By: Ishan Verma (Founder & Editor, TheExamHub.in)
गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही/रायपुर | 11 मई
छत्तीसगढ़ में हमारी प्राचीन ज्ञान संपदा और ऐतिहासिक धरोहरों को डिजिटल रूप से सहेजने का काम मिशन मोड पर चल रहा है। इसी कड़ी में भारत सरकार के ‘संस्कृति मंत्रालय’ द्वारा संचालित Gyanbharatam Abhiyan Chhattisgarh (राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान) के तहत राज्य में एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है।
छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) जिले में इतिहास, धर्म और साहित्य के संगम वाली ‘रामचरितमानस (Ramcharitmanas)’ की एक अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपि (Rare Manuscript) प्राप्त हुई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों (CGPSC/Vyapam) के लिए कला एवं संस्कृति के नजरिए से यह एक बेहद महत्वपूर्ण करंट अफेयर्स है।
4 पीढ़ियों का समर्पण: धनौली के उपाध्याय परिवार की विरासत
यह कोई आम पुस्तक नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी एक ऐतिहासिक धरोहर है। यह दुर्लभ पांडुलिपि गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत ‘धनौली’ निवासी श्री ज्ञानेंद्र उपाध्याय के परिवार के पास सुरक्षित रखी हुई थी।
परिवार के अनुसार, उनके परदादा ने दशकों पहले इस ग्रंथ की महत्ता को समझते हुए इसे सहेजना शुरू किया था। तब से लेकर आज तक, उपाध्याय परिवार की चार पीढ़ियों ने इस अमूल्य निधि को दीमक और समय की मार से बचाकर रखा। अब ‘ज्ञानभारतम्’ अभियान के माध्यम से इसे वैज्ञानिक तरीके से डिजिटाइज्ड (Digital) कर हमेशा के लिए सुरक्षित कर लिया गया है।

अवधी भाषा में रचित: आखिर क्यों इतनी खास है यह पांडुलिपि?
कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन की मौजूदगी में इस पांडुलिपि का डिजिटल संरक्षण किया गया। CGPSC और UPSC के छात्रों को इस पांडुलिपि की भाषा और ऐतिहासिक महत्व को जरूर नोट करना चाहिए:
- भाषा (Language): विशेषज्ञों के अनुसार, यह पांडुलिपि ‘अवधी (Awadhi)’ भाषा में रचित है।
- ऐतिहासिक महत्व: यह उस काल की लेखन शैली (Writing style) और भाषाई संरचना को समझने का एक बहुत बड़ा प्रामाणिक स्रोत है। इसके अध्ययन से तत्कालीन सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की सटीक जानकारी मिलती है। यह इस क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार का एक जीवंत प्रमाण है।
📖 Static GK: क्या है “ज्ञानभारतम्” अभियान?
कलेक्टर डॉ. देवांगन ने बताया कि “ज्ञानभारतम्” (National Manuscript Survey Campaign) भारत सरकार का एक राष्ट्रीय अभियान है।
- मुख्य उद्देश्य: इसका उद्देश्य देश भर के निजी संग्रहों, मंदिरों, आश्रमों और पुराने संस्थानों में बिखरी हुई प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान करना है।
- डिजिटल संरक्षण: इन अमूल्य धरोहरों का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण (Documentation) और ‘ज्ञानभारतम् एप’ के जरिए डिजिटल संरक्षण किया जा रहा है, ताकि भारत की प्राचीन ज्ञान संपदा को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
📚 The Exam Hub – कला एवं संस्कृति करेंट अफेयर्स (Fact-Check)
आगामी CGPSC, Vyapam और अन्य परीक्षाओं के लिए इस खबर का ‘निचोड़’ (Quick Revision):
- अभियान का नाम: ज्ञानभारतम् (राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान)।
- प्राप्त दुर्लभ ग्रंथ: रामचरितमानस की पांडुलिपि (Ramcharitmanas Rare Manuscript)।
- चर्चित भाषा: अवधी भाषा (Awadhi Language)।
- कहाँ प्राप्त हुई: ग्राम पंचायत धनौली, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) जिला।
- संरक्षणकर्ता परिवार: श्री ज्ञानेंद्र उपाध्याय का परिवार (4 पीढ़ियों से)।
- नोडल मंत्रालय: संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार।
Gyanbharatam Abhiyan Chhattisgarh: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: हाल ही में छत्तीसगढ़ के किस जिले में ‘ज्ञानभारतम्’ अभियान के तहत रामचरितमानस की दुर्लभ पांडुलिपि प्राप्त हुई है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ के ‘गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM)’ जिले के धनौली ग्राम में 4 पीढ़ियों पुरानी रामचरितमानस की अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपि प्राप्त हुई है।
प्रश्न 2: GPM जिले में प्राप्त रामचरितमानस की दुर्लभ पांडुलिपि किस भाषा में रचित है?
उत्तर: विशेषज्ञों के अनुसार, GPM जिले से प्राप्त यह ऐतिहासिक पांडुलिपि मुख्य रूप से ‘अवधी’ भाषा में रचित है, जो तत्कालीन लेखन शैली का एक बड़ा स्रोत है।
(छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति, इतिहास और एग्जाम से जुड़े सटीक करेंट अफेयर्स के लिए जुड़े रहें Ishan Verma की वेबसाइट theexamhub.in के साथ।)
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