आंगन मिलन उत्सव: छत्तीसगढ़ में सुपोषण बना जनआंदोलन, अन्नप्राशन और गोद भराई से संवर रहा बच्चों का भविष्य

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रायपुर, 29 सितंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़ में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत ‘आंगन मिलन उत्सव’ ग्रामीण अंचलों में सामाजिक बदलाव की नई मिसाल बन रहा है। प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में समुदाय, वरिष्ठ नागरिकों और पंचायत प्रतिनिधियों की सहभागिता से अन्नप्राशन, गोद भराई और पारंपरिक पोषण संवाद के प्रेरक आयोजन किए जा रहे हैं। बच्चों को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालने वाली मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और महतारी वंदन योजना की हितग्राही माताओं का सम्मान कर इस सरकारी मुहिम को व्यापक सामाजिक आंदोलन में बदल दिया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों में उत्सव की तरह मनाया जा रहा ‘आंगन मिलन उत्सव’।
  • नवजातों के लिए अन्नप्राशन और गर्भवती माताओं के लिए गोद भराई से मातृ-शिशु स्वास्थ्य की मजबूत नींव।
  • महतारी वंदन योजना की लाभार्थी महिलाओं, मितानिनों और स्व-सहायता समूहों की दीदियों का सम्मान।
  • स्थानीय अनाजों से सजी ‘सुपोषण रंगोली’ और वरिष्ठ नागरिकों के अनुभवों से घर-घर पहुंच रहे पोषण के सूत्र।

अन्नप्राशन और गोद भराई: मातृत्व और नवजात पोषण की नई शुरुआत

उत्सव के दौरान आयोजित अन्नप्राशन कार्यक्रम नवजात शिशुओं के जीवन में छह माह की उम्र के बाद ठोस और पौष्टिक ऊपरी आहार की वैज्ञानिक शुरुआत का प्रतीक बना।

वहीं पारंपरिक गोद भराई रस्म के जरिए गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, आयरन की गोलियां और संतुलित आहार लेने की सीख दी गई। इस पहल ने मातृत्व सुरक्षा को केवल परिवार का निजी विषय न मानकर पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बना दिया है।

अनाज से सजी ‘सुपोषण रंगोली’ और वरिष्ठों का पारंपरिक अनुभव

आंगनबाड़ी केंद्रों में दालों, बाजरा, रागी, चावल और कोदो-कुटकी जैसे स्थानीय पोषक अनाजों के दानों से बनाई गई ‘सुपोषण रंगोली’ आकर्षण का केंद्र रही। यह कलात्मक प्रदर्शन ग्रामीणों को यह संदेश देता है कि महंगे डिब्बाबंद सप्लीमेंट्स के बजाय हमारे अपने खेतों और घरों में उपलब्ध देसी अनाज ही बेहतर सेहत की असली पूंजी हैं।

गांव के वरिष्ठ नागरिकों और बुजुर्ग महिलाओं ने नई माताओं के साथ बैठकर पारंपरिक खान-पान और नवजात की मालिश व देखभाल से जुड़े अपने व्यावहारिक नुस्खे साझा किए, जिससे पुरानी पीढ़ी का ज्ञान नई पीढ़ी के काम आ रहा है।


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मितानिनों और महतारी वंदन की हितग्राहियों का हुआ सम्मान

उत्सव में उन मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की लगातार मॉनिटरिंग कर उन्हें सामान्य श्रेणी में लाने में दिन-रात एक किया।

इसके साथ ही महतारी वंदन योजना की हितग्राही माताओं ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि खाते में आने वाली राशि का उपयोग वे बच्चों के लिए फल, दूध और पौष्टिक आहार जुटाने में कर रही हैं।

भोजन की मात्रा नहीं, आदत और जागरूकता है सुपोषण

यह अभियान इस सोच को स्थापित कर रहा है कि सुपोषण केवल थाली में भोजन परोसने तक सीमित नहीं है। इसमें स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, बच्चों का समय पर टीकाकरण और एनीमिया की रोकथाम का तालमेल जरूरी है।

स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक गीतों और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से ग्रामीणों को खेल-खेल में पोषण का महत्व समझाया जा रहा है।

“आज के बच्चों के स्वस्थ शरीर में ही कल के विकसित समाज की नींव रखी जाती है। कुपोषण के विरुद्ध जागरूकता और मातृ-शिशु स्वास्थ्य की देखभाल आने वाली पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य के लिए किया गया सबसे बड़ा निवेश है। सेवा संकल्प अभियान सम्मान, सहभागिता और सुपोषण का जीवंत उदाहरण है।”— ओम प्रकाश डहरिया, सहायक जनसंपर्क अधिकारी, छत्तीसगढ़

माताओं, बच्चों और ग्रामीण परिवारों के लिए इसके क्या मायने हैं?

  • कुपोषण दर में गिरावट: घर में मौजूद अनाज और हरी सब्जियों के सही उपयोग की जानकारी मिलने से ग्रामीण परिवारों के बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होगा।
  • संकोच और भ्रांतियों का खात्मा: आंगनबाड़ी में उत्सव जैसा माहौल होने से धात्री माताएं बिना झिझक अपनी स्वास्थ्य समस्याएं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से साझा कर पा रही हैं।
  • समुदाय का सीधा जुड़ाव: सरपंचों, पंचों और वरिष्ठ ग्रामीणों के जुड़ने से आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं और पोषण आहार की गुणवत्ता पर सामाजिक निगरानी मजबूत हुई है।

आंगन मिलन उत्सव के प्रमुख घटक

  • संस्कार एवं पोषण: नवजातों का अन्नप्राशन संस्कार और गर्भवती महिलाओं की गोद भराई।
  • जनजागरूकता: स्थानीय मोटे अनाजों (मिलेट्स) से निर्मित ‘सुपोषण रंगोली’ का प्रदर्शन।
  • सामुदायिक संवाद: वरिष्ठ नागरिकों द्वारा घरेलू पोषण आहार और शिशु देखभाल पर मार्गदर्शन।
  • सम्मान समारोह: कुपोषण मुक्त गांव बनाने वाली मितानिनों और समर्पित कार्यकर्ताओं का अभिनंदन।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

‘आंगन मिलन उत्सव’ किस अभियान के तहत मनाया जा रहा है?

‘आंगन मिलन उत्सव’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत मनाया जा रहा है।

उत्सव में अन्नप्राशन और गोद भराई कार्यक्रमों का क्या उद्देश्य है?

अन्नप्राशन के जरिए छह माह के शिशुओं के लिए पौष्टिक ऊपरी आहार की शुरुआत कराई जाती है, जबकि गोद भराई से गर्भवती माताओं को पोषण व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है।

सुपोषण रंगोली के माध्यम से क्या संदेश दिया जा रहा है?

सुपोषण रंगोली घर और खेतों में उपलब्ध स्थानीय दालों, अनाजों और मौसमी सब्जियों के संतुलित उपयोग से बच्चों को स्वस्थ रखने का संदेश देती है।

स्रोत (Source): छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR Raipur) | विशेष लेख: ओम प्रकाश डहरिया (सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

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