Indravati Tiger Reserve Safari: शुरू हुई पहली जंगल सफारी; अचानकमार में केंवची गेट से बफर सफारी का हुआ भव्य आगाज

Indravati Tiger Reserve Safari Indravati Tiger Reserve Safari

रायपुर, 02 नवम्बर: छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण और ईको-टूरिज्म को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में राज्य स्थापना दिवस पर दो युगांतरकारी परियोजनाओं की शुरुआत हुई है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बीजापुर जिले के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में इतिहास की पहली जंगल सफारी और मुंगेली जिले के अचानकमार टाइगर रिजर्व में केंवची गेट से बफर सफारी का बटन दबाकर वर्चुअल शुभारंभ किया। Indravati Tiger Reserve Safari (इंद्रावती टाइगर रिजर्व सफारी) के प्रारंभ होने से दशकों तक नक्सल हिंसा के साये में रहे बस्तर के बीहड़ों में अब वन्यजीव पर्यटन का नया अध्याय शुरू हो गया है। समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव एवं वरिष्ठ विधायक श्री धर्मजीत सिंह विशेष रूप से वर्चुअल जुड़े। दोनों टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के लिए आधिकारिक बुकिंग शुरू कर दी गई है।

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • ‘Indravati Tiger Reserve Safari’: बीजापुर के इंद्रावती में पहली बार जंगल सफारी और अचानकमार में बफर सफारी शुरू।
  • इंद्रावती का प्रवेश द्वार उलूर गांव: बीजापुर से 60 किमी दूर, 4 जिप्सी वाहनों से स्थानीय युवा कराएंगे भ्रमण।
  • अचानकमार में केंवची गेट से बफर सफारी: राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर 50 किमी लंबा नया सफारी ट्रैक खुला।
  • सफारी वाहन और शुल्क: अचानकमार में जिप्सी का किराया ₹3,500 तथा महारानी वाहन का किराया ₹5,000 प्रति राउंड निर्धारित।
  • स्थानीय युवाओं को रोजगार: कांगेर घाटी में प्रशिक्षित ग्रामीण युवा बने गाइड और ड्राइवर; होमस्टे को मिलेगा बढ़ावा।
  • पर्यटन सर्किट को संबल: अमरकंटक-अचानकमार-रतनपुर धार्मिक और वन्यजीव सर्किट से सीधे जुड़ेंगे देश-विदेश के पर्यटक।

Indravati Tiger Reserve Safari: नक्सलवाद के साये से निकलकर वन्यजीव पर्यटन का नया केंद्र बना इंद्रावती

लंबे समय तक सुरक्षा चुनौतियों और भौगोलिक दुर्गमता के कारण पर्यटकों की पहुंच से दूर रहे इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहली बार जंगल सफारी शुरू होना ऐतिहासिक घटनाक्रम है।

Indravati Tiger Reserve Safari का मुख्य प्रवेश द्वार बीजापुर जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर उलूर गांव में स्थापित किया गया है। पर्यटक बीजापुर से भोपालपटनम मार्ग होते हुए आसानी से उलूर पहुंच सकेंगे। इंद्रावती अभयारण्य दुर्लभ बाघों, राज्य पशु जंगली वन भैंसा (Wild Water Buffalo), गिद्धों और समृद्ध वनौषधियों का प्राकृतिक बसेरा है। सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होने के बाद अब प्रकृति प्रेमी इस वनांचल के नैसर्गिक सौंदर्य और समृद्ध जैव विविधता का प्रत्यक्ष दीदार कर सकेंगे।

उलूर गांव से शुरू हुई सफारी: कांगेर घाटी में प्रशिक्षित स्थानीय युवा संभालेंगे संचालन

शासन ने इंद्रावती सफारी के प्रबंधन में शत-प्रतिशत स्थानीय जनजातीय युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित की है:

  • स्थानीय ग्रामीणों को कमान: उलूर गांव के स्थानीय युवाओं को कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (बस्तर) में विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया है, जिससे वे दक्ष टूर गाइड और कुशल जिप्सी चालक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
  • 4 जिप्सी वाहनों की व्यवस्था: पर्यटकों के लिए प्रारंभिक चरण में 4 जिप्सी वाहनों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए स्थानीय खानपान, चाय-नाश्ते, होमस्टे और बस्तर की अनूठी काष्ठ व लौह हस्तशिल्प बिक्री केंद्र भी विकसित किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की आजीविका को सीधा संबल मिलेगा।

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अचानकमार में केंवची गेट से 50 किमी लंबी बफर सफारी: अमरकंटक सर्किट से सीधा जुड़ाव

मुंगेली जिले में स्थित प्रसिद्ध अचानकमार टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की भारी मांग को देखते हुए बफर जोन सफारी का दायरा बढ़ाया गया है:

  • केंवची गेट से नया विकल्प: गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) से अमरकंटक मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग-45 (NH-45) पर स्थित केंवची गेट से पहली बार बफर सफारी खोली गई है। इससे पूर्व केवल शिवतराई गेट से सफारी संचालित थी।
  • अमरकंटक-रतनपुर पर्यटन सर्किट: केंवची गेट खुलने से नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक आने वाले लाखों तीर्थयात्री अब आसानी से अचानकमार में सफारी का आनंद लेते हुए मां महामाया नगरी रतनपुर सर्किट से जुड़ सकेंगे।
  • कोर और बफर का क्षेत्रफल: कुल 914.017 वर्ग किलोमीटर में फैले अचानकमार टाइगर रिजर्व में 626.195 वर्ग किलोमीटर कोर और 287.822 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है।

वाहन दरें, 50 किमी लंबा रूट और प्राकृतिक आकर्षण

अचानकमार में केंवची गेट से शुरू होने वाले 50 किलोमीटर लंबे सफारी ट्रैक में रोमांचक प्राकृतिक स्पॉट शामिल किए गए हैं:

  • प्रमुख वॉच टॉवर व क्षेत्र: सफारी मार्ग में भैरोसांगफाटर, सेमर वॉच टॉवर, कचांदी, जलांगो तिराहा, दरियाबूट पेट्रोलिंग कैंप और आमाडोब बैरियर शामिल हैं। इसके अलावा सिहावल सागर, माझी डोंगरी वॉच टॉवर और जल्दा ग्रासलैंड पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।
  • सफारी वाहन व किराया: पर्यटकों के लिए 1 जिप्सी और 3 बड़े महारानी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। जिप्सी का किराया ₹3,500 प्रति राउंड तथा महारानी वाहन का किराया ₹5,000 प्रति राउंड निर्धारित किया गया है। ठहरने के लिए पर्यटन विभाग का सोनभद्र रिसॉर्ट केंवची में उपलब्ध है।

वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण आजीविका का सशक्त संगम

पर्यटकों को दोनों अभयारण्यों में बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर (भारतीय बाइसन), चीतल, सांभर, कोटरा और चौसिंगा जैसे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का रोमांच मिलेगा। वन मंत्री ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल पहरेदारी से संभव नहीं है; जब स्थानीय समुदाय को पर्यटन से प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है, तो वे स्वयं वनों और वन्यजीवों के सबसे बड़े रक्षक बन जाते हैं।

“छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर इंद्रावती में पहली जंगल सफारी और अचानकमार में केंवची गेट से बफर सफारी की शुरुआत हमारे समृद्ध वन वैभव को विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। बस्तर के बीजापुर में बंदूक और बारूद के स्थान पर अब प्रकृति और वन्यजीव पर्यटन की गूंज होगी। स्थानीय ग्रामीणों को गाइड, वाहन और होमस्टे से जोड़कर हम वनांचल में स्वावलंबन का नया सूरज उगा रहे हैं।”— श्री केदार कश्यप, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन

इंद्रावती व अचानकमार सफारी शुभारंभ: एक नजर में

  • परियोजनाएं: इंद्रावती जंगल सफारी एवं अचानकमार बफर सफारी (Indravati Tiger Reserve Safari)
  • लोकार्पण तिथि: 02 नवंबर 2026 (छत्तीसगढ़ राज्योत्सव)
  • उद्घाटनकर्ता: वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप (वर्चुअल माध्यम)
  • विशिष्ट अतिथि: केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, डिप्टी सीएम अरुण साव, विधायक धर्मजीत सिंह
  • इंद्रावती सफारी गेट: उलूर गांव (बीजापुर), 4 जिप्सी वाहन, कांगेर घाटी में प्रशिक्षित ग्रामीण स्टाफ
  • अचानकमार नया गेट: केंवची गेट (NH-45, मुंगेली), 50 किमी लंबा बफर सफारी रूट
  • अचानकमार सफारी दरें: जिप्सी ₹3,500 | महारानी वाहन ₹5,000 प्रति राउंड
  • प्रमुख वन्यजीव: बाघ, राजकीय पशु वन भैंसा, तेंदुआ, भालू, गौर, चीतल, सांभर व गिद्ध
  • आर्थिक प्रभाव: होमस्टे, गाइड, वाहन चालक, स्थानीय हस्तशिल्प व ग्रामीण रोजगार सृजन

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Indravati Tiger Reserve Safari का प्रवेश द्वार कहाँ बनाया गया है और कैसे पहुंचें?

इंद्रावती टाइगर रिजर्व सफारी का प्रवेश द्वार बीजापुर जिला मुख्यालय से लगभग 60 किमी दूर उलूर गांव में बनाया गया है, जहाँ पर्यटक बीजापुर से भोपालपटनम होते हुए पहुंच सकते हैं।

अचानकमार टाइगर रिजर्व में किस नए गेट से बफर सफारी शुरू की गई है?

अचानकमार में जीपीएम-अमरकंटक मार्ग पर स्थित केंवची गेट (NH-45) से 50 किलोमीटर लंबी नई बफर सफारी शुरू की गई है, जिससे अमरकंटक-रतनपुर पर्यटन सर्किट को लाभ मिलेगा।

अचानकमार टाइगर रिजर्व में सफारी वाहनों का किराया क्या निर्धारित किया गया है?

अचानकमार में जिप्सी का किराया 3,500 रुपये प्रति राउंड तथा महारानी वाहन का किराया 5,000 रुपये प्रति राउंड निर्धारित किया गया है।

सफारी सेवाओं के विस्तार से स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों को क्या लाभ होगा?

स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित गाइड और वाहन चालक के रूप में सीधा रोजगार मिलेगा, साथ ही ग्रामीण परिवारों के लिए होमस्टे, पारंपरिक खानपान और हस्तशिल्प बिक्री के जरिए आय बढ़ेगी।

आधिकारिक स्रोत: वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन / राज्य वन अनुसंधान संस्थान / जनसंपर्क संचालनालय (DPR Raipur)

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