रायपुर, 09 सितंबर 2026: पानी की एक-एक बूंद सहेजने की मुहिम ने छत्तीसगढ़ में एक ऐसा ऐतिहासिक चमत्कार कर दिखाया है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। जल संरक्षण और भूजल प्रबंधन (Groundwater Management) के क्षेत्र में राज्य ने एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है जो कुछ वर्षों पहले तक असंभव लगता था। हाल ही में जारी CG Groundwater Report 2026 (भूजल संसाधन आकलन-2026) के अनुसार, छत्तीसगढ़ अब पूरी तरह से ‘क्रिटिकल’ (अत्यधिक भूजल दोहन) के खतरे से बाहर आ गया है। प्रदेश में अब एक भी विकासखंड क्रिटिकल श्रेणी में नहीं बचा है।
यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। यह उन किसानों के पसीने और त्याग का परिणाम है जिन्होंने अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए अपने खेती के तौर-तरीके बदल दिए। वर्ष 2020 में प्रदेश के 9 विकासखंड क्रिटिकल श्रेणी में थे, जो 2025 में 5 रह गए थे। अब 2026 में यह संख्या शून्य (0) हो गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय महानदी भवन के वातानुकूलित कमरों को नहीं, बल्कि खेतों, गांवों और मैदानी अमले को दिया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘जन शक्ति से जल शक्ति’ के आह्वान को राज्य ने जनभागीदारी से सचमुच धरातल पर उतार दिया है। यह वही ऐतिहासिक उपलब्धि है जिसे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल ही में 1 और 2 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ‘राष्ट्रीय जल शिखर सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री के समक्ष गर्व के साथ प्रस्तुत किया था। राज्य ने ठान लिया है कि 2030 तक पूरा छत्तीसगढ़ जल-तनाव से मुक्त हो जाएगा।
| भूजल संसाधन आकलन-2026: मुख्य तथ्य (Quick Facts) | विवरण |
|---|---|
| रिपोर्ट का नाम | CG Groundwater Report 2026 |
| क्रिटिकल (Critical) ब्लॉक की संख्या | शून्य (0) (2020 में 9, 2025 में 5 थे) |
| वार्षिक भूजल रिचार्ज (Recharge) | 14.65 बिलियन घन मीटर (BCM) – अब तक का सर्वोच्च |
| कुल भूजल दोहन (Extraction) | 6.21 BCM (46.37%) – इतिहास में पहली बार गिरावट |
| आगामी रणनीति (2026-27) | ‘कैच द रेन’ योजना के तहत विकासखंड स्तर पर मासिक लक्ष्य |
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रिकॉर्ड 14.65 BCM भूजल रिचार्ज और दोहन में पहली बार गिरावट
केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB) और राज्य भूजल सर्वेक्षण मंडल द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई और राज्य स्तरीय भूजल आकलन एवं प्रबंधन समिति द्वारा अनुमोदित CG Groundwater Report 2026 के अनुसार, राज्य ने अब तक का सबसे बड़ा ‘एक-चक्रीय सुधार’ (Single-cycle improvement) दर्ज किया है। 12 विकासखंडों की स्थिति सुधरी है, जबकि किसी भी ब्लॉक की स्थिति बिगड़ी नहीं है। सुरक्षित ब्लॉकों की संख्या अब 127 हो गई है।
- ऐतिहासिक भूजल रिचार्ज: वर्ष 2017 में वार्षिक भूजल रिचार्ज 11.57 BCM था, जो अब बढ़कर 14.65 BCM हो गया है।
- भूजल दोहन (Extraction) घटा: वर्ष 2026 में कुल भूजल दोहन 6.21 BCM दर्ज किया गया है, जबकि पिछले चक्र में यह 6.30 BCM था। उपलब्ध रिकॉर्ड में यह पहली वार्षिक गिरावट है।
- सुरक्षित सीमा: वर्ष 2022 में दोहन का स्तर 49.5% के उच्च स्तर पर पहुंच गया था, जो अब घटकर 46.37% रह गया है (जो 70% की सुरक्षित सीमा से काफी नीचे है)।
- जल संरचनाओं का कमाल: 2026 के आकलन में कुल 2,28,736 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं। वर्ष 2020 की तुलना में तालाबों/पोखरों से होने वाले रिचार्ज में 266.9% और अन्य संरचनाओं से रिचार्ज में 202.8% की भारी वृद्धि हुई है।
बेमेतरा और राजनांदगांव मॉडल: ‘फसल विविधीकरण’ का चमत्कार
भूजल दोहन कम होने का सबसे बड़ा कारण गर्मी के मौसम में पानी पीने वाली धान की फसल (Summer Paddy) के रकबे में आई कमी है। CG Groundwater Report 2026 ने बेमेतरा और राजनांदगांव के किसानों की भारी प्रशंसा की है:
- बेमेतरा जिला: यहां गर्मी के धान का रकबा लगभग 26,000 हेक्टेयर से घटकर मात्र 5,000 हेक्टेयर रह गया। लगातार चार आकलन चक्रों के बाद बेमेतरा ‘क्रिटिकल’ श्रेणी से बाहर आया है। जिले में 2023 की तुलना में भूजल दोहन में 20% की कमी आई है।
- राजनांदगांव जिला: यहां धान का रकबा 9,400 हेक्टेयर से घटकर 2,800 हेक्टेयर हो गया। 2022 में यहां दोहन 70.5% था, जो अब 16.4% (वर्ष 2023 की तुलना में) घटकर पूर्णतः ‘सुरक्षित’ श्रेणी में आ गया है।
- दोनों जिलों में मिलाकर गर्मी के धान के रकबे में कुल 27,600 हेक्टेयर की कमी आई है।
राष्ट्रीय जल शिखर सम्मेलन 2026 और आगामी लक्ष्य
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 1 और 2 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ‘राष्ट्रीय जल शिखर सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष इन उपलब्धियों को प्रस्तुत किया था। राज्य ने 2030 तक सभी विकासखंडों को जल-तनाव से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है।
आगामी रणनीति:
- अर्ध-संकटग्रस्त ब्लॉक: वर्तमान में 11 जिलों के 19 विकासखंड ‘अर्ध-संकटग्रस्त’ (Semi-critical) श्रेणी में हैं, जिन पर अब विशेष फोकस होगा।
- विकासखंड स्तर के मासिक लक्ष्य: राज्य सरकार अब वार्षिक ‘कैच द रेन’ योजना 2026-27 को केवल कागजों पर नहीं, बल्कि ‘विकासखंड स्तर के मासिक लक्ष्यों’ के साथ लागू करने की तैयारी कर रही है ताकि कार्य परिणामोन्मुख (Result-oriented) हों।
- NAQUIM 2.0 का वैज्ञानिक अध्ययन: वर्ष 2026-27 के दौरान बेमेतरा, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जिलों के लगभग 5,442 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में NAQUIM 2.0 के अंतर्गत ‘जलभृत मानचित्रण’ (Aquifer Mapping) अध्ययन प्रस्तावित है।
यह समग्र सफलता जल संसाधन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कृषि और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) जैसे विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।
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UPSC/CGPSC Static Facts: CGWB की श्रेणियां और NAQUIM 2.0
चूंकि CG Groundwater Report 2026 एक अत्यधिक तकनीकी और नीतिगत विषय है, इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC GS-3 Environment & Geography) के छात्रों के लिए ये बुनियादी (Static) तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
- भूजल दोहन की श्रेणियां (CGWB Classification): केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB) विकासखंडों को उनके भूजल दोहन (Extraction) के आधार पर 4 श्रेणियों में बांटता है:
- Safe (सुरक्षित): 70% से कम दोहन।
- Semi-Critical (अर्ध-संकटग्रस्त): 70% से 90% तक दोहन।
- Critical (संकटग्रस्त): 90% से 100% तक दोहन।
- Over-exploited (अति-दोहित): 100% से अधिक दोहन (जितना पानी जमीन में जा रहा है, उससे ज्यादा निकाला जा रहा है)।
- NAQUIM (National Aquifer Mapping and Management Programme): यह जल शक्ति मंत्रालय की एक योजना है। इसका उद्देश्य भारत के भूमिगत जल स्रोतों (Aquifers) का 3D मैप (नक्शा) तैयार करना है, ताकि वैज्ञानिक तरीके से यह पता लगाया जा सके कि जमीन के नीचे पानी की स्थिति और गुणवत्ता (Quality) कैसी है।
विश्लेषण: ‘विकासखंड स्तर के मासिक लक्ष्य’ और ‘फसल विविधीकरण’
(CGPSC Mains Analysis – Governance & Environment)
1. माइक्रो-गवर्नेंस (Micro-Governance): ‘कैच द रेन 2026-27’ को विकासखंड स्तर पर ‘मासिक लक्ष्यों’ के साथ लागू करना प्रशासनिक जवाबदेही (Accountability) को बढ़ाता है। इससे साल के अंत में एकमुश्त काम दिखाने के बजाय हर महीने मॉनिटरिंग होगी, जो सुशासन का बेहतरीन उदाहरण है।
2. कृषि और जल का सीधा संबंध (Agriculture-Water Nexus): भारत में 80% से अधिक भूजल का उपयोग केवल सिंचाई के लिए होता है। गर्मी के मौसम में धान (Summer Paddy) उगाने में प्रति किलो चावल 3000 से 5000 लीटर पानी लगता है। बेमेतरा और राजनांदगांव के किसानों द्वारा धान की जगह दलहन या तिलहन लगाना यह साबित करता है कि जल संकट का स्थायी समाधान केवल बांध बनाना नहीं, बल्कि ‘फसल विविधीकरण’ (Crop Diversification) है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. CG Groundwater Report 2026 के अनुसार छत्तीसगढ़ में कितने विकासखंड ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में हैं?
ताजा आकलन के अनुसार छत्तीसगढ़ में अब एक भी विकासखंड ‘क्रिटिकल’ (संकटग्रस्त) श्रेणी में नहीं है (संख्या शून्य हो गई है)। 2020 में 9 और 2025 में 5 ब्लॉक इस श्रेणी में थे।
Q2. राष्ट्रीय जल शिखर सम्मेलन (National Water Summit) कब और कहाँ आयोजित किया गया?
राष्ट्रीय जल शिखर सम्मेलन 1 और 2 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया था, जहाँ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पीएम मोदी के समक्ष राज्य की इन भूजल उपलब्धियों को प्रस्तुत किया था।
Q3. राज्य सरकार ‘कैच द रेन 2026-27’ योजना को प्रभावी बनाने के लिए क्या नई रणनीति अपना रही है?
राज्य सरकार अब वार्षिक ‘कैच द रेन’ योजना 2026-27 को केवल जिला स्तर पर नहीं, बल्कि ‘विकासखंड स्तर के मासिक लक्ष्यों’ के साथ लागू करने की तैयारी कर रही है ताकि संरक्षण कार्य परिणामोन्मुख हों।
स्रोत (Source)
छत्तीसगढ़ शासन, जनसंपर्क विभाग (DPRCG), 09 सितंबर 2026, रायपुर।
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