रायपुर, 26 अगस्त 2026: छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिले नारायणपुर में कलेक्टर के मार्गदर्शन में संचालित ‘स्कूल केईन्ता’ (School Keinta) अभियान दूरस्थ और दुर्गम वनांचलों में शिक्षा की नई अलख जगा रहा है। इस अभियान के तहत अत्यंत दुर्गम और भौगोलिक रूप से कटे क्षेत्रों में 34 नई वैकल्पिक शालाएं शुरू की गई हैं और अब तक 2 हजार से अधिक बच्चों का सफल नामांकन कराकर उन्हें शिक्षा से जोड़ा गया है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| अभियान | स्कूल केईन्ता (School Keinta) |
| जिला | नारायणपुर, छत्तीसगढ़ (आकांक्षी जिला) |
| नई वैकल्पिक शालाएं | 34 |
| कुल नामांकन | 2 हजार से अधिक बच्चे |
| घमंडी गांव | 22 बच्चों को जाति प्रमाण पत्र वितरित; 30 बच्चे अध्ययनरत |
| शिक्षा दूत | कोसा राम वड्डे (ग्राम घमंडी) |
| संकुल केंद्र | गारपा |
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घमंडी गांव: 10 किलोमीटर की कठिन यात्रा से मिली मुक्ति
संकुल केंद्र गारपा के तहत आने वाले ग्राम घमंडी की कहानी इस अभियान की सफलता का एक जीवंत उदाहरण है। इससे पहले घमंडी गांव के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए 10 किलोमीटर दूर कोड़ेनार पैदल जाना पड़ता था। ऊबड़-खाबड़ और कठिन रास्तों के कारण बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते थे।
जिला प्रशासन ने इस समस्या का स्थायी समाधान करते हुए गांव में ही वैकल्पिक प्राथमिक शाला शुरू की। वर्तमान में इस शाला में 30 बच्चे अध्ययनरत हैं, जहां स्थानीय शिक्षा दूत कोसा राम वड्डे समर्पित भाव से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
22 बच्चों को मिले जाति प्रमाण पत्र
शिक्षा तक पहुंच के साथ-साथ इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू बच्चों को सरकारी दस्तावेजों से जोड़ना है। हाल ही में घमंडी की वैकल्पिक प्राथमिक शाला में नामांकित 22 बच्चों को जाति प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इससे बच्चों और उनके अभिभावकों को शासकीय योजनाओं और आगे की शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिल सकेगा।
महत्वपूर्ण जानकारी
- आकांक्षी जिला (Aspirational District): नीति आयोग द्वारा चिन्हित वे जिले जो विकास सूचकांकों में पिछड़े हुए हैं और जहां स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, वित्तीय समावेश और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में विशेष प्रयास किए जाते हैं। नारायणपुर ऐसा ही एक आकांक्षी जिला है।
- वैकल्पिक प्राथमिक शाला: दुर्गम और भौगोलिक रूप से कटे क्षेत्रों में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए स्थानीय स्तर पर शुरू की गई शालाएं, जहां स्थानीय शिक्षा दूत पढ़ाते हैं।
- शिक्षा दूत: स्थानीय समुदाय से चयनित वे व्यक्ति जो दुर्गम क्षेत्रों में बच्चों को पढ़ाने का कार्य करते हैं और शिक्षा को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहायक होते हैं।
दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा: व्यापक संदर्भ
(विश्लेषण)
‘स्कूल केईन्ता’ अभियान का व्यापक संदर्भ छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग और विशेषकर नक्सल प्रभावित दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा की चुनौतियों से जुड़ा है। नारायणपुर जैसे आकांक्षी जिले में, जहां घने जंगल, पहाड़ी रास्ते और भौगोलिक दुर्गमता शिक्षा तक पहुंच को बाधित करती है, वहां गांव में ही वैकल्पिक शाला खोलना और स्थानीय शिक्षा दूत के माध्यम से पढ़ाई कराना एक व्यावहारिक समाधान है।
2 हजार से अधिक बच्चों का नामांकन और 34 नई वैकल्पिक शालाओं की शुरुआत एक सकारात्मक आंकड़ा है। इसके साथ ही बच्चों को जाति प्रमाण पत्र जैसे सरकारी दस्तावेज उपलब्ध कराना शिक्षा के साथ-साथ उन्हें शासकीय योजनाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना एक दीर्घकालिक चुनौती है। शिक्षा दूत के भरोसे संचालित ये शालाएं तभी सफल होंगी जब इन्हें नियमित प्रशिक्षण, शिक्षण सामग्री, और बुनियादी सुविधाओं का निरंतर सहयोग मिलता रहे।
UPSC/CGPSC के लिए प्रासंगिक बिंदु
यह विषय CGPSC पेपर-4 (शिक्षा नीति, ग्रामीण विकास) और पेपर-6 (छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था) तथा UPSC सामान्य अध्ययन पेपर-2 (शिक्षा, सामाजिक न्याय) के लिए प्रासंगिक है। परीक्षा की दृष्टि से निम्नलिखित बिंदु महत्वपूर्ण हैं:
- आकांक्षी जिला कार्यक्रम और नीति आयोग
- दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा तक पहुंच की चुनौतियां
- वैकल्पिक शाला मॉडल और शिक्षा दूत प्रणाली
- जाति प्रमाण पत्र और शासकीय योजनाओं से जोड़ना
- नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा
तीन प्रमुख बातें
- 34 नई वैकल्पिक शालाएं, 2 हजार से अधिक नामांकन: ‘स्कूल केईन्ता’ अभियान के तहत नारायणपुर के दुर्गम क्षेत्रों में 34 नई वैकल्पिक शालाएं शुरू की गई हैं और 2 हजार से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया है।
- घमंडी गांव में 10 किमी की यात्रा से मुक्ति: पहले 10 किलोमीटर दूर कोड़ेनार पैदल जाने वाले बच्चों के लिए गांव में ही वैकल्पिक शाला शुरू की गई; अब 30 बच्चे अध्ययनरत, शिक्षा दूत कोसा राम वड्डे सेवारत।
- 22 बच्चों को जाति प्रमाण पत्र: घमंडी की वैकल्पिक शाला में नामांकित 22 बच्चों को जाति प्रमाण पत्र वितरित किए गए, जिससे उन्हें शासकीय योजनाओं और शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1: ‘स्कूल केईन्ता’ अभियान किस जिले में संचालित किया जा रहा है?
(A) बीजापुर
(B) दंतेवाड़ा
(C) नारायणपुर
(D) सुकमा
उत्तर: (C) नारायणपुर
व्याख्या: ‘स्कूल केईन्ता’ अभियान छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिले नारायणपुर में कलेक्टर के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. ‘स्कूल केईन्ता’ अभियान क्या है?
‘स्कूल केईन्ता’ (School Keinta) अभियान छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिले नारायणपुर में कलेक्टर के मार्गदर्शन में संचालित एक पहल है, जिसके तहत दुर्गम और भौगोलिक रूप से कटे वनांचल क्षेत्रों में वैकल्पिक शालाएं शुरू कर बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है।
Q2. इस अभियान से कितने बच्चे जुड़े हैं?
इस अभियान के माध्यम से अब तक 2 हजार से अधिक बच्चों का सफल नामांकन कराकर उन्हें शिक्षा से जोड़ा गया है। 34 नई वैकल्पिक शालाएं शुरू की गई हैं।
Q3. घमंडी गांव में क्या विशेष किया गया?
घमंडी गांव में वैकल्पिक प्राथमिक शाला शुरू की गई, जहां 30 बच्चे अध्ययनरत हैं। 22 बच्चों को जाति प्रमाण पत्र वितरित किए गए। शिक्षा दूत कोसा राम वड्डे समर्पित भाव से सेवारत हैं। पहले बच्चों को 10 किलोमीटर दूर कोड़ेनार पैदल जाना पड़ता था।
Q4. इस अभियान में जाति प्रमाण पत्र क्यों दिए गए?
जाति प्रमाण पत्र देने का उद्देश्य बच्चों को शासकीय योजनाओं और आगे की शैक्षणिक सुविधाओं से बिना किसी बाधा के जोड़ना है। अभियान केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के आवश्यक सरकारी दस्तावेज भी स्थानीय स्तर पर तैयार कर वितरित किए जा रहे हैं।
स्रोत
छत्तीसगढ़ शासन, जनसंपर्क विभाग (DPRCG), 26 अगस्त 2026, रायपुर।
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