डूरंड कप 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया ऐतिहासिक ट्रॉफियों का अनावरण | Durand Cup 2026

President Droupadi Murmu unveiling the Durand Cup 2026 trophies at Rashtrapati Bhavan President Droupadi Murmu unveiling the Durand Cup 2026 trophies at Rashtrapati Bhavan

Published on July 7, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in


भारत की समृद्ध खेल विरासत में डूरंड कप (Durand Cup 2026) का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया का सबसे पुराना और दुनिया का तीसरा सबसे पुराना चालू फुटबॉल टूर्नामेंट है। हाल ही में, भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित एक समारोह में डूरंड कप टूर्नामेंट 2026 की तीन प्रतिष्ठित ट्रॉफियों का अनावरण किया और उन्हें देशव्यापी दौरे के लिए हरी घंडी दिखाई।

यह आयोजन भारतीय फुटबॉल के इतिहास में एक और नया अध्याय जोड़ता है। इस वर्ष टूर्नामेंट में कई नई टीमों के शामिल होने की घोषणा की गई है, जिसमें पड़ोसी देश श्रीलंका की एक टीम भी शामिल है। यह पहल खेल कूटनीति (Sports Diplomacy) और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

Table of Contents

डूरंड कप 2026: त्वरित अवलोकन (Quick Highlights)

महत्वपूर्ण बिंदुविवरण
टूर्नामेंट का नामडूरंड कप 2026 (135वां संस्करण)
अनावरण तिथि07 जुलाई, 2026
किसने अनावरण कियाश्रीमती द्रौपदी मुर्मू (भारत की राष्ट्रपति)
स्थानराष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र, नई दिल्ली
तीन मुख्य ट्रॉफियांडूरंड कप, प्रेसिडेंट्स कप और शिमला ट्रॉफी
विशेष अंतरराष्ट्रीय भागीदारीश्रीलंका की टीम की भागीदारी
ऐतिहासिक महत्वएशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट (स्थापना: 1888)

चर्चा में क्यों है? (Why in News?)

7 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने डूरंड कप 2026 की ट्रॉफियों का अनावरण कर इस प्रतिष्ठित खेल प्रतियोगिता के नए सत्र का औपचारिक शंखनाद किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने फुटबॉल के वैश्विक महत्व और भारत के ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य के साथ इसके जुड़ाव पर बल दिया।

इस वर्ष का टूर्नामेंट इसलिए भी विशेष है क्योंकि इसमें अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के तहत श्रीलंका की टीम को आमंत्रित किया गया है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रकाश डाला कि देश में फुटबॉल के विकास के लिए अभी एक लंबी यात्रा तय करनी शेष है, और डूरंड कप जैसी प्रतियोगिताएं जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशने में मील का पत्थर साबित हो सकती हैं।

“फुटबॉल उत्कृष्टता, एकता और खेल भावना का एक अनूठा उदाहरण है। जिस तरह मैदान पर खिलाड़ी एक-दूसरे का सहयोग करते हुए विजय की ओर बढ़ते हैं, उसी तरह देश के नागरिकों को एकजुट होकर वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण का संकल्प पूरा करना होगा।”— राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

डूरंड कप का ऐतिहासिक बैकग्राउंड (History of Durand Cup)

डूरंड कप का इतिहास भारतीय उपमहाद्वीप के औपनिवेशिक अतीत और सैन्य इतिहास से गहरा जुड़ा हुआ है। इसकी शुरुआत से लेकर आधुनिक स्वरूप तक के सफर की प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:

1. स्थापना और प्रारंभिक दौर

  • स्थापना वर्ष: डूरंड कप की स्थापना वर्ष 1888 में शिमला के निकट ‘डगशाई’ (Dagshai) में की गई थी।
  • संस्थापक: सर हेनरी मोर्टिमर डूरंड (Sir Henry Mortimer Durand), जो उस समय ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव थे। मूल रूप से इसे स्वास्थ्य लाभ ले रहे सैनिकों के मनोरंजन और शारीरिक फिटनेस के लिए शुरू किया गया था।
  • प्रारंभिक विजेता: डूरंड कप का पहला खिताब ‘रॉयल स्कॉट्स फुसियर’ (Royal Scots Fusiliers) ने जीता था।

2. दिल्ली और कोलकाता का सफर

प्रारंभ में यह टूर्नामेंट मुख्य रूप से सशस्त्र बलों की टीमों के लिए आयोजित किया जाता था। वर्ष 1940 में इस टूर्नामेंट को शिमला से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया। स्वतंत्रता के पश्चात, इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट का आयोजन स्थल कोलकाता (Kolkata) बन गया, जिसे भारतीय फुटबॉल का मक्का भी कहा जाता है। वर्तमान में, इसका आयोजन मुख्य रूप से डूरंड फुटबॉल टूर्नामेंट सोसाइटी (DFTS) और भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है।

डूरंड कप की तीन अनूठी ट्रॉफियां (The Three Legendary Trophies)

डूरंड कप दुनिया के उन गिने-कुने टूर्नामेंट्स में से एक है, जहां विजेता टीम को एक नहीं बल्कि तीन अलग-अलग ट्रॉफियां प्रदान की जाती हैं। इन तीनों ट्रॉफियों का अपना अनूठा इतिहास और महत्व है:

1. डूरंड कप (The Durand Cup)

यह मूल ट्रॉफी है जिसे वर्ष 1888 में सर मोर्टिमर डूरंड द्वारा प्रदान किया गया था। इसे ‘मूल पुरस्कार’ (Original Trophy) के रूप में जाना जाता है। विजेता टीम को इसे एक वर्ष के लिए अपने पास रखने का अधिकार मिलता है, जिसके बाद इसे वापस कर दिया जाता है और उसकी प्रतिकृति दी जाती है।

2. शिमला ट्रॉफी (The Shimla Trophy)

यह ट्रॉफी वर्ष 1904 में शिमला के नागरिकों द्वारा फुटबॉल के प्रति अपने प्रेम और सम्मान को प्रदर्शित करने के लिए दान में दी गई थी। यह ट्रॉफी भी रोटेटिंग आधार पर प्रदान की जाती है।

3. प्रेसिडेंट्स कप (The President’s Cup)

स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वर्ष 1956 में इस ट्रॉफी की शुरुआत की थी। यह स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और खेलों के प्रति राजकीय संरक्षण का प्रतीक है।

खेल कूटनीति और क्षेत्रीय महत्व (Sports Diplomacy)

इस वर्ष डूरंड कप में श्रीलंका की टीम की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खेल कूटनीति (Sports Diplomacy) के माध्यम से भारत अपने पड़ोसियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।

  • दक्षिण एशियाई सहयोग: फुटबॉल दक्षिण एशिया में एक लोकप्रिय खेल है। इस तरह के टूर्नामेंट में भागीदारी से दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के देशों के बीच लोगों से लोगों के संपर्क (People-to-People Contact) को बढ़ावा मिलता है।
  • सॉफ्ट पावर का विकास: खेल भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) को वैश्विक पटल पर प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम है।

क्या आप जानते हैं?
डूरंड कप की सबसे सफल टीमों में ‘मोहन बागान’ (Mohun Bagan) और ‘इस्ट बंगाल’ (East Bengal) शामिल हैं। इन दोनों टीमों ने इस खिताब को सबसे अधिक बार अपने नाम किया है। इनके बीच होने वाले मुकाबले को ‘कोलकाता डर्बी’ कहा जाता है, जो एशिया की सबसे बड़ी फुटबॉल प्रतिद्वंद्विता में से एक है।

भारतीय फुटबॉल की चुनौतियां और आगे की राह

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत को वैश्विक फुटबॉल मानचित्र पर एक मजबूत पहचान बनाने के लिए अभी एक लंबी दूरी तय करनी है। वर्तमान में भारतीय फुटबॉल कई तरह की ढांचागत और प्रणालीगत चुनौतियों से जूझ रहा है:

प्रमुख चुनौतियां (Challenges):

  1. बुनियादी ढांचे की कमी: विश्व स्तरीय अकादमियों, पिचों और खेल विज्ञान केंद्रों की कमी अभी भी एक गंभीर मुद्दा है।
  2. वित्तीय अस्थिरता: भारत में क्रिकेट की तुलना में फुटबॉल में निजी प्रायोजकों और निवेश का अभाव है, जिससे क्लबों का परिचालन मुश्किल होता है।
  3. जमीनी स्तर पर विकास (Grassroots Development): ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में युवा प्रतिभाओं की खोज और उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अभाव।
  4. प्रतिस्पर्धात्मक एक्स्पोज़र: भारतीय खिलाड़ियों को यूरोपीय या दक्षिण अमेरिकी क्लबों के स्तर पर खेलने के अवसर कम मिलते हैं।

आगे की राह (The Way Forward):

  • मिशन इलेवन मिलियन (Mission XI Million) जैसी पहलों का विस्तार: देश भर के स्कूली बच्चों को फुटबॉल से जोड़ना।
  • AIFF का विजन 2047 (Vision 2047): अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) के इस रणनीतिक रोडमैप का उद्देश्य भारत को वर्ष 2047 तक एशिया की शीर्ष चार फुटबॉल शक्तियों में शामिल करना है।
  • निजी क्षेत्र का सहयोग: कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत खेलों में निवेश को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

परीक्षा उपयोगी विशेष तथ्य (Exam-Oriented Facts)

प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, State PCS, SSC, और Railway) के दृष्टिकोण से डूरंड कप से जुड़े निम्नलिखित तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  • स्थापना वर्ष: 1888 (शिमला)
  • प्रथम संस्करण विजेता: रॉयल स्कॉट्स फुसियर
  • प्रथम भारतीय विजेता: मोहम्मद स्पोर्टिंग क्लब (Mohammedan Sporting Club) ने वर्ष 1940 में यह खिताब जीतकर इतिहास रचा था। यह पहला अवसर था जब किसी गैर-सैन्य भारतीय क्लब ने डूरंड कप जीता था।
  • आयोजक संस्था: डूरंड फुटबॉल टूर्नामेंट सोसाइटी (DFTS) और भारतीय सशस्त्र बल (Indian Armed Forces)।
  • तीनों ट्रॉफियों के नाम: डूरंड कप, प्रेसिडेंट्स कप, शिमला ट्रॉफी।

UPSC मुख्य परीक्षा विश्लेषण (Mains Analysis)

सामान्य अध्ययन पेपर-II (शासन व्यवस्था, नीति और सॉफ्ट पावर)

प्रश्न: “खेल कूटनीति (Sports Diplomacy) पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने में एक प्रभावी उपकरण के रूप में कार्य कर सकती है।” डूरंड कप 2026 में विदेशी टीमों की भागीदारी के संदर्भ में इस कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए.

विश्लेषण के प्रमुख बिंदु:

  • सॉफ्ट पावर कूटनीति: खेल कूटनीति पारंपरिक राजनीतिक सीमाओं को लांघकर दो देशों के नागरिकों के बीच भावनात्मक जुड़ाव पैदा करती है। डूरंड कप में श्रीलंका जैसे देश की भागीदारी भारत की ‘पड़ोसी पहले’ (Neighbourhood First) नीति के अनुकूल है।
  • सांस्कृतिक सेतु: दक्षिण एशिया में खेल साझा सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं। साझा खेल मंचों के माध्यम से क्षेत्रीय तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • सीमाएं: खेल कूटनीति केवल एक सीमा तक ही प्रभावी हो सकती है जब तक कि गंभीर भू-राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों को राजनयिक स्तर पर न सुलझाया जाए।

एक मिनट का रिवीज़न (One Minute Revision)

स्मृति शॉर्टकट (Memory Trick): DPS

डूरंड कप की तीन ट्रॉफियों को याद रखने की आसान ट्रिक: DPS

  • D – Durand Cup (डूरंड कप)
  • P – President’s Cup (प्रेसिडेंटस कप)
  • S – Shimla Trophy (शिमला ट्रॉफी)

स्टेटिक जीके कनेक्शन (Static GK Connection)

भारतीय फुटबॉल से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय टूर्नामेंट और कप जो परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं:

  1. संतोष ट्रॉफी (Santosh Trophy): यह भारत की राष्ट्रीय फुटबॉल चैम्पियनशिप है जिसमें राज्यों की टीमें खेलती हैं। इसकी स्थापना 1941 में हुई थी।
  2. सुब्रतो कप (Subroto Cup): यह एक प्रतिष्ठित अंतर-स्कूल फुटबॉल टूर्नामेंट है जिसका आयोजन भारतीय वायु सेना द्वारा किया जाता है।
  3. फेडरेशन कप (Federation Cup): डूरंड कप के बाद यह भारत का दूसरा सबसे पुराना क्लब टूर्नामेंट है (स्थापना 1977)।
  4. आई-लीग (I-League) और आईएसएल (Indian Super League): ये भारत की शीर्ष व्यावसायिक फुटबॉल लीग हैं।

अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)

नीचे दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से अपनी तैयारी का स्व-मूल्यांकन करें:

प्रश्न 1: डूरंड कप की स्थापना किस वर्ष और किस स्थान पर की गई थी?

(A) 1888, शिमला
(B) 1940, नई दिल्ली
(C) 1956, कोलकाता
(D) 1898, दार्जिलिंग

उत्तर: (A) 1888, शिमला
व्याख्या: डूरंड कप की स्थापना 1888 में शिमला के डगशाई में सर मोर्टिमर डूरंड द्वारा की गई थी।

प्रश्न 2: निम्नलिखित में से कौन सी ट्रॉफी डूरंड कप टूर्नामेंट से संबंधित नहीं है?

(A) शिमला ट्रॉफी
(B) प्रेसिडेंट्स कप
(C) डूरंड कप
(D) संतोष ट्रॉफी

उत्तर: (D) संतोष ट्रॉफी
व्याख्या: डूरंड कप के विजेताओं को तीन ट्रॉफियां दी जाती हैं: डूरंड कप, प्रेसिडेंट्स कप और शिमला ट्रॉफी। संतोष ट्रॉफी एक अलग राष्ट्रीय चैम्पियनशिप है।

प्रश्न 3: डूरंड कप जीतने वाला पहला भारतीय क्लब कौन सा था?

(A) मोहन बागान
(B) ईस्ट बंगाल
(C) मोहम्मद स्पोर्टिंग क्लब
(D) डेम्पो एससी

उत्तर: (C) मोहम्मद स्पोर्टिंग क्लब
व्याख्या: मोहम्मद स्पोर्टिंग क्लब ने वर्ष 1940 में दिल्ली में डूरंड कप जीतकर इतिहास रचा था। वह यह टूर्नामेंट जीतने वाला पहला गैर-सैन्य भारतीय क्लब बना।

प्रश्न 4: डूरंड कप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. यह एशिया का सबसे पुराना और दुनिया का तीसरा सबसे पुराना चालू फुटबॉल टूर्नामेंट है।
2. वर्ष 2026 के संस्करण में पहली बार श्रीलंका की एक टीम भाग ले रही है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?

(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) 1 और 2 दोनों
(D) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (C) 1 और 2 दोनों
व्याख्या: डूरंड कप एशिया की सबसे पुरानी फुटबॉल प्रतियोगिता है। वर्ष 2026 के संस्करण में खेल कूटनीति के तहत श्रीलंका की टीम को भी आमंत्रित किया गया है।

प्रश्न 5: स्वतंत्र भारत के किस राष्ट्रपति ने वर्ष 1956 में डूरंड कप के लिए ‘प्रेसिडेंटस कप’ की शुरुआत की थी?

(A) डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
(B) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
(C) डॉ. जाकिर हुसैन
(D) वी. वी. गिरि

उत्तर: (B) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
व्याख्या: भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वर्ष 1956 में खेल को बढ़ावा देने और इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट को सम्मानित करने के लिए प्रेसिडेंट्स कप की शुरुआत की थी।


विगत वर्षों के प्रश्न (PYQ Connection)

UPSC Civil Services Prelims (General Studies Paper I):
विगत वर्षों में खेलों से जुड़े पुरस्कारों और ऐतिहासिक टूर्नामेंटों के बारे में प्रश्न पूछे गए हैं। उदाहरण के लिए, 2021 की प्रारंभिक परीक्षा में 32वें ग्रीष्मकालीन ओलंपिक और आईसीसी टेस्ट चैम्पियनशिप से जुड़े कथन आधारित प्रश्न शामिल थे। डूरंड कप का ऐतिहासिक और प्रशासनिक ढांचा परीक्षा की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. डूरंड कप क्या है और इसका क्या महत्व है?

डूरंड कप भारत और एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट है, जिसकी स्थापना 1888 में हुई थी। यह भारतीय फुटबॉल की नींव माना जाता है और सशस्त्र बलों तथा खेल संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जाता है।

Q2. डूरंड कप के विजेताओं को कितनी ट्रॉफियां दी जाती हैं?

विजेता टीम को तीन ट्रॉफियां दी जाती हैं: मूल डूरंड कप, शिमला ट्रॉफी (शिमला के नागरिकों द्वारा भेंट की गई) और प्रेसिडेंट्स कप (स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा शुरू की गई)।

Q3. डूरंड कप 2026 का अनावरण किसने किया?

डूरंड कप 2026 की ट्रॉफियों का अनावरण भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा 7 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में किया गया।

Q4. क्या डूरंड कप में विदेशी टीमें भी भाग लेती हैं?

हाँ, डूरंड कप में समय-समय पर पड़ोसी देशों की टीमों को आमंत्रित किया जाता रहा है। वर्ष 2026 के संस्करण में श्रीलंका की एक फुटबॉल टीम विशेष रूप से भाग ले रही है।

Q5. भारत में फुटबॉल के विकास के लिए ‘विजन 2047’ क्या है?

विजन 2047 अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) द्वारा तैयार किया गया एक रणनीतिक खाका है, जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता के सौवें वर्ष (2047) तक भारत को वैश्विक फुटबॉल के मंच पर स्थापित करना और एशिया की शीर्ष चार टीमों में शामिल करना है।


निष्कर्ष (Conclusion)

डूरंड कप केवल एक फुटबॉल टूर्नामेंट नहीं है, बल्कि यह भारत के इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता का एक जीवंत प्रतीक है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा वर्ष 2026 की ट्रॉफियों के अनावरण ने इस ऐतिहासिक कप की गरिमा को और बढ़ा दिया है। श्रीलंका जैसी विदेशी टीमों के शामिल होने से इस खेल की पहुंच और कूटनीतिक प्रभाव में वृद्धि होगी।

भारतीय फुटबॉल को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए अभी एक लंबी दूरी तय करनी है, परंतु डूरंड कप जैसी ऐतिहासिक प्रतियोगिताएं देश के युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित करने और ‘विकसित भारत @ 2047‘ के राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेंगी।

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