Ehime University Delegation CG: जापानी छात्रों पर चढ़ा छत्तीसगढ़ी संस्कृति का रंग, CM साय ने साझा किए अपनी ‘जापान यात्रा’ के अनुभव

Ehime University Delegation CG Ehime University Delegation CG

रायपुर, 14 सितंबर 2026: सुदूर पूर्व में उगते सूरज का देश ‘जापान’ और भारत के हृदय में बसा ‘छत्तीसगढ़’, भले ही भौगोलिक रूप से हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन भगवान बुद्ध के शांति संदेश और तकनीकी नवाचार ने इन दोनों को बेहद करीब ला दिया है। सोमवार को राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में एक अद्भुत सांस्कृतिक और तकनीकी संगम देखने को मिला, जब जापान से आई Ehime University Delegation CG (एहिमे यूनिवर्सिटी के छात्र प्रतिनिधिमंडल) ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से एक बेहद आत्मीय और लंबी मुलाकात की।

भारत-जापान इंटर एक्सचेंज (India-Japan Inter Exchange) कार्यक्रम के तहत तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर छत्तीसगढ़ पहुंचे इन जापानी विद्यार्थियों ने जब मुख्यमंत्री से संवाद किया, तो चर्चा केवल औपचारिक नहीं रही। दोनों देशों के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों, बौद्ध विरासत, शिक्षा, अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप्स जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

विदेशी मेहमानों पर छत्तीसगढ़ी संस्कृति का रंग ऐसा चढ़ा कि जापानी छात्राओं ने न केवल हाथों में ‘मेहंदी’ लगवाई, बल्कि भारतीय परिधानों की जमकर खरीदारी भी की। संयोग से राज्य में चल रहे ‘गणेश उत्सव’ (Ganesh Utsav) की भव्यता ने इन विदेशी छात्रों को भारत की सजीव परंपराओं का साक्षात दर्शन करा दिया।

भारत-जापान छात्र विनिमय: मुख्य तथ्य (Quick Facts)विवरण
विदेशी प्रतिनिधिमंडलEhime University Delegation CG (जापान)
सदस्यों की संख्या17 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल
कार्यक्रम का नामभारत-जापान इंटर एक्सचेंज कार्यक्रम (3 दिवसीय भ्रमण)
ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमणमहानदी के तट पर स्थित सिरपुर (बौद्ध विरासत)
तकनीकी संस्थान का भ्रमणएनआईटी (NIT) रायपुर के इन्क्यूबेशन और रिसर्च सेंटर

साझा आध्यात्मिक विरासत: भगवान बुद्ध और सिरपुर का वैभव

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने Ehime University Delegation CG का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान की मित्रता की जड़ें प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में गहराई से जुड़ी हुई हैं। यह संबंध अब आध्यात्मिकता से आगे बढ़कर शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, नवाचार और आर्थिक सहयोग तक विस्तृत हो चुका है।

बौद्ध दर्शन पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “भारत भगवान बुद्ध की भूमि है। भगवान बुद्ध के शांति, करुणा, मैत्री और मानव कल्याण के संदेश ने दुनिया के अनेक देशों को प्रभावित किया और जापान की संस्कृति में भी बौद्ध दर्शन की गहरी छाप दिखाई देती है। यही साझा आध्यात्मिक विरासत भारत और जापान को एक विशिष्ट सांस्कृतिक सूत्र में जोड़ती है।”

उन्होंने जापानी विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध पुरातात्विक विरासत की जानकारी देते हुए विशेष रूप से तीन स्थलों— सिरपुर, मैनपाट और भोंगापाल का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि महानदी के तट पर स्थित सिरपुर छत्तीसगढ़ की प्राचीन सभ्यता, कला, स्थापत्य और ‘बौद्ध विरासत’ का अद्भुत केंद्र है। राज्य सरकार सिरपुर को विश्वस्तरीय ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए योजनाबद्ध प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री ने साझा किए अपनी ‘जापान यात्रा’ के अनुभव

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपनी खुद की ‘जापान यात्रा’ से जुड़े अनुभव भी विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने जापान की अनुशासित कार्यसंस्कृति, तकनीकी प्रगति और अपनी परंपराओं के प्रति सम्मान की भूरि-भूरि सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा, “जापान ने आधुनिक विज्ञान और तकनीक में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए अपनी सांस्कृतिक पहचान को जिस प्रकार सहेजकर रखा है, वह प्रेरणादायी है। भारत भी अपनी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक मूल्यों को साथ लेकर आधुनिक तकनीक, नवाचार और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।”

एनआईटी रायपुर के स्टार्टअप्स ने किया जापानी छात्रों को हैरान

छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान Ehime University Delegation CG ने ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान’ (NIT Raipur) के विभिन्न रिसर्च सेंटरों और इन्क्यूबेशन सेंटर का भी भ्रमण किया। जापानी विद्यार्थियों ने वहां संचालित स्टार्टअप्स की गतिविधियों, अनुसंधान परियोजनाओं और नई तकनीकों की जानकारी ली।

जापानी छात्रों ने विशेष रूप से ऐसे स्टार्टअप्स में गहरी रुचि दिखाई, जो तकनीक के माध्यम से आम लोगों की दैनिक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान विकसित कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने इन नवाचारों की सराहना करते हुए ‘टेक्नोलॉजी ट्रांसफर’, अनुसंधान और नवाचार आधारित सहयोग की संभावनाओं में अपनी गहरी रुचि दिखाई।

जापानी छात्रों का अनुभव: ‘पुस्तकों से बाहर भारत को समझा’

जापानी छात्र प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को बताया कि रायपुर में उन्हें अत्यंत आत्मीय अनुभव हुआ। यहां की संस्कृति, परंपराओं और लोगों के सहज एवं आत्मीय व्यवहार ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया।

  • विद्यार्थियों ने भारतीय खान-पान की जमकर प्रशंसा की।
  • छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान उन्हें गणेश उत्सव की परंपराओं और उसके सांस्कृतिक महत्व को करीब से जानने का अवसर मिला।
  • जापानी छात्राओं ने उत्साहपूर्वक बताया कि उन्होंने मेहंदी लगवाई और भारतीय परिधानों की खरीदारी भी की।
  • विद्यार्थियों ने कहा कि इस यात्रा ने उन्हें भारत को ‘पुस्तकों और कक्षाओं से आगे बढ़कर’ यहां के समाज, संस्कृति और जीवनशैली के माध्यम से समझने का अवसर दिया है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे यहां से छत्तीसगढ़ की सुखद स्मृतियां लेकर जाएं और भविष्य में पुनः प्रदेश आएं।

उपस्थित प्रमुख अधिकारी और शिक्षाविद्

मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित इस उच्च-स्तरीय सांस्कृतिक और तकनीकी संवाद कार्यक्रम में राज्य शासन और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों के निम्नलिखित अधिकारी और प्राध्यापक उपस्थित रहे:

  • श्री पी. दयानंद: मुख्यमंत्री के सचिव
  • प्रोफेसर श्री दिलीप सिंह सिसोदिया: एनआईटी (NIT) रायपुर
  • डॉ. समीर बाजपेयी: एनआईटी (NIT) रायपुर
  • प्रोफेसर सी.के. मोहन: आईआईटी (IIT) हैदराबाद
  • श्री संजय गजघाटे: अतिरिक्त संचालक, उद्योग विभाग
  • श्री अमय त्रिपाठी: उपसंचालक, उद्योग विभाग
  • श्री अनुपम आशीष टोप्पो: ज्वाइंट सीईओ, चिप्स (CHiPS)

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UPSC/CGPSC Static Facts: सिरपुर, मैनपाट और भोंगापाल का इतिहास

चूंकि मुख्यमंत्री ने जापानी प्रतिनिधिमंडल के सामने राज्य के इन तीन ऐतिहासिक स्थलों का जिक्र किया है, इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं (CGPSC Paper-3 History & Tourism) के छात्रों के लिए ये बुनियादी (Static) तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  • सिरपुर (Sirpur): प्राचीन काल में इसे ‘श्रीपुर’ कहा जाता था। यह सोमवंशी शासकों की राजधानी थी। महानदी के तट पर स्थित इस शहर का दौरा 639 ईस्वी में प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनत्सांग (Hiuen Tsang) ने किया था। यहाँ का ‘लक्ष्मण मंदिर’ (लाल ईंटों से निर्मित) और ‘आनंद प्रभु कुटी विहार’ (बौद्ध मठ) विश्वप्रसिद्ध है।
  • मैनपाट (Mainpat): सरगुजा जिले में स्थित इसे ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ कहा जाता है। 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद तिब्बती शरणार्थियों को यहीं बसाया गया था, इसलिए यह छत्तीसगढ़ में बौद्ध संस्कृति (तिब्बती मठों) का सबसे बड़ा जीवित केंद्र है।
  • भोंगापाल (Bhongapal): यह कोंडागांव जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है, जहाँ से ईंटों से बने प्राचीन बौद्ध टीले और बौद्ध चैत्य (सप्तमातृका) प्राप्त हुए हैं।

विश्लेषण: ‘पीपल-टू-पीपल कनेक्ट’ और ‘सॉफ्ट पावर’ कूटनीति

(UPSC Mains Analysis – International Relations)

सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy): अंतरराष्ट्रीय संबंधों में ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) सबसे मजबूत हथियार है। जापान और भारत के बीच बुलेट ट्रेन या रक्षा समझौते (Hard Power) अपनी जगह हैं, लेकिन ‘बौद्ध धर्म’ वह सांस्कृतिक धागा है जो दोनों देशों के आम नागरिकों (People-to-People connect) को जोड़ता है। जापानी छात्रों का छत्तीसगढ़ के गणेश उत्सव में भाग लेना, मेहंदी लगाना और NIT के स्टार्टअप्स को देखना, भारत की बढ़ती ‘डिजिटल और सांस्कृतिक’ ताकत का बेहतरीन प्रदर्शन है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. हाल ही में जापान की Ehime University Delegation CG ने छत्तीसगढ़ में किससे मुलाकात की?

जापान की एहिमे यूनिवर्सिटी (Ehime University) के 17 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल ने ‘भारत-जापान इंटर एक्सचेंज’ कार्यक्रम के तहत रायपुर में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से मुलाकात की।

Q2. जापानी छात्र प्रतिनिधिमंडल ने तकनीकी नवाचारों के लिए किस संस्थान का भ्रमण किया?

जापानी छात्रों ने ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान’ (NIT) रायपुर के विभिन्न रिसर्च सेंटरों और इन्क्यूबेशन सेंटर का भ्रमण कर वहां के स्टार्टअप्स की जानकारी ली।

Q3. मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की किन पुरातात्विक और बौद्ध विरासतों का उल्लेख किया?

मुख्यमंत्री ने जापान के छात्रों को महानदी के तट पर स्थित विश्वप्रसिद्ध बौद्ध केंद्र ‘सिरपुर’, सरगुजा के ‘मैनपाट’ और कोंडागांव के ‘भोंगापाल’ की ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराया।

स्रोत (Source)

छत्तीसगढ़ शासन, जनसंपर्क विभाग (DPRCG), 14 सितंबर 2026, रायपुर।

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