Chhattisgarh Traditional Vaidya: 6 जिलों के 309 पारंपरिक वैद्यों को मिला प्रमाण पत्र; वन मंत्री बोले- ज्ञान का होगा दस्तावेजीकरण

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रायपुर, 25 अक्टूबर: वनांचल और दूरस्थ जनजातीय अंचलों में पीढ़ियों से लोक स्वास्थ्य की निस्वार्थ सेवा कर रहे पारंपरिक वैद्यों और उनकी अनूठी जड़ी-बूटी चिकित्सा परंपरा को संस्थागत पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रविवार को कोण्डागांव में आयोजित गरिमामय समारोह में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने प्रदेश के 6 जिलों से आए 309 पारंपरिक वैद्यों को स्वैच्छिक प्रमाणन के अंतर्गत आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रदान किए। Chhattisgarh Traditional Vaidya (छत्तीसगढ़ पारंपरिक वैद्य प्रमाणन) कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा किया गया। इस अवसर पर वन मंत्री ने घोषणा की कि हमारे वैद्यों का ज्ञान पीढ़ियों के अनुभवों पर आधारित एक अमूल्य विरासत है, जिसका व्यवस्थित दस्तावेजीकरण कर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। बोर्ड ने 31 मार्च 2027 तक राज्य के 1,000 पारंपरिक वैद्यों के प्रमाणीकरण का लक्ष्य रखा है।

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • ‘Chhattisgarh Traditional Vaidya’: कोण्डागांव में 6 जिलों के 309 पारंपरिक वैद्यों को स्वैच्छिक प्रमाण पत्र वितरित।
  • 1,000 वैद्यों के प्रमाणन का लक्ष्य: औषधि पादप बोर्ड 31 मार्च 2027 तक पूरे प्रदेश में हासिल करेगा यह ऐतिहासिक मुकाम।
  • पारंपरिक ज्ञान का होगा दस्तावेजीकरण: सदियों पुरानी देशी चिकित्सा विधियों और दुर्लभ नुस्खों को सहेजेगी सरकार।
  • पंचायतों व बाड़ियों में औषधीय रोपण: खाली जमीन और घरों के आंगनों में दुर्लभ जड़ी-बूटियां लगाने के दिए गए निर्देश।
  • लघु वनोपज व मिलेट्स का वैल्यू एडिशन: साल बीज, कोदो, कुटकी व रागी के प्रसंस्करण से खुलेंगे ग्रामीण आजीविका के नए द्वार।
  • शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी: बस्तर विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष लता उसेंडी और बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम रहे उपस्थित।

Chhattisgarh Traditional Vaidya: वनांचल के लोक स्वास्थ्य रक्षकों को मिली आधिकारिक पहचान

छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में पाई जाने वाली वनस्पतियों और जड़ी-बूटियों से असाध्य रोगों का उपचार करने वाले पारंपरिक वैद्यों का योगदान सदियों से अतुलनीय रहा है।

Chhattisgarh Traditional Vaidya स्वैच्छिक प्रमाणन पहल के माध्यम से राज्य सरकार ने इन अनौपचारिक चिकित्सकों की बौद्धिक क्षमता को कानूनी और सामाजिक मान्यता प्रदान की है। कोण्डागांव में आयोजित इस समारोह में बस्तर, दक्षिण बस्तर और आसपास के 6 जिलों से पहुंचे 309 वैद्यों को अधिकृत प्रमाणपत्र दिए गए। इस कदम से न केवल वैद्यों का आत्मसम्मान बढ़ा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जनता का विश्वास भी और अधिक सुदृढ़ हुआ है।

पारंपरिक ज्ञान का होगा वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण: दुर्लभ औषधियों का सघन रोपण

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिकता के दौर में हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को विलुप्त होने से बचाना राज्य का प्राथमिक दायित्व है:

  • अनुभवों की धरोहर का संरक्षण: उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वैद्यों के पास मौजूद औषधीय ज्ञान, पौधों की पहचान और रोगों के निदान की विधियों का चरणबद्ध दस्तावेजीकरण (Documentation) किया जाए, ताकि यह अनमोल ज्ञान पुस्तकालयों और शोध संस्थानों के माध्यम से भावी पीढ़ियों के काम आ सके।
  • बाड़ियों और पंचायतों में रोपण: औषधीय पौधों की घटती संख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने वन विभाग और बोर्ड को निर्देश दिया कि ग्राम पंचायतों की उपलब्ध भूमि, सामुदायिक परिसरों और ग्रामीणों के घरों की बाड़ियों में औषधीय पौधों के रोपण को जन-आंदोलन का रूप दिया जाए।

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साल बीज और मिलेट्स का प्रसंस्करण: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल

पारंपरिक औषधियों के साथ-साथ वन मंत्री ने वनांचल की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए मूल्य संवर्धन (Value Addition) का रोडमैप प्रस्तुत किया:

  • लघु वनोपज की ब्रांडिंग: उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा के साल बीज (Sal Seed), हर्रा, बहेड़ा, आंवला और महुआ जैसे वन उत्पादों की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग कर स्थानीय आदिवासियों को सीधे बाजार से जोड़ा जाएगा।
  • पारंपरिक सुपरफूड्स को बढ़ावा: पोषण सुरक्षा के लिए कोदो, कुटकी और रागी (मड़िया) जैसे पारंपरिक मोटे अनाजों के उपयोग को भोजन में शामिल करने पर बल दिया गया। इनके प्रसंस्करण से स्थानीय युवाओं और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

“मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार पारंपरिक ज्ञान, वन संपदा और वन्य औषधियों के संरक्षण के लिए पूरी निष्ठा से संकल्पित है। हमारे पारंपरिक वैद्य केवल दवा देने वाले नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और लोक स्वास्थ्य के सजग प्रहरी हैं। उनके पीढ़ियों पुराने ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक मान्यता दिलाना और उसका दस्तावेजीकरण करना हमारा कर्तव्य है, जिससे छत्तीसगढ़ का यह स्वास्थ्य दर्शन पूरे विश्व का मार्गदर्शन कर सके।”— श्री केदार कश्यप, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन

समारोह में उपस्थित प्रमुख जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी

कोण्डागांव में आयोजित इस गरिमामय सम्मेलन में शासन और समाज के प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे:

  • मुख्य अतिथि: श्री केदार कश्यप, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन।
  • विशिष्ट अतिथि: सुश्री लता उसेंडी, उपाध्यक्ष बस्तर विकास प्राधिकरण एवं विधायक कोण्डागांव।
  • बोर्ड नेतृत्व: श्री विकास मरकाम (अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड), श्री अंजय शुक्ला (उपाध्यक्ष)।
  • विभागीय अमला: वन विभाग के वरिष्ठ वन संरक्षक, औषधि पादप बोर्ड के वैज्ञानिक, विभिन्न जिलों से आए 309 पारंपरिक वैद्य एवं स्थानीय जनसेवक।

छत्तीसगढ़ पारंपरिक वैद्य प्रमाणन अभियान: एक नजर में

  • कार्यक्रम: पारंपरिक वैद्य स्वैच्छिक प्रमाणन एवं सम्मान समारोह
  • समारोह स्थल व तिथि: कोण्डागांव, बस्तर संभाग (25 अक्टूबर 2026)
  • प्रमाण पत्र प्राप्तकर्ता: 6 जिलों के 309 पारंपरिक वैद्य
  • आगामी प्रमाणन लक्ष्य: 31 मार्च 2027 तक 1,000 पारंपरिक वैद्य
  • आयोजक संस्था: छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड
  • मुख्य अतिथि: वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप
  • विशिष्ट अतिथि: विधायक सुश्री लता उसेंडी एवं बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम
  • मुख्य घोषणाएं: वैद्यों के ज्ञान का दस्तावेजीकरण, पंचायतों में औषधीय पौधे, साल बीज व मिलेट्स का प्रसंस्करण

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Chhattisgarh Traditional Vaidya प्रमाणन कार्यक्रम कहाँ और किसके द्वारा आयोजित किया गया?

Chhattisgarh Traditional Vaidya प्रमाणन समारोह कोण्डागांव में छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा 25 अक्टूबर 2026 को आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में कितने पारंपरिक वैद्यों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए?

समारोह में प्रदेश के 6 जिलों से आए 309 पारंपरिक वैद्यों को स्वैच्छिक प्रमाणन के अंतर्गत आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

औषधि पादप बोर्ड ने वैद्यों के प्रमाणन को लेकर क्या लक्ष्य निर्धारित किया है?

बोर्ड ने 31 मार्च 2027 तक छत्तीसगढ़ के कुल 1,000 पारंपरिक वैद्यों का स्वैच्छिक प्रमाणीकरण पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने पारंपरिक ज्ञान और जड़ी-बूटियों के लिए क्या निर्देश दिए?

वन मंत्री ने वैद्यों के पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण करने, ग्राम पंचायतों व बाड़ियों में औषधीय पौधे लगाने और साल बीज व पारंपरिक अनाजों (कोदो, कुटकी, रागी) के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।

आधिकारिक स्रोत: वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन / छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड / जनसंपर्क संचालनालय (DPR Raipur)

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