BRICS Traditional Medicine: 18वें शिखर सम्मेलन के नई दिल्ली घोषणापत्र में TCIM Expert Group को मंजूरी— आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा को मिला वैश्विक मंच

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नई दिल्ली, 13 सितंबर 2026: 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में अपनाए गए नई दिल्ली घोषणापत्र ने BRICS Traditional Medicine (पारंपरिक चिकित्सा) के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को एक बड़ी गति दी है। घोषणापत्र में Traditional, Complementary and Integrative Medicine (TCIM) के तहत BRICS Expert Working Group के प्रस्तावित गठन का स्वागत किया गया है, जो BRICS सदस्य देशों के बीच संवाद, सहयोग और ज्ञान-आदान-प्रदान का एक संरचित तंत्र (Structured Mechanism) प्रदान करेगा।

यह घोषणापत्र BRICS Health Track के अंतर्गत पारंपरिक चिकित्सा को स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) में योगदान देने के लिए बढ़ती प्रासंगिकता के साथ मान्यता देता है। केंद्रीय आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि यह “पारंपरिक चिकित्सा में वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम” है।

BRICS Traditional Medicine के तहत यह विकास भारत की BRICS अध्यक्षता के अंतर्गत 21 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित BRICS बैठक के बाद आया है, जिसमें प्रस्तावित Expert Working Group के Terms of Reference पर सहमति बनी थी। WHO ने भी इस पहल को पारंपरिक चिकित्सा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने में एक “महत्वपूर्ण विकास” बताया है।

BRICS TCIM घोषणापत्र: मुख्य तथ्य (Quick Facts)विवरण
शिखर सम्मेलन18वां BRICS शिखर सम्मेलन
घोषणापत्रनई दिल्ली घोषणापत्र (New Delhi Declaration)
विषयTraditional, Complementary and Integrative Medicine (TCIM)
प्रस्तावित निकायBRICS Expert Working Group on TCIM (BRICS Health Track के अंतर्गत)
आयुष मंत्रीश्री प्रतापराव जाधव (स्वतंत्र प्रभार) + स्वास्थ्य राज्य मंत्री
आयुष सचिववैद्य राजेश कोटेचा
BRICS TCIM बैठक21 जुलाई 2026, चंडीगढ़ (भारत की BRICS अध्यक्षता)
WHO रणनीतिWHO Global Traditional Medicine Strategy 2025-2034
लक्ष्यसार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC), साक्ष्य-आधारित सहयोग

आयुष मंत्री और सचिव ने क्या कहा?

केंद्रीय आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने कहा: “नई दिल्ली घोषणापत्र में BRICS Traditional Medicine — TCIM को मान्यता दिया जाना पारंपरिक चिकित्सा में वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रस्तावित Expert Working Group सदस्य देशों को ज्ञान साझा करने, अनुसंधान को मजबूत करने और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए एक सार्थक मंच प्रदान करेगा। भारत आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता आश्वासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।”

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा: “प्रस्तावित Expert Working Group BRICS देशों के बीच साक्ष्य साझा करने, अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने और गुणवत्ता तथा नियामक दृष्टिकोण में सुधार के लिए एक केंद्रित मंच प्रदान कर सकता है। भारत अपने आयुष पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से कठोर अनुसंधान और साक्ष्य-सूचित पद्धतियों को बढ़ावा देकर इस सहयोग में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।”

घोषणापत्र के प्रमुख प्रावधान

BRICS Traditional Medicine से जुड़े नई दिल्ली घोषणापत्र के प्रमुख प्रावधान:

  • Expert Working Group: BRICS Health Track के अंतर्गत TCIM पर प्रस्तावित BRICS Expert Working Group का स्वागत— यह संवाद, सहयोग और ज्ञान-आदान-प्रदान का संरचित तंत्र होगा।
  • औषधीय पौधे और हर्बल तैयारियां: चिकित्सीय और निवारक उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले औषधीय पौधों और हर्बल तैयारियों पर अनुसंधान में अधिक सहयोग का आह्वान।
  • साझा पारंपरिक औषधि संहिता (Pharmacopoeias): BRICS सदस्य देशों की साझा पारंपरिक औषधि संहिताओं को सुरक्षित, प्रभावी और किफायती उत्पाद विकसित करने का आधार माना गया।
  • गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता: साक्ष्य-सूचित दृष्टिकोण और उचित नियामक ढांचे के माध्यम से TCIM पद्धतियों और उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने पर बल।
  • UHC से जोड़ा: TCIM को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage) से जोड़ा गया।

चंडीगढ़ बैठक और भारत की BRICS अध्यक्षता

यह विकास भारत की BRICS अध्यक्षता के अंतर्गत 21 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित BRICS बैठक के बाद आया है। इस बैठक में:

  • BRICS सदस्य देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल हुए।
  • TCIM से संबंधित अनुसंधान, शिक्षा, ज्ञान-आदान-प्रदान और नियामक ढांचे में सहयोग पर चर्चा हुई।
  • प्रस्तावित BRICS Expert Working Group on TCIM के Terms of Reference पर सहमति बनी।

प्रस्तावित Expert Working Group अनुसंधान संस्थानों, विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और शैक्षणिक संस्थानों के बीच निरंतर सहयोग को संस्थागत बनाने का अवसर प्रदान करेगा।


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WHO Global Traditional Medicine Strategy 2025-2034

BRICS Traditional Medicine के तहत यह विकास वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा की भूमिका पर बढ़ते ध्यान की पृष्ठभूमि में आया है:

  • WHO Global Traditional Medicine Strategy 2025-2034: साक्ष्य आधार को मजबूत करने, सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने और पारंपरिक चिकित्सा को स्वास्थ्य प्रणालियों में उचित रूप से एकीकृत करने पर बल देती है।
  • WHO की सराहना: WHO ने BRICS पहल को पारंपरिक चिकित्सा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने में एक “महत्वपूर्ण विकास” (significant development) बताया है।

भारत के लिए महत्व: आयुर्वेद और आयुष पारिस्थितिकी तंत्र

भारत के लिए BRICS Traditional Medicine का यह निर्णय विशेष महत्व रखता है:

  • आयुर्वेद और आयुष प्रणालियों का अंतरराष्ट्रीय मंच: यह भारत के प्रयासों को मजबूत करता है— वैज्ञानिक अनुसंधान, साक्ष्य सृजन, गुणवत्ता आश्वासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाना।
  • औषधीय पौधों पर अनुसंधान: समन्वित अनुसंधान से औषधीय संसाधनों का बेहतर दस्तावेजीकरण और वैज्ञानिक समझ, औषधि संहिता ज्ञान को मजबूती और गुणवत्ता-आश्वस्त उत्पादों के विकास में सहायता मिलेगी।
  • सुरक्षित, प्रभावी और किफायती स्वास्थ्य समाधान: घोषणापत्र दीर्घकालिक सहयोग के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है— पारंपरिक ज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान, औषधीय पौधे संसाधन और नियामक अनुभव को एक साथ लाकर।

UPSC/CGPSC Static Facts: BRICS, WHO, आयुष और UHC

प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC Prelims & Mains, UPSC GS-2 International Relations / GS-3 Health) के छात्रों के लिए प्रासंगिक बुनियादी (Static) जानकारी:

  • BRICS: Brazil, Russia, India, China, South Africa— 2009 में स्थापित (तब BRIC, 2010 में South Africa शामिल)। 2024 में विस्तार— Egypt, Ethiopia, Iran, UAE, Saudi Arabia शामिल। नई दिल्ली में BRICS Summit 2026 भारत की अध्यक्षता में।
  • आयुष मंत्रालय (Ministry of Ayush): 2014 में स्वतंत्र मंत्रालय के रूप में स्थापित। इसके अंतर्गत आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी (AYUSH) प्रणालियां आती हैं।
  • UHC (Universal Health Coverage): WHO के अनुसार UHC का अर्थ है कि सभी व्यक्तियों को बिना वित्तीय कठिनाई के आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों। SDG-3.8 में UHC प्राप्ति का लक्ष्य 2030 तक निर्धारित है।
  • WHO Global Traditional Medicine Strategy 2025-2034: WHO द्वारा जारी 10-वर्षीय रणनीति। तीन लक्ष्य— साक्ष्य आधार मजबूत करना, सुरक्षा/गुणवत्ता/प्रभावकारिता सुनिश्चित करना, स्वास्थ्य प्रणालियों में उचित एकीकरण।
  • WHO और पारंपरिक चिकित्सा: WHO का अनुमान है कि विश्व की लगभग 80% जनसंख्या किसी न किसी रूप में पारंपरिक चिकित्सा का उपयोग करती है। 2023 में WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन (जामनगर, भारत) का उद्घाटन किया गया।
  • Pharmacopoeia (औषधि संहिता): किसी देश में स्वीकृत दवाओं, उनके मानकों, गुणवत्ता और तैयारी विधियों का आधिकारिक दस्तावेज। भारतीय औषधि संहिता (Indian Pharmacopoeia) भारत में दवाओं के मानक निर्धारित करती है। आयुर्वेदिक औषधि संहिता (Ayurvedic Pharmacopoeia of India) भी है।
  • जामनगर WHO केंद्र: 2023 में गुजरात के जामनगर में WHO Global Centre for Traditional Medicine का उद्घाटन। यह विश्व का पहला और एकमात्र WHO TCIM केंद्र है। भारत सरकार ने इसके लिए $250 मिलियन का योगदान दिया।

विश्लेषण: ‘Evidence-Based Global South Health Diplomacy’— भारत का नया कूटनीतिक उपकरण

(UPSC/CGPSC Mains Analysis – International Relations & Health Governance)

1. पारंपरिक चिकित्सा— ‘Soft Power’ से ‘Evidence-Based Cooperation’ तक: BRICS Traditional Medicine के तहत TCIM Expert Working Group का गठन दर्शाता है कि भारत ने पारंपरिक चिकित्सा को केवल ‘सॉफ्ट पावर’ के रूप में प्रस्तुत करने से आगे बढ़कर साक्ष्य-आधारित अंतरराष्ट्रीय सहयोग (Evidence-Based International Cooperation) के मंच पर स्थापित किया है। यह ‘Global South Health Diplomacy’ का एक नया मॉडल है।

2. WHO जामनगर केंद्र— भारत का वैश्विक नेतृत्व: 2023 में जामनगर में WHO Global Centre for Traditional Medicine की स्थापना और अब BRICS Expert Working Group— ये दोनों विकास भारत को पारंपरिक चिकित्सा में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में ला रहे हैं।

3. औषधीय पौधे— ‘Green Pharmacy’ की संभावना: BRICS देशों (विशेषकर भारत, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका) में औषधीय पौधों की विशाल विविधता है। समन्वित अनुसंधान से ‘Green Pharmacy’ (जैव औषधालय) की दिशा में बड़ी प्रगति संभव है, जो सुरक्षित, प्रभावी और किफायती उत्पाद विकसित कर सकती है।

4. Pharmacopoeial Standards— वैश्विक मानक निर्माण: BRICS देशों के बीच औषधि संहिता मानकों (Pharmacopoeial Standards) का आदान-प्रदान भविष्य में पारंपरिक चिकित्सा उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक निर्माण का आधार बन सकता है। यह भारतीय आयुर्वेदिक उत्पादों के वैश्विक निर्यात को भी सुगम बनाएगा।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. BRICS TCIM Expert Working Group क्या है?

18वें BRICS शिखर सम्मेलन के नई दिल्ली घोषणापत्र में Traditional, Complementary and Integrative Medicine (TCIM) पर प्रस्तावित BRICS Expert Working Group का स्वागत किया गया। यह BRICS Health Track के अंतर्गत सदस्य देशों के बीच पारंपरिक चिकित्सा में संवाद, सहयोग और ज्ञान-आदान-प्रदान का संरचित तंत्र होगा।

Q2. BRICS TCIM बैठक कहां और कब हुई थी?

21 जुलाई 2026 को भारत की BRICS अध्यक्षता के अंतर्गत चंडीगढ़ में BRICS बैठक आयोजित हुई, जिसमें TCIM पर सहयोग और Expert Working Group के Terms of Reference पर सहमति बनी।

Q3. WHO Global Traditional Medicine Strategy 2025-2034 क्या है?

यह WHO की 10-वर्षीय रणनीति है जो साक्ष्य आधार को मजबूत करने, सुरक्षा/गुणवत्ता/प्रभावकारिता सुनिश्चित करने और पारंपरिक चिकित्सा को स्वास्थ्य प्रणालियों में उचित रूप से एकीकृत करने पर बल देती है। WHO ने BRICS पहल को पारंपरिक चिकित्सा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग में एक “महत्वपूर्ण विकास” बताया है।

Q4. भारत के लिए BRICS TCIM Expert Working Group क्यों महत्वपूर्ण है?

यह आयुर्वेद और अन्य आयुष प्रणालियों को वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता आश्वासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से वैश्विक मंच पर आगे बढ़ाने का अवसर है। जामनगर में WHO Global Centre for Traditional Medicine (2023) और अब BRICS Expert Working Group— दोनों भारत को पारंपरिक चिकित्सा में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में ला रहे हैं।

स्रोत (Source)

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), नई दिल्ली— 13 सितंबर 2026।

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