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट पोर्टल’ (National Human-Wildlife Conflict Portal) इस दिशा में डिजिटल इंडिया कूटनीति का एक बेहतरीन उदाहरण है:

  • एकीकृत डेटा प्रबंधन: देश भर में होने वाली संघर्ष की सभी घटनाओं का एक ही पोर्टल पर वास्तविक समय (Real-time) में पंजीकरण और ट्रैकिंग की जा सकेगी। इससे हॉटस्पॉट क्षेत्रों की पहचान करना आसान होगा।
  • निर्णय समर्थन प्रणाली (Decision Support System): यह पोर्टल नीति निर्माताओं और वन संरक्षकों को त्वरित और डेटा-आधारित निर्णय लेने में मदद करेगा ताकि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत या सुरक्षा बल भेजे जा सकें।
  • ज्ञान साझाकरण: विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाए जा रहे सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) को इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाएगा ताकि अन्य राज्य भी अपने यहाँ उन्हें लागू कर सकें।

SACON और WII का रणनीतिक एकीकरण (WII-SACON Integration)
कोयंबटूर स्थित ‘सालिम अली पक्षी विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केंद्र’ (SACON) और देहरादून स्थित ‘भारतीय वन्यजीव संस्थान’ (WII) दोनों ही पर्यावरण मंत्रालय के प्रतिष्ठित संस्थान हैं। हाल ही में दोनों के एकीकरण के बाद, कोयंबटूर का यह परिसर देश में पक्षी विज्ञान के साथ-साथ समग्र वन्यजीव अनुसंधान का एक बड़ा केंद्र बन गया है, जहां अब Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict की स्थापना की गई है।

भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष (HWC) की वर्तमान स्थिति और कारण

उद्घाटन सत्र के दौरान जारी की गई रिपोर्ट ‘Current Status of Human–Wildlife Conflict in India: An Overview’ भारत में इस संकट की गहराई को स्पष्ट करती है। भारत में इस संघर्ष के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. आवास विखंडन (Habitat Fragmentation): सड़कों, रेलवे लाइनों, बिजली के तारों और नहरों जैसी रैखिक बुनियादी ढांचा (Linear Infrastructure) परियोजनाओं के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारे (Corridors) कट गए हैं।
  2. कृषि और शहरीकरण का विस्तार: वनों की सीमाओं से लगे क्षेत्रों में मानव बस्तियों और कृषि खेतों के विस्तार के कारण भोजन और पानी की तलाश में वन्यजीव अक्सर इंसानी बस्तियों में प्रवेश कर जाते हैं।
  3. संसाधनों की कमी: वनों के भीतर पानी के स्रोतों के सूखने और शाकाहारी जीवों के लिए चारे की कमी होने के कारण हाथी और नीलगाय जैसे जीव फसलों की ओर आकर्षित होते हैं।
  4. सफल संरक्षण पहलों का प्रभाव: केंद्रीय राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सही रेखांकित किया कि प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफेंट जैसी संरक्षण योजनाओं की सफलता के कारण वन्यजीवों की संख्या बढ़ी है, जिससे उनका इंसानों के साथ संपर्क अधिक सघन हुआ है और यह अब एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक मुद्दा बन चुका है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष शमन के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां

नवनिर्मित Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict आधुनिक तकनीकों के व्यावहारिक अनुप्रयोग पर विशेष ध्यान देगा, जिन्हें राष्ट्रीय कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में भी प्रदर्शित किया गया:

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और थर्मल कैमरे: वनों की सीमाओं पर एआई-सक्षम थर्मल सेंसर कैमरे लगाए जा रहे हैं जो रात के अंधेरे में हाथियों या बाघों के बस्तियों की ओर बढ़ने पर तुरंत स्थानीय वन विभाग और ग्रामीणों के मोबाइल पर अलर्ट (SMS) भेज देते हैं।
  • ड्रोन (UAVs) द्वारा निगरानी: बस्तियों के पास भटकने वाले हाथियों के झुंडों की सुरक्षित ट्रैकिंग के लिए बिना शोर करने वाले उन्नत ड्रोनों का उपयोग किया जा रहा है।
  • रेडियो कॉलरिंग (Radio Collaring): संघर्ष-प्रवण तेंदुओं और बाघों के गले में जीपीएस रेडियो कॉलर बांधकर उनकी गतिविधियों की चौबीसों घंटे लाइव ट्रैकिंग की जा रही है।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष अनुभाग (Exam Relevance Section)

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) और राज्य लोक सेवा आयोगों की मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन पेपर-3 (पर्यावरण, जैव विविधता और सुरक्षा) के लिए यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

UPSC Prelims Fact Box: Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict

  • राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL): यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है, जिसकी अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री करते हैं।
  • भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII): इसकी स्थापना 1982 में देहरादून में की गई थी। यह MoEFCC के तहत एक स्वायत्त संस्थान है जो वन्यजीव अनुसंधान में देश का नेतृत्व करता है।
  • SACON: सालिम अली पक्षी विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केंद्र, कोयंबटूर। इसका नाम भारत के प्रसिद्ध ‘बर्डमैन’ डॉ. सालिम अली के नाम पर रखा गया है।
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधन 2022): इसके शेड्यूल के अनुसार, कुछ वन्यजीवों को अति-संरक्षित श्रेणी में रखा गया है, जिनके संघर्ष प्रबंधन के लिए विशिष्ट कानूनी प्रक्रियाएं अपनानी होती हैं।

UPSC Mains Analysis (GS Paper III: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी)

प्रश्न: “मानव-वन्यजीव संघर्ष केवल एक संरक्षण चुनौती नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण आजीविका और सतत विकास को प्रभावित करने वाली एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक आपदा भी है।” हाल ही में कोयंबटूर में स्थापित Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict के उद्देश्यों के प्रकाश में इस चुनौती से निपटने के लिए व्यावहारिक और तकनीकी उपायों की चर्चा कीजिए।

उत्तर की रूपरेखा:

  • प्रस्तावना: कोयंबटूर में भारत के पहले Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict और राष्ट्रीय पोर्टल के शुभारंभ का उल्लेख करते हुए उत्तर की शुरुआत करें।
  • चुनौती के सामाजिक-आर्थिक आयाम: स्पष्ट करें कि कैसे फसल विनाश, मानव मृत्यु और पशुधन की हानि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पंगु बनाती है, जिससे किसानों में वन्यजीवों के प्रति आक्रोश (Hostility) बढ़ता है जो संरक्षण के प्रयासों को कमजोर करता है।
  • नये उत्कृष्ट केंद्र की भूमिका और उपाय:
    • वैज्ञानिक साक्ष्य-आधारित नीतियां: बाघों और हाथियों के संरक्षण गलियारों (Corridors) का पुनर्निर्माण करना।
    • सामुदायिक भागीदारी: त्वरित मुआवजा वितरण, बीमा योजनाएं और ‘प्राइमरी रिस्पांस टीम्स’ (PRTs) में स्थानीय ग्रामीणों का समावेशन।
    • तकनीकी नवाचार: अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS), आईओटी (IoT) सेंसर, और नेशनल पोर्टल के जरिए रियल-टाइम डेटा का एकीकरण।
  • निष्कर्ष: यह निष्कर्ष दें कि ‘सह-अस्तित्व और सद्भाव’ (Coexistence) का मंत्र ही सतत विकास का एकमात्र मार्ग है, जो इंसानों की आजीविका सुरक्षित रखने के साथ-साथ हमारी अमूल्य वन्यजीव विरासत को भी अगली पीढ़ी के लिए बचाए रखेगा।

संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)

भारत में वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दिशा-निर्देश और कानून:

  1. राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (NWAP 2017-2031): भारत की तीसरी वन्यजीव कार्य योजना, जिसमें मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए जनभागीदारी और आधुनिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
  2. फसलों के नुकसान का मुआवजा: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत अब कुछ राज्यों में जंगली जानवरों द्वारा फसलों को पहुँचाए गए नुकसान को भी बीमा सुरक्षा के अंतर्गत शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
  3. हाथी गलियारे (Elephant Corridors): भारत में हाल ही में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 150 से अधिक हाथी गलियारों की पहचान कर उन्हें अधिसूचित करने का कार्य किया गया है ताकि हाथियों के सुगम आवागमन को सुनिश्चित कर संघर्ष टाला जा सके।

एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)

त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:

  • CoE-HWC Location: कोयंबटूर, तमिलनाडु के WII-SACON परिसर में स्थापित।
  • Inaugurated By: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव द्वारा 10 जुलाई 2026 को उद्घाटन।
  • National Portal: संघर्ष की घटनाओं के डिजिटल ट्रैकिंग और त्वरित समाधान के लिए नेशनल ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट पोर्टल लॉन्च।
  • Strategic Vision: बाघों, तेंदुओं और हाथियों के संघर्ष प्रबंधन के लिए क्षेत्र-विशिष्ट और प्रजाति-विशिष्ट नीतियां बनाना।
  • Key Mantra: “संघर्ष के बजाय सह-अस्तित्व और सद्भाव” ही पारिस्थितिकी स्थिरता का आधार है।

अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

अपनी तैयारी का आकलन करने के लिए नीचे दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों को हल करें:

प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में देश के पहले ‘Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict’ का उद्घाटन कहाँ किया गया है?

(A) देहरादून, उत्तराखंड
(B) कोयंबटूर, तमिलनाडु
(C) मैसूर, कर्नाटक
(D) गुवाहाटी, असम

उत्तर: (B) कोयंबटूर, तमिलनाडु
व्याख्या: 10 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा तमिलनाडु के कोयंबटूर में स्थित WII-SACON परिसर में Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict का उद्घाटन किया गया है।

प्रश्न 2: मानव-वन्यजीव संघर्ष के संदर्भ में शुरू की गई ‘WII-SACON’ संस्थाओं के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) का मुख्यालय देहरादून में स्थित है।
2. सालिम अली पक्षी विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केंद्र (SACON) कोयंबटूर में स्थित है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?

(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (C) 1 और 2 दोनों
व्याख्या: दोनों कथन पूरी तरह सत्य हैं। देहरादून स्थित WII और कोयंबटूर स्थित SACON दोनों ही पर्यावरण मंत्रालय के प्रमुख अनुसंधान संस्थान हैं जो इस नए उत्कृष्ट केंद्र के संचालन में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।

प्रश्न 3: नव-उद्घाटित उत्कृष्ट केंद्र की घोषणा सर्वप्रथम प्रधानमंत्री द्वारा किस राष्ट्रीय संस्था की बैठक के दौरान की गई थी?

(A) राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)
(B) राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL)
(C) भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI)
(D) केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB)

उत्तर: (B) राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL)
व्याख्या: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की 7वीं बैठक के दौरान देश में मानव-वन्यजीव संघर्ष के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए इस उत्कृष्ट केंद्र की स्थापना की घोषणा की थी।

प्रश्न 4: हाल ही में लॉन्च किए गए ‘नेशनल ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट पोर्टल’ का प्राथमिक कार्य क्या है?

(A) केवल जंगली जानवरों की जनगणना करना
(B) संघर्ष की घटनाओं का वास्तविक समय में डेटा प्रबंधन, मैपिंग और त्वरित निर्णय समर्थन प्रदान करना
(C) पर्यावरण संबंधी कानूनी मुकदमों की ऑनलाइन सुनवाई करना
(D) चिड़ियाघरों की ऑनलाइन टिकट बुकिंग करना

उत्तर: (B) संघर्ष की घटनाओं का वास्तविक समय में डेटा प्रबंधन, मैपिंग और त्वरित निर्णय समर्थन प्रदान करना
व्याख्या: यह राष्ट्रीय पोर्टल देश भर में संघर्ष की घटनाओं की रियल-टाइम रिपोर्टिंग, डेटा एकीकरण, हॉटस्पॉट मैपिंग और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने का एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है।

प्रश्न 5: भारत के किस प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और वैज्ञानिक को ‘बर्डमैन ऑफ इंडिया’ के रूप में जाना जाता है, जिनके नाम पर कोयंबटूर में अनुसंधान केंद्र स्थित है?

(A) डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन
(B) डॉ. सालिम अली
(C) सुंदरलाल बहुगुणा
(D) माधवन नायर

उत्तर: (B) डॉ. सालिम अली
व्याख्या: डॉ. सालिम अली को भारत का ‘बर्डमैन’ कहा जाता है। उन्हीं की स्मृति और वैज्ञानिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए कोयंबटूर में सालिम अली पक्षी विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केंद्र (SACON) की स्थापना की गई थी।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict क्या है?

Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय द्वारा कोयंबटूर में स्थापित किया गया देश का पहला राष्ट्रीय उत्कृष्ट केंद्र है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसधानों, नवीन तकनीकों (जैसे AI और ड्रोन) और नीतिगत दिशा-निर्देशों के माध्यम से मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करना है।

Q2. यह उत्कृष्ट केंद्र कहाँ स्थित है और इसका संचालन कौन करेगा?

यह केंद्र तमिलनाडु के कोयंबटूर के पास अनाइकट्टी में स्थित WII-SACON परिसर में स्थापित किया गया है। इसका संचालन भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII, देहरादून) और सालिम अली पक्षी विज्ञान केंद्र (SACON) के वैज्ञानिक संयुक्त रूप से करेंगे।

Q3. नेशनल ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट पोर्टल का मुख्य लाभ क्या है?

यह पोर्टल देश भर में जंगली जानवरों और इंसानों के बीच होने वाले संघर्ष की घटनाओं को डिजिटल रूप से ट्रैक करने का काम करेगा। इसके माध्यम से वन विभाग को संघर्ष के हॉटस्पॉट की पहचान करने, त्वरित राहत कार्य सुनिश्चित करने और राज्य-वार सर्वोत्तम शमन प्रथाओं को आपस में साझा करने में मदद मिलेगी।

Q4. मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए इस केंद्र की क्या रणनीति है?

यह केंद्र मुख्य रूप से प्रजाति-विशिष्ट (जैसे बाघों, तेंदुओं और हाथियों के लिए अलग योजना) और क्षेत्र-विशिष्ट शमन उपाय तैयार करेगा। इसमें अत्याधुनिक तकनीकों (जैसे जीपीएस कॉलर, एआई थर्मल कैमरे) के उपयोग के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण समुदायों का क्षमता निर्माण और जन-जागरूकता शामिल है।

Q5. संघर्ष शमन के संदर्भ में “सह-अस्तित्व और सद्भाव” का क्या अर्थ है?

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के अनुसार, सह-अस्तित्व और सद्भाव का अर्थ यह है कि हम जंगली जानवरों को अपनी सुरक्षा के लिए केवल एक ‘खतरे या शत्रु’ के रूप में न देखें। इसके बजाय, हम ऐसी वैज्ञानिक और तकनीकी प्रणालियाँ विकसित करें जिससे मानव बस्तियाँ सुरक्षित रहें और वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक गलियारों में बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के शांतिपूर्वक रहने का अवसर मिले।


निष्कर्ष (Conclusion)

कोयंबटूर के WII-SACON परिसर में स्थापित किया गया यह नया Centre of Excellence on Human-Wildlife Conflict भारत के पर्यावरण संरक्षण इतिहास में एक अत्यंत दूरदर्शी और वैज्ञानिक कदम है। यह केंद्र केवल कागजी नीतियों तक सीमित न रहकर सीधे तौर पर ग्रामीण आजीविका की रक्षा करने और बहुमूल्य वन्यजीवों की प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाने का एक व्यावहारिक माध्यम बनेगा।

नेशनल पोर्टल की शुरुआत और आधुनिक एआई व थर्मल तकनीकों के एकीकरण से देश भर के वन विभागों को त्वरित डेटा-आधारित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। ‘संघर्ष के बजाय सह-अस्तित्व और सद्भाव’ का जो विचार केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रस्तुत किया है, वही आने वाले समय में ‘विकसित भारत’ के औद्योगिक विकास और पर्यावरण संतुलन (Sustainable Development) के बीच का वास्तविक सेतु साबित होगा, जो हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित, सुरक्षित और समृद्ध भारत का मार्ग प्रशस्त करेगा।

Official Sources:

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