Published on July 10, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले ने जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण की दिशा में देश भर में एक नई मिसाल पेश करते हुए Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh के तहत एक नया रिकॉर्ड बनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 135वें संस्करण में जल शक्ति अभियान के तहत #CatchTheRain (कैच द रेन) आंदोलन की गति को बनाए रखने के आह्वान के जवाब में बालोद जिले ने जनभागीदारी (Community Participation) का एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है।
स्थानीय ग्राम पंचायतों, ग्रामीण समुदायों और जिला प्रशासन के सक्रिय समन्वय से बालोद ने वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और भू-जल पुनर्भरण के लिए बड़े पैमाने पर विकेंद्रीकृत बुनियादी ढांचे का विकास किया है। जिले ने जून 2025 से मई 2026 के बीच रिकॉर्ड 2,84,917 जल संरक्षण और पुनर्भरण ढांचों का निर्माण किया है। यह अभियान वर्तमान मानसून सीजन में जल स्तर को ऊपर उठाने और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने में गेम चेंजर साबित हो रहा है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh ग्रामीण विकास, पर्यावरण भूगोल और जल प्रबंधन नीतियों के तहत एक अत्यंत महत्वपूर्ण समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस जनभागीदारी मॉडल, तावेरा नाला पुनरुद्धार परियोजना और परीक्षा उपयोगी विभिन्न पहलुओं का गहराई से अध्ययन करेंगे।
Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)
बालोद जिले द्वारा जल संवर्धन के क्षेत्र में स्थापित किए गए इस कीर्तिमान से जुड़े प्रमुख आंकड़ों और तथ्यों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| महत्वपूर्ण संकेतक | Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh के प्रमुख आंकड़े |
|---|---|
| संबद्ध राष्ट्रीय अभियान | जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (#CatchTheRain Movement) |
| अग्रणी जिला और राज्य | बालोद जिला, छत्तीसगढ़ |
| कुल निर्मित जल संरचनाएं (JSJB 2.0) | 2,84,917 संरचनाएं (जून 2025 से मई 2026 के बीच निर्मित) |
| तावेरा नाला पुनरुद्धार की लंबाई | 14.3 किलोमीटर (गुंडरदेही ब्लॉक) |
| तावेरा नाला के तहत कुल ढांचे | 6,250 से अधिक जल संरक्षण और शोधन संरचनाएं |
| अनुमानित जल संचयन क्षमता | 6.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त वर्षा जल का संचयन |
| भू-जल स्तर में अनुमानित वृद्धि | 5 से 10 फीट की बढ़ोतरी का अनुमान |
| JSJB 1.0 के तहत राष्ट्रीय रैंकिंग | देश में तीसरा स्थान और पूर्वी क्षेत्र (Eastern Zone) में प्रथम स्थान (राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित) |
Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh क्या है?
यह अभियान भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ का छत्तीसगढ़ी रूपांतरण और स्थानीय स्तर पर विस्तारित रूप है। इसका मुख्य दर्शन “जनभागीदारी से जल संरक्षण” है।
Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh का मूल विज़न यह है कि जल संवर्धन को केवल एक सरकारी विभाग की ज़िम्मेदारी न मानकर इसे आम जनता के सामाजिक सरोकारों से जोड़ा जाए। इसके तहत मनरेगा (MGNREGA), जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) निधि और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के फंडों का कुशल समन्वय करके ग्रामीण स्तर पर जल अवसंरचनाओं का निर्माण किया जाता है। बालोद जिले ने इस अवधारणा को व्यावहारिक धरातल पर उतार कर पूरे देश को एक नया विकास मार्ग दिखाया है।
बालोद जिला: जल संरक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी
बालोद जिला जल संरक्षण के क्षेत्र में कोई नया नाम नहीं है। इससे पहले भी जिले ने अपनी प्रशासनिक तत्परता और सामुदायिक एकता का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर किया था:
1. जल संचय जन भागीदारी (JSJB 1.0) की सफलता
अभियान के पहले चरण (JSJB 1.0) के दौरान बालोद जिले ने 1.06 लाख से अधिक जल संरक्षण ढांचों का निर्माण किया था। इस उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए बालोद को राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के तहत देश भर में तीसरा स्थान और पूर्वी क्षेत्र (Eastern Zone) में पहला स्थान प्राप्त हुआ था, जिसके लिए तत्कालीन जिला प्रशासन को भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया था।
2. द्वितीय चरण (JSJB 2.0) में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन
इसी सफलता को जारी रखते हुए, Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh के तहत बालोद ने अपनी गति को दोगुना कर दिया। जून 2025 से मई 2026 के बीच जिले में 2.84 लाख से अधिक संरचनाएं बनाई गईं, जो मानसून के दौरान गिरने वाले पानी की एक-एक बूंद को सहेजने के लिए तैयार हैं।
“बालोद का जनभागीदारी मॉडल यह सिद्ध करता है कि जब समाज और प्रशासन मिलकर पानी बचाने का संकल्प लेते हैं, तो बंजर भूमि भी जल संपदा में बदल जाती है। यह कैच द रेन आंदोलन को एक वास्तविक जन आंदोलन बनाने की दिशा में अनुकरणीय कदम है।”— जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार
तावेरा नाला पुनरुद्धार मॉडल और Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh
बालोद जिले की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलता गुंडरदेही (Gundardehi) विकासखंड के भाठागांव (आर) में स्थित ‘तावेरा नाला’ (Tawera Nala) के जीर्णोद्धार के रूप में सामने आई है। यह परियोजना जल विज्ञान (Hydrology) और वाटरशेड प्रबंधन के क्षेत्र में एक अध्ययन का विषय बन चुकी है:
1. 14.3 किलोमीटर लंबे नाले का पुनर्जन्म
तावेरा नाला वर्षों से गाद जमने, अतिक्रमण और उपेक्षा के कारण पूरी तरह से सूख चुका था। Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh के तहत ग्रामीणों और तकनीकी विशेषज्ञों ने मिलकर इस 14.3 किमी लंबे नाले को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया।
2. 6,250 से अधिक जल संरचनाओं का एकीकृत संजाल
इस पूरे नाले के जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) का वैज्ञानिक उपचार करने के लिए निम्नलिखित संरचनाओं का निर्माण किया गया:
- चेक डैम और बोल्डर चेक (Check Dams): पानी के बहाव की गति को धीमा करने और गाद को रोकने के लिए।
- सॉसेज और कंटूर ट्रेंच: मिट्टी के कटाव को रोकने और नमी को जमीन में बनाए रखने के लिए।
- मैजिक पिट और सोक पिट (Soak Pits): घरेलू उपयोग के गंदे पानी (Greywater) के उपचार और पुनर्चक्रण के लिए।
- इंजेक्शन वेल (Injection Wells): सतही जल को सीधे गहरे भू-जल एक्विफर्स (Aquifers) तक पहुँचाने के लिए।
3. परिणाम और लाभ
इस एकीकृत प्रयास से लगभग 6.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त वर्षा जल का संचयन संभव हुआ है। कृषि वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस क्षेत्र के भू-जल स्तर में 5 से 10 फीट तक की वृद्धि होगी, जिससे सैकड़ों एकड़ भूमि में रबी फसलों की सिंचाई आसान हो जाएगी और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह बहाल हो जाएगा।
बालोद जिले के गांवों पर पड़ा सकारात्मक प्रभाव
इस अभियान के तहत निर्मित विकेंद्रीकृत जल अवसंरचनाओं ने बालोद के कई गांवों के परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है:
1. ग्राम पंचायत मुंडेरा (Mundera GP) – रिचार्ज पिट और शाफ्ट
मुंडेरा गाँव में नलकूपों (Borewells) के पास विशेष रिचार्ज पिट्स बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, गाँव के निष्क्रिय और सूखे पड़े ट्यूबवेलों को ‘रिचार्ज शाफ्ट’ (Recharge Shafts) में बदल दिया गया है। वर्षा का बहता हुआ पानी इन शाफ्टों के माध्यम से सीधे जमीन के नीचे जाता है, जिससे भू-जल रिचार्ज होता है और सूखे कुएं दोबारा जीवित हो रहे हैं।
2. ग्राम पंचायत कोंगनी (Kongni GP) – अपवाह नियंत्रण
कोंगनी गाँव में ढलान वाले स्थानों पर रनऑफ कैप्चरिंग पिट्स (Runoff Pits) का निर्माण किया गया है, जो बहते हुए पानी को सहेजकर जल तालिका को मजबूत कर रहे हैं।
3. ओदारसकरी और खुतेरी (Odarsakari & Khuteri GPs) – चेक डैम
इन ग्राम पंचायतों में बनाए गए चेक डैम वर्तमान मानसून में पानी से लबालब भर चुके हैं। ये चेक डैम भू-जल स्तर बढ़ाने के साथ-साथ मवेशियों के लिए पीने के पानी और खरीफ-रबी फसलों के लिए पूरक सिंचाई का मुख्य साधन बन गए हैं।
4. भानगाँव (Bhangagaon R) – कंटूर ट्रेंच
पहाड़ी ढलानों पर कंटूर ट्रेंच (Contour Trenches) विकसित की गई हैं, जो जल की गति को रोकने के साथ-साथ मृदा नमी (Soil Moisture) का संरक्षण करती हैं, जिससे वहाँ सामाजिक वानिकी और वृक्षारोपण को बड़ी सफलता मिली है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष विश्लेषण (Exam Relevance Section)
सीजीपीएससी (CGPSC State Service Exam) और यूपीएससी (UPSC CSE) की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए जल संवर्धन नीतियां पर्यावरण और भूगोल विषय का एक मुख्य अंग हैं।
UPSC & CGPSC Prelims Fact Box
- जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (#CatchTheRain): इसकी शुरुआत राष्ट्रीय जल मिशन, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए की गई है। इसकी थीम है—“Catch the rain, where it falls, when it falls” (बारिश के पानी को सहेजें, जहाँ भी गिरे, जब भी गिरे)।
- तावेरा नाला (Tawera Nala): छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुंडरडेही विकासखंड में स्थित 14.3 किमी लंबी जलधारा, जिसका जनभागीदारी से जीर्णोद्धार किया गया है।
- इंजेक्शन वेल (Injection Well): एक उन्नत भू-जल पुनर्भरण प्रणाली जिसके माध्यम से छने हुए वर्षा जल को सीधे भू-गर्भीय चट्टानी परतों (Aquifers) में डाला जाता है।
CGPSC Mains Analysis (Paper V: छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था एवं भूगोल)
प्रश्न: “छत्तीसगढ़ के वनांचल और कृषि प्रधान क्षेत्रों में जल सुरक्षा और ग्रामीण आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने में जनभागीदारी आधारित लघु जल संवर्धन प्रणालियाँ ही सबसे व्यावहारिक उपाय हैं।” बालोद जिले के तावेरा नाला पुनरुद्धार और **Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh** के विशेष संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर की रूपरेखा:
- प्रस्तावना: छत्तीसगढ़ के भू-जल संकट और जल संवर्धन के लिए बालोद जिले द्वारा अपनाए गए जनभागीदारी (JSJB 2.0) मॉडल का परिचय देते हुए उत्तर की शुरुआत करें।
- बालोद मॉडल की तकनीकी विशेषताएं (वाटरशेड प्रबंधन):
- विकेंद्रीकरण: विशाल बांधों के स्थान पर 2.84 लाख से अधिक छोटे ढांचों (रिचार्ज पिट, सोक पिट, चेक डैम) का निर्माण, जिससे वन भूमि का जलमग्न होना और विस्थापन की समस्या नहीं होती।
- पारंपरिक बनाम आधुनिक तकनीक: सूखे पड़े नलकूपों को रिचार्ज शाफ्ट में बदलना और बंद नालों का जलमार्ग वैज्ञानिक पद्धतियों (कंटूर ट्रेंच, इंजेक्शन वेल) से बहाल करना।
- सामाजिक-आर्थिक प्रभाव:
- भू-जल स्तर में 5 से 10 फीट की वृद्धि से सिंचाई की उपलब्धता में सुधार।
- दलहन, तिलहन और रबी फसलों के क्षेत्रफल में वृद्धि (फसल विविधीकरण)।
- मत्स्य पालन, बत्तख पालन और मेढ़ों पर बागवानी के जरिए अतिरिक्त आजीविका का सृजन।
- सुशासन और जनभागीदारी (Jan Bhagidari): समझाएं कि कैसे पंचायतों, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय ग्रामीणों को जोड़ने से संपत्तियों का मालिकाना हक (Ownership) समुदाय के पास आता है, जिससे परियोजनाओं का रखरखाव स्थायी होता है।
- निष्कर्ष: यह निष्कर्ष दें कि बालोद का ‘जल संचय जन भागीदारी’ मॉडल यह दर्शाता है कि जल सुरक्षा केवल तकनीकी चुनौती नहीं है बल्कि यह एक सामाजिक संकल्प है, जिसे देश के अन्य शुष्क और पठारी क्षेत्रों में भी नीतिगत रूप से लागू किया जाना चाहिए।
संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)
जल संरक्षण और वाटरशेड प्रबंधन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक सामान्य ज्ञान तथ्य:
- वाटरशेड प्रबंधन (Watershed Management): यह एक भौगोलिक या जल विज्ञान संबंधी इकाई (जैसे नदी बेसिन या नाला क्षेत्र) में जल, मिट्टी, वनस्पतियों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, विकास और इष्टतम उपयोग की एक एकीकृत प्रक्रिया है।
- तांदुला जलाशय (Tandula Reservoir): बालोद जिले में स्थित छत्तीसगढ़ की एक ऐतिहासिक सिंचाई परियोजना। इसका निर्माण तांदुला और सुखा नदियों के संगम पर वर्ष 1913-1921 के बीच किया गया था, जो भिलाई स्टील प्लांट और बालोद-दुर्ग के खेतों की जीवन रेखा है।
- राष्ट्रीय जल मिशन (National Water Mission): जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत शुरू किए गए आठ राष्ट्रीय मिशनों में से एक, जिसका उद्देश्य जल उपयोग दक्षता में 20% की वृद्धि करना और एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)
त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:
- Record Structures: बालोद जिले ने जून 2025 से मई 2026 के बीच 2.84 लाख से अधिक जल संवर्धन ढांचों का निर्माण कर रिकॉर्ड स्थापित किया।
- Tawera Nala Revival: गुंडरडेही ब्लॉक में 14.3 किमी लंबे तावेरा नाले का जीर्णोद्धार कर 6.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी सहेजा गया।
- National Laurels: पहले चरण (JSJB 1.0) में बालोद को राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा और पूर्वी क्षेत्र में प्रथम स्थान मिला था (राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित)।
- Innovative Tech: सूखे बोरवेलों को रिचार्ज शाफ्ट में बदला गया और मुंडेरा गाँव में इंजेक्शन वेल तकनीक अपनाई गई।
- Jan Bhagidari: ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से इस अभियान को एक सफल जन आंदोलन बनाया गया।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
अपनी तैयारी को जांचने के लिए नीचे दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों को हल करें:
प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में चर्चा में रहा ‘Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh’ अभियान मुख्य रूप से राज्य के किस जिले में रिकॉर्ड जल संवर्धन ढांचों के निर्माण के लिए सराहा गया है?
(A) सरगुजा जिला
(B) बस्तर जिला
(C) बालोद जिला
(D) राजनांदगांव जिला
उत्तर: (C) बालोद जिला
व्याख्या: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले ने इस अभियान के दूसरे चरण (JSJB 2.0) के तहत रिकॉर्ड 2.84 लाख से अधिक जल संवर्धन ढांचों का निर्माण कर देश भर में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
प्रश्न 2: बालोद जिले के गुंडरडेही विकासखंड में जनभागीदारी से पुनर्जीवित किए गए ‘तावेरा नाला’ (Tawera Nala) की कुल लंबाई कितनी है?
(A) 5.5 किलोमीटर
(B) 10.2 किलोमीटर
(C) 14.3 किलोमीटर
(D) 20.5 किलोमीटर
उत्तर: (C) 14.3 किलोमीटर
व्याख्या: 14.3 किलोमीटर लंबे तावेरा नाले का 6,250 से अधिक छोटी-बड़ी जल संरचनाएं बनाकर पूरी तरह जीर्णोद्धार किया गया है, जिससे क्षेत्र का जल स्तर 5 से 10 फीट तक सुधरेगा।
प्रश्न 3: जल संचय जन भागीदारी (JSJB 1.0) के पहले चरण में शानदार प्रदर्शन के लिए बालोद जिले को राष्ट्रीय जल पुरस्कारों में पूर्वी क्षेत्र (Eastern Zone) में कौन सा स्थान प्राप्त हुआ था?
(A) प्रथम स्थान
(B) द्वितीय स्थान
(C) तृतीय स्थान
(D) चतुर्थ स्थान
उत्तर: (A) प्रथम स्थान
व्याख्या: बालोद जिले को JSJB 1.0 के तहत उत्कृष्ट जल संरक्षण के लिए देश भर में तीसरा स्थान और पूर्वी क्षेत्र (Eastern Zone) में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था, जिसके लिए इसे राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया था।
प्रश्न 4: भू-जल पुनर्भरण की उस उन्नत तकनीक को क्या कहा जाता है जिसके माध्यम से वर्षा जल को सीधे भूमिगत गहरी चट्टानी परतों (Aquifers) में प्रविष्ट कराया जाता है?
(A) सॉक पिट (Soak Pit)
(B) कंटूर ट्रेंच (Contour Trench)
(C) इंजेक्शन वेल (Injection Well)
(D)magic pit (मैजिक पिट)
उत्तर: (C) इंजेक्शन वेल (Injection Well)
व्याख्या: इंजेक्शन वेल तकनीक का उपयोग करके सतही वर्षा जल को फिल्टर करके सीधे गहरे एक्विफर्स में डाला जाता है, जिससे भू-जल पुनर्भरण की दर बहुत तेज हो जाती है।
प्रश्न 5: बालोद जिले में सिंचाई और पेयजल की जीवन रेखा माने जाने वाले ऐतिहासिक ‘तांदुला जलाशय’ (Tandula Reservoir) का निर्माण किस संगम पर किया गया है?
(A) शिवनाथ और खारून नदी
(B) तांदुला और सुखा नदी
(C) महानदी और सोंढूर नदी
(D) हसदेव और बोरई नदी
उत्तर: (B) तांदुला और सुखा नदी
व्याख्या: तांदुला जलाशय का निर्माण तांदुला और सुखा नदियों के संगम पर वर्ष 1913-1921 के बीच किया गया था, जो बालोद जिले की प्रमुख सिंचाई परियोजना है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh क्या है?
Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh केंद्र सरकार के ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में संचालित एक अत्यंत सफल जल संवर्धन आंदोलन है। इसके तहत ग्रामीण पंचायतों और जनभागीदारी की मदद से विकेंद्रीकृत जल संरचनाओं का निर्माण किया जाता है।
Q2. बालोद जिले ने जून 2025 से मई 2026 के बीच कितने जल ढांचों का निर्माण किया है?
बालोद जिले ने इस निर्धारित अवधि के भीतर रिकॉर्ड 2,84,917 जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण पूरा किया है, जो देश के किसी भी जिले द्वारा किए गए सबसे बड़े लघु जल संवर्धन प्रयासों में से एक है।
Q3. ‘तावेरा नाला’ (Tawera Nala) परियोजना क्या है और इसके क्या लाभ हैं?
तावेरा नाला बालोद जिले के गुंडरडेही विकासखंड में स्थित एक 14.3 किमी लंबी जलधारा है जो पूरी तरह सूख चुकी थी। जनभागीदारी से इस नाले के जलग्रहण क्षेत्र में 6,250 से अधिक संरचनाएं बनाई गईं, जिससे 6.5 करोड़ लीटर पानी का संचयन होगा और भू-जल स्तर 5 से 10 फीट तक बढ़ने की उम्मीद है।
Q4. इस अभियान में निष्क्रिय पड़े नलकूपों (Defunct Borewells) का क्या उपयोग किया गया है?
जिले के कई गांवों (जैसे मुंडेरा) में सूखे और बेकार पड़े नलकूपों को ‘रिचार्ज शाफ्ट’ (Recharge Shafts) में बदल दिया गया है। वर्षा के पानी को फिल्टर करके इन शाफ्टों के माध्यम से सीधे जमीन के नीचे डाला जाता है, जिससे बेकार बुनियादी ढांचे का उपयोग जल संवर्धन के लिए किया जा सका।
Q5. बालोद जिले को जल संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर क्या पहचान मिली है?
बालोद जिले को जल संचय जन भागीदारी के पहले चरण (JSJB 1.0) में शानदार प्रदर्शन (1.06 लाख ढांचे) के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान और पूर्वी क्षेत्र (Eastern Zone) में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था, जिसके लिए इसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
निष्कर्ष (Conclusion)
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले द्वारा स्थापित किया गया यह कीर्तिमान Jal Sanchay Jan Bhagidari 2.0 Chhattisgarh यह सिद्ध करता है कि जल सुरक्षा केवल बड़ी कंक्रीट संरचनाओं या सरकारी बजट की मात्रा पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह सामुदायिक एकजुटता और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का एक सुंदर संगम है। 2.84 लाख से अधिक लघु जल संरचनाओं का निर्माण और 14.3 किमी लंबे तावेरा नाले का ऐतिहासिक पुनरुद्धार जल प्रबंधन के क्षेत्र में देश भर के जिलों के लिए एक अनुकरणीय केस स्टडी (Case Study) है।
सूखे पड़े नलकूपों को रिचार्ज शाफ्ट में बदलने और पहाड़ी ढलानों पर कंटूर ट्रेंच बनाने जैसे अभिनव प्रयोगों ने बालोद के कृषि परिदृश्य को एक नया जीवन दिया है। जल संकट और अनियंत्रित मानसून की इस वैश्विक चुनौती के दौर में, बालोद का यह “जनभागीदारी से जल संरक्षण” मॉडल यह साबित करता है कि जब समाज अपनी जल संपदा को बचाने के लिए स्वयं उठ खड़ा होता है, तो वह न केवल अपने वर्तमान जल संकट का समाधान करता है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आत्मनिर्भर, समृद्ध और जल-सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव भी रखता है।
Official Sources:
- Press Information Bureau (PIB) Delhi (https://pib.gov.in)