रायपुर, 12 सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ को साइबर अपराधों से मुक्त और सुरक्षित डिजिटल राज्य बनाने की दिशा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा ने पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में 500 से अधिक विद्यार्थियों के बीच Cyber Sankalp Chhattisgarh का शुभारंभ किया— यह 9 मॉड्यूल वाला एक वीडियो पाठ्यक्रम है, जो नागरिकों को साइबर ठगी के नए तरीकों, डिजिटल सुरक्षा और बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी सरल भाषा में देगा।
कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली हिस्सा एक साइबर पीड़ित की आपबीती रही। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर एक करोड़ रुपए से अधिक की ठगी के शिकार डॉ. सेन ने बताया कि कैसे साइबर अपराधियों ने उन्हें जाल में फंसाया। लेकिन समय रहते पुलिस से संपर्क करने पर गोल्डन ऑवर में 60 लाख रुपए वापस मिल गए। उपमुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि साइबर ठगी होते ही 1930 पर तत्काल कॉल करें— हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
Cyber Sankalp Chhattisgarh के 9 वीडियो मॉड्यूल प्रत्येक लगभग 5-6 मिनट के हैं। यह छत्तीसगढ़ पुलिस के चल रहे ‘साइबर जागृति अभियान’ (15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026) का हिस्सा है। उपमुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से ‘साइबर जागरूकता के दूत’ बनकर गांव-गांव तक जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
| साइबर संकल्प छत्तीसगढ़: मुख्य तथ्य (Quick Facts) | विवरण |
|---|---|
| कार्यक्रम | ‘साइबर संकल्प’ वीडियो पाठ्यक्रम का शुभारंभ |
| स्थान | पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर |
| मुख्य अतिथि | उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा |
| मॉड्यूल | 9 वीडियो मॉड्यूल, प्रत्येक ~5-6 मिनट |
| साइबर हेल्पलाइन | 1930 |
| डिजिटल अरेस्ट पीड़ित | डॉ. सेन — ₹1 करोड़+ की ठगी, ₹60 लाख गोल्डन ऑवर में वापस |
| साइबर जागृति अभियान | 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 |
| सहभागी | 500+ विद्यार्थी (विश्वविद्यालय + विभिन्न महाविद्यालय) |
| पहल | साइबर क्राइम वालंटियर (MHA & I4C) |
‘डिजिटल अरेस्ट’ क्या है? डॉ. सेन की आपबीती
Cyber Sankalp Chhattisgarh के कार्यक्रम में साइबर अपराध से पीड़ित व्यक्तियों ने अपने अनुभव साझा किए। सबसे चौंकाने वाला मामला डॉ. सेन का रहा, जो ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) के नाम पर एक करोड़ रुपए से अधिक की साइबर धोखाधड़ी के शिकार हुए।
डॉ. सेन ने बताया कि साइबर अपराधियों ने किस प्रकार उन्हें अपने जाल में फंसाया। हालांकि, समय रहते पुलिस से संपर्क करने पर गोल्डन ऑवर में पुलिस को सूचना मिलने के कारण 60 लाख रुपये की ठगी की राशि वापस प्राप्त हो सकी। उनकी आपबीती ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि साइबर ठगी के बाद प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है और तत्काल 1930 पर सूचना देना अत्यंत आवश्यक है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का एक नया और खतरनाक रूप है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को ‘गिरफ्तार’ करने का नाटक करते हैं और बड़ी रकम ऐंठते हैं।
‘साइबर संकल्प’: 9 मॉड्यूल, 5-6 मिनट प्रत्येक, सरल भाषा
उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि Cyber Sankalp Chhattisgarh के अंतर्गत तैयार किए गए 9 वीडियो मॉड्यूल प्रत्येक लगभग 5-6 मिनट के हैं। इनके माध्यम से नागरिकों को:
- साइबर ठगी के नए तरीकों (सोशल मीडिया, फर्जी कॉल, ओटीपी, बैंकिंग धोखाधड़ी, फर्जी लिंक, डिजिटल अरेस्ट) की जानकारी
- डिजिटल सुरक्षा के व्यावहारिक उपाय
- साइबर अपराधों से बचाव के तरीके
- सब कुछ सरल भाषा में दिया जाएगा
1930: साइबर ठगी होते ही तत्काल कॉल करें
उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल कार्रवाई को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी होती है तो घबराने या देर करने के बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। समय पर सूचना मिलने से पुलिस को ठगी की राशि को रोकने और पीड़ित तक वापस पहुंचाने की कार्रवाई करने में मदद मिलती है।
विद्यार्थी बनें ‘साइबर जागरूकता के दूत’
Cyber Sankalp Chhattisgarh के कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कई अहम अपील कीं:
- साइबर जागरूकता के दूत बनें: युवा वर्ग तकनीक का सबसे अधिक उपयोग करता है और जागरूकता को समाज के बड़े वर्ग तक पहुंचा सकता है।
- परिवार को जागरूक करें: घरों में बुजुर्गों, माता-पिता और परिजनों को साइबर ठगी के नए तरीकों के बारे में बताएं।
- गांव-गांव तक पहुंचाएं: साइबर जागरूकता को ग्रामीण क्षेत्रों तक ले जाने का आह्वान।
- साइबर क्राइम वालंटियर बनें: केंद्रीय गृह मंत्रालय एवं I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) द्वारा संचालित इस पहल में सहभागी बनने की अपील।
डिजिटल लेनदेन में भारत विश्व में अग्रणी— लेकिन सतर्कता जरूरी
उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि भारत डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। देश में बड़े पैमाने पर डिजिटल लेनदेन हो रहा है और डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। लेकिन डिजिटल सुविधा जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं और तकनीक का उपयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सतर्क और जागरूक रहना होगा।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
Cyber Sankalp Chhattisgarh के शुभारंभ कार्यक्रम में निम्नलिखित प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे:
- अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तवार्ता): श्री अमित कुमार
- पुलिस आयुक्त रायपुर: डॉ. संजीव शुक्ला
- पुलिस महानिरीक्षक (तकनीकी सेवाएं): श्री प्रशांत अग्रवाल
- अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रायपुर: श्री अमित तुकाराम कांबले
- अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त: श्री गौरव मंडल
- कुलपति: प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला
- कुलसचिव: श्री शैलेंद्र पटेल
यह भी पढ़ें: Chhattisgarh Teeja Pora: CM निवास बना बहनों का मायका, ₹20,000 करोड़ पार महतारी वंदन
UPSC/CGPSC Static Facts: साइबर अपराध, I4C, IT Act और डिजिटल सुरक्षा
प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC Prelims & Mains, UPSC GS-2 Governance / GS-3 Internal Security) के छात्रों के लिए प्रासंगिक बुनियादी (Static) जानकारी:
- I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre): केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित। साइबर अपराधों से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय करता है। इसके 7 प्रमुख घटक हैं— राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, साइबर क्राइम वालंटियर, साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस यूनिट आदि।
- साइबर हेल्पलाइन 1930: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) और हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग। गोल्डन ऑवर में रिपोर्ट करने पर ठगी की राशि फ्रीज कराना संभव होता है।
- IT Act, 2000 (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम): भारत में साइबर अपराधों से निपटने का प्रमुख कानून। धारा 66 (कंप्यूटर से छेड़छाड़), धारा 66C (पहचान चोरी), धारा 66D (धोखाधड़ी), धारा 67 (अश्लील सामग्री) प्रमुख प्रावधान। 2008 में संशोधन कर अनेक नए अपराध जोड़े गए।
- ‘गोल्डन ऑवर’ अवधारणा: साइबर अपराध में ठगी के तुरंत बाद का समय (आमतौर पर कुछ घंटे) सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान 1930 पर रिपोर्ट करने पर बैंक/पेमेंट गेटवे से संपर्क कर राशि को फ्रीज कराया जा सकता है।
- ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest): साइबर अपराध का नया रूप, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस/CBI/ED का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को कई घंटों तक ‘अरेस्ट’ रखने का नाटक करते हैं और पैसे ऐंठते हैं। RBI और MHA ने इसके खिलाफ विशेष अभियान चलाए हैं।
- साइबर क्राइम वालंटियर: MHA और I4C द्वारा शुरू की गई पहल। इच्छुक नागरिक cybercrime.gov.in पर पंजीकरण कर साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाने में योगदान दे सकते हैं।
- डिजिटल इंडिया और UPI: भारत में UPI (Unified Payments Interface) के माध्यम से प्रतिमाह 10 अरब+ लेनदेन। भारत दुनिया में सबसे अधिक रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन करने वाला देश।
विश्लेषण: डिजिटल सुरक्षा— ‘तकनीकी विकास’ और ‘जागरूकता’ का अंतर पाटना
(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Internal Security & Digital Governance)
1. साइबर अपराध— भारत की सबसे तेजी से बढ़ती आंतरिक सुरक्षा चुनौती: NCRB के आंकड़ों के अनुसार भारत में साइबर अपराध के मामले प्रतिवर्ष 20-30% की दर से बढ़ रहे हैं। UPI धोखाधड़ी, फिशिंग, रैनसमवेयर और अब ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए तरीके सामने आ रहे हैं। Cyber Sankalp Chhattisgarh जैसी पहल जागरूकता की दिशा में एक ठोस कदम है।
2. ‘गोल्डन ऑवर’— साइबर पुलिसिंग का सबसे प्रभावी हथियार: डॉ. सेन का मामला यह सिद्ध करता है कि समय पर रिपोर्टिंग से ₹60 लाख बचाए जा सके। यह ‘गोल्डन ऑवर’ अवधारणा सड़क दुर्घटनाओं की तरह साइबर अपराधों में भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
3. विश्वविद्यालयों में साइबर जागरूकता— ‘Multiplier Effect’: 500+ विद्यार्थियों को ‘साइबर जागरूकता का दूत’ बनाने की रणनीति एक ‘Multiplier Effect’ पैदा करेगी। हर विद्यार्थी अपने परिवार और समाज में जागरूकता फैलाएगा। यह Community Policing का डिजिटल रूप है।
4. डिजिटल इंडिया का दूसरा पहलू— साइबर सुरक्षा ढांचा: भारत में UPI के माध्यम से 10 अरब+ मासिक लेनदेन हो रहे हैं, लेकिन ग्रामीण और वरिष्ठ नागरिक अभी भी साइबर धोखाधड़ी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। 1930 हेल्पलाइन और ‘साइबर संकल्प’ जैसे पाठ्यक्रम इस अंतर को पाटने में मदद करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. ‘साइबर संकल्प’ क्या है और इसमें कितने मॉड्यूल हैं?
‘साइबर संकल्प’ छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा तैयार किया गया 9 मॉड्यूल वाला वीडियो पाठ्यक्रम है। प्रत्येक मॉड्यूल लगभग 5-6 मिनट का है, जिसमें साइबर ठगी के नए तरीकों, डिजिटल सुरक्षा और बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी सरल भाषा में दी गई है। इसका शुभारंभ 12 सितंबर 2026 को पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा किया गया।
Q2. साइबर ठगी होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
साइबर ठगी होते ही तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसे ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है— शुरुआती समय में सूचना देने पर पुलिस ठगी की राशि को फ्रीज करा सकती है। कार्यक्रम में डॉ. सेन ने बताया कि समय पर 1930 पर कॉल करने से ₹60 लाख वापस मिले।
Q3. ‘डिजिटल अरेस्ट’ क्या है?
‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर अपराध का एक नया तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI या ED का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पीड़ित को कई घंटों तक ‘गिरफ्तार’ रखने का नाटक करते हैं और बड़ी रकम ऐंठते हैं। RBI और MHA ने इसके खिलाफ विशेष अभियान चलाए हैं।
Q4. I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) क्या है?
I4C केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित एक संस्था है जो साइबर अपराधों से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय करती है। इसके तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in), हेल्पलाइन 1930 और साइबर क्राइम वालंटियर पहल संचालित की जा रही है।
स्रोत (Source)
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) / छत्तीसगढ़ शासन, जनसंपर्क विभाग, रायपुर— 12 सितंबर 2026।
One thought on “Cyber Sankalp Chhattisgarh: ‘डिजिटल अरेस्ट’ में ₹1 करोड़ गंवाने वाले पीड़ित ने बताई आपबीती— गोल्डन ऑवर में 1930 पर कॉल कर बचाए ₹60 लाख”