Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोबाइल फोन विनिर्माण के लिए ₹62,500 करोड़ की योजना को दी मंजूरी

Union Cabinet Approves Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS Union Cabinet Approves Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS

Published on July 15, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (Global Electronics Manufacturing) का एक महाशक्तिशाली और आत्मनिर्भर केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) की बैठक में 15 जुलाई 2026 को ‘मोबाइल फोन विनिर्माण योजना‘ (Mobile Phone Manufacturing Scheme – MPMS) को मंजूरी दी गई। इस योजना के लिए सरकार द्वारा कुल 62,500 करोड़ रुपये (Rs 62,500 Crore) का भारी बजटीय आवंटन किया गया है।

यह दूरगामी योजना न केवल देश में मोबाइल फोन के विनिर्माण को एक नई ऊंचाई देगी, बल्कि यह घरेलू मूल्य संवर्धन (Domestic Value Addition) को गहरा करने, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में भारत की स्थिति को मजबूत करने और भारतीय ब्रांडों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है। नव-स्वीकृत Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS कूटनीतिक और आर्थिक रूप से अत्यधिक प्रासंगिक है क्योंकि यह पूर्ववर्ती पीएलआई (PLI) योजना की समाप्ति के बाद भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को निरंतरता प्रदान करेगी। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और विभिन्न राज्य स्तरीय सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS भारतीय अर्थव्यवस्था, औद्योगिक नीति और डिजिटल इंडिया (GS Paper III) के तहत एक अत्यंत महत्वपूर्ण समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस योजना की विशेषताओं, वित्तीय प्रोत्साहन ढांचे, इसके आर्थिक और सामरिक निहितार्थों और परीक्षा उपयोगी विभिन्न पहलुओं का गहराई से अध्ययन करेंगे।

Table of Contents

Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)

इस नई विनिर्माण योजना और इसके कूटनीतिक लक्ष्यों से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेपित किया गया है:

महत्वपूर्ण आयामMobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS के प्रमुख तथ्य
योजना का नाममोबाइल फोन विनिर्माण योजना (Mobile Phone Manufacturing Scheme – MPMS)
कुल बजटीय आवंटन62,500 करोड़ रुपये (Rupees Sixty-Two Thousand Five Hundred Crore)
योजना की समय अवधि (Tenure)5 वर्ष (वित्तीय वर्ष 2026-27 से वित्तीय वर्ष 2030-31 तक)
बुनियादी प्रोत्साहन दरें (Incentives)पात्र बिक्री (Eligible Sales) पर 2.25% से लेकर 5% तक की प्रोत्साहन दरें
घरेलू सोर्सिंग प्रोत्साहनमुख्य पुर्जों की घरेलू खरीद पर 1.5% तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन
अनुसंधान एवं डिजाइन (R&D) बोनसभारतीय ब्रांडों के डिजाइन और अनुसंधान के लिए 3% का अतिरिक्त प्रोत्साहन
अपेक्षित कुल उत्पादन (Value)लगभग 39,00,000 करोड़ रुपये (39 लाख करोड़) का संचयी उत्पादन
अपेक्षित प्रत्यक्ष रोजगारलगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन

Why in News?: चर्चा में क्यों है?

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली पूर्ववर्ती योजना ‘लार्ज स्केल इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन’ (PLI-LSEM) की समय सीमा 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है। पीएलआई (PLI) योजना ने भारत को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बनाने और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इसी ऐतिहासिक गति को बनाए रखने, आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को मजबूत करने और चीन के एकाधिकार को चुनौती देने (China + 1 Strategy) के लिए सरकार ने एक नए और अधिक व्यापक रूप में Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS को लॉन्च करने का निर्णय लिया है। यह योजना न केवल विदेशी विनिर्माताओं (जैसे फॉक्सकॉन, पेगाट्रॉन) को भारत में बने रहने के लिए प्रोत्साहित करेगी, बल्कि इसका मुख्य ध्यान स्वदेशी भारतीय ब्रांडों का विकास करना और देश के भीतर अनुसंधान व डिजाइन (R&D) पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है, ताकि भारत “असेंबली हब” से आगे बढ़कर “डिजाइन और तकनीकी संप्रभुता” (Technological Sovereignty) की ओर बढ़ सके।

Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS के प्रमुख नीतिगत स्तंभ

कैबिनेट द्वारा स्वीकृत इस योजना के मार्गदर्शक सिद्धांतों और वित्तीय संरचना को निम्नलिखित प्रमुख रणनीतिक पहलुओं में वर्गीकृत किया जा सकता है:

1. वर्गीकृत प्रोत्साहन संरचना (Differentiated Incentive Rates)

योजना के तहत भारत में निर्मित मोबाइल फोन की पात्र बिक्री (Eligible Sales) पर विभिन्न स्तरों पर 2.25% से लेकर 5% तक का प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहन (Incentive Support) दिया जाएगा। यह संरचना कंपनियों को उत्पादन का पैमाना बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी।

2. घरेलू मूल्य संवर्धन पर विशेष बल (Value Addition)

अब तक भारत पर यह आरोप लगता था कि यहाँ केवल मोबाइल के पुर्जों को जोड़ा जाता है (Screwdriver Technology)। इस विसंगति को दूर करने के लिए, यदि कोई कंपनी मोबाइल के मुख्य घटकों और सब-असेंबलियों की खरीद स्थानीय भारतीय निर्माताओं से करती है, तो उसे 1.5% तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन (Additional Sourcing Incentive) प्रदान किया जाएगा। यह कदम भारत में सहायक पुर्जा उद्योगों (Ancillary Industries) के विकास में क्रांतिकारी साबित होगा।

3. भारतीय ब्रांडों और अनुसंधान (R&D) को बढ़ावा

भारत को तकनीकी संप्रभुता प्रदान करने और भारतीय ब्रांडों के वैश्विक पेटेंट (Patents) बनाने के लिए योजना में एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी प्रावधान किया गया है। भारतीय ब्रांडों के लिए उत्पाद के डिजाइन और अनुसंधान (Design & R&D) पर किए जाने वाले खर्च के आधार पर पात्र बिक्री पर 3% का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।

4. निश्चित समय अवधि (Five-Year Tenure)

Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS की अवधि को पांच वर्षों के लिए निश्चित किया गया है, जो वित्तीय वर्ष 2026-27 से प्रारंभ होकर वित्तीय वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी। यह निश्चित अवधि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को अपनी दीर्घकालिक व्यापार योजनाएं भारत में स्थापित करने के लिए एक स्थिर और विश्वसनीय नीतिगत वातावरण प्रदान करेगी।

“यह योजना केवल उत्पादन बढ़ाने के बारे में नहीं है, बल्कि यह भारतीय डिजाइनरों, इंजीनियरों और शोधकर्ताओं की बौद्धिक संपदा (IP) का विकास कर देश को तकनीकी रूप से संप्रभु बनाने की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है।”— इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)

भारत की मोबाइल विनिर्माण क्रांति: 2014 से 2026 तक का सफर

इस योजना के लॉन्च होने के महत्व को समझने के लिए भारत के पिछले एक दशक के अभूतपूर्व इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के सफर पर नजर डालना आवश्यक है:

  • Make in India की सफलता: वर्ष 2014-15 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ विज़न के कारण देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में 7 गुना और इसके निर्यात में 11 गुना की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
  • दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक: भारत वर्तमान में मात्रा (Volume) के दृष्टिकोण से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश बन चुका है। सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि वर्तमान में भारत में उपयोग किए जाने वाले कुल मोबाइल फोनों में से 99.2% फोन स्वदेशी रूप से निर्मित हैं, जो एक समय पूरी तरह आयातों पर निर्भर था।
  • निर्यात का नया चैंपियन: वर्ष 2025 में, स्मार्टफोन (Smartphones) भारत से निर्यात होने वाला एकल सबसे बड़ा उत्पाद श्रेणी (Single Largest Exported Product Category) बनकर उभरा है। इसने भारत के पारंपरिक निर्यात चैंपियन उत्पादों जैसे—रिफाइंड डीजल और कटे व तराशे गए हीरों (Cut & Diamonds) को भी पीछे छोड़ दिया है, जो भारतीय व्यापार संतुलन (Balance of Payments) के लिए एक अत्यंत सकारात्मक संकेत है।

योजना के अपेक्षित परिणाम और आर्थिक-सामाजिक प्रभाव

इस 62,500 करोड़ रुपये की बड़ी योजना के सफल क्रियान्वयन से भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज पर निम्नलिखित दूरगामी और सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है:

1. 39 लाख करोड़ रुपये का विशाल उत्पादन

योजना की पांच वर्षों की अवधि के दौरान, देश में मोबाइल फोन का कुल संचयी (Cumulative) उत्पादन लगभग 39,00,000 करोड़ रुपये (39 लाख करोड़) तक पहुँचने का अनुमान है। इससे निर्यात में अभूतपूर्व उछाल आएगा और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) मजबूत होगा।

2. 60,000 प्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन

यह योजना देश के युवाओं के लिए रोजगार का एक बड़ा जरिया बनेगी। इसके तहत लगभग 60,000 प्रत्यक्ष (Direct) रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र पहले से ही देश के ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों के युवाओं, विशेष रूप से महिलाओं के लिए रोजगार का एक प्रमुख स्रोत बनकर उभरा है, जहां कुछ बड़े संयंत्रों में एकल स्थान पर 5,000 से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं।

3. वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की मजबूत स्थिति

Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) के केंद्र में स्थापित करेगी। एप्पल (Apple), सैमसंग (Samsung) और अन्य वैश्विक तकनीकी दिग्गजों के लिए भारत अब केवल एक असेंबली लाइन नहीं, बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और आरएंडडी का एक वैश्विक केंद्र बनेगा।


प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष विश्लेषण (Exam Relevance Section)

यूपीएससी और राज्य सेवा मुख्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सामान्य अध्ययन के पेपर-3 (भारतीय अर्थव्यवस्था, औद्योगिक नीतियां, और रोजगार संवर्धन) के दृष्टिकोण से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

UPSC & State PCS Prelims Fact Box: Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS

  • MeitY (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय): इस योजना के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए नोडल मंत्रालय है। इसके वर्तमान सचिव श्री एस. कृष्णन हैं।
  • PLI-LSEM योजना: बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजना, जिसकी शुरुआत वर्ष 2020 में की गई थी और इसकी अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई।
  • तकनीकी संप्रभुता (Technological Sovereignty): किसी देश की वह क्षमता जिसके तहत वह अपनी तकनीकी आवश्यकताओं के लिए विदेशी पेटेंटों और आयातित हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर पर निर्भर न रहकर स्वदेशी डिजाइनों और प्रणालियों का विकास करता है।

UPSC Mains Analysis (GS Paper III: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं औद्योगिक विकास)

प्रश्न: “पूर्ववर्ती पीएलआई (PLI) योजना की समाप्ति के बाद शुरू की गई नई ‘मोबाइल फोन विनिर्माण योजना’ (MPMS) भारत को ‘केवल असेंबली हब’ से आगे ले जाकर ‘डिजाइन और तकनीकी संप्रभुता’ प्रदान करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।” समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

उत्तर की रूपरेखा:

  • प्रस्तावना: केंद्रीय कैबिनेट द्वारा हाल ही में स्वीकृत की गई ₹62,500 करोड़ की Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS और 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई पीएलआई (PLI-LSEM) योजना की पृष्ठभूमि से उत्तर प्रारंभ करें।
  • पीएलआई योजना की सीमाएं और MPMS की प्रासंगिकता: समझाएं कि कैसे पिछली योजना ने भारत में उत्पादन की मात्रा तो बढ़ाई, लेकिन देश मुख्य रूप से विदेशों से आयातित कंपोनेंट्स की असेंबली (Screwdriver assembly) तक सीमित रहा। बौद्धिक संपदा (IP) और पेटेंट अभी भी विदेशी कंपनियों के पास थे।
  • MPMS के रणनीतिक और सुधारात्मक उपाय:
    • घरेलू सोर्सिंग प्रोत्साहन (1.5% अतिरिक्त): यह स्थानीय कंपोनेंट पारिस्थितिकी तंत्र और एमएसएमई (MSMEs) को मजबूत कर गहरे मूल्य संवर्धन (Deep Value Addition) को बढ़ावा देगा।
    • डिजाइन और आरएंडडी प्रोत्साहन (3% अतिरिक्त): भारतीय ब्रांडों के स्वदेशी अनुसंधान को बढ़ावा देकर बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) और वैश्विक पेटेंटों का भारत में निर्माण सुनिश्चित करेगा, जिससे वास्तविक ‘तकनीकी संप्रभुता’ स्थापित होगी।
  • आर्थिक और सामाजिक निहितार्थ: ₹39 लाख करोड़ के उत्पादन लक्ष्य, निर्यात संवर्धन और ग्रामीण युवाओं व महिलाओं के लिए 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन।
  • चुनौतियां: सेमीकंडक्टर चिप्स के लिए अभी भी भारत की ताइवान और अन्य देशों पर आयात निर्भरता; उच्च लॉजिस्टिक्स और बिजली लागत के कारण विनिर्माण की लागत में वैश्विक प्रतिस्पर्धा; और घरेलू ब्रांडों के वैश्विक बाजार में स्थापित होने की कठिन प्रक्रिया।
  • निष्कर्ष: यह निष्कर्ष दें कि ‘मेक इन इंडिया’ विज़न को ‘डिजाइन इन इंडिया’ और ‘इनोवेट इन इंडिया’ के साथ जोड़ना ही वास्तविक आत्मनिर्भरता का मार्ग है, जिसे यह नई योजना नीतिगत रूप से धरातल पर उतारने का प्रयास कर रही है।

संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)

इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग, पीएलआई और सेमीकंडक्टर विनिर्माण से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक तथ्य जो परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:

  1. भारत का सेमीकंडक्टर मिशन (ISM): वर्ष 2021 में ₹76,000 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ शुरू किया गया मिशन, जिसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर वेफर फैब्रिकेशन और डिस्प्ले इकोसिस्टम का विकास करना है। सेमीकंडक्टर मोबाइल फोन का सबसे महत्वपूर्ण घटक (चिप) है।
  2. राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति (NEP 2019): इस नीति का उद्देश्य भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) के क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र बनाना और इसके निर्यात को बढ़ावा देना है।
  3. एप्पल (Apple) और सैमसंग (Samsung) का भारतीय विनिर्माण: पीएलआई योजना की सफलता के कारण वैश्विक दिग्गज एप्पल ने भारत में अपने फ्लैगशिप आईफोन (iPhone) के विनिर्माण की शुरुआत की, और सैमसंग ने नोएडा में दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल विनिर्माण इकाई स्थापित की है।

एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)

त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:

  • Budget Outlay: केंद्रीय कैबिनेट ने मोबाइल फोन विनिर्माण के लिए ₹62,500 करोड़ की योजना को मंजूरी दी।
  • Tenure: यह योजना पांच वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026-27 से वित्तीय वर्ष 2030-31) के लिए लागू रहेगी।
  • Incentive Model: पात्र बिक्री पर 2.25% से 5% की प्रोत्साहन दरें। घरेलू कंपोनेंट सोर्सिंग पर 1.5% का अतिरिक्त लाभ।
  • Design Bonus: भारतीय ब्रांडों के स्वदेशी उत्पाद डिजाइन और आरएंडडी (R&D) पर 3% का अतिरिक्त प्रोत्साहन।
  • PLI Transition: यह योजना पूर्ववर्ती पीएलआई (PLI-LSEM) योजना का स्थान लेगी जो 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गई थी।
  • Outcomes: ₹39 लाख करोड़ का कुल संचयी उत्पादन और लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन।

अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और आर्थिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत की गई ‘मोबाइल फोन विनिर्माण योजना’ (MPMS) के लिए कुल कितना बजटीय परिव्यय (Budgetary Outlay) निर्धारित किया गया है?

(A) 45,000 करोड़ रुपये
(B) 52,500 करोड़ रुपये
(C) 62,500 करोड़ रुपये
(D) 75,000 करोड़ रुपये

उत्तर: (C) 62,500 करोड़ रुपये
व्याख्या: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने ₹62,500 करोड़ की लागत से ‘मोबाइल फोन विनिर्माण योजना’ (MPMS) को मंजूरी प्रदान की है।

प्रश्न 2: ‘Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS’ की कुल समय अवधि (Tenure) कितनी निर्धारित की गई है?

(A) 3 वर्ष (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2028-29)
(B) 5 वर्ष (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31)
(C) 7 वर्ष (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2032-33)
(D) 10 वर्ष

उत्तर: (B) 5 वर्ष (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31)
व्याख्या: इस योजना की कुल अवधि 5 वर्षों की होगी जो चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 से शुरू होकर वित्तीय वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी।

प्रश्न 3: इस नई विनिर्माण योजना (MPMS) के तहत, भारतीय ब्रांडों को उत्पाद की डिजाइन और अनुसंधान (Design & R&D) के लिए पात्र बिक्री पर कितने प्रतिशत का अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा?

(A) 1.5% अतिरिक्त प्रोत्साहन
(B) 2.5% अतिरिक्त प्रोत्साहन
(C) 3.0% अतिरिक्त प्रोत्साहन
(D) 5.0% अतिरिक्त प्रोत्साहन

उत्तर: (C) 3.0% अतिरिक्त प्रोत्साहन
व्याख्या: तकनीकी संप्रभुता हासिल करने और भारतीय पेटेंट बनाने के उद्देश्य से भारतीय ब्रांडों के स्वदेशी डिजाइन और आरएंडडी पर 3% का अतिरिक्त प्रोत्साहन बोनस प्रदान किया जाएगा।

प्रश्न 4: भारत में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को गति देने वाली पूर्ववर्ती योजना ‘PLI-LSEM’ का आधिकारिक कार्यकाल किस तिथि को समाप्त हो गया, जिसके बाद इस नई योजना को लाया गया है?

(A) 31 दिसंबर 2025
(B) 31 मार्च 2026
(C) 30 जून 2026
(D) 15 जुलाई 2026

उत्तर: (B) 31 मार्च 2026
व्याख्या: बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए पीएलआई (PLI-LSEM) योजना का आधिकारिक कार्यकाल 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गया था, जिसके बाद इसकी निरंतरता बनाए रखने के लिए MPMS को लाया गया है।

प्रश्न 5: वर्ष 2025 के आधिकारिक निर्यात आंकड़ों के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन सा उत्पाद भारत से निर्यात होने वाला एकल सबसे बड़ा उत्पाद श्रेणी (Single Largest Export Category) बनकर उभरा है?

(A) कटे और तराशे गए हीरे (Cut & Diamonds)
(B) रिफाइंड डीजल और पेट्रोलियम ईंधन
(C) स्मार्टफोन (Smartphones / Mobile Phones)
(D) जैविक कृषि उत्पाद और मसाले

उत्तर: (C) स्मार्टफोन (Smartphones / Mobile Phones)
व्याख्या: वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत से निर्यात होने वाला सबसे बड़ा एकल उत्पाद बन गया है, जिसने हीरा और डीजल जैसे पारंपरिक निर्यातों को भी पीछे छोड़ दिया है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS क्या है?

Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS भारत सरकार द्वारा स्वीकृत की गई एक नई विनिर्माण योजना है, जिसके लिए ₹62,500 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में मोबाइल फोन के गहरे मूल्य संवर्धन (Local Sourcing) को बढ़ावा देना, स्वदेशी डिजाइन और आरएंडडी को मजबूत करना तथा भारतीय ब्रांडों का विकास करना है।

Q2. यह योजना पूर्ववर्ती पीएलआई (PLI) योजना से कैसे भिन्न और बेहतर है?

पुरानी पीएलआई योजना मुख्य रूप से केवल उत्पादन और असेंबली बढ़ाने पर केंद्रित थी। इसके विपरीत, MPMS योजना स्थानीय पुर्जों की सोर्सिंग पर 1.5% और स्वदेशी डिजाइन व आरएंडडी (R&D) करने वाले भारतीय ब्रांडों को 3% का अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन देती है, ताकि भारत असेंबली हब से आगे बढ़कर ‘तकनीकी संप्रभुता’ हासिल कर सके।

Q3. इस योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन दरें (Incentives) क्या हैं?

इस योजना के तहत भारत में निर्मित मोबाइलों की बिक्री पर कंपनियों को 2.25% से 5% तक की बुनियादी प्रोत्साहन दरें मिलेंगी। स्थानीय पुर्जों की खरीद करने पर 1.5% तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन और भारतीय डिजाइन पर 3% का अतिरिक्त बोनस मिलेगा।

Q4. वैश्विक स्मार्टफोन निर्यात के क्षेत्र में वर्तमान में भारत की क्या स्थिति है?

भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश बन चुका है। भारत में उपयोग होने वाले 99.2% मोबाइल स्वदेशी हैं, और वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत से निर्यात होने वाला सबसे बड़ा एकल उत्पाद बन गया है, जिसने हीरा और डीजल निर्यात को भी पीछे छोड़ दिया है।

Q5. योजना के पांच वर्षों के कार्यकाल के दौरान क्या परिणाम अपेक्षित हैं?

वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 के दौरान देश में लगभग ₹39 लाख करोड़ के मोबाइल फोन का संचयी उत्पादन होने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, इस योजना के माध्यम से लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।


निष्कर्ष (Conclusion)

केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत की गई यह महत्वाकांक्षी योजना Mobile Phone Manufacturing Scheme India MPMS भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की मूल्य श्रृंखलाओं में एक स्वतंत्र और मजबूत महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। पीएलआई (PLI-LSEM) की समाप्ति के बाद इस नई योजना का आना देश के औद्योगिक विनिर्माण की निरंतरता को बनाए रखने के लिए अनिवार्य था।

स्थानीय पुर्जों की सोर्सिंग पर मिलने वाला 1.5% अतिरिक्त प्रोत्साहन जहाँ भारत के छोटे एमएसएमई (MSMEs) और कल-पुर्जा उद्योगों को सुदृढ़ करेगा, वहीं स्वदेशी डिजाइनों और भारतीय ब्रांडों को मिलने वाला 3% अतिरिक्त बोनस देश को ‘केवल असेंबली हब’ की छवि से बाहर निकालकर ‘डिजाइन और तकनीकी संप्रभुता’ (Technological Sovereignty) प्रदान करेगा। यह रणनीतिक प्रयास न केवल भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में चीन का सबसे मजबूत विकल्प बनाएगा बल्कि ‘विकसित भारत @ 2047’ के हमारे बड़े राष्ट्रीय सपनों को धरातल पर साकार करने की दिशा में सबसे मजबूत आर्थिक और तकनीकी रीढ़ साबित होगा।

Official Sources:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *