Published on July 26, 2026 | By Ishan Verma, Editor, theexamhub.in
छत्तीसगढ़ के औद्योगिक और खनिज समृद्ध जिले कोरबा के जल संवर्धन मॉडल को आज एक बड़ी राष्ट्रीय पहचान मिली है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम *मन की बात* के 136वें एपिसोड (26 जुलाई 2026) में कोरबा नगर पालिक निगम द्वारा किए जा रहे जल संरक्षण के अभिनव प्रयासों की विशेष सराहना की है।
प्रधानमंत्री ने इस कूटनीतिक कड़े प्रयासों को देश के अन्य नगरीय निकायों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बताया है। इस ऐतिहासिक उल्लेख के बाद Mann Ki Baat Korba Water Model पूरे देश में चर्चा का मुख्य विषय बन चुका है, जो जिला प्रशासन और कोरबावासियों के लिए एक अत्यंत गौरवशाली अवसर है।
| महत्वपूर्ण संकेतक | Mann Ki Baat Korba Water Model के प्रमुख तथ्य व आंकड़े |
|---|---|
| संबद्ध राष्ट्रीय प्रसारण | प्रधानमंत्री का ‘मन की बात’ कार्यक्रम (136वां एपिसोड – 26 जुलाई 2026) |
| मुख्य सराहना विषय | कैच द रेन (Catch The Rain) अभियान के तहत कोरबा का जल संरक्षण मॉडल |
| मार्गदर्शक जिला कलेक्टर | श्री कुणाल दुदावत (कलेक्टर, कोरबा) |
| क्रियान्वयन अधिकारी | श्री आशुतोष पांडेय (आयुक्त, नगर पालिक निगम कोरबा) |
| स्थापित वॉटर हार्वेस्टिंग पिट | कुल 1,728 पिट (757 शासकीय भवनों में, 971 निजी भवनों में) |
| सैम-2.0 रिचार्ज वेल | इसरो (ISRO) की मदद से 10 प्रमुख संवेदनशील स्थानों पर स्थापित |
| बोरवेलों का पुनरुद्धार | 95 अनुपयोगी और बंद पड़े बोरवेलों को एक्टिव रिचार्ज शाफ्ट में बदलने की योजना |
| पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम | ‘एक पेड़ माँ के नाम’ और ‘रन फॉर ग्रीन कोरबा’ (18 जुलाई) के तहत ढाई लाख पौधे रोपने का लक्ष्य |
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Mann Ki Baat Korba Water Model: ‘मन की बात’ में गूंजा छत्तीसगढ़ का गौरव
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जल संकट और औद्योगिक प्रदूषण जैसी दोहरी चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, कोरबा ने तकनीक और जनभागीदारी (Jan Bhagidari) के माध्यम से जल संवर्धन का एक उत्कृष्ट ढांचा तैयार किया है।
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत और निगम आयुक्त श्री आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में शुरू किया गया यह Mann Ki Baat Korba Water Model मुख्य रूप से इसरो (ISRO) के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) की सैटेलाइट मैपिंग पर आधारित है।
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इसरो (ISRO) तकनीक और कैच द रेन (Catch The Rain) अभियान
इस मॉडल की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसका ‘सैम-2.0’ (Shallow Aquifer Management – SAM) सिस्टम है। इसके तहत शहर के 10 अलग-अलग जल-संकट वाले क्षेत्रों में ‘डायरेक्ट इंजेक्शन वेल’ स्थापित किए गए हैं।
ये कुएं सड़कों और नालियों में बहने वाले गंदे पानी को मल्टी-स्टेज फिल्टरों के जरिए छानकर सीधे भूमिगत जलभृतों (Aquifers) तक पहुँचाते हैं। इससे वर्षा जल का अपव्यय रुकता है और भूजल स्तर में भारी सुधार होता है।
इसके अतिरिक्त, नगर निगम ने कुल 1,728 रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट स्थापित किए हैं, जिनमें से 757 शासकीय भवनों में और 971 निजी भवनों में स्थित हैं। वर्तमान में भवन निर्माण की प्रत्येक अनुमति में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है।
95 बंद पड़े नलकूपों का पुनरुद्धार और ग्रीन कोरबा मिशन
भूजल संरक्षण को अधिक व्यापक बनाने के लिए, नगर निगम ने शहर के 95 अनुपयोगी, क्षतिग्रस्त और बंद पड़े बोरवेलों की री-ड्रिलिंग करके उन्हें ‘सक्रिय रीचार्ज शाफ्ट’ के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की है।
इसके साथ ही, जिले में पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने के लिए 15 सितंबर तक ‘एक पेड़ माँ के नाम’ सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, 18 जुलाई को “रन फॉर ग्रीन कोरबा” (Run for Green Korba) का सफल आयोजन किया गया, जिसमें नागरिकों की मदद से सघन पौधरोपण किया गया।
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UPSC Prelims Fact Box: Mann Ki Baat Korba Water Model
- अमृत 2.0 (AMRUT 2.0): आवास और शहरी कार्य मंत्रालय का राष्ट्रीय मिशन, जिसका एक घटक ‘कैच द रेन’ अभियान है।
- एनआरएससी (NRSC): हैदराबाद स्थित इसरो का ‘राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र’ जो उपग्रहों के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों की मैपिंग करता है।
- एनटीपीसी अपशिष्ट जल समझौता: कोरबा में हसदेव नदी के संरक्षण के लिए ₹111 करोड़ की लागत से गंदे पानी का पुनर्चक्रण कर औद्योगिक कूलिंग के लिए एनटीपीसी को बेचने का चक्रीय मॉडल तैयार किया गया है।
UPSC & CGPSC Mains Analysis: जल सुरक्षा एवं जनभागीदारी
प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में इस मॉडल की सराहना किया जाना यह सिद्ध करता है कि स्थानीय स्तर पर किए गए लघु और तकनीक-आधारित प्रयास राष्ट्रीय नीतियां बन सकते हैं।
यह मॉडल मुख्य रूप से सुशासन के ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ और ‘जनभागीदारी’ (Community Ownership) के सिद्धांतों पर काम करता है।
इसरो की मदद से की गई रिमोट सेंसिंग मैपिंग और ‘सैम’ (SAM) तकनीक के अनुप्रयोग यह दर्शाते हैं कि कैसे आधुनिक विज्ञान का उपयोग करके औद्योगिक नगरों में गिरते भू-जल स्तर को 600 मीटर से सुधारकर केवल 150 मीटर पर लाया जा सकता है, जो कि देश के अन्य जल-संकट वाले शहरों के लिए सर्वश्रेष्ठ केस स्टडी (Case Study) है।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से इस कूटनीतिक और पर्यावरण विषय पर अपने ज्ञान का परीक्षण करें:
प्रश्न 1: हाल ही में 26 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के किस एपिसोड में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के जल संरक्षण मॉडल (Mann Ki Baat Korba Water Model) की सराहना की है?
(A) 130वें एपिसोड में
(B) 135वें एपिसोड में
(C) 136वें एपिसोड में
(D) 140वें एपिसोड में
उत्तर: (C) 136वें एपिसोड में
व्याख्या: प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड (26 जुलाई 2026) में कोरबा के ‘कैच द रेन’ मॉडल की सराहना कर इसे राष्ट्रीय प्रेरणा बताया।
प्रश्न 2: ‘Mann Ki Baat Korba Water Model’ के तहत कोरबा नगर निगम ने अनुपयोगी संसाधनों का पुनर्चक्रण करने के लिए कितने बंद पड़े बोरवेलों को सक्रिय रिचार्ज शाफ्ट में बदलने की योजना बनाई है?
(A) 50 बोरवेलों को
(B) 75 बोरवेलों को
(C) 95 बोरवेलों को
(D) 120 बोरवेलों को
उत्तर: (C) 95 बोरवेलों को
व्याख्या: नगर निगम कोरबा शहर के 95 अनुपयोगी, क्षतिग्रस्त और बंद पड़े पुराने बोरवेलों का चिन्हांकन कर उन्हें ‘सैम’ तकनीक से वॉटर रीचार्ज संरचनाओं में बदल रहा है।
प्रश्न 3: जल संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ के किस जिले में हाल ही में 18 जुलाई को “रन फॉर ग्रीन” (Run for Green) जनभागीदारी दौड़ और सघन पौधरोपण का आयोजन किया गया था?
(A) बस्तर जिला
(B) बिलासपुर जिला
(C) कोरबा जिला
(D) सरगुजा जिला
उत्तर: (C) कोरबा जिला
व्याख्या: 18 जुलाई को कोरबा नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा “रन फॉर ग्रीन कोरबा” का आयोजन किया गया, जिसमें जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सहभागिता से बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. Mann Ki Baat Korba Water Model क्या है?
Mann Ki Baat Korba Water Model छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में संचालित एक अत्यंत सफल जल संवर्धन मॉडल है, जिसकी सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई 2026 को ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में की है। इसके तहत कड़े डिजिटल और वैज्ञानिक उपायों (इसरो मैपिंग, डायरेक्ट इंजेक्शन वेल) से भू-जल का पुनरुद्धार किया गया है।
Q2. इस जल संरक्षण अभियान में कुल कितने रेन वॉटर हार्वेस्टिंग पिट स्थापित किए गए हैं?
नगर निगम कोरबा ने जनभागीदारी के तहत कुल 1,728 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग पिट स्थापित किए हैं, जिनमें से 757 शासकीय भवनों में और 971 निजी आवासीय भवनों में स्थित हैं। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में 109 नए भवनों में इसका निर्माण कार्य जारी है।
Q3. ‘मन की बात’ में की गई इस सराहना से छत्तीसगढ़ को क्या लाभ होगा?
इस राष्ट्रीय सराहना से छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण प्रयासों और कूटनीतिक वन नीतियों को वैश्विक साख मिलेगी। साथ ही, यह मॉडल देश के अन्य नगर निकायों (जैसे सिंगरौली, बोकारो) के लिए कोयला खनन क्षेत्रों में जल सुरक्षा बहाल करने का एक आदर्श मार्गदर्शक बनेगा।
तीन मुख्य निष्कर्ष (3 Key Takeaways)
- प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय सराहना: ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में पीएम मोदी ने कोरबा के ‘कैच द रेन’ जल संवर्धन कार्यों को देश के लिए एक प्रेरणादायी मॉडल बताया।
- अभूतपूर्व तकनीकी कायाकल्प: इसरो की सैटेलाइट मैपिंग, सैम (SAM) प्रणालियों, और 1,728 वॉटर हार्वेस्टिंग पिट्स के कारण भूजल स्तर 600 मीटर से सुधरकर मात्र 150 मीटर के स्तर पर पहुँच गया है।
- पर्यावरण और जल सुरक्षा का समन्वय: ‘एक पेड़ माँ के नाम’ और ‘रन फॉर ग्रीन कोरबा’ जैसी जनभागीदारी अभियानों के तहत ढाई लाख से अधिक पौधों के रोपण और 95 बंद बोरवेलों के रिचार्ज का कड़ा लक्ष्य।
UPSC Relevance (यूपीएससी प्रासंगिकता)
यह विषय मुख्य रूप से सामान्य अध्ययन पेपर-3 (पर्यावरण संरक्षण, जल सुरक्षा, तकनीकी अनुप्रयोग, सुशासन और जनभागीदारी नीतियां) और सामान्य अध्ययन पेपर-1 (भारत का भौतिक भूगोल और जल संसाधन संवर्धन) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
Official Source (आधिकारिक स्रोत)
यह लेख प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ प्रसारण (प्रसार भारती), आवास और शहरी कार्य मंत्रालय, और जनसंपर्क विभाग छत्तीसगढ़ (DPRCG) द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति पर आधारित है।