Ethnobotany of Chhattisgarh Research Project: छत्तीसगढ़ में पारंपरिक ज्ञान और औषधीय जड़ी-बूटियों के संरक्षण के लिए शुरू हुई विशेष शोध परियोजना

Ethnobotany of Chhattisgarh Research Project Launch Ethnobotany of Chhattisgarh Research Project Launch

Published on July 29, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और स्थानीय आदिवासी समुदायों के प्राचीन पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक मान्यता देने के लिए एक ऐतिहासिक पहल शुरू हुई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी मार्गदर्शन और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में वन विभाग के अधीन ‘छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड’ द्वारा एक महत्वपूर्ण शोध परियोजना शुरू की गई है।

इस अभिनव परियोजना को Ethnobotany of Chhattisgarh Research Project का नाम दिया गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य स्थानीय वनवासियों और पारंपरिक वैद्यों के पास सुरक्षित औषधीय एवं उपयोगी पौधों के पारंपरिक ज्ञान का डिजिटल दस्तावेजीकरण (Documentation) करना और उसे वैज्ञानिक आधार प्रदान करना है।

महत्वपूर्ण आयामEthnobotany of Chhattisgarh Research Project के प्रमुख तथ्य व आंकड़े
शोध परियोजना का नामएथ्नोबॉटनी ऑफ छत्तीसगढ़ (Ethnobotany of Chhattisgarh)
मुख्य उद्देश्यपारंपरिक वैद्यों के ज्ञान का प्रलेखन, जड़ी-बूटियों का संरक्षण और बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) की सुरक्षा
नोडल एजेंसीछत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड (Chhattisgarh State Biodiversity Board)
प्रथम चरण का लक्षित क्षेत्रबस्तर संभाग (बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कोंडागांव और कांकेर जिला)
मुख्य वैज्ञानिक दलडॉ. के. रवि कुमार, डॉ. अब्दुल करीम (दोनों TDU बेंगलुरु) और विशेषज्ञ डॉ. देवयानी शर्मा
भविष्य की कार्ययोजनाबस्तर संभाग के बाद इस शोध का चरणबद्ध विस्तार छत्तीसगढ़ के सभी पांच संभागों में किया जाएगा

यह महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय सीजीपीएससी (CGPSC) और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए छत्तीसगढ़ के वन संसाधनों, पारंपरिक जनजातीय ज्ञान (GS Paper VI – छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ) और जैव विविधता कूटनीति (GS Paper III – पर्यावरण) के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस एथ्नोबॉटनी शोध परियोजना के वैज्ञानिक उद्देश्यों, बस्तर के पारंपरिक वैद्यों के ज्ञान और परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण आयामों का गहराई से अध्ययन करेंगे।

Table of Contents

Ethnobotany of Chhattisgarh Research Project: औषधीय वनस्पतियों का प्रलेखन

छत्तीसगढ़ के सघन वनों (विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा संभाग में) में औषधीय पौधों का एक विशाल और प्राकृतिक भंडार है। यहाँ की जनजातियाँ सदियों से गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए जंगलों में मिलने वाली विशिष्ट जड़ी-बूटियों का सफलतापूर्वक उपयोग करती आ रही हैं।

लेकिन लिखित प्रलेखन (Written Records) के अभाव में यह अमूल्य ज्ञान केवल वैद्यों की मौखिक परंपराओं (Oral Traditions) तक ही सीमित था। इसी ज्ञान को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान से जोड़ने और पेटेंट चोरी से बचाने के लिए Ethnobotany of Chhattisgarh Research Project की शुरुआत की गई है।

यह परियोजना यह सुनिश्चित करेगी कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अमूल्य सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित रखा जा सके। इससे राज्य की जैव विविधता संप्रभुता मजबूत होगी।


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पारंपरिक वैद्यों (Vaidyas) के ज्ञान और जड़ी-बूटियों का संग्रह

शोध परियोजना के प्रथम चरण में विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की टीम ने बस्तर संभाग के सघन जंगलों और आदिवासी गांवों का व्यापक दौरा किया है:

  • बीजापुर से शुरुआत: वैज्ञानिकों के दल ने बीजापुर जिले के भोपालपटनम, उसूर, भैरमगढ़ और बीजापुर ब्लॉक के अंदरूनी गांवों का भ्रमण किया। उन्होंने स्थानीय पारंपरिक वैद्यों और बुजुर्ग ग्रामीणों से मुलाकात की।
  • जंगलों में प्रत्यक्ष पहचान: पौधों की सटीक प्रजातियों और उनके गुणों की पहचान करने के लिए वैज्ञानिकों ने पारंपरिक वैद्यों के साथ सीधे जंगलों का भ्रमण किया और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के लाइव नमूने एकत्र किए।
  • बस्तर संभाग में विस्तार: बीजापुर के बाद वैज्ञानिकों की टीम ने दंतेवाड़ा, बस्तर (जगदलपुर), कोंडागांव और कांकेर जिलों का भी दौरा कर बहुमूल्य प्रारंभिक आंकड़ों (Data) का संग्रह पूरा कर लिया है।

आदिवासी जीवन, संस्कृति और आजीविका में पौधों की भूमिका

यह Ethnobotany of Chhattisgarh Research Project केवल चिकित्सा प्रणालियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पौधों के बहुआयामी सांस्कृतिक और आर्थिक उपयोगों का भी गहन अध्ययन कर रही है:

  • सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव: आदिवासी समुदायों के पारंपरिक त्योहारों, अनुष्ठानों और विभिन्न सामाजिक अवसरों में विशिष्ट पेड़-पौधों की धार्मिक भूमिका का दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।
  • आजीविका सुरक्षा: यह भी समझा जा रहा है कि महुआ, इमली, चारौटा और औषधीय पौधों जैसे लघु वनोपज (Minor Forest Produce) का स्थानीय आदिवासियों की घरेलू अर्थव्यवस्था में कितना योगदान है।

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UPSC & CGPSC Prelims Fact Box: Ethnobotany of Chhattisgarh

  • एथ्नोबॉटनी (Ethnobotany): विज्ञान की वह शाखा जिसके तहत मानव और पौधों के बीच के पारंपरिक और सांस्कृतिक संबंधों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है।
  • टी.डी.यू. बेंगलुरु (TDU): ‘ट्रांसडिसिप्लिनरी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी’, जो पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और आधुनिक विज्ञान के एकीकरण के लिए देश का एक प्रमुख अनुसंधान केंद्र है।
  • TKDL (पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी): सीएसआईआर (CSIR) और आयुष मंत्रालय की संयुक्त भारतीय डिजिटल लाइब्रेरी, जिसका उद्देश्य भारत के पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को पेटेंट चोरी (Biopiracy) से बचाना है।

UPSC & CGPSC Mains Analysis: बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) और जनजातीय कल्याण

भारत के आदिवासी क्षेत्रों का पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान वैश्विक फार्मा कंपनियों के लिए ‘बायोपायरेसी’ (Biopiracy – जैव-चोरी) का एक आसान साधन रहा है।

Ethnobotany of Chhattisgarh Research Project जैसी पहलें इस अमूल्य ज्ञान का आधिकारिक सरकारी प्रलेखन करके अंतरराष्ट्रीय पेटेंट कानूनों के तहत भारत और स्थानीय आदिवासियों के बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

यह सुशासन (Good Governance) का एक संवेदनशील उदाहरण है, जो न केवल हमारे पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है, बल्कि भविष्य में इसके माध्यम से विकसित होने वाली औषधियों के व्यावसायिक लाभों (Royalty) को सीधे आदिवासी समुदायों तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त करता है, जो ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के सपने को समयबद्ध तरीके से धरातल पर साकार करने की सबसे मजबूत प्रशासनिक और आर्थिक रीढ़ साबित होगा।


अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और पर्यावरण विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में चर्चा में रही ‘एथ्नोबॉटनी ऑफ छत्तीसगढ़’ (Ethnobotany of Chhattisgarh Research Project) नामक विशेष शोध परियोजना का क्रियान्वयन किस सरकारी संस्था के तहत किया जा रहा है?

(A) छत्तीसगढ़ वन विकास निगम
(B) छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड (Chhattisgarh State Biodiversity Board)
(C) भारतीय वन सर्वेक्षण क्षेत्रीय कार्यालय
(D) छत्तीसगढ़ आदिमजाति अनुसंधान संस्थान (CG TRTI)

उत्तर: (B) छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड (Chhattisgarh State Biodiversity Board)
व्याख्या: छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा राज्य की औषधीय वनस्पतियों और वैद्यों के पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण करने के लिए इस विशेष शोध परियोजना की शुरुआत की गई है।

प्रश्न 2: ‘Ethnobotany of Chhattisgarh Research Project’ के पहले चरण के तहत, वैज्ञानिकों के दल ने छत्तीसगढ़ के किस विशिष्ट भौगोलिक संभाग का सघन दौरा कर जड़ी-बूटियों का डेटा संकलित किया है?

(A) सरगुजा संभाग
(B) बिलासपुर संभाग
(C) बस्तर संभाग (Bastar Division)
(D) रायपुर संभाग

उत्तर: (C) बस्तर संभाग (Bastar Division)
व्याख्या: इस शोध परियोजना के प्रथम चरण की शुरुआत बस्तर संभाग के बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कोंडागांव और कांकेर जिलों से की गई है, जिसके बाद इसका विस्तार पूरे राज्य में किया जाएगा।

प्रश्न 3: पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणालियों और स्थानीय औषधीय पौधों के ज्ञान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट चोरी (Biopiracy) से बचाने के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित डिजिटल डेटाबेस को क्या कहा जाता है?

(A) बायो-पेटेंट रजिस्टर इंडिया
(B) पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL)
(C) आयुष कल्पवृक्ष पोर्टल
(D) राष्ट्रीय डिजिटल जड़ी-बूटी डेटाबेस

उत्तर: (B) पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL)
व्याख्या: TKDL (Traditional Knowledge Digital Library) सीएसआईआर और आयुष मंत्रालय का संयुक्त डिजिटल डेटाबेस है, जो भारत के पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को पेटेंट चोरी से बचाने के लिए कड़ाई से कार्य करता है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Ethnobotany of Chhattisgarh Research Project क्या है?

Ethnobotany of Chhattisgarh Research Project छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा शुरू की गई एक राष्ट्रीय शोध परियोजना है। इसका मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ (विशेष रूप से बस्तर संभाग) की जनजातियों और पारंपरिक वैद्यों के पास सुरक्षित औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों के पारंपरिक ज्ञान का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और संरक्षण करना है।

Q2. एथ्नोबॉटनी (Ethnobotany) का क्या अर्थ होता है?

एथ्नोबॉटनी विज्ञान की वह विशिष्ट शाखा है जिसके अंतर्गत मनुष्य (विशेष रूप से स्थानीय आदिम संस्कृतियाँ और आदिवासी समुदाय) और पौधों के बीच के पारस्परिक, पारंपरिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों का वैज्ञानिक और मानवशास्त्रीय अध्ययन किया जाता है।

Q3. इस शोध परियोजना में किन तकनीकी और वैज्ञानिक संस्थाओं का सहयोग लिया जा रहा है?

इस परियोजना में बेंगलुरु स्थित स्वास्थ्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी की ट्रांसडिसिप्लिनरी यूनिवर्सिटी (TDU) के प्रख्यात वैज्ञानिकों (जैसे प्रो. डॉ. के. रवि कुमार, प्रो. डॉ. अब्दुल करीम) और जनजातीय औषधि विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं।


तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)

  • पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण: ‘एथ्नोबॉटनी ऑफ छत्तीसगढ़’ परियोजना के माध्यम से राज्य के पारंपरिक वैद्यों के पास सुरक्षित जड़ी-बूटियों के मौखिक ज्ञान का लिखित और डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।
  • बस्तर संभाग से शुरुआत: प्रथम चरण के तहत वैज्ञानिकों ने बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कोंडागांव और कांकेर के वनों का दौरा कर दुर्लभ पौधों के लाइव सैंपल और आंकड़े एकत्रित किए हैं।
  • बौद्धिक संपदा का कानूनी रक्षक: यह कड़ा प्रलेखन भारतीय पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक स्तर पर पेटेंट चोरी (Biopiracy) से बचाएगा और जैव-विविधता संप्रभुता सुनिश्चित करेगा।

UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)

यह विषय मुख्य रूप से सामान्य अध्ययन पेपर-1 (भौतिक और मानव भूगोल – वनस्पति व औषधीय पौधे; समाज – जनजातीय समाज और पारंपरिक ज्ञान) तथा सामान्य अध्ययन पेपर-3 (पर्यावरण – जैव विविधता का संरक्षण, बौद्धिक संपदा अधिकार – IPR, और सतत विकास) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

Official Source (आधिकारिक स्रोत)

यह लेख छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा जारी की गई आधिकारिक परियोजना विवरणिका और प्रेस सूचनाओं पर आधारित है।

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