Published on July 14, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कला और लोक महाकाव्य ‘पंडवानी’ (Pandavani) को वैश्विक स्तर पर एक अमिट और अद्वितीय पहचान दिलाने वाली महान साधिका, पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई के योगदान को चिरस्थायी बनाने के लिए राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक घोषणाएं की हैं। दुर्ग जिले के ग्राम गनियारी (Ganiyari, Durg) में आयोजित उनके दशगात्र और श्रद्धांजलि सभा में शामिल होकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस महान लोक कलाकार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस शोकसभा के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रतिवर्ष 1 नवंबर को आयोजित होने वाले छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर उत्कृष्ट लोक कलाकारों को सम्मानित करने के लिए Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh सम्मान प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, तीजन बाई के पैतृक गाँव गनियारी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण उनके नाम पर किया जाएगा। साथ ही, उनकी जीवनभर की कला-साधना के जीवंत प्रतीक रहे ‘तंबूरे’ (Tambura) को रायपुर के राज्य संग्रहालय (Raipur State Museum) में पूरे राजकीय सम्मान के साथ संरक्षित रखा जाएगा। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) और राज्य स्तरीय अन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh सम्मान की घोषणा, छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति, प्रमुख व्यक्तित्व और राज्य अलंकरण पुरस्कारों (GS Paper VI) के तहत एक अत्यंत प्रासंगिक समसामयिक (Current Affairs) विषय है। इस विस्तृत विश्लेषण में हम पंडवानी लोककला, डॉ. तीजन बाई के जीवन संघर्ष, कापालिक गायन शैली और परीक्षा उपयोगी विभिन्न पहलुओं का गहराई से अध्ययन करेंगे।
Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)
पंडवानी की महान साधिका की स्मृति में घोषित नए राज्य अलंकरण और अन्य ऐतिहासिक निर्णयों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से संक्षेपित किया गया है:
| महत्वपूर्ण क्षेत्र | Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh के मुख्य तथ्य |
|---|---|
| अलंकरण का नाम | डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण सम्मान (Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh) |
| सम्मान की घोषणा तिथि | 14 जुलाई 2026 |
| घोषणाकर्ता | श्री विष्णुदेव साय (मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़) |
| प्रदान करने का अवसर | प्रतिवर्ष 1 नवंबर को आयोजित होने वाले छत्तीसगढ़ राज्योत्सव (Rajyotsav) के दौरान |
| विद्यालय का नया नामकरण | शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, ग्राम गनियारी, जिला दुर्ग |
| तंबूरा का संरक्षण स्थल | राज्य संग्रहालय, रायपुर (पूर्ण सम्मान के साथ संरक्षण) |
| तीजन बाई की शैली | पंडवानी की कापालिक शैली (Kapalik Style of Pandavani) |
Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh क्या है और इसका क्या महत्व है?
छत्तीसगढ़ सरकार प्रतिवर्ष 1 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस (राज्योत्सव) के अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों (जैसे कृषि, खेल, कला, समाज सेवा, आदिवासी कल्याण आदि) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली विभूतियों को ‘राज्य अलंकरण सम्मान’ (State Alankaran Awards) प्रदान करती है। इसी ऐतिहासिक श्रृंखला के हिस्से के रूप में अब Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh सम्मान की शुरुआत की जा रही है।
यह सम्मान मुख्य रूप से लोक कला और पारंपरिक लोक गायन के क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाले देश व राज्य के कलाकारों को दिया जाएगा। इस अलंकरण की शुरुआत करना न केवल डॉ. तीजन बाई की अविश्वसनीय साधना को एक राष्ट्रीय श्रद्धांजलि है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के स्थानीय कलाकारों को वैश्विक स्तर पर अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करने का एक बड़ा नीतिगत कदम है।
डॉ. तीजन बाई: जीवन परिचय और कला-साधना (Biographical Profile)
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए डॉ. तीजन बाई के जीवन और उनके ऐतिहासिक संघर्षों का विस्तृत ब्यौरा नीचे दिया गया है:
1. जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
- जन्म: डॉ. तीजन बाई का जन्म 24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के पाटन ब्लाक के ग्राम गनियारी में हुआ था।
- समुदाय: वे ‘पारधी’ (Pardhi) अनुसूचित जनजाति समुदाय से ताल्लुक रखती थीं, जिसमें महिलाओं को खुलकर बाहर गाने या मंच पर प्रदर्शन करने की पारंपरिक मनाही थी।
- प्रेरणा: बचपन में उन्होंने अपने नाना बृजलाल पारधी (Brijlal Pardhi) को महाभारत की कथाएं गाते हुए सुना था, जिससे वे पंडवानी की ओर आकर्षित हुईं।
2. पंडवानी की कापालिक शैली (Kapalik Style of Pandavani)
छत्तीसगढ़ का पारंपरिक लोक नाट्य ‘पंडवानी’ मुख्य रूप से महाभारत के पात्रों (विशेष रूप से पांडवों और भीम) के पराक्रम की संगीतमय कथा है। पंडवानी मुख्य रूप से दो शैलियों में गाई जाती है:
- कापालिक शैली (Kapalik Style): इस शैली में कलाकार खड़े होकर, हाथ में तंबूरा लेकर, अत्यंत आक्रामक मुद्रा, अभिनय, नृत्य और नाट्य रूपांतरण के माध्यम से महाभारत की वीर रस से परिपूर्ण कथा का वाचन करता है। डॉ. तीजन बाई इस शैली की पहली महिला कलाकार और वैश्विक पहचानकर्ता थीं। वे अपने तंबूरे को कभी गदा, कभी धनुष तो कभी अर्जुन का रथ बनाकर जीवंत अभिनय करती थीं।
- वेदमती शैली (Vedamati Style): इस शैली में कलाकार बिना खड़े हुए, बैठकर शास्त्रीय रागों के साथ शांतिपूर्वक कथा का वाचन करता है। झाडूराम देवांगन और पुनाराम निषाद इस शैली के प्रमुख प्रतिनिधि रहे हैं।
3. ऐतिहासिक उपलब्धियां और पुरस्कार
पंडवानी को विश्व पटल (जैसे पेरिस, लंदन, मॉस्को) पर प्रतिष्ठित करने वाली डॉ. तीजन बाई भारत की सबसे सम्मानित लोक कलाकारों में से एक रहीं, जिन्हें उनके जीवनकाल में निम्नलिखित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया:
- पद्मश्री (Padma Shri): वर्ष 1987 में (कम उम्र में इस राष्ट्रीय नागरिक सम्मान को प्राप्त करने वाली हस्तियों में से एक)।
- संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार: वर्ष 1995 में।
- पद्मभूषण (Padma Bhushan): वर्ष 2003 में।
- फुकुओका पुरस्कार (Fukuoka Prize): वर्ष 2018 में (जापान का प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पुरस्कार)।
- पद्म विभूषण (Padma Vibhushan): वर्ष 2019 में (देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान)।
- मानद डॉक्टरेट (D.Litt.): विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा उनकी असाधारण कला साधना के लिए प्रदान की गई मानद उपाधि।
“स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत की सांस्कृतिक पहचान थीं। छत्तीसगढ़ सरकार उनके जीवन संघर्ष और कला साधना को Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh के माध्यम से अमर रखने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।”— मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
साय सरकार के प्रमुख निर्णय: स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने की रणनीति
दशगात्र कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ दुर्ग के सांसद श्री विजय बघेल, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल और विधायक व पद्मश्री श्री अनुज शर्मा उपस्थित थे। बैठक के दौरान तीजन बाई की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए निम्नलिखित ऐतिहासिक निर्णय लिए गए:
1. विद्यालय का नामकरण
ग्राम गनियारी स्थित ‘शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय’ का नामकरण अब आधिकारिक रूप से ‘स्व. डॉ. तीजन बाई शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय’ किया जाएगा, ताकि स्थानीय ग्रामीण छात्र-छात्राएं उनके कड़े जीवन संघर्ष और विश्व पटल पर हासिल की गई उपलब्धियों से लगातार प्रेरणा प्राप्त कर सकें।
2. तंबूरे का रायपुर संग्रहालय में संरक्षण
डॉ. तीजन बाई का लाल रंग का तंबूरा (जिसमें वे मयूरपंख बांधकर गाती थीं) केवल एक वाद्ययंत्र नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ी अस्मिता और लोक कला का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि इस तंबूरे को रायपुर के राज्य संग्रहालय में पूर्ण सम्मान के साथ एक विशिष्ट दीर्घा (Gallery) में संरक्षित रखा जाएगा, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से शोधकर्ता और पर्यटक आ सकेंगे।
3. Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh का वार्षिक क्रियान्वयन
प्रतिवर्ष 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के मुख्य मंच से लोक कला संवर्धन के लिए इस अलंकरण सम्मान को प्रदान किया जाएगा, जिसकी पूरी नियमावली संस्कृति विभाग द्वारा शीघ्र ही जारी की जाएगी।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष विश्लेषण (Exam Relevance Section)
सीजीपीएससी (CGPSC) राज्य सेवा परीक्षा और छत्तीसगढ़ व्यापम (CG Vyapam) की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए छत्तीसगढ़ के लोक नाट्य, लोकगीत और राज्य अलंकरण सम्मान (GS Paper VI) के दृष्टिकोण से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
CGPSC & UPSC Prelims Fact Box: Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh
- पंडवानी (Pandavani): यह छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख लोक महाकाव्य गायन है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘पांडव वाणी’ या पांडवों की कथा है। इसके मुख्य नायक ‘भीम’ और नायिका ‘द्रौपदी’ हैं। इसमें प्रयोग होने वाला मुख्य वाद्ययंत्र तंबूरा और करताल है।
- कापालिक शैली (Kapalik): कापालिक शब्द ‘कपाल’ (मस्तिष्क/स्मृति) से बना है, जिसमें कलाकार अपनी स्मृति और खड़े होकर किए जाने वाले शारीरिक अभिनय के बल पर वीर रस की कथा का वाचन करता है।
- छत्तीसगढ़ राज्योत्सव (1 नवंबर): 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ देश का 26वां राज्य बना था, जिसकी स्मृति में प्रतिवर्ष राज्योत्सव मनाया जाता है और राज्य अलंकरण पुरस्कार दिए जाते हैं।
UPSC & CGPSC Mains Analysis (GS Paper I & VI: कला, संस्कृति एवं जनजातीय समाज)
प्रश्न: “छत्तीसगढ़ का लोक नाट्य ‘पंडवानी’ केवल एक संगीतमय कथावाचन नहीं है, बल्कि यह आदिम जनजातियों के मौखिक इतिहास (Oral History) और सामाजिक समरसता को प्रदर्शित करने वाली एक सशक्त सांस्कृतिक विधा है।” डॉ. तीजन बाई के जीवन और नवनिर्मित **Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh** के संदर्भ में इस विधा के महत्व का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
उत्तर की रूपरेखा:
- प्रस्तावना: गनियारी दुर्ग की पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई की अमिट सांस्कृतिक विरासत और साय सरकार द्वारा घोषित नए Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh अलंकरण पुरस्कार का परिचय देते हुए उत्तर की शुरुआत करें।
- पंडवानी लोककला का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व:
- मौखिक परंपरा का संरक्षण: सदियों से बिना लिखित दस्तावेजों के, लोकगीतों के माध्यम से महाभारत की कथाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत बनाए रखना।
- नृवंशविज्ञान और जनजातीय जुड़ाव: पारधी और अन्य आदिवासी समुदायों के जीवन में इस विधा की जड़ें होना।
- कापालिक शैली का महत्व: अभिनय, वीरता (वीर रस) और तंबूरे के माध्यम से युद्ध के मैदान का जीवंत दृश्य प्रस्तुत करना, जो लोक नाट्य विधा की सर्वोच्च परिपक्वता को दर्शाता है।
- डॉ. तीजन बाई का ऐतिहासिक योगदान:
- लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ना: पारधी समाज की कठोर वर्जनाओं को पार कर महिलाओं को मंच पर गाने का अधिकार दिलाया।
- वैश्विक मंच पर छत्तीसगढ़ का गौरव: भारत उत्सव (पेरिस, मास्को) के माध्यम से छत्तीसगढ़ी बोली और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया।
- राज्य अलंकरण सम्मान का महत्व: यह स्पष्ट करें कि कैसे तीजन बाई अलंकरण सम्मान के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लोक कलाकारों को अपनी पारंपरिक विधाओं को जीवित रखने के लिए वित्तीय और सामाजिक मान्यता प्राप्त होगी।
- निष्कर्ष: यह निष्कर्ष दें कि ‘तंबूरे’ का संग्रहालय में संरक्षण और राज्योत्सव पर इस विशिष्ट अलंकरण की शुरुआत छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक संप्रभुता (Cultural Sovereignty) को बनाए रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक और अनुकरणीय कदम है, जो ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के सपने को हमारी जड़ों के साथ जोड़ता है।
संबद्ध स्टेटिक जीके (Static GK Connection)
छत्तीसगढ़ के लोक गीतों, लोक नाट्यों और राज्य अलंकरण सम्मानों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण स्टेटिक तथ्य जो परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं:
- छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोक नाट्य और शैलियां:
- नाच (Nacha): छत्तीसगढ़ का सबसे लोकप्रिय पारंपरिक लोक नाट्य, जिसके विकास में हबीब तनवीर (Habib Tanvir) और उनके ‘नया थिएटर’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है (जैसे ‘चरनदास चोर’ नाटक)।
- रहस्य (Rahas): बिलासपुर संभाग में मुख्य रूप से आयोजित होने वाला कृष्ण लीला पर आधारित एक पारंपरिक लोक नाट्य।
- भतरा नाट (Bhatra Nat): बस्तर संभाग की भतरा जनजाति द्वारा युद्ध और पौराणिक कथाओं पर आधारित एक मंचीय नृत्य-नाट्य।
- अन्य प्रमुख राज्य अलंकरण पुरस्कार (छत्तीसगढ़):
- गुंडाधुर सम्मान: खेल के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च राज्य सम्मान।
- मिनीमाता सम्मान: महिला उत्थान के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च अलंकरण।
- पं. रविशंकर शुक्ल सम्मान: सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए।
- चक्रधर सम्मान: संगीत और कला के क्षेत्र में राजा चक्रधर सिंह की स्मृति में दिया जाने वाला प्रतिष्ठित सम्मान।
एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)
तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु:
- Award Announcement: प्रतिवर्ष 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर ‘डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण’ प्रदान किया जाएगा।
- Ganiyari School: तीजन बाई के पैतृक गृह ग्राम गनियारी (दुर्ग) के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नाम उनके नाम पर होगा।
- Tambura Preservation: उनके जीवनभर की साधना के प्रतीक रहे ऐतिहासिक तंबूरे को रायपुर के राज्य संग्रहालय में पूर्ण सम्मान के साथ सहेजा जाएगा।
- Style and Awards: डॉ. तीजन बाई पंडवानी की कापालिक शैली की अग्रदूत थीं, जिन्हें पद्मश्री (1987), पद्मभूषण (2003) और पद्म विभूषण (2019) से सम्मानित किया गया था।
- Bhanu Bhoomi: दुर्ग जिला और पाटन ब्लाक ऐतिहासिक रूप से छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं और आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और सांस्कृतिक विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में जुलाई 2026 में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री द्वारा किस विख्यात लोक कलाकार की स्मृति में ‘राज्य अलंकरण सम्मान’ (Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh) शुरू करने की घोषणा की गई है?
(A) सूरज बाई खांडे
(B) डॉ. तीजन बाई
(C) तीजन पटेल
(D) ममता चंद्राकर
उत्तर: (B) डॉ. तीजन बाई
व्याख्या: विख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के दशगात्र कार्यक्रम के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने उनके नाम पर ‘राज्य अलंकरण’ शुरू करने की घोषणा की है।
प्रश्न 2: पंडवानी लोकगाथा गायन की उस विशिष्ट शैली को क्या कहा जाता है जिसमें कलाकार खड़े होकर, हाथ में तंबूरा लेकर नृत्य और अभिनय के साथ प्रदर्शन करता है?
(A) वेदमती शैली (Vedamati)
(B) कापालिक शैली (Kapalik)
(C) भतरी शैली (Bhatri)
(D) पंडवानी गद्य शैली
उत्तर: (B) कापालिक शैली (Kapalik)
व्याख्या: कापालिक शैली में कलाकार खड़े होकर, तंबूरे को विभिन्न हथियारों के रूप में प्रयुक्त करते हुए अत्यंत आक्रामक और वीर रस के साथ कथावाचन करता है, जबकि वेदमती शैली बैठकर गाई जाती है।
प्रश्न 3: डॉ. तीजन बाई को कला और लोक संस्कृति के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा किस वर्ष देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था?
(A) वर्ष 1987
(B) वर्ष 2003
(C) वर्ष 2019
(D) वर्ष 2024
उत्तर: (C) वर्ष 2019
व्याख्या: डॉ. तीजन बाई को वर्ष 1987 में पद्मश्री, वर्ष 2003 में पद्मभूषण और वर्ष 2019 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था।
प्रश्न 4: ‘Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh’ सम्मान के तहत छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लोक कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को किस अवसर पर सम्मानित किया जाएगा?
(A) छत्तीसगढ़ राज्योत्सव (1 नवंबर)
(B) गणतंत्र दिवस (26 जनवरी)
(C) स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त)
(D) हरेली तिहार के अवसर पर
उत्तर: (A) छत्तीसगढ़ राज्योत्सव (1 नवंबर)
व्याख्या: यह अलंकरण प्रतिवर्ष 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ के राज्य स्थापना दिवस (राज्योत्सव) के अवसर पर आयोजित होने वाले मुख्य अलंकरण समारोह में प्रदान किया जाएगा।
प्रश्न 5: डॉ. तीजन बाई की जीवनभर की साधना का प्रतीक रहा ऐतिहासिक ‘तंबूरा’ (Tambura) राज्य सरकार द्वारा किस संग्रहालय में पूरे राजकीय सम्मान के साथ संरक्षित रखा जाएगा?
(A) बस्तर जनजातीय संग्रहालय, जगदलपुर
(B) पुरातात्विक एवं राज्य संग्रहालय, रायपुर
(C) घासीदास संग्रहालय, बिलासपुर
(D) राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली
उत्तर: (B) पुरातात्विक एवं राज्य संग्रहालय, रायपुर
व्याख्या: तीजन बाई के ऐतिहासिक तंबूरे को आने वाली पीढ़ियों के शोध और दर्शन के लिए राजधानी रायपुर के राज्य संग्रहालय में पूरे सम्मान के साथ संरक्षित रखने का निर्णय लिया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh सम्मान क्या है?
Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किया जाने वाला एक नया राज्य अलंकरण सम्मान है। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर लोक कला और पारंपरिक विधाओं के क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाले देश व राज्य के उत्कृष्ट कलाकारों को प्रदान किया जाएगा।
Q2. डॉ. तीजन बाई कौन थीं और उनका क्या महत्व है?
डॉ. तीजन बाई (1956-2026) छत्तीसगढ़ की विश्व प्रसिद्ध पंडवानी (कापालिक शैली) गायिका थीं। वे भारत की पहली महिला कलाकार थीं जिन्होंने इस पारंपरिक कला को पेरिस, मॉस्को और लंदन जैसे वैश्विक मंचों पर प्रतिष्ठित किया। उन्हें देश के तीन सर्वोच्च नागरिक सम्मानों—पद्मश्री (1987), पद्मभूषण (2003) और पद्म विभूषण (2019) से सम्मानित किया गया था।
Q3. पंडवानी गायन की ‘कापालिक’ और ‘वेदमती’ शैलियों में क्या अंतर है?
पंडवानी की कापालिक शैली में कलाकार खड़े होकर, हाथ में तंबूरा लेकर, अत्यंत आक्रामक मुद्रा, नृत्य और नाट्य रूपांतरण के माध्यम से अभिनय करते हुए कथा सुनाता है (जिसका प्रतिनिधित्व तीजन बाई करती थीं)। वहीं, वेदमती शैली में कलाकार शांत बैठकर, शास्त्रीय रागों के साथ केवल स्वर के माध्यम से कथावाचन करता है (जैसे झाडूराम देवांगन)।
Q4. तीजन बाई की स्मृतियों को संजोने के लिए साय सरकार ने क्या तीन बड़े निर्णय लिए हैं?
सरकार ने निम्नलिखित तीन बड़े निर्णय लिए हैं: 1. प्रतिवर्ष राज्योत्सव पर ‘डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण’ सम्मान प्रदान करना, 2. उनके पैतृक ग्राम गनियारी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण उनके नाम पर करना, और 3. उनकी कला-साधना के प्रतीक रहे ऐतिहासिक ‘तंबूरे’ को रायपुर के राज्य संग्रहालय में संरक्षित रखना।
Q5. डॉ. तीजन बाई का पैतृक गाँव कौन सा है और वह किस जिले में स्थित है?
डॉ. तीजन बाई का पैतृक गाँव ‘गनियारी’ है, जो छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के अंतर्गत पाटन विकासखंड में स्थित है। इसी गाँव के शासकीय स्कूल का नाम अब उनके नाम पर किया जा रहा है।
निष्कर्ष (Conclusion)
दुर्ग के ग्राम गनियारी में आयोजित श्रद्धांजलि सभा और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की ऐतिहासिक घोषणाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के प्रति राज्य सरकार के अगाध सम्मान को दर्शाती हैं। Dr Teejan Bai Lokkala Alankaran Chhattisgarh सम्मान की शुरुआत करना न केवल ‘पंडवानी की कपिला’ को एक राष्ट्रीय और शाश्वत श्रद्धांजलि है, बल्कि यह देश भर के लोक कलाकारों को अपनी पारंपरिक जड़ों को सहेजने के लिए राजकीय स्तर पर वित्तीय और सामाजिक संबल प्रदान करेगा।
उनके पैतृक गाँव के स्कूल का नामकरण उनके नाम पर करने से स्थानीय छात्र-छात्राओं में शिक्षा और कला के प्रति स्वाभिमान जगेगा। साथ ही, उनके जीवनभर के संघर्ष के प्रतीक रहे लाल रंग के ‘तंबूरे’ का रायपुर के राज्य संग्रहालय में पूर्ण सम्मान के साथ संरक्षण करना सुशासन (Good Governance) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को हमारी मौखिक इतिहास परंपराओं से परिचित कराएगा। ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के सपने को आकार देते हुए, डॉ. तीजन बाई का यह अदम्य कला-संसार और सरकार के ये ऐतिहासिक निर्णय संपूर्ण भारत में लोक कलाओं के पुनरुद्धार का एक शानदार मार्गदर्शक लाइटहाउस साबित होंगे, जो छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू को संपूर्ण विश्व में सदा के लिए अमर रखेगा।
Official Sources:
- Public Relations Department, Government of Chhattisgarh (DPRCG) (https://dprcg.gov.in)