Semicon 2.0 Scheme India: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत को ग्लोबल चिप हब बनाने के लिए ₹1,27,500 करोड़ के महा-बजट को दी मंजूरी

India Semiconductor Mission Launches Semicon 2.0 Scheme India India Semiconductor Mission Launches Semicon 2.0 Scheme India

Published on July 15, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स कूटनीति (Global Electronics Diplomacy) और तकनीकी संप्रभुता (Technological Sovereignty) के युग में भारत ने एक ऐतिहासिक और रणनीतिक छलांग लगाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने 15 जुलाई 2026 को भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (Semiconductor Design and Manufacturing Ecosystem) के समग्र विकास के लिए Semicon 2.0 Scheme India को मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए सरकार द्वारा कुल 1,27,500 करोड़ रुपये (Rs 1,27,500 Crore) का एक अभूतपूर्व बजटीय आवंटन किया गया है।

यह ऐतिहासिक योजना पूर्ववर्ती ‘सेमीकॉन 1.0’ (Semicon 1.0) के दौरान प्राप्त गति को आगे बढ़ाते हुए भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र (Global Semiconductor Map) पर एक अग्रणी महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के सरकार के संकल्प को दर्शाती है। आधुनिक तकनीकों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अंतरिक्ष अनुसंधान, रक्षा प्रणालियों और सुपरकंप्यूटिंग के लिए सेमीकंडक्टर (चिप) की सुरक्षित और लचीली आपूर्ति श्रृंखला का होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। यही कारण है कि Semicon 2.0 Scheme India न केवल आर्थिक बल्कि सामरिक दृष्टि से भी भारत के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और विभिन्न राज्य स्तरीय सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए Semicon 2.0 Scheme India सामान्य अध्ययन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (GS Paper III) और अंतर्राष्ट्रीय रणनीतिक कूटनीति (GS Paper II) खंड के तहत एक अनिवार्य समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम इस महत्वाकांक्षी योजना के छह प्रमुख स्तंभों, भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM 1.0) की अब तक की प्रगति, वैश्विक चिप युद्ध (Global Chip War) और परीक्षा उपयोगी सभी महत्वपूर्ण आयामों का गहराई से अध्ययन करेंगे।

Table of Contents

Semicon 2.0 Scheme India: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)

इस मेगा सेमीकंडक्टर योजना और इसके कूटनीतिक लक्ष्यों से जुड़े प्रमुख तथ्यों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेपित किया गया है:

महत्वपूर्ण आयामSemicon 2.0 Scheme India के प्रमुख तथ्य व आंकड़े
योजना का नामसेमीकॉन 2.0 (Semicon 2.0 Scheme India)
कुल बजटीय परिव्यय1,27,500 करोड़ रुपये (Rs 1,27,500 Crore)
मुख्य उद्देश्यचिप डिजाइन, फैब्रीकेशन प्लांट (Fabs), उपकरण व कच्चे माल का स्वदेशीकरण
छह बुनियादी स्तंभडिजाइन, मशीनें व सामग्री, फैब्स, ATMP/OSAT, अनुसंधान (R&D), प्रतिभा विकास
ISM 1.0 की कुल स्वीकृत इकाइयाँ12 विनिर्माण इकाइयाँ (कुल ₹1.64 लाख करोड़ का निवेश)
वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने वाली कंपनियांमाइक्रोन (Micron), कायन्स (Kaynes) और सीजी सेमी (CG Semi)
चिप डिजाइन में वर्तमान प्रगति24 डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता; 105 स्टार्टअप्स को EDA टूल्स तक पहुंच
लक्षित प्रतिभा विकास संख्या315 विश्वविद्यालयों में 68,000 से अधिक छात्रों को जटिल चिप डिजाइन का प्रशिक्षण

Why in News?: चर्चा में क्यों है?

वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य (जैसे अमेरिका-चीन चिप युद्ध और ताइवान जलडमरूमध्य का भू-राजनीतिक तनाव) यह स्पष्ट करता है कि सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं में किसी भी प्रकार की रुकावट वैश्विक अर्थव्यवस्था को ठप कर सकती है। वर्तमान में ताइवान दुनिया के 90% से अधिक उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन करता है।

भारत ने इस खतरे को भांपते हुए वर्ष 2021 में ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (India Semiconductor Mission – ISM 1.0) की शुरुआत की थी। इसकी भारी सफलता के बाद, अब एक दीर्घकालिक और टिकाऊ नीतिगत समर्थन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने Semicon 2.0 Scheme India को लॉन्च किया है। यह नई योजना न केवल भारत को बाहरी देशों के आयातों पर निर्भरता से बचाएगी, बल्कि देश के भीतर खुद का बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) और स्वदेशी डिजाइन इकोसिस्टम तैयार करेगी, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ विज़न का मुख्य आधार है।

Semicon 2.0 के प्रमुख छह स्तंभ (Six Pillars of Semicon 2.0)

भारत सरकार ने Semicon 2.0 Scheme India को अत्यधिक वैज्ञानिक और होलिस्टिक दृष्टिकोण से तैयार किया है, जो निम्नलिखित छह प्रमुख रणनीतिक स्तंभों पर आधारित है:

1. पहला स्तंभ: चिप डिजाइन और आईपी (IP) का विकास

सेमीकॉन 2.0 चिप डिजाइन (Chip Design) के क्षेत्र में भारत को वैश्विक नेता बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है:

  • बौद्धिक संपदा (IP) का विकास: वर्तमान में भारत के 105 से अधिक स्टार्टअप्स चिप डिजाइन करने में लगे हुए हैं। नए चरण के तहत सामरिक (Strategic) और व्यावसायिक उपयोग के लिए आवश्यक चिप्स के बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPRs) और डिजाइनों का स्वामित्व भारत के पास होगा।
  • चिप डिजाइन पावरहाउस: इस दृष्टिकोण से भारत केवल विदेशी कंपनियों के लिए बैक-ऑफिस डिजाइन का काम नहीं करेगा, बल्कि खुद के स्वदेशी चिप और सिस्टम ब्रांड्स का निर्माण करेगा।

2. दूसरा स्तंभ: मशीनें और कच्चे माल (Machines and Materials)

सेमीकंडक्टर विनिर्माण एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया है, जिसमें विशिष्ट रसायनों, अल्ट्रा-प्योर गैसों और उच्च परिशुद्धता (Precision) वाली मशीनों की आवश्यकता होती है:

  • स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहन: जो कंपनियां इन विशिष्ट मशीनों, कच्चे मालों, रसायनों और गैसों के अनुसंधान और निर्माण में शामिल होंगी, उन्हें वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  • परिशुद्धता इंजीनियरिंग (Precision Engineering): यह स्तंभ भारत में उन्नत औद्योगिक रसायनों और सटीक मशीनरी उद्योगों की मजबूत नींव रखेगा।

3. तीसरा स्तंभ: अधिक फैब्स (Fabs) की स्थापना

फैब्स (Fabrication Plants) वे अत्याधुनिक क्लीन-रूम कारखाने होते हैं जहाँ सिलिकॉन वेफर्स पर सूक्ष्म सर्किट उकेरे जाते हैं:

  • वैश्विक निवेशकों का विश्वास: भारत के पहले कमर्शियल फैब (धौलेरा, गुजरात) के वर्ष 2028 में चालू होने की योजना है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की साख बढ़ी है।
  • विविध फैब्स की स्थापना: योजना के तहत देश में अधिक से अधिक सिलिकॉन फैब्स (Silicon Fabs), कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्स (Compound Fabs), डिस्क्रीट कंपोनेंट फैब्स और डिस्प्ले फैब्स स्थापित करने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित किया जाएगा।

4. चौथा स्तंभ: ATMP/OSAT उद्योग का सुदृढ़ीकरण

चिप बनने के बाद उसकी असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (Assembly, Testing, Marking, and Packaging – ATMP) का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण होता है:

  • वैकल्पिक वैश्विक गंतव्य: भारत की शुरुआती सफलता के बाद पूरी दुनिया अब भारत को चीन और ताइवान के एक सुरक्षित विकल्प के रूप में देख रही है।
  • उन्नत पैकेजिंग तकनीकें: योजना के तहत दुनिया की सबसे उन्नत ATMP/OSAT तकनीकों को भारत में स्थानांतरित और स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे।

5. पांचवां स्तंभ: गहन अनुसंधान एवं विकास (Research & Development)

भारत ने अपनी सेमीकंडक्टर यात्रा की शुरुआत 28nm से 110nm (नैनोमीटर) के नोड्स के साथ की है। Semicon 2.0 Scheme India के तहत अब भारत का मुख्य ध्यान वैश्विक अग्रणी अनुसंधान केंद्रों के साथ मिलकर और अधिक उन्नत नोड्स (जैसे 14nm, 7nm या उससे भी कम) और अगली पीढ़ी की चिप तकनीकों के विकास पर केंद्रित होगा।

6. छठा स्तंभ: प्रतिभा विकास (Talent Development)

सेमीकंडक्टर उद्योग को अत्यंत विशिष्ट और प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होती है:

  • विश्वविद्यालयों का नेटवर्क: वर्तमान में भारत के 315 विश्वविद्यालय अपने छात्रों को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) उपकरणों की मदद से जटिल चिप डिजाइन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहे हैं। अब तक लगभग 68,000 छात्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
  • क्लीन रूम ट्रेनिंग: नए चरण के तहत इस प्रशिक्षण को और अधिक व्यावहारिक बनाया जाएगा और छात्रों को क्लीन रूम (Clean Room) निर्माण, फैब ऑपरेशन और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए तैयार किया जाएगा।

“सेमीकंडक्टर केवल एक इलेक्ट्रॉनिक पुर्जा नहीं है, बल्कि यह 21वीं सदी के वैश्विक भू-राजनीतिक शक्ति संतुलन का नया नियंत्रक है। सेमीकॉन 2.0 भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता को अजेय बनाएगा।”— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM 1.0) की अब तक की प्रगति

Semicon 2.0 Scheme India को मंजूरी देते समय कैबिनेट ने पूर्ववर्ती ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (ISM 1.0) की शानदार उपलब्धियों की भी समीक्षा की, जो निम्नलिखित मील के पत्थरों को दर्शाती हैं:

1. विनिर्माण के क्षेत्र में प्रगति (Manufacturing)

  • 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी: अब तक कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये के संचयी निवेश के साथ 12 विनिर्माण प्रस्तावों को हरी झंडी दी जा चुकी है।
  • इनमें शामिल हैं: 1 सिलिकॉन फैब, 1 सिलिकॉन कार्बाइड फैब, 1 एकीकृत गैलियम नाइट्राइड माइक्रो एलईडी डिस्प्ले फैब, और 9 अत्याधुनिक पैकेजिंग (ATMP) इकाइयाँ। ये इकाइयाँ ऑटोमोबाइल, स्मार्टफोन, एयरोस्पेस और रक्षा उद्योगों की आवश्यकताओं को पूरा करेंगी।
  • कमर्शियल प्रोडक्शन की शुरुआत: स्वीकृत 12 प्रस्तावों में से तीन प्रमुख कंपनियों—माइक्रोन (Micron), कायन्स (Kaynes), और सीजी सेमी (CG Semi) ने भारत में अपना वाणिज्यिक उत्पादन (Commercial Production) शुरू कर दिया है, और चौथी कंपनी का उत्पादन भी वर्ष 2026 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है।

2. डिजाइन के क्षेत्र में प्रगति (Design)

  • स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता: एमएसएमई (MSMEs) और नवोदित स्टार्टअप्स की 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है।
  • वैश्विक स्तर के उपकरणों तक पहुंच: 105 से अधिक कंपनियों को उद्योग-मानक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स तक निःशुल्क पहुंच प्रदान की गई है। ये कंपनियां वर्तमान में सैटेलाइट संचार, ड्रोन, एआई सिस्टम, स्मार्ट मीटर और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) उपकरणों के लिए स्वदेशी सिस्टम-ऑन-चिप (SoCs) विकसित कर रही हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक महत्व: सेमीकॉन 2.0 की आवश्यकता

भारत के लिए चिप विनिर्माण में आत्मनिर्भर होना केवल एक आर्थिक लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील रणनीतिक विषय है:

  1. सैन्य प्रणालियों की सुरक्षा: मिसाइल गाइडिंग सिस्टम, लड़ाकू जेट (जैसे तेजस), परमाणु पनडुब्बी और सैन्य उपग्रहों में प्रयुक्त होने वाली चिप्स यदि विदेशों से आयात की जाती हैं, तो उनमें हार्डवेयर-स्तरीय जासूसी (Hardware Backdoors) का खतरा हमेशा बना रहता है। स्वदेशी चिप डिजाइन इस खतरे को पूरी तरह समाप्त कर देगा।
  2. डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty): 5G/6G दूरसंचार नेटवर्क और क्लाउड डेटा केंद्रों के लिए सुरक्षित स्वदेशी चिप्स का होना देश के नागरिकों के निजी डेटा की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
  3. आर्थिक सुरक्षा और व्यापार संतुलन: वर्तमान में भारत अपनी कुल चिप आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। Semicon 2.0 Scheme India के लागू होने से भारत के आयात बिल में भारी कमी आएगी और देश इलेक्ट्रॉनिक्स का एक बड़ा निर्यातक बनकर उभरेगा।

Semicon 2.0 Scheme India के समक्ष चुनौतियाँ

इस बड़ी नीतिगत घोषणा के बावजूद, भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण के क्षेत्र में वैश्विक धाक जमाने के लिए निम्नलिखित बुनियादी चुनौतियों का सामना करना होगा:

  • अत्यधिक पानी और निर्बाध बिजली की आवश्यकता: एक सिंगल सेमीकंडक्टर फैब को प्रतिदिन लाखों गैलन अल्ट्रा-प्योर पानी (Ultrapure Water) और बिना किसी नैनो-सेकंड की रुकावट के चौबीसों घंटे उच्च वोल्ट की बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है, जिसके लिए भारत में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण करना होगा।
  • अत्यधिक पूंजी निवेश: इस क्षेत्र में तकनीक तेजी से बदलती है। 28nm से 7nm की ओर बढ़ने के लिए अरबों डॉलर के निरंतर निवेश (Capital-intensive) की आवश्यकता होती है, जिसमें सरकारों और निजी क्षेत्रों का आपसी तालमेल अनिवार्य है।
  • विशेषज्ञ मानव संसाधन की आपूर्ति: यद्यपि भारत के पास सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की कोई कमी नहीं है, परंतु फैब ऑपरेशन्स, केमिकल इंजीनियरिंग और सटीक भौतिकी (Precision Physics) के क्षेत्र में विशेषज्ञ मानव संसाधन को तैयार करने में समय लगेगा।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष अनुभाग (Exam Relevance Section)

यूपीएससी और राज्य सेवा मुख्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सामान्य अध्ययन के पेपर-3 (विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और औद्योगिक विकास) के दृष्टिकोण से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

UPSC & State PCS Prelims Fact Box: Semicon 2.0 Scheme India

  • सेमीकॉन 2.0 का बजट: ₹1,27,500 करोड़ का कुल वित्तीय आवंटन किया गया है।
  • ATMP और OSAT: असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) तथा आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (OSAT) चिप विनिर्माण की अंतिम कड़ियाँ हैं जो तैयार सिलिकॉन वेफर को उपयोग के योग्य बनाती हैं।
  • सक्रिय भारतीय इकाइयाँ: माइक्रोन (Micron), कायन्स (Kaynes) और सीजी सेमी (CG Semi) ने भारत में वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ कर दिया है।
  • EDA टूल्स: ‘इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन’ सॉफ्टवेयर टूल्स जिनका उपयोग जटिल सिलिकॉन चिप्स के सर्किट डिजाइन को कंप्यूटर पर सिम्युलेट करने के लिए किया जाता है।

UPSC Mains Analysis (GS Paper III: विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं राष्ट्रीय सुरक्षा)

प्रश्न: “वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता के इस युग में, ‘सेमीकॉन 2.0’ (Semicon 2.0) जैसी दीर्घकालिक नीतियां भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता को अक्षुण्ण रखने की दिशा में एक अपरिहार्य रणनीतिक रक्षा कवच हैं।” समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

उत्तर की रूपरेखा:

  • प्रस्तावना: केंद्रीय कैबिनेट द्वारा हाल ही में स्वीकृत की गई ₹1,27,500 करोड़ की Semicon 2.0 Scheme India और इसके छह प्रमुख स्तंभों का संक्षिप्त परिचय देते हुए उत्तर प्रारंभ करें।
  • भू-राजनीतिक संदर्भ और आपूर्ति श्रृंखला का संकट (Global Chip War): ताइवान पर वैश्विक निर्भरता के खतरों, दक्षिण चीन सागर के तनाव और ‘चिप कूटनीति’ (Chip Diplomacy) में भारत के रणनीतिक हितों को स्पष्ट करें।
  • सेमीकॉन 2.0 की रणनीतिक महत्ता (राष्ट्रीय सुरक्षा):
    • सैन्य अनुप्रयोग: रक्षा प्रणालियों, मिसाइल और उपग्रह संचार के लिए पूरी तरह स्वदेशी और सुरक्षित ‘ट्रस्टेड चिप्स’ (Trusted Chips) का घरेलू डिजाइन और विनिर्माण सुनिश्चित करना।
    • डेटा संप्रभुता: घरेलू 5G/6G बुनियादी ढांचे और क्लाउड सर्वरों में होने वाले जासूसी (Hardware Exploitation) के खतरों को कम करना।
  • आर्थिक लाभ और विनिर्माण क्रांति: कच्चे माल (रसायन, गैस) और मशीनों के स्वदेशीकरण के जरिए भारत में ‘परिशुद्धता इंजीनियरिंग’ (Precision Engineering) का विकास करना और आयात बिलों में भारी कटौती करना।
  • चुनौतियां: भारत में अत्यधिक पानी, निर्बाध बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करना, अत्याधुनिक फैब्स के लिए आवश्यक निरंतर विशाल वित्तीय निवेश, और वैश्विक मानकों के अनुरूप मानव संसाधन का विकास करना।
  • निष्कर्ष: यह निष्कर्ष दें कि ‘सेमीकॉन 1.0’ की नींव पर खड़ा सेमीकॉन 2.0 भारत को केवल ‘चिप उपभोक्ता’ से ‘वैश्विक चिप प्रदाता’ के रूप में स्थापित करेगा, जो ‘विकसित भारत @ 2047’ के संकल्प को वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)

सेमीकंडक्टर तकनीक और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संस्थानों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक तथ्य जो परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:

  1. सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (SCL – Semiconductor Laboratory): यह भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के तहत पंजाब के मोहाली में स्थित एक प्रमुख राष्ट्रीय स्वायत्त संस्थान है। इसकी स्थापना वर्ष 1983 में भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण और अनुसंधान की नींव रखने के लिए की गई थी।
  2. सेमीकंडक्टर क्या होता है?: यह एक ऐसी ठोस सामग्री (जैसे सिलिकॉन या जर्मेनियम) है जिसकी विद्युत चालकता (Electrical Conductivity) एक सुचालक (Conductor) और एक कुचालक (Insulator) के बीच होती है। तापमान और अशुद्धियों (Doping) को नियंत्रित कर इसकी चालकता को बदला जा सकता है, जो आधुनिक ट्रांजिस्टर और इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) का मुख्य आधार है।
  3. मूर का नियम (Moore’s Law): इंटेल के सह-संस्थापक गॉर्डन मूर द्वारा वर्ष 1965 में प्रतिपादित एक ऐतिहासिक नियम, जिसके अनुसार किसी माइक्रोचिप पर ट्रांजिस्टरों की संख्या प्रति दो वर्ष में दोगुनी हो जाती है, जबकि विनिर्माण की लागत आधी हो जाती है। यह नियम आधुनिक चिप लघुकरण (Miniaturization) का मार्गदर्शक रहा है।

एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)

त्वरित परीक्षा उपयोगी पुनरीक्षण के लिए Semicon 2.0 Scheme India के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:

  • Megabudget Outlay: केंद्रीय कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के लिए ₹1,27,500 करोड़ के महा-बजट को मंजूरी दी।
  • The Six Pillars: यह योजना डिजाइन, मशीन व सामग्री, फैब्स, ATMP, अनुसंधान (R&D) और प्रतिभा विकास के 6 स्तंभों पर आधारित है।
  • ISM 1.0 Achievements: पहले चरण के तहत ₹1.64 लाख करोड़ के निवेश से 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी गई, जिनमें से माइक्रोन, कायन्स और सीजी सेमी ने वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है।
  • Design Deepening: 105 से अधिक डिजाइन स्टार्टअप्स को ऑटोमेशन (EDA) टूल्स की पहुंच दी गई है ताकि भारत खुद के ‘चिप आईपी’ (Intellectual Property) विकसित कर सके।
  • Talent Pipeline: देश के 315 विश्वविद्यालयों में 68,000 से अधिक छात्रों को जटिल चिप डिजाइन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
  • Geopolitical Shield: यह योजना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संप्रभुता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को मजबूत करेगी।

अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और तकनीकी विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:

प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत की गई ‘सेमीकॉन 2.0’ (Semicon 2.0 Scheme India) योजना के लिए कुल कितना बजटीय परिव्यय (Budgetary Outlay) निर्धारित किया गया है?

(A) 76,000 करोड़ रुपये
(B) 1,00,000 करोड़ रुपये
(C) 1,27,500 करोड़ रुपये
(D) 1,50,000 करोड़ रुपये

उत्तर: (C) 1,27,500 करोड़ रुपये
व्याख्या: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने ₹1,27,500 करोड़ की ऐतिहासिक लागत से ‘सेमीकॉन 2.0’ (Semicon 2.0) योजना को मंजूरी प्रदान की है, जो सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत का अब तक का सबसे बड़ा निवेश है।

प्रश्न 2: भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM 1.0) के पहले चरण के तहत, निम्नलिखित में से किन प्रमुख कंपनियों ने भारत में सफलतापूर्वक अपना वाणिज्यिक उत्पादन (Commercial Production) प्रारंभ कर दिया है?

1. माइक्रोन (Micron)
2. कायन्स (Kaynes)
3. सीजी सेमी (CG Semi)
सही विकल्प का चयन कीजिए:

(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3 सभी

उत्तर: (D) 1, 2 और 3 सभी
व्याख्या: कैबिनेट की बैठक में समीक्षा के दौरान बताया गया कि स्वीकृत 12 प्रस्तावों में से माइक्रोन, कायन्स और सीजी सेमी (CG Semi) ने भारत में वाणिज्यिक स्तर पर उत्पादन शुरू कर दिया है, जो भारत की एक बड़ी सफलता है।

प्रश्न 3: ‘Semicon 2.0 Scheme India’ के तहत विकसित किए जाने वाले छह प्रमुख स्तंभों में से ‘ATMP’ शब्द का पूर्ण रूप क्या है?

(A) Advanced Technology and Material Processing
(B) Assembly, Testing, Marking, and Packaging
(C) Automated Transistor Manufacturing and Production
(D) Analytical Tool for Microprocessor Programming

उत्तर: (B) Assembly, Testing, Marking, and Packaging
व्याख्या: ATMP का पूरा नाम ‘Assembly, Testing, Marking, and Packaging’ है, जिसे OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) के रूप में भी जाना जाता है। यह तैयार सिलिकॉन वेफर्स को अंतिम पैकेज्ड चिप्स में बदलने की महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रक्रिया है।

प्रश्न 4: अर्धचालक विनिर्माण के क्षेत्र में ‘क्लीन रूम’ (Clean Room) से क्या तात्पर्य है, जिसके प्रशिक्षण को इस योजना के छठे स्तंभ में शामिल किया गया है?

(A) वनों के भीतर सौर ऊर्जा से संचालित बिजली घर
(B) एक अत्यंत नियंत्रित वातावरण कक्ष जहां हवा में धूल के कण, सूक्ष्मजीव और तापमान कड़ाई से सीमित होते हैं
(C) केवल पानी के नीचे पनडुब्बियों के नियंत्रण कक्ष
(D) सॉफ्टवेयर कोडर्स के काम करने वाले वातानुकूलित केबिन

उत्तर: (B) एक अत्यंत नियंत्रित वातावरण कक्ष जहां हवा में धूल के कण, सूक्ष्मजीव और तापमान कड़ाई से सीमित होते हैं
व्याख्या: सिलिकॉन चिप्स के विनिर्माण में धूल का एक छोटा सा कण भी पूरे सर्किट को नष्ट कर सकता है। इसलिए, फैब्स के भीतर ‘क्लीन रूम’ का उपयोग किया जाता है, जहां हवा को विशेष HEPA फिल्टरों के जरिए लगातार साफ किया जाता है।

प्रश्न 5: भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत काम करने वाली ‘सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला’ (SCL) कहाँ स्थित है?

(A) बेंगलुरु, कर्नाटक
(B) मोहाली, पंजाब
(C) पुणे, महाराष्ट्र
(D) हैदराबाद, तेलंगाना

उत्तर: (B) मोहाली, पंजाब
व्याख्या: भारत सरकार की एकमात्र सरकारी सेमीकंडक्टर विनिर्माण और अनुसंधान प्रयोगशाला (SCL) पंजाब के मोहाली में स्थित है, जिसकी स्थापना वर्ष 1983 में की गई थी।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. Semicon 2.0 Scheme India क्या है?

Semicon 2.0 Scheme India भारत सरकार द्वारा स्वीकृत की गई एक नई महा-योजना है, जिसके लिए ₹1,27,500 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में चिप डिजाइन, विनिर्माण संयंत्रों (Fabs), उन्नत पैकेजिंग (ATMP/OSAT), अनुसंधान और मानव संसाधन का समेकित विकास करना है।

Q2. सेमीकॉन 2.0 के प्रमुख छह स्तंभ (Six Pillars) कौन से हैं?

यह योजना निम्नलिखित छह स्तंभों पर आधारित है: 1. चिप डिजाइन और आईपी (IP) का विकास, 2. मशीनरी और कच्चे माल का स्वदेशीकरण, 3. अधिक फैब्स (Fabs) की स्थापना, 4. उन्नत ATMP/OSAT सुविधाओं का विकास, 5. गहन अनुसंधान और विकास (R&D), और 6. विश्वविद्यालयों के माध्यम से विशेषज्ञ प्रतिभा विकास।

Q3. पूर्ववर्ती इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM 1.0) की क्या उपलब्धियां रही हैं?

ISM 1.0 के तहत ₹1.64 लाख करोड़ के निवेश से 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी गई। इनमें से माइक्रोन, कायन्स और सीजी सेमी ने भारत में व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। इसके अतिरिक्त, 105 डिजाइन स्टार्टअप्स को ऑटोमेशन (EDA) टूल्स की पहुंच दी गई है और 68,000 छात्रों को प्रशिक्षित किया गया है।

Q4. चिप डिजाइन और ‘आईपी’ (IP) का विकास भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

चिप डिजाइन और बौद्धिक संपदा (Intellectual Property – IP) का विकास होने से भारत केवल विदेशी कंपनियों के लिए असेंबली का काम नहीं करेगा, बल्कि खुद के स्वदेशी पेटेंट और डिजाइनों का मालिक होगा। यह देश को ‘तकनीकी संप्रभुता’ प्रदान करेगा और रक्षा प्रणालियों के लिए सुरक्षित चिप्स का निर्माण सुनिश्चित करेगा।

Q5. भारत में पहले कमर्शियल फैब्रीकेशन प्लांट (Fab) की स्थापना कब और कहाँ की जा रही है?

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान के पीएसएमसी (PSMC) के सहयोग से भारत के पहले सिलिकॉन फैब्रीकेशन प्लांट की स्थापना धौलेरा, गुजरात में की जा रही है, जिसके वर्ष 2028 में चालू होने की आधिकारिक योजना है।


निष्कर्ष (Conclusion)

केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत की गई ₹1,27,500 करोड़ की यह महत्वाकांक्षी योजना Semicon 2.0 Scheme India भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखलाओं में एक स्वतंत्र और मजबूत महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम है। ‘सेमीकॉन 1.0’ के शानदार अनुभवों और माइक्रोन व कायन्स जैसी कंपनियों द्वारा शुरू किए गए वाणिज्यिक उत्पादन की नींव पर खड़ा सेमीकॉन 2.0 देश के तकनीकी आधुनिकीकरण को एक अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।

चिप डिजाइन के क्षेत्र में खुद के बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPRs) का विकास करना, कच्चे माल व गैसों का स्वदेशीकरण करना, और विश्वविद्यालयों के नेटवर्क के माध्यम से 68,000 से अधिक प्रशिक्षित छात्रों की ‘प्रतिभा पाइपलाइन’ (Talent Pipeline) तैयार करना सुशासन और आत्मनिर्भर भारत का एक उत्कृष्ट व्यावहारिक उदाहरण है। यद्यपि बिजली-पानी के बुनियादी ढांचे और निरंतर भारी वित्तीय पूंजी निवेश के मोर्चे पर भारत को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, परंतु सेमीकॉन 2.0 की यह ‘चिप कूटनीति’ (Chip Diplomacy) अंततः भारत को ‘केवल चिप उपभोक्ता’ की छवि से बाहर निकालकर ‘वैश्विक चिप प्रदाता’ के रूप में स्थापित करेगी। यह वैज्ञानिक प्रयास आने वाले समय में हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को अभेद्य बनाएगा और ‘विकसित भारत @ 2047’ के हमारे बड़े राष्ट्रीय सपनों को तकनीकी रूप से साकार करने की दिशा में सबसे मजबूत और अजेय रीढ़ साबित होगा।

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