Chhattisgarh Farming: धान के कटोरे से आगे— अदरक, गेंदा और मछली पालन से किसानों की बदल रही तकदीर

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रायपुर, 12 सितंबर 2026: छत्तीसगढ़ की पहचान लंबे समय से ‘धान के कटोरे’ के रूप में रही है, लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सरकार की पहल से राज्य की कृषि अब इस पारंपरिक पहचान से आगे बढ़ रही है। Chhattisgarh Farming (छत्तीसगढ़ की खेती) में एक बड़ा बदलाव आया है— अदरक, गेंदा फूल, बागवानी और मछली पालन जैसी आधुनिक और नगदी फसलों की खेती से किसान प्रति एकड़ लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले ढाई वर्षों में खरीफ फसलों के उत्पादन में करीब 17 प्रतिशत और रबी फसलों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बागवानी का क्षेत्रफल 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत खरीफ 2023 से 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों के बैंक खातों में सीधे 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता राशि ट्रांसफर की गई है।

Chhattisgarh Farming की तस्वीर बदलने में ड्रोन तकनीक, ऑटोमैटिक रीपर, फार्म मशीनरी बैंक और सूक्ष्म सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों का भी बड़ा योगदान है। ग्रामीण क्षेत्रों में इन तकनीकों के बढ़ते उपयोग से श्रम लागत घट रही है और पैदावार बढ़ रही है। पिछले वर्ष 57 हजार से अधिक किसानों ने प्राकृतिक खेती भी अपनाई है।

छत्तीसगढ़ कृषि बदलाव: मुख्य आंकड़े (Quick Facts)विवरण
खरीफ उत्पादन वृद्धिलगभग 17% (ढाई वर्षों में)
रबी उत्पादन वृद्धिलगभग 20% (ढाई वर्षों में)
कृषक उन्नति योजना (धान आदान सहायता)24,73,762 किसानों को ₹13,289 करोड़
कृषक उन्नति योजना (कुल DBT 2023-2025)25.52 लाख किसानों को ₹35,892.90 करोड़
गन्ना प्रोत्साहन योजना1,03,34,000+ क्विंटल खरीदी, 32,955 किसानों को ₹64.95 करोड़
फसल बीमा (खरीफ)15.92 लाख+ किसान
फसल बीमा (रबी)2.99 लाख किसान
PM-KISAN (कुल हस्तांतरण)24.63 लाख किसानों को ₹11,000 करोड़+ (23वीं किस्त: ₹493 करोड़)
फसल विविधीकरण प्रोत्साहन₹15,000 प्रति एकड़
बागवानी क्षेत्रफल8.42 लाख हेक्टेयर → 8.91 लाख हेक्टेयर
प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसान57,000+ (पिछले वर्ष)

कृषक उन्नति योजना: ₹35,892 करोड़ सीधे किसानों के खाते में

Chhattisgarh Farming में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में ‘कृषक उन्नति योजना’ सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुई है। इस योजना के अंतर्गत:

  • धान आदान सहायता (खरीफ): न्यूनतम समर्थन मूल्य से जुड़ी आदान सहायता के रूप में 24,73,762 किसानों को 13,289 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
  • कुल DBT (खरीफ 2023-2025): लगभग 25.52 लाख किसानों के बैंक खातों में सीधे 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता राशि ट्रांसफर की गई।

इसके अलावा, गन्ना प्रोत्साहन योजना के तहत 1 करोड़ 3 लाख 34 हजार क्विंटल से ज्यादा गन्ने की खरीदी कर 32 हजार 955 किसानों को 64.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत प्रदेश के 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये सहित अब तक 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे ट्रांसफर की जा चुकी है।

फसल बीमा के दायरे में खरीफ सीजन में 15.92 लाख से अधिक तथा रबी सीजन में 2.99 लाख किसानों को शामिल किया गया, जिससे किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से आर्थिक सुरक्षा मिल रही है।

फसल विविधीकरण: ₹15,000 प्रति एकड़ प्रोत्साहन से धान से आगे

Chhattisgarh Farming को धान के एकल फसल चक्र से बाहर निकालने के लिए सरकार फसल विविधीकरण (Crop Diversification) पर विशेष जोर दे रही है। इसके तहत किसानों को ₹15,000 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इस योजना के तहत प्रोत्साहित की जाने वाली फसलें:

  • दलहन: अरहर, मूंग, उड़द और चना
  • तिलहन: सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी और तिल
  • अन्य: मक्का, कपास और कोदो, कुटकी, रागी, बाजरा जैसे मोटे अनाज

युवा किसान मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को एक साथ जोड़कर खेतों को आय का मुख्य केंद्र बना रहे हैं। किसान अदरक, गेंदा और अन्य फूलों की खेती से प्रति एकड़ लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं।

बागवानी विस्तार: 8.42 से 8.91 लाख हेक्टेयर, तेल पाम और बांस भी

Chhattisgarh Farming का एक और महत्वपूर्ण अध्याय बागवानी है। पिछले ढाई वर्षों में बागवानी का क्षेत्रफल 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है।

  • फल, सब्जी, मसाले और फूलों के साथ तेल पाम और बांस जैसी फसलों का विस्तार नई संभावनाएं पैदा कर रहा है।
  • अब चुनौती उत्पादन बढ़ाने से आगे बढ़कर उसे बाजार, प्रसंस्करण और बेहतर मूल्य से जोड़ने की है।
  • इसी दिशा में पैक हाउस और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी अधोसंरचनाएं विकसित करने की तैयारी है।

कृषि तकनीक: ड्रोन, फार्म मशीनरी बैंक और प्राकृतिक खेती

खेती में नई तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। Chhattisgarh Farming में तकनीकी बदलाव के प्रमुख आयाम:

  • फार्म मशीनरी बैंक: गांवों में खुले इन बैंकों से छोटे किसानों को किराये पर महंगी मशीनें मिल रही हैं, जिससे श्रम और लागत घट रही है।
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों का विस्तार, जिससे पानी की भारी बचत हो रही है।
  • ड्रोन तकनीक और ऑटोमैटिक रीपर: ग्रामीण क्षेत्रों में इनके उपयोग से श्रम लागत कम और पैदावार बढ़ रही है।
  • प्राकृतिक खेती: पिछले वर्ष 57 हजार से अधिक किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाई, जो कृषि के टिकाऊ भविष्य को दर्शाता है।

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UPSC/CGPSC Static Facts: MSP, फसल बीमा, मोटे अनाज और कृषि योजनाएं

चूंकि छत्तीसगढ़ में कृषि नीति से जुड़े व्यापक बदलाव हो रहे हैं, इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC Prelims & Mains, UPSC GS-3 Agriculture) के छात्रों के लिए ये बुनियादी (Static) जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  • CACP (Commission for Agricultural Costs and Prices): यह संस्था MSP की सिफारिश करती है। MSP अभी 23 फसलों (धान, गेहूं, दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, कपास, गन्ना आदि) के लिए घोषित की जाती है।
  • PMFBY (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana): 2016 में शुरू की गई। खरीफ के लिए 2% और रबी के लिए 1.5% प्रीमियम दर। शेष प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार वहन करती हैं।
  • PM-KISAN (Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi): 2019 में शुरू। सभी किसान परिवारों को ₹6,000 प्रति वर्ष (3 किस्तों में) सीधे बैंक खाते में।
  • मोटे अनाज (Millets) — श्री अन्न: 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटे अनाज वर्ष (International Year of Millets) घोषित किया गया था (भारत की पहल पर UN द्वारा)। कोदो, कुटकी, रागी, बाजरा जैसे मोटे अनाजों को ‘श्री अन्न’ ब्रांड नाम दिया गया है।
  • NMSA (National Mission for Sustainable Agriculture): जलवायु अनुकूल कृषि, सूक्ष्म सिंचाई और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाली केंद्रीय योजना।
  • NABARD: कृषि और ग्रामीण विकास के लिए वित्त पोषण करने वाली शीर्ष संस्था। 1982 में स्थापित। मुख्यालय: मुंबई।
  • छत्तीसगढ़— ‘धान का कटोरा’: भारत के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में से एक। मैदानी और उपजाऊ भूमि, अनुकूल जलवायु और प्रचुर वर्षा धान की खेती के लिए अनुकूल है।

विश्लेषण: ‘धान से विविधीकरण’ — कृषि अर्थव्यवस्था का रणनीतिक बदलाव

(UPSC/CGPSC Mains Analysis – Agriculture & Rural Economy)

1. एमएसपी-केंद्रित खेती से बाजार-केंद्रित खेती की ओर: छत्तीसगढ़ में लंबे समय से धान पर अत्यधिक निर्भरता रही है, जिससे मिट्टी की उर्वरता घट रही है और जल संकट बढ़ रहा है। ₹15,000 प्रति एकड़ का फसल विविधीकरण प्रोत्साहन एक ठोस कदम है, जो किसानों को दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की ओर प्रेरित करेगा।

2. DBT मॉडल— पारदर्शिता और सीधा लाभ: ₹35,892.90 करोड़ का सीधा हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer) यह दर्शाता है कि बिचौलियों को हटाकर किसानों तक सीधे लाभ पहुंचाने का मॉडल काम कर रहा है। यह डिजिटल गवर्नेंस और वित्तीय समावेशन का एक सफल उदाहरण है।

3. बागवानी और प्रसंस्करण— मूल्य संवर्धन की चुनौती: बागवानी क्षेत्रफल में वृद्धि (8.42 से 8.91 लाख हेक्टेयर) स्वागतयोग्य है, लेकिन असली चुनौती प्रसंस्करण (Processing) और बाजार पहुंच है। पैक हाउस और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की योजना यदि समय पर पूरी होती है, तो किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा।

4. प्राकृतिक खेती— टिकाऊ कृषि की दिशा: 57,000+ किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती अपनाना एक सकारात्मक संकेत है। भारत सरकार की ‘प्राकृतिक खेती’ पहल (National Natural Farming Movement) और जैविक खेती के बढ़ते बाजार को देखते हुए यह दीर्घकालिक रूप से लाभकारी हो सकता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. छत्तीसगढ़ में कृषक उन्नति योजना के तहत कितने किसानों को कितनी राशि दी गई?

खरीफ 2023 से 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों के बैंक खातों में सीधे 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता राशि ट्रांसफर की गई। इसके अलावा धान आदान सहायता के रूप में 24,73,762 किसानों को 13,289 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

Q2. छत्तीसगढ़ में फसल विविधीकरण के लिए कितनी प्रोत्साहन राशि दी जा रही है और किन फसलों को बढ़ावा मिल रहा है?

सरकार फसल विविधीकरण के लिए ₹15,000 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दे रही है। इसके तहत अरहर, मूंग, उड़द, चना (दलहन), सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी, तिल (तिलहन), मक्का, कपास और कोदो, कुटकी, रागी, बाजरा (मोटे अनाज) की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

Q3. छत्तीसगढ़ में खरीफ और रबी उत्पादन में कितनी वृद्धि हुई है?

पिछले ढाई वर्षों में खरीफ फसलों के उत्पादन में करीब 17 प्रतिशत और रबी फसलों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बागवानी का क्षेत्रफल भी 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर हो गया है।

Q4. छत्तीसगढ़ में कृषि में कौन-कौन सी आधुनिक तकनीकें अपनाई जा रही हैं?

छत्तीसगढ़ में ड्रोन तकनीक, ऑटोमैटिक रीपर, फार्म मशीनरी बैंक (किराये पर मशीनें), ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई (PM Krishi Sinchayi Yojana के तहत) और प्राकृतिक खेती अपनाई जा रही है। पिछले वर्ष 57,000 से अधिक किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाई।

स्रोत (Source)

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) / छत्तीसगढ़ शासन, जनसंपर्क विभाग, रायपुर— 12 सितंबर 2026।

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